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  • स्मित मच्छार पर हमले के बाद फ्लाईदुबई विमान को गिराने की तैयारी में था इजरायल, 150 यात्रियों की थी जान

    स्मित मच्छार पर हमले के बाद फ्लाईदुबई विमान को गिराने की तैयारी में था इजरायल, 150 यात्रियों की थी जान


    नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर सह-पायलट के हमले और विमान को कथित तौर पर अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश के बाद एक बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकपिट में हुए हमले की जानकारी मिलने के बाद इजरायल ने विमान को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी। इजरायल को आशंका थी कि यदि विमान को हाइजैक कर लिया जाता है तो उसका इस्तेमाल 11 सितंबर 2001 जैसी घटना को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है। विमान में करीब 150 इजरायली यात्री सवार थे। ऐसे में इजरायल के सामने विमान को गिराने और संभावित रूप से किसी बड़े हादसे को रोकने के बीच फैसला लेने की स्थिति बन गई थी।

    घटना के दौरान ओमानी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया। हमले में मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआत में विमान में मौजूद अन्य लोगों को कॉकपिट के भीतर हुई घटना की जानकारी नहीं हो सकी। इसके बाद कैप्टन मच्छार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे कुछ क्रू सदस्य और यात्री अंदर पहुंच सके और उन्होंने सह-पायलट को काबू में कर लिया। घटना के बाद विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया।

    विमान के सुरक्षित उतरने से उसमें सवार करीब 180 लोगों की जान बच गई। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर विमान अपना रास्ता बदलकर किसी बड़े शहर या ऊंची इमारत की ओर जाता है तो इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है। इसी आशंका के कारण विमान के रास्ते में बदलाव नहीं होने की स्थिति में उसे निशाना बनाने की तैयारी की गई थी। हालांकि विमान को सुरक्षित उतार लिया गया और इजरायल को उस योजना को लागू करने की जरूरत नहीं पड़ी। घटना के बाद मामले की जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

    इस मामले में ओमानी सह-पायलट की पुरानी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां करीब एक दशक पहले उसके ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान की गतिविधियों की जांच कर रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस के मुताबिक, संघीय और राज्य पुलिस तथा देश की घरेलू खुफिया एजेंसी की संयुक्त आतंकवाद रोधी टीम उसके ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है। सह-पायलट फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत में है। उस पर इजरायल जा रहे विमान को अपने नियंत्रण में लेने की कथित कोशिश का आरोप है।

    न्यूजीलैंड की पुलिस ने भी कहा है कि सह-पायलट कुछ समय न्यूजीलैंड में रहा था और अधिकारी वहां उसके रहने से जुड़े पहलुओं की जांच करेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसे 2014 में ऑस्ट्रेलिया का छात्र वीजा मिला था और वह 2015 में एक विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचा था। बताया गया है कि वह 2017 में ऑस्ट्रेलिया से चला गया। इसके बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि वह संबंधित पाठ्यक्रम में पंजीकृत नहीं था, जिसके बाद 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में विमान पर हमला, उसके सुरक्षित उतरने और सह-पायलट की पृष्ठभूमि की जांच प्रमुख पहलू बने हुए हैं।

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना पर अल कायदा की यमन शाखा का समर्थन, 9/11 का जिक्र कर को-पायलट की कथित कोशिश को सराहा

    फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना पर अल कायदा की यमन शाखा का समर्थन, 9/11 का जिक्र कर को-पायलट की कथित कोशिश को सराहा


    नई दिल्ली ।
    फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 से जुड़ी कथित हाईजैकिंग कोशिश के मामले में अल कायदा की यमन शाखा AQAP से जुड़े एक अनौपचारिक मुखपत्र ने घटना पर संपादकीय प्रकाशित किया है। इसमें फ्लाइट के ओमानी को-पायलट की कथित कार्रवाई का समर्थन किया गया और 9/11 हमले का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, AQAP ने इस घटना की सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर ध्यान दे रही हैं कि संगठन ने जिम्मेदारी लेने के बजाय घटना को वैचारिक समर्थन देने का रास्ता अपनाया है।

    संपादकीय में फ्लाईदुबई की फ्लाइट की घटना को 9/11 से जोड़कर पेश किया गया है। इसका शीर्षक ‘Between September 11 and September 30’ रखा गया है। लेख में फ्लाइट को ‘यहूदी-यूएई विमान’ के रूप में संबोधित किया गया और ओमानी को-पायलट की कथित कोशिश की प्रशंसा की गई। संपादकीय में यह दावा भी किया गया कि अगर हाईजैकिंग की कोशिश सफल हो जाती तो क्षेत्र में ताकत का संतुलन बदल सकता था। इसके साथ फ्लाईदुबई के विमान की तस्वीरें भी प्रकाशित की गईं।

    घटना के बाद फ्लाइट में सवार को-पायलट से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट भी जांच के दायरे में आए हैं। बताया गया है कि घटना के कुछ घंटे बाद उसके एक सोशल मीडिया अकाउंट से दो पोस्ट साझा की गई थीं। इस घटनाक्रम के बीच जांच एजेंसियां आरोपी को-पायलट से संबंधित उपलब्ध जानकारियों और उसके कथित ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही हैं।

    मुखपत्र में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल को गैर-मुस्लिम लोग भी निशाना बना सकते हैं और ऐसे हमलों को मुसलमानों के फायदे के रूप में पेश किया गया। संपादकीय में फ्लाइट 1073 का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि विमान सऊदी अरब में उतरा था। साथ ही ओमानी को-पायलट की कथित कार्रवाई को समर्थन देने के लिए 9/11 हमले का संदर्भ इस्तेमाल किया गया। संगठन की ओर से घटना की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं ली गई है।

    जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 इजराइल जा रही थी। आरोप है कि विमान के कॉकपिट में ओमान के को-पायलट ने क्रैश एक्स से कप्तान पर हमला किया था। घटना के बाद इस मामले में को-पायलट की पृष्ठभूमि भी जांच का विषय बनी। बताया गया है कि हमाम अल-हमामी को पहले ही कट्टरपंथी विचारों के कारण ओमान में उड़ान भरने से प्रतिबंधित किया गया था।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच AQAP से जुड़े मुखपत्र का संपादकीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कथित विमान घटना को वैचारिक समर्थन दिया गया है। हालांकि संगठन ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। जांच में फ्लाइट की घटना, को-पायलट की कथित गतिविधियों, उसके सोशल मीडिया अकाउंट और AQAP की प्रतिक्रिया से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।