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  • हिमाचल प्रदेश….. चंबा-मसरूंड मार्ग पर 500 मीटर गहरी खाई में गिरी बोलेरो, 7 लोगों की मौत

    हिमाचल प्रदेश….. चंबा-मसरूंड मार्ग पर 500 मीटर गहरी खाई में गिरी बोलेरो, 7 लोगों की मौत


    चंबा।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के चंबा जिले (Chamba district) में वीरवार को चंबा-मसरूंड मार्ग (Chamba-Masrund Road) पर छतरूंड के समीप एक बोलेरो (Bolero) अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई (500-Meter-Feep Gorge) में जा गिरी, जिसमें सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है।


    मुंडन संस्कार में शामिल होकर लौट रहे थे घर

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोलेरो (एचपी-01सी-2581) में ग्राम महल पंचायत के सपरोठ गांव के छह लोग, जिनमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे और वाहन का चालक सवार था। ये सभी लोग काकड़ोथा गांव में आयोजित एक मुंडन संस्कार में शामिल होकर अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान छतरूंड के पास अनियंत्रित होकर वाहन सड़क से लुढ़क गया और खाई में समा गया। खाई की गहराई लगभग 500 मीटर बताई जा रही है।


    राहत एवं बचाव कार्य

    हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे। तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। गहरी खाई से सभी सात शवों को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, ताकि मौत के कारणों की पुष्टि हो सके।


    जांच शुरू, कारणों की पड़ताल जारी

    प्रशासन ने इस भीषण हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों की स्थिति, वाहन की गति, या किसी अन्य यांत्रिक खराबी जैसे संभावित कारणों की जांच की जा रही है। इस दर्दनाक हादसे ने सपरोठ पंचायत में मातम का माहौल बना दिया है।


    पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा की चिंता

    चंबा जैसे पहाड़ी जिलों में इस तरह के सड़क हादसे कोई नई बात नहीं हैं। संकरे और घुमावदार रास्ते, तीव्र ढलानें और कई बार खराब सड़क की स्थिति, इन सभी कारणों से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा के उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं और सड़कों की स्थिति को सुधारा जाए।

  • समुद्र से दूर पहाड़ों का जादू: मनाली बना गर्मियों का एडवेंचर हॉटस्पॉट, जानें टॉप घूमने की जगहें

    समुद्र से दूर पहाड़ों का जादू: मनाली बना गर्मियों का एडवेंचर हॉटस्पॉट, जानें टॉप घूमने की जगहें

    नई दिल्ली। जैसे-जैसे गर्मियों का तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे लोग ठंडी जगहों की ओर रुख कर रहे हैं। समुद्र से दूर, हिमालय की गोद में बसा मनाली इस समय देशभर के पर्यटकों का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। बर्फ से ढकी चोटियां, ठंडी हवाएं और एडवेंचर स्पोर्ट्स इसे गर्मियों की छुट्टियों के लिए परफेक्ट जगह बनाते हैं।

    मनाली सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर प्रेमियों के लिए भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आने वाले पर्यटक पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और स्कीइंग जैसे रोमांचक अनुभवों का आनंद लेते हैं।

    सबसे लोकप्रिय जगहों में सोलंग वैली का नाम सबसे पहले आता है। यह जगह एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए मशहूर है और यहां पर्यटक पैराग्लाइडिंग और स्नो एक्टिविटीज का भरपूर मजा लेते हैं। गर्मियों में भी यहां हल्की ठंडक बनी रहती है, जो इसे और खास बनाती है।

    इसके अलावा, रोहतांग पास भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां बर्फ से ढके पहाड़ और मनमोहक दृश्य हर किसी का दिल जीत लेते हैं। हालांकि, मौसम और प्रशासनिक अनुमति के अनुसार ही यहां यात्रा संभव होती है।

    मनाली में स्थित हिडिंबा देवी मंदिर भी एक प्रमुख आकर्षण है। देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।

    जो लोग शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए ओल्ड मनाली और मॉल रोड बेहतरीन विकल्प हैं। यहां कैफे, लोकल मार्केट और नदी किनारे बैठकर समय बिताना एक अलग ही अनुभव देता है।

    बीस नदी (Beas River) के किनारे बैठकर बहते पानी की आवाज और पहाड़ों का नजारा मन को सुकून देता है। कई पर्यटक यहां कैंपिंग का भी आनंद लेते हैं, जो उनकी यात्रा को और यादगार बना देता है।

