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  • बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में महू-नीमच हाईवे पर एक भीषण और सनसनीखेज लूट की वारदात सामने आई है। बड़नगर से रतलाम लौट रहे एक सराफा व्यापारी को निशाना बनाते हुए अज्ञात बदमाशों ने चलती बस के भीतर से लगभग पांच किलोग्राम सोने के जेवरों से भरा बैग लूट लिया। लूटे गए आभूषणों की अनुमानित कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, रतलाम के जैन कॉलोनी निवासी सराफा व्यवसायी अर्पित चौरड़िया आसपास के क्षेत्रों में स्वर्ण आभूषणों का व्यापार करते हैं। वे गुरुवार शाम बड़नगर क्षेत्र में व्यापारियों को जेवर दिखाने और व्यापारिक सिलसिले में गए थे। काम निपटाने के बाद वे रात करीब आठ बजे बड़नगर से रतलाम जाने वाली एक निजी बस में सवार हुए थे।

    व्यापारी के साथ ही बड़नगर से चार-पांच संदिग्ध यात्री भी उसी बस में सवार हुए थे। रात करीब सवा नौ बजे जब बस बिलपांक थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेन-मऊ फंटे के पास पहुंची, तब एक यात्री ने उतरने के बहाने चालक से बस रुकवाई। बस के रुकते ही भीतर मौजूद दो अन्य बदमाशों ने झपट्टा मारकर व्यापारी से जेवरों का बैग छीन लिया और बाहर खड़े अपने अन्य साथियों के साथ अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

    घटना के तुरंत बाद पीड़ित व्यापारी ने धराड़ पुलिस चौकी पहुंचकर अधिकारियों को मामले की सूचना दी। साढ़े सात करोड़ रुपये मूल्य के पांच किलो सोने की लूट की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बिलपांक थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी।

    वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तथा अपर पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले की सभी सीमाओं पर सख्त नाकाबंदी लागू कर दी गई है और संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली जा रही है।

    मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में हाईवे पर हुई इस बड़ी आपराधिक वारदात के बाद व्यापारिक जगत और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। रतलाम और उज्जैन संभाग के सराफा व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और लूटे गए आभूषणों को बरामद करने की मांग की है।

    जांच प्रक्रिया को गति देने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। पुलिस द्वारा बड़नगर से लेकर बिलपांक टोल नाके और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों ने व्यापारी की रेकी की थी और योजनाबद्ध तरीके से बस में सवार होकर वारदात को अंजाम दिया।

    फिलहाल बिलपांक थाना पुलिस ने व्यापारी के बयानों के आधार पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इस बड़ी लूट की गुत्थी सुलझा ली जाएगी।

  • भोपाल मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र के विकास को मिली रफ्तार, भोपाल-विदिशा 4-लेन मार्ग के लिए 1,757 करोड़ से अधिक मंजूर

    भोपाल मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र के विकास को मिली रफ्तार, भोपाल-विदिशा 4-लेन मार्ग के लिए 1,757 करोड़ से अधिक मंजूर

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद ने भोपाल को मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल करते हुए भोपाल-विदिशा मार्ग के 2-लेन से 4-लेन उन्नयन एवं निर्माण के लिए 1757.57 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस मार्ग के निर्माण से तेजी से औद्योगिक निवेश बढ़ेगा और अधोसंरसचना का भी व्यवस्थित विकास हो पायेगा। सांची स्तूप और कर्क रेखा जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरने वाला यह मार्ग प्रादेशिक कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा। मंत्रि-परिषद ने भोपाल बायपास को 6-लेन बनाने के दृष्टिगत भोपाल बायपास- टोल टैक्स शुल्क संग्रहण की अनुमति 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में मंत्रि-परिषद ने स्थानीय मजदूरों और क्षेत्र के रहवासियों को लाभांश वितरण के लिए वन विभाग द्वारा संचालित संयुक्त वन प्रबंध समितियों को लाभांश का प्रदाय योजना के तहत वर्ष 2030-31 तक निरंतर रखे जाने की 918 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

    मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण वर्ष में किसानों को बड़ी सौगात देते हुए भारत सरकार के अंतर्गत गठित उपक्रम नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए सीहोर जिले की इछावर तहसील के गांव भाउखेड़ी में 20 हैक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित किये जाने का निर्णय लिया है। प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जन-स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण, बुनियादी ढांचे के विस्तार और महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत योजना के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये शामिल हैं।

    मंत्रि-परिषद ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए हर तरह की परिस्थितियों में समाज सेवा करने वाली महिलाओं के लिए ‘रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार’ की राशि भी 2 लाख रुपये करने की स्वीकृति दी है और ‘रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार’ की राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मंजूरी दी है। इसी तरह जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के आगामी 5 वर्षों के संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की मंजूरी दी गई। देवास पटाखा फैक्ट्री दुर्घटना जांच आयोग की अवधि 3 माह बढ़ाने तथा एम.पी.पी.एस.सी के वार्षिक प्रतिवेदनों को विधानसभा के पटल पर रखने का अनुमोदन भी बैठक में किया गया।

    भोपाल-विदिशा मार्ग का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर निर्माण किये जाने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने भोपाल को मेट्रो-पोलिटिन सिटी के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हाईब्रिड एन्यूटी मोडल (एचएएम) के लिए बनाए गए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर, भोपाल-विदिशा मार्ग लंबाई 44.830 कि.मी. का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर निर्माण किये जाने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इससे अब औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ अधोसंरचनात्मक विकास होगा।

    कुल परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एच.ए.एम) अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से परियोजना क्रियान्वयन के दौरान जीएसटी सहित वहन किया जायेगा। कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जायेगा। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि रूपये 364 करोड़ 41 लाख रूपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किया जायेगा।

    भोपाल विदिशा (राज्य मार्ग-28) मार्ग, अयोध्या बायपास के भानपुर टी-जंक्शन से प्रारंभ होकर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-146 पर साँची-सलामतपुर जंक्शन पर समाप्त होता है। यह मार्ग भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर से गुजरते हुए भोपाल और विदिशा जिलों को जोड़ता है। रायसेन जिले में सांची स्तूप सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है, जो कि यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है। कर्क रेखा भी भोपाल-विदिशा मार्ग के कि.मी. 24.550 से गुजरती है। भौगोलिक दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग पर वर्ष 2031 तक उपभोक्ता शुल्क संग्रहण की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम अंतर्गत भोपाल बायपास 4-लेन को 6-लेन बनाने के दृष्टिगत मार्ग लम्बाई 51.963 कि.मी. पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण की अनुमति प्रदाय की है। साथ ही इसकी अवधि अतिरिक्त 5 वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया है। भोपाल बायपास पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण, पूर्व में जारी अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार यथावत् रखा गया है। उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड अथवा निगम द्वारा चयनित संग्रहण एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा।

    भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग की कुल लंबाई 51.963 कि.मी. है, जो कि भोपाल शहर से इन्दौर, रायसेन, विदिशा एवं नर्मदापुरम् जिलों को जोड़ता है। इससे भोपाल शहरी क्षेत्र का यातायात दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रियों को निर्बाद्ध रूप से सुगमतापूर्वक मार्ग उपलब्ध होता है। इसका नियमित संचालन, अनुरक्षण एवं रख-रखाव निगम द्वारा किया जाता है। संग्रहित टोल राशि मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि अधिनियम 2012 अंतर्गत स्थापित राज्य राजमार्ग निधि में जमा कराई जाती है, जिसका व्यय निगम द्वारा राज्य मार्गों के विकास एवं संधारण सहित अन्य कार्यों में किया जाता है।

    संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश प्रदाय करने के लिए 918 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    अब श्रमिकों के साथ रहवासियों को भी मिलेगा लाभांश

