Tag: Highway Protest

  • बुजुर्ग की मौत के बाद हाईवे पर बवाल, परिजनों ने पुलिस पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

    बुजुर्ग की मौत के बाद हाईवे पर बवाल, परिजनों ने पुलिस पर लगाए प्रताड़ना के आरोप


    हरदा, मध्यप्रदेश: हरदा जिले में पुलिस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोपों के बीच एक 80 वर्षीय बुजुर्ग अजबसिंह कोरकू की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। बुजुर्ग की इंदौर में इलाज के दौरान मौत होने के बाद परिजनों ने हंगामा करते हुए पहले थाने में और फिर हाइवे पर प्रदर्शन किया, जिससे कई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।

    पूरा मामला ग्राम रेलवा का है, जहां रहने वाले अजबसिंह कोरकू ने 1 मई को कथित रूप से कीटनाशक पी लिया था। परिजनों का आरोप है कि हंडिया थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल कंचनसिंह राजपूत ने उनसे 25 हजार रुपये लेने के बावजूद लगातार प्रताड़ित किया, जिससे परेशान होकर बुजुर्ग ने यह आत्मघाती कदम उठाया।

    जहर पीने के बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद 4 मई को छुट्टी दे दी गई। घर लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। हालत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर रेफर किया गया, जहां शनिवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    पोस्टमार्टम के बाद रविवार को परिजन शव लेकर सीधे हंडिया थाने पहुंचे और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला गरमा गया और करीब तीन घंटे तक थाना परिसर में धरना चलता रहा। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक डॉ. आरके दोगने, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन साई और एससी-एसटी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

    विधायक डॉ. आरके दोगने ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसपी और कलेक्टर पीड़ित परिवार से बात करने को तैयार नहीं हैं, जो बेहद संवेदनहीनता को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को एसपी और कलेक्टर के बंगले के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।

    स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी थाने से निकलकर हाइवे पर बैठ गए। इससे सड़क पर लंबा जाम लग गया और वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। मौके पर एएसपी अमित मिश्रा ने लोगों को समझाने की कोशिश की और जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

    लगातार बढ़ते दबाव और प्रदर्शन के बाद देर रात प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए हेड कॉन्स्टेबल कंचनसिंह राजपूत को लाइन अटैच कर दिया। हालांकि इसके बावजूद परिजनों की नाराजगी पूरी तरह शांत नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग जारी है।

    यह पूरा घटनाक्रम जिले में पुलिस कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • छिंदवाड़ा में मौत का मंजर, पति पत्नी की कुचलकर मौत के बाद हाईवे जाम, तीन घंटे ठप रहा यातायात

    छिंदवाड़ा में मौत का मंजर, पति पत्नी की कुचलकर मौत के बाद हाईवे जाम, तीन घंटे ठप रहा यातायात

    छिंदवाड़ा /मध्य प्रदेश के Chhindwara जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सौंसर नागपुर मार्ग पर स्थित सतनूर के पास नेशनल हाईवे 547 पर आरटीओ बैरियर के नजदीक एक तेज रफ्तार ट्रक ने पति पत्नी को कुचल दिया जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना इतनी भयावह थी कि आसपास मौजूद लोग सन्न रह गए और देखते ही देखते गुस्से की लहर फैल गई।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश फूट पड़ा। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में आरटीओ की सख्ती और अव्यवस्थित कार्रवाई के कारण आए दिन सड़क पर अव्यवस्था की स्थिति बनती है जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बैरियर के आसपास वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं और अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने से हादसों का खतरा बना रहता है।

    दंपति की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। आक्रोशित भीड़ ने नेशनल हाईवे 547 पर चक्काजाम कर दिया और सड़क पर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि भीड़ ने आरटीओ के एक वाहन में तोड़फोड़ भी कर दी। हालात ऐसे बन गए कि दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।

    मौके पर शुरुआती दौर में केवल चार पुलिसकर्मी मौजूद थे जो बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने में असमर्थ नजर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादसे के बाद संबंधित अधिकारी और कथित दलाल मौके से गायब हो गए जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क उठा। भीड़ लगातार जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती रही।

    लोगों का कहना है कि यदि बैरियर पर व्यवस्था दुरुस्त होती और यातायात को सुचारू रूप से संचालित किया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आरटीओ की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

    करीब तीन घंटे की मशक्कत और समझाइश के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। आश्वासन दिया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद धीरे धीरे जाम खुला और यातायात सामान्य हो सका।

    यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए असहनीय त्रासदी बन गया बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि हाईवे पर सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं ताकि भविष्य में किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।