    गर्मियों के मौसम में मनाली का तापमान काफी सुहावना रहता है, जिससे यह दिल्ली, मुंबई और अन्य मैदानी इलाकों की गर्मी से राहत पाने के लिए आदर्श जगह बन जाती है।

    पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में मनाली की ओर बढ़ती भीड़ यह दिखाती है कि लोग अब प्राकृतिक और एडवेंचर टूरिज्म की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

    कुल मिलाकर, अगर आप इस गर्मी में भीड़-भाड़ और गर्मी से दूर एक सुकून भरी और रोमांच से भरी यात्रा की तलाश में हैं, तो मनाली आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है।


  • कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह

    कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश में संगठन विस्तार के तहत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ी स्तर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। कुल 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है।

    संगठन विस्तार में नई नियुक्तियां

    कांग्रेस द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर नए अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे सभी जिलों को शामिल किया गया है।

    नालागढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बने बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति पर हाईकमान का आभार जताया और इसे बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलेंगे।

    नेताओं ने जताया नेतृत्व पर भरोसा

    बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह और अन्य नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

    जमीनी संगठन को मजबूत करने का दावा

    नवनियुक्त अध्यक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करेंगे और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्राथमिकता देंगे। साथ ही, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय लेने की बात भी कही गई।

    जिलावार नियुक्तियां पूरी

    सूची के अनुसार सभी जिलों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है, जिनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, सोलन, सिरमौर, शिमला और अन्य जिले शामिल हैं।

    महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

    हालांकि संगठन विस्तार के इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों के बावजूद किसी भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया विषय बन सकता है, खासकर उस समय जब महिला प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।

  • विज्ञान भी हैरान ज्वाला देवी मंदिर में जलती प्राकृतिक ज्योतियों का अनोखा रहस्य

    विज्ञान भी हैरान ज्वाला देवी मंदिर में जलती प्राकृतिक ज्योतियों का अनोखा रहस्य


    नई दिल्ली । भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है यहां स्थित देवी मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं बल्कि अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य भी समेटे हुए हैं इन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला देवी मंदिर जो भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी स्थल माना जाता है इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी देवी की मूर्ति नहीं है बल्कि चट्टानों के बीच से निकलती प्राकृतिक ज्वालाओं को ही देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक है कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के टुकड़े किए थे तब उनकी जीभ यहां गिरी थी इसी कारण यहां देवी ज्वाला के रूप में प्रकट हुईं और तभी से यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है मंदिर के गर्भगृह में चट्टानों के बीच से नौ अलग अलग ज्वालाएं निकलती हैं जो लगातार जलती रहती हैं इन ज्वालाओं को नौ दुर्गा का स्वरूप माना जाता है जिनमें महाकाली की ज्वाला सबसे प्रमुख और बड़ी मानी जाती है जबकि अन्य ज्वालाएं अन्नपूर्णा चंडी हिंगलाज विंध्यवासिनी महालक्ष्मी सरस्वती अंबिका और अंजनी के रूप में पूजी जाती हैं

    सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये ज्वालाएं सदियों से बिना किसी तेल बाती या घी के निरंतर जल रही हैं यही कारण है कि यह मंदिर आस्था के साथ साथ रहस्य का भी केंद्र बना हुआ है विज्ञान ने भी इस रहस्य को समझने की कई कोशिशें की हैं वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ज्वालाएं संभवतः धरती के भीतर से निकलने वाली प्राकृतिक गैस के कारण जलती हैं लेकिन कई वर्षों तक की गई जांच और गहराई तक खुदाई के बावजूद गैस का स्पष्ट स्रोत नहीं मिल पाया है जिससे यह रहस्य आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं सका है

    इतिहास में भी इस मंदिर से जुड़ी कई रोचक घटनाएं मिलती हैं कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर ने इन ज्वालाओं की सत्यता को परखने के लिए उन्हें बुझाने की कोशिश की थी उन्होंने लोहे की प्लेट और पानी का उपयोग किया लेकिन ज्वालाएं बुझ नहीं सकीं इस घटना के बाद उन्होंने देवी की शक्ति को स्वीकार करते हुए मंदिर में सोने का छाता अर्पित किया हालांकि मान्यता है कि वह छाता बाद में किसी अन्य धातु में परिवर्तित हो गया जिसने इस चमत्कार को और भी रहस्यमयी बना दिया