    मंत्रि-परिषद ने वन विभाग अंतर्गत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश प्रदाय से संबंधित योजना को वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 918 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य संयुक्त वन प्रबंधन अंतर्गत वनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए श्रमिकों के साथ रहवासियों की जन-भागीदारी प्राप्त करना है। प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियां वनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन में वन विभाग को समुचित सहयोग प्रदान कर रही है। प्रावधानों के अनुरूप काष्ठ के अंतिम पातन से प्राप्त काष्ठ की बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि संयुक्त वन प्रबंधन समिति को दी जाती है। साथ ही बांस के विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का शत-प्रतिशत, कटाई में संलग्न श्रमिकों को प्रदाय किया जाता है।इस योजना के तहत अब श्रमिकों के साथ ही समिति से जुड़े क्षेत्रों के रहवासियों को भी लाभांश दिया जाएगा।

    रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार राशि 2 लाख रुपये और रानी अवन्ती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार राशि को एक से बढ़ाकर 2 लाख रूपये करने की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने हर परिस्थिति में संघर्ष करते हुये समाज सेवा करने वाली एक महिला को प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय रानी दुर्गावती पुरस्कार राशि 2 लाख रूपये प्रदाय करने और वर्ष 2006 से प्रदाय किए जा रहे रानी अवन्ती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि को भी एक लाख रूपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किये जाने की स्वीकृति दी है।

    पुरस्कार प्रदान करने से अत्यन्त गरीब, विकलांग 40 प्रतिशत से अधिक एकल महिला, किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त, एसिड, दहेज, घरेलू हिंसा से पीड़ित अथवा अन्य कोई विपरीत स्थिति में संघर्ष करते हुए समाज सेवा के कार्य कर रही महिलाओं की सेवाओं, कार्यों और योगदान को प्रोत्साहन व पहचान मिलेगी। अन्य महिलाएं भी प्रेरणा लेकर महिलाओं और बच्चों के क्षेत्र में समाजसेवा कार्य करने आगे आएंगी।

    वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुल 6 पुरस्कार यथा रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार, राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार, श्री विष्णु कुमार महिला बाल कल्याण समाज सेवा सम्मान पुरस्कार, मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार, अरुणा शानबाग वीरता पुरस्कार और राष्ट्रमाता प‌द्मावती पुरस्कार प्रदाय किये जा रहे हैं।

    किसान वर्ष में सौगात-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापना के लिए 20 हैक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी

    मंत्रि-परिषद ने किसान वर्ष में सोयाबीन किसानों को भी सौगात दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भारत सरकार के अंतर्गत गठित उपक्रम नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए ग्राम भाऊखेड़ी तहसील इछावर जिला सीहोर में 20 हैक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।

    भारतीय कृषि अनुसंधान के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित किया जाता है। यह संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रस्तावित भूमि का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित करने के लिये किया जाएगा। इस केंद्र की स्थापना से मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खेती में चहुँमुखी प्रगति की उम्मीद है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत सहित स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए 44 हजार 515.13 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य और आयुष्मान भारत (नॉन एस. ई. सी. सी. हितग्राही), बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था, जिला स्तरीय अमला से संबंधित योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भारत सरकार से 60:40 के अनुपात में संचालित है। यह योजना केन्द्र प्रवर्तित है एवं प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम जैसे मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टी.बी. उन्मूलन, शिशु स्वास्थ्य पोषण, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, गैर-संचारी कार्यक्रम, अंधत्व निवारण, कुष्ठ उन्मूलन, प्रधानमंत्री डायलिसिस सेवा, निःशुल्क दवा एवं जांच इत्यादि स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है।

