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  • गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर में राजमार्ग अवसंरचना के विकास और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर को होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।

    मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। इसके साथ विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा। यह आयोजन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर सामने आए अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इसमें विभिन्न राज्यों के सड़क परिवहन और लोक निर्माण विभागों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक, कार्यक्रम में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान के साथ नए और दोहराए जा सकने वाले समाधानों पर विचार किया जाएगा। नीति और संस्थागत सुधारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि अलग-अलग राज्यों और संबंधित एजेंसियों के अनुभवों को एक मंच पर लाने से सड़क अवसंरचना विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने में मदद मिलेगी और परियोजनाओं की गति बढ़ाई जा सकेगी।

    दो दिवसीय चिंतन शिविर में पांच प्रमुख विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पीएम गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना योजना, भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि प्लेटफॉर्म, मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स, हाईवे सुरक्षा तथा गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी शामिल हैं। पीएम गतिशक्ति से जुड़े सत्र में विभिन्न अवसंरचना क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत योजना निर्माण पर चर्चा होगी। भूमि अधिग्रहण से संबंधित सत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं और उन्हें दूर करने के संभावित उपायों पर विचार किया जाएगा।

    मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स से जुड़े सत्र में अनुबंध संबंधी मुद्दों तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हाईवे सुरक्षा के सत्र में सुरक्षित सड़क डिजाइन और सुरक्षा उपायों को परियोजना की योजना तथा निर्माण प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर चर्चा होगी। वहीं गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी सत्र में निर्माण की गुणवत्ता सुधारने, परियोजनाओं की निगरानी मजबूत करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर से सड़क और राजमार्ग अवसंरचना विकास को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • हाईवे पर पुल-टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर है तो 40% तक कम लगेगा टोल टैक्स… NHAI ने बदला नियम

    हाईवे पर पुल-टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर है तो 40% तक कम लगेगा टोल टैक्स… NHAI ने बदला नियम


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। यदि आपके रास्ते में लंबे पुल, सुरंगें, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड आते हैं तो अब आपको पहले के मुकाबले कम टोल टैक्स (Toll Tax) चुकाना होगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन किया गया है। इसे लागू करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नए नियमों के तहत टोल दरों की समीक्षा और संशोधन प्रक्रिया शुरू करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।

    आमतौर पर किसी भी हाईवे पर पुल, टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर (Elevated structure) का निर्माण करना और उसका रखरखाव करना बेहद खर्चीला काम होता है। यही वजह थी कि पुराने नियमों के तहत इनकी लंबाई को 10 गुना मानकर टोल की गणना की जाती थी।

    उदाहरण के लिए यदि किसी हाईवे पर 5 किलोमीटर लंबी टनल (Long tunnel) या एलिवेटेड स्ट्रक्चर होता था तो टोल लेते वक्त उसे 50 किलोमीटर सड़क के बराबर माना जाता था। पहाड़ी इलाकों, एक्सप्रेसवे और बड़े शहरी रास्तों में जहां कई किलोमीटर लंबे ब्रिज या एलिवेटेड हाईवे बने हैं वहां इस नियम के कारण टोल का बोझ आम जनता और वाहन चालकों की जेब पर बेहद भारी पड़ रहा था। इसी समस्या को हल करने और टोल की दरों को व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार ने टोल संशोधन नियमों को जारी किया है।


    क्या है नया टोल फॉर्मूला? समझें गणित

    संशोधित राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रहण) नियम, 2008 के तहत अब टोल की गणना के लिए एक पारदर्शी और संतुलित फॉर्मूला पेश किया गया है। नए फॉर्मूले के अनुसार, जिन हाईवे पर एक या एक से अधिक ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड सेक्शन हैं वहां टोल की गणना के लिए दो तरीके अपनाए जाएंगे।

    पहला तरीका यह है कि विशेष संरचनाओं जैसे कि ब्रिज या टनल की लंबाई का 10 गुना करके, उसे हाईवे के शेष सामान्य हिस्से की लंबाई में जोड़ दिया जाए। दूसरा तरीका यह है कि पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई का 5 गुना कर दिया जाए।

    NHAI को अनिवार्य रूप से इन दोनों गणनाओं में से जो भी दूरी कम होगी उसी के आधार पर टोल तय करना होगा। इसके अलावा जिन पुलों या फ्लाईओवरों की लंबाई 60 मीटर या उससे कम होगी उन्हें अलग से विशेष संरचना नहीं माना जाएगा और उन पर कोई अतिरिक्त नियम नहीं होगा।


    केस स्टडी से समझें टोल का गणित

    केस 1: मान लीजिए कोई हाईवे 40 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से 30 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड या ब्रिज का है और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है। पुराने फॉर्मूले के मुताबिक, 30 किमी × 10 + 10 किमी = 310 किमी की दूरी पर टोल लगता है। नए फॉर्मूले के मुताबिक, कुल दूरी का 5 गुना (40 किमी × 5) यानी कि 200 किमी ही होगा। चूंकि 200 किमी की दूरी कम है, इसलिए जनता को 310 किमी के बजाय केवल 200 किमी का ही टोल देना होगा।

    केस 2: अगर 40 किलोमीटर के हाईवे में 10 किलोमीटर ब्रिज है और 30 किलोमीटर सामान्य सड़क है। पहले तरीके से दूरी 10 किमी × 10 + 30 किमी यानी कि 130 किमी होगी। दूसरे तरीके से दूरी 40 किमी × 5 यानी कि 200 किमी होगी। आपको बता दें कि यहां 130 किलोमीटर वाली दूरी कम है, इसलिए केवल 130 किमी का टोल लागू होगा। पहले यहां 200 किमी के हिसाब से टोल देना पड़ता था।

    दोनों फॉर्मूले को देखें तो करीब 40 प्रतिशत तक की दूरी कम हो रही है। इस हिसाब से टोल भी 40 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है।


    कब से लागू होंगी नई दरें?

    नियमों में यह संशोधन लागू कर दिया गया है, लेकिन टोल प्लाजा के प्रकार के आधार पर इसका फायदा वाहन चालकों को अलग-अलग समय पर मिलेगा। वर्तमान में चल रहे ऐसे सार्वजनिक टोल प्लाजा पर नई दरें उनके अगले निर्धारित वार्षिक शुल्क संशोधन की तारीख से लागू हो जाएंगी। पीपीपी (PPP) मॉडल या प्राइवेट कंपनियों द्वारा संचालित टोल प्लाजा पर यह नया नियम उनकी रियायत अवधि पूरी होने या प्रोजेक्ट एनएचएआई को वापस सौंपे जाने के बाद प्रभावी होगा। भविष्य में शुरू होने वाले सभी नए टोल प्लाजा पर टोल टैक्स की वसूली पहले दिन से ही इसी संशोधित और सस्ते फॉर्मूले के तहत की जाएगी।

    सरकार के इस कदम से न केवल लंबी दूरी का सफर तय करने वाले निजी वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई करने वाले व्यावसायिक वाहनों का परिचालन खर्च भी कम होगा। इसका सकारात्मक असर आने वाले समय में महंगाई और लॉजिस्टिक्स लागत पर देखने को मिल सकता है।