    मंदिर परिसर में स्थित एक और अनोखी जगह है जिसे गोरख डिब्बी कहा जाता है यह एक छोटा कुंड है जिसमें पानी देखने में उबलता हुआ प्रतीत होता है लेकिन जब कोई उसे छूता है तो वह ठंडा महसूस होता है यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आश्चर्य और आस्था का अनूठा अनुभव बन जाता हैज्वाला देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि विश्वास और रहस्य का अद्भुत संगम है यहां की प्राकृतिक ज्वालाएं आज भी लोगों के लिए आस्था का प्रतीक बनी हुई हैं और यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिव्य स्थान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं

  • Weather Update: दिल्ली में मार्च की गर्मी 35.7°C पार, 50 साल का रिकॉर्ड टूटा, इन राज्यों में बारिश की संभावना

    Weather Update: दिल्ली में मार्च की गर्मी 35.7°C पार, 50 साल का रिकॉर्ड टूटा, इन राज्यों में बारिश की संभावना



    नई दिल्ली । मार्च की शुरुआत होते ही देश के कई हिस्सों में गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। कई राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ते हुए 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। राजस्थान के अकोला में अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तेज गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मार्च की गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले करीब 50 वर्षों में मार्च के पहले ही सप्ताह में दर्ज सबसे अधिक तापमान है। दिन के समय तेज धूप के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक पहुंच जाता है और सामान्य से 4-6 डिग्री अधिक होता है, तब हीटवेव की स्थिति मानी जाती है। ऐसे समय लोगों को लू लगने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि, आने वाले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के प्रभाव से पहाड़ी क्षेत्रों में राहत मिल सकती है। 8 से 12 मार्च के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा, गांदरबल, बांदीपोरा और अनंतनाग में भी हल्की बर्फबारी हो सकती है।

    इसके अलावा सिक्किम, ओडिशा और केरल में बारिश के आसार हैं। पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में मौसम बदलने से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग ने लोगों से आगाह किया है कि तेज धूप में घर से बाहर निकलते समय सुरक्षा उपाय अपनाएं, पर्याप्त पानी पीएं और बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। इस मार्च की गर्मी ने देशभर में गर्मी की शुरुआती चेतावनी दे दी है और आने वाले दिनों में मौसम पर नजर रखना जरूरी है।

  • बिना बताए दूसरे राज्य से आरोपी लाना: क्या पुलिस भी हो सकती है गिरफ्तार?

    बिना बताए दूसरे राज्य से आरोपी लाना: क्या पुलिस भी हो सकती है गिरफ्तार?


    नई दिल्ली । हाल ही में शिमला में यूथ कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के दौरान यह सवाल फिर से उभरा कि क्या एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य से आरोपी को बिना सूचना दिए ले जा सकती है। मंगलवार रात दिल्ली और हरियाणा पुलिस की टीम ने रोहड़ू इलाके से तीन लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें दिल्ली ले जाने लगी। बुधवार सुबह हिमाचल प्रदेश पुलिस ने रास्ते में गाड़ियों को रोककर पूछताछ की। अंततः ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपी दिल्ली ले जाए गए।

    दूसरे राज्य से गिरफ्तारी के नियम

    भारत में एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तारी कर सकती है लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इसे नियंत्रित करते हैं दंड प्रक्रिया संहिता और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश जैसे कि डी.के. बसु बनाम राज्य मामला।

    इंटर-स्टेट गिरफ्तारी के नियम इस प्रकार हैं

    स्थानीय पुलिस को पूर्व सूचना देना जिस राज्य में गिरफ्तारी करनी है वहां के थाने को पहले जानकारी देना आवश्यक है।ट्रांजिट रिमांड लेना आरोपी को नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है और ट्रांजिट रिमांड मिलना चाहिए। यह कानूनी अनुमति है जिससे आरोपी को दूसरे राज्य ले जाया जा सकता है।स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिकॉर्ड दर्ज करना गिरफ्तारी की पूरी जानकारी डायरी में दर्ज करनी होती है।पुलिस अधिकारियों की पहचान स्पष्ट होना गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी वर्दी में हों पहचान पत्र दिखाएं और अपनी पहचान स्पष्ट करें।

    नियम तोड़ने पर परिणाम

    अगर पुलिस बिना स्थानीय पुलिस को बताए और ट्रांजिट रिमांड लिए आरोपी को ले जाती है तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी। परिणामस्वरूप संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपहरण गैरकानूनी हिरासत या बंधक बनाने के आरोप लग सकते हैं।सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन अदालत की अवमानना माना जा सकता है। विभागीय जांच निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है।