    स्वीकृति अनुसार आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य और आयुष्मान भारत (नॉन एस. ई. सी. सी. हितग्राही) के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना अंतर्गत गरीब एवं कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य व्यय के कारण होने वाली आर्थिक हानि को रोकते हुए सरकारी एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार कैशलेस रूप में उपलब्ध कराना आवश्यक है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य की पूर्ति, उपचार तक सहज पहुँच तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना ही इस योजना का प्रमुख आधार है। स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रूपये स्वीकृत किए गये है। जिला स्तरीय अमला योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रूपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना लगभग 40-50 वर्ष से संचालित है।

    कृषि विश्वविद्यालय के निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय को वेतन भत्तों मानदेय आदि के लिए ब्लाक ग्राण्ट योजना के आगामी 05 वर्षो वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केन्द्र संचालित हैं, जिनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त लगभग 500 ओल्ड पेंशनरों के वेतन, भत्तों, मानदेय एवं पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों के साथ-साथ संस्थानों के आवश्यक प्रशासनिक एवं आकस्मिक व्ययों की पूर्ति राज्य शासन द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से की जाती है।

    खनिज साधन विभाग की परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 2 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने खनिज साधन विभाग अंतर्गत विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। खनिज साधन विभाग में कुल 54 खनिज भवन है। खनिज भवनों को निर्मित हुए 10 वर्ष से अधिक की अवधि हो चुकी है इसलिए योजना अंतर्गत भवनों में मरम्मत तथा संधारण का कार्य निरंतर रूप से कराया जा रहा है।

    देवास की पटाखा फैक्ट्री में अग्नि दुर्घटना जाँच के लिए गठित एकल सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग का अनुमोदन

    मंत्रि-परिषद द्वारा देवास जिले में 14 मई 2026 को टोकंकला में स्थित पटाखा फैक्ट्री में घटित दुखद अग्नि दुर्घटना की न्यायिक जाँच के लिए श्री सुभाष काकड़े सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति, उच्च न्यायालय जबलपुर की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग गठित किये जाने और जॉच आयोग के कार्यकाल में तीन माह 14 अगस्त 2026 तक की वृद्धि किये जाने के संबंध में जारी अधिसूचना का अनुसमर्थन किया गया।

    मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन को विधान सभा के पटल पर रखने का अनुमोदन

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन एवं जिन प्रकरणों में आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई है, उनके संबंध में ज्ञापन के साथ विधान सभा के पटल पर रखे जाने का अनुमोदन दिया है।

  • झांसी सड़क हादसे में अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की मौत, डिवाइडर से टकराई कार, तीन लोगों की गई जान

    झांसी सड़क हादसे में अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की मौत, डिवाइडर से टकराई कार, तीन लोगों की गई जान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में गुरुवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद समेत तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर उस समय हुआ, जब प्रयागराज से झांसी जा रही एक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में कुल छह लोग सवार थे। सभी लोग झांसी जिला कारागार में बंद अली अहमद से मिलने के लिए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सफर के दौरान हाईवे पर अचानक चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया, जिसके बाद कार तेज गति से डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को तत्काल एम्बुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद अबान अहमद समेत तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य घायलों का इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने के लिए परिवार और परिचित नियमित रूप से आते-जाते रहे हैं। अली अहमद को पिछले वर्ष प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल से स्थानांतरित कर झांसी जिला कारागार भेजा गया था। इसी सिलसिले में परिवार के सदस्य झांसी की ओर जा रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।

    पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में दुर्घटना के कई संभावित कारणों पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा तेज रफ्तार, चालक को झपकी आने, वाहन के तकनीकी खराब होने या टायर फटने जैसी किसी वजह से हुआ। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दुर्घटना के बाद मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। इस घटना के बाद अतीक अहमद के परिवार में एक बार फिर शोक का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

    सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना गंभीर दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनता है। ऐसे मामलों में वाहन की तकनीकी स्थिति, चालक की सतर्कता और यातायात नियमों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास जारी है।

  • 77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और FASTag एनुअल पास की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार पिछले 11 महीनों में 77 लाख से अधिक FASTag एनुअल पास जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के माध्यम से 63 करोड़ से अधिक टोल लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि निजी वाहन चालकों के बीच यह सुविधा तेजी से स्वीकार की जा रही है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