  • US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट

    US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट


    नई दिल्ली।
    भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर कश्मीर (Kashmir) से लेकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) तक के सेब किसानों में चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर अमेरिकी सेब (American Apple) सस्ते दाम पर भारतीय बाजार में आने लगे, तो स्थानीय सेब की मांग और कीमत दोनों गिर सकती हैं। इस डील के तहत कई देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम किया जा रहा है। पहले ज्यादा कीमत होने के कारण विदेशी सेब कम मात्रा में आते थे, लेकिन अब ड्यूटी कम होने से आयात बढ़ने का डर है।

    कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग बहुत अहम है। हजारों परिवार सीधे या परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। ऐसे में अगर विदेशी सेब ज्यादा आए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ सकता है। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आयात बढ़ा, तो स्थानीय बागवानी उद्योग को नुकसान हो सकता है।


    अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो टेंशन बढ़ेगी

    हालांकि सरकार का कहना है कि अमेरिकी सेब के लिए केवल सीमित (कोटा आधारित) रियायत दी जा रही है और किसानों की सुरक्षा के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) जैसी व्यवस्था रखी गई है, ताकि बहुत सस्ते सेब बाजार में न आ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो घरेलू किसानों पर कीमत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग इसे अवसर भी मानते हैं—कहते हैं कि इससे भारतीय किसान गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे सकते हैं।


    फल मंडी के नेता क्या कह रहे?

    घाटी के सबसे बड़े फल मार्केट, सोपोर फ्रूट मंडी के प्रेसिडेंट फैयाज अहमद मलिक ने बताया, “यह (इंडिया-US डील) हमारे लिए बहुत बुरा होगा।” वे कहते हैं, “हम US में फल उगाने वालों से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्हें खेती के हर स्टेज पर सरकार से मदद मिलती है। उन्हें अच्छी-खासी सब्सिडी और कैश ट्रांसफर मिलते हैं, जबकि हमारे पास फसल बीमा तक नहीं है।” मलिक का कहना है कि इस ट्रेड डील का कश्मीर घाटी की इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ेगा। वे कहते हैं, “जब हम अपने सेब बांग्लादेश भेजते हैं, तो हमें 100% से ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है। सरकार अमेरिकन सेब पर टैक्स कैसे कम कर सकती है? इससे लोकल इंडस्ट्री और इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी।”


    10,000 करोड़ रुपये की है सेब इंडस्ट्री

    बता दें कि सेब इंडस्ट्री जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) की अर्थव्यवस्था, खासकर कश्मीर घाटी की इकॉनमी का आधार और रीढ़ है। घाटी देश के कुल सेब उत्पादन का 75% पैदा करती है। आधिकारिक आंकड़ों के के मुताबिक घाटी में करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होते हैं और इस सेब इंडस्ट्री की कीमत 10,000 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि इस इंडस्ट्री में सीधे या अप्रत्यक्ष करीब 50 लाख लोग जुड़े हुए हैं। फिलहाल किसान संगठन सरकार से सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने भारत-US डील में खेती की उपज, खासकर सेब को शामिल करने के खिलाफ 12 फरवरी को बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कश्मीर के किसान भी अब इसी तरह के प्रदर्शन का प्लान बना रहे हैं।

  • उत्तर भारत में सर्दी की मार, कोहरे और बर्फबारी से जीवन प्रभावित, शीतलहर के कारण अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में सर्दी की मार, कोहरे और बर्फबारी से जीवन प्रभावित, शीतलहर के कारण अलर्ट जारी


    नई दिल्ली । उत्तर भारत के कई हिस्सों में सर्दी और कोहरे के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। दिल्ली उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा और अन्य मैदानी इलाकों में घना कोहरा और शीतलहर ने दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग IMD के अनुसार अगले कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    दिल्ली और उत्तर प्रदेश

    दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इस समय घना कोहरा छाया हुआ है जिससे विजिबिलिटी बहुत कम हो गई है। राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास है जबकि अधिकतम तापमान 16-18 डिग्री तक पहुँच रहा है। कोहरे की वजह से हवाई और रेल यातायात पर भी असर पड़ा है कई उड़ानें देरी से चल रही हैं। इसके अलावा यूपी के लखनऊ वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने यूपी के लगभग 30 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है और 4-6 जनवरी तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है।