    सरकार के मुताबिक कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा केवल FASTag एनुअल पास के माध्यम से हो रहा है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली के तहत वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 98 प्रतिशत टोल शुल्क FASTag के जरिए ही वसूला जा रहा है। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी है।

    FASTag एनुअल पास विशेष रूप से निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसकी कीमत 3,075 रुपये निर्धारित की गई है। यह पास एक वर्ष तक या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है। जो भी सीमा पहले पूरी होती है, उसी के अनुसार इसकी वैधता समाप्त हो जाती है। नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए यह सुविधा समय और प्रक्रिया दोनों के लिहाज से उपयोगी मानी जा रही है।

    सरकार का कहना है कि FASTag नेटवर्क को बहु-स्तरीय डिजिटल सुरक्षा प्रणाली के साथ संचालित किया जा रहा है। इसमें टोल प्रबंधन प्रणाली, अधिग्रहण बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) तथा FASTag जारी करने वाले बैंक आपस में समन्वित रूप से कार्य करते हैं। प्रत्येक टोल लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है और भुगतान होते ही वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत सूचना भेजी जाती है। किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की गई है।

    सरकार भविष्य में टोल संग्रह प्रणाली को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण और RFID तकनीक का उपयोग किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरा और सेंसर वाहन की पहचान कर संबंधित खाते से स्वतः टोल शुल्क काट देंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक लागू होने से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी, यात्रा का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सड़क परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। साथ ही डिजिटल भुगतान और टोल संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों को अधिक सुविधाजनक और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा।

  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

  • खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    मध्य प्रदेश । मुरैना जिले में चंबल की प्रतिबंधित रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून और प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-44 पर नहर के समीप अवैध रेत के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने उतरी परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त चेकिंग टीम पर हमला करने और उन्हें वाहन से कुचलने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस जानलेवा हमले के दौरान मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बेहद बाल-बाल बचे।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले संदिग्ध और ओवरलोड वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम को अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली आती हुई दिखाई दी। आरटीओ के कर्मचारियों ने जब नियमानुसार उस वाहन को रुकने का इशारा किया, तो ट्रैक्टर चालक ने वाहन की रफ्तार धीमी करने के बजाय उसे सीधे चेकिंग कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मोड़ दिया और उन्हें कुचलने का प्रयास किया।

    वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और आरटीओ अमले ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। शासकीय टीम को निशाना बनाने के तुरंत बाद आरोपी चालक बेहद लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली को दौड़ाते हुए मौके से फरार हो गया। इस अप्रत्याशित हमले से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में सघन नाकाबंदी लागू की गई।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के संबंध में सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और अवैध खनिज परिवहन की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात माफियाओं के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा हाईवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावर ट्रैक्टर और उसके चालक की सटीक पहचान की जा सके।

    मुरैना और चंबल संभाग में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक टीमों पर खनन माफियाओं द्वारा हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और राजस्व टीम को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और दावा किया है कि सरकारी अमले पर हमला करने वाले तत्वों को जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर बड़ा हादसा, राजस्थान से आए यात्रियों की बस पलटी, कई घायल अस्पताल में भर्ती

    हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर बड़ा हादसा, राजस्थान से आए यात्रियों की बस पलटी, कई घायल अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और यातायात मार्गों में शामिल Dehradun–Haridwar Highway पर सोमवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। यह दुर्घटना Haridwar के नगर कोतवाली क्षेत्र में स्थित शांतिकुंज के पास हुई, जहां राजस्थान से आए श्रद्धालुओं से भरी एक बस डंपर की टक्कर के बाद अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक यात्री घायल बताए जा रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में सवार सभी यात्री Rajasthan से हरिद्वार दर्शन के लिए आए थे और धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद वापस लौट रहे थे। सुबह के समय बस जब सर्विस लेन से मुख्य हाईवे की ओर मुड़ रही थी, तभी रायवाला की दिशा से तेज गति में आ रहे डंपर ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का संतुलन बिगड़ गया और वह पलटकर सड़क पर जा गिरी।

    हादसे के बाद बस के भीतर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और मौके पर भय का माहौल बन गया। कई यात्री बस के अंदर फंस गए, जिन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस टीम की मदद से बाहर निकाला गया। घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई यात्रियों का उपचार जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर के बाद डंपर भी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक ढाबे में जा घुसा, जिससे वहां मौजूद लोगों में भी दहशत फैल गई। हादसे के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और डंपर को हटाना पड़ा, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया जा सका।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।

    यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर यातायात सुरक्षा व्यवस्था और भारी वाहनों की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। धार्मिक यात्राओं के दौरान बढ़ने वाले यातायात दबाव के बीच ऐसे हादसे चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा घायलों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है।

  • चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।

    यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

    वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा।

    इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।

  • ट्रक से छलांग लगाते ही गई जान: होमगार्ड जवान की हाईवे पर दर्दनाक मौत

    ट्रक से छलांग लगाते ही गई जान: होमगार्ड जवान की हाईवे पर दर्दनाक मौत


    नई दिल्ली । ग्वालियर जिले के घाटीगांव क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां शिवपुरी में पदस्थ 25 वर्षीय होमगार्ड जवान धर्मेन्द्र आदिवासी की चलती पुलिस ट्रक से कूदने के बाद मौत हो गई। यह घटना आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर सिमरिया मोड़ के पास हुई।

    जानकारी के अनुसार, जवान अपने साथियों के साथ सरकारी कार्य के लिए राइफल जमा करने ग्वालियर आ रहा था। इसी दौरान वह पुलिस के मिनी ट्रक में सवार था। रास्ते में उसके मोबाइल पर घर से एक कॉल आया, जिसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया।

    साथी जवानों के मुताबिक, फोन पर लंबी बातचीत के बाद वह तनावग्रस्त और उत्तेजित दिखाई देने लगा। जैसे ही वाहन सिमरिया मोड़ के पास पहुंचा, उसने अचानक चिल्लाते हुए चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। सिर के बल गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    साथियों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया।

    पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और जवान के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिरी कॉल में क्या बातचीत हुई थी, जिससे वह मानसिक रूप से विचलित हुआ।

    फिलहाल पुलिस इसे संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मानकर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण


    उज्जैन । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन जिले के खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, कृषि, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए कई योजनाओं का उद्घाटन किया।
    मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 39 विकास कार्यों की शुरुआत की, जिनमें 16 पूर्ण और 23 नए कार्य शामिल हैं। इनमें 35.40 करोड़ रुपये की लागत से सांदीपनि विद्यालय भवन और 11.30 करोड़ रुपये की लागत से नई कृषि उपज मंडी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय में आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का प्रबंध किया जाएगा, जिससे छात्रों का भविष्य उज्जवल होगा।
    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में स्मार्ट क्लासेस, संयुक्त तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत भवन और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी परियोजनाओं का भी भूमिपूजन किया। कृषि उपज मंडी में विश्राम भवन, भोजनालय और पेयजल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क की घोषणा की, जो क्षेत्र के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार प्रदान करेगा। इसके अलावा, उन्होंने नागदा से खाचरौद होते हुए उज्जैन और जावरा तक फोरलेन हाईवे बनाने की योजना की भी जानकारी दी, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से सीधा लाभ मिलेगा।
    किसानों के हित में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया और बताया कि सरकार गेहूं खरीदी पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। इसके साथ ही, अगले तीन वर्षों में 32 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
    मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना और केन-बेतवा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाई जाएगी, जिससे किसानों को  फायदेमंद होगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने इन विकास कार्यों को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। इस मौके पर उज्जैन सांसद अनि फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेशनाथ महाराज, खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।