    पंजाब और हरियाणा

    पंजाब और हरियाणा में भी घना कोहरा और शीतलहर जारी है। यहां विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो गई है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में शीतलहर की स्थिति को 6 जनवरी तक जारी रहने का अनुमान जताया है। न्यूनतम तापमान इन क्षेत्रों में सामान्य से काफी नीचे जा चुका है और ठंड के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश

    जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। गुलमर्ग सोनमर्ग पहलगाम और अन्य ऊपरी इलाकों में नए साल के मौके पर ताजा बर्फबारी हुई है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। जम्मू-कश्मीर में ‘चिल्लई कलां’ के दौरान कड़ाके की ठंड ने तापमान को और नीचे गिरा दिया है लेकिन पर्यटक बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के मनाली रोहतांग पास लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बर्फबारी हो रही है जिससे ठंड का असर बढ़ा है लेकिन पर्यटकों की भीड़ बनी हुई है।

    कोहरा और ठंड की चुनौती

    उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से 30 से अधिक जिलों में घना कोहरा छाया रहेगा और शीतलहर के कारण सामान्य जनजीवन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। मौसम विभाग ने लखनऊ समेत कई जिलों में अगले तीन दिनों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। घना कोहरा और शीतलहर का प्रभाव कृषि ट्रांसपोर्ट और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ा है और इससे बचने के लिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।अगले कुछ दिनों तक मौसम में कोई खास राहत की उम्मीद नहीं जताई गई है इसलिए उत्तर भारत के लोग खासकर यात्री और स्कूलों के छात्र अपनी यात्रा और अन्य गतिविधियों को लेकर सतर्क रहें।

  • हिमाचल के ब्लास्ट मामले में पंजाब पुलिस को पाकिस्तान की ISI का हाथ होने की आशंका

    हिमाचल के ब्लास्ट मामले में पंजाब पुलिस को पाकिस्तान की ISI का हाथ होने की आशंका


    चंडीगढ़।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सोलन जिले (Solan district) में नलागढ़ पुलिस स्टेशन (Nalagarh Police Station) के पास नए साल के पहले दिन (1 जनवरी) सुबह करीब 9:40 बजे हुए जोरदार विस्फोट ने इलाके में दहशत फैला दी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पुलिस स्टेशन के स्टोर रूम की खिड़कियां टूट गईं, पास की इमारतों के शीशे चटक गए और करीब 2.5 फुट गहरा गड्ढा बन गया। आवाज 400-500 मीटर दूर तक सुनाई दी। अच्छी बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

    विस्फोट के एक दिन बाद गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक कथित प्रेस नोट सामने आया, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और पंजाब सॉवरेन्टी अलायंस (PSA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। प्रेस नोट में कहा गया कि यह आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमला था, जिसकी योजना और अंजाम देने का काम अमेरिका में रहने वाले गोपी नवांशहरीया और कबाल सिंह ने किया। दोनों संगठनों ने दावा किया कि हमला इसलिए किया गया क्योंकि- हिमाचल प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स बनाए जा रहे हैं और उन्हें पंजाब भेजा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन नहीं चेता तो अगली बार पुलिस वाहनों और मुख्यालयों में आईईडी प्लांट किए जाएंगे।

    हालांकि, पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन काल्पनिक दावों को ढोंग करार देते हुए खारिज कर दिया। अधिकारी ने कहा- ये तत्व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं। इसमें कोई विचारधारा नहीं है, सिर्फ पैसे के लिए युवाओं को भर्ती किया जाता है। पंजाब पुलिस का मानना है कि यह विस्फोट दिल्ली के उत्तर-पश्चिम और जम्मू-कश्मीर के दक्षिण में स्थित इस क्षेत्र में अशांति पैदा करने की पाकिस्तानी रणनीति का हिस्सा है।

    गोपी नवांशहरीया नवंबर 2024 से पंजाब में पुलिस ठिकानों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है। BKI और PSA पहले भी पंजाब में हुए इसी तरह के विस्फोटों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं, जो ISI के निर्देश पर किए गए थे। हिमाचल पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फोरेंसिक टीम ने मौके से सैंपल इकट्ठा किए हैं और सीसीटीवी फुटेज की जांच के लिए टीमें गठित की गई हैं।

    नलागढ़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 324(4) (उपद्रव), 125 (जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। हिमाचल पुलिस पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है। नलागढ़-बद्दी क्षेत्र फार्मास्यूटिकल हब है, जहां कई दवा फैक्टरियां हैं। पुलिस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आगे किसी घटना की आशंका से सतर्क है। जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।