Tag: Himachal

  • हिमाचल के सिंदूरी अनार दुबई पहुंचे, किसानों के लिए खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमाई बढ़ाने का नया रास्ता

    हिमाचल के सिंदूरी अनार दुबई पहुंचे, किसानों के लिए खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमाई बढ़ाने का नया रास्ता

    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपज पहुंचाने का एक नया अवसर सामने आया है। राज्य के कुल्लू में पैदा होने वाले सिंदूरी अनारों की 1.3 मीट्रिक टन खेप सफलतापूर्वक दुबई भेजी गई है। इस निर्यात से भारतीय कृषि उत्पादों को विदेशी बाजारों में पहचान दिलाने और स्थानीय किसानों को व्यापक बाजार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को इस उपलब्धि की जानकारी दी।

    इस खेप का निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कृषि उपज को वैश्विक खरीदारों तक पहुंचाना है। विदेशों में भारतीय फलों की मांग और बाजार तक सीधी पहुंच बढ़ने से किसानों को अपनी उपज के लिए नए खरीदार मिल सकते हैं। हालांकि, किसानों की आय पर इसका वास्तविक प्रभाव निर्यात की निरंतरता, बाजार की मांग, कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

    कुल्लू के सिंदूरी अनारों का दुबई पहुंचना हिमाचल प्रदेश की कृषि उपज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। विदेशी बाजार में उत्पाद पहुंचाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और समय पर आपूर्ति जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होता है। यदि ऐसे निर्यात नियमित रूप से आगे बढ़ते हैं, तो स्थानीय उत्पादकों और उनसे जुड़े कारोबारियों को अपने व्यापार का विस्तार करने का अवसर मिल सकता है।

    कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी महीने की शुरुआत में एपीडा ने हरियाणा के सोनीपत से कनाडा के लिए 24 मीट्रिक टन जमे हुए खाद्य उत्पादों की खेप भेजने में सहायता की थी। इस खेप में हरी मटर, मिश्रित सब्जियां, मटर और गाजर, स्वीट कॉर्न तथा समोसे जैसे उत्पाद शामिल थे। यह निर्यात किसान उत्पादक संगठनों के नेतृत्व में किया गया था। निर्यात करने वाली इकाई को एपीडा की वित्तीय सहायता योजना से भी मदद मिली।

    इन पहलों के जरिए कृषि और खाद्य उत्पादों के कारोबार से जुड़े छोटे उत्पादकों तथा संगठनों को विदेशी बाजारों तक पहुंचने में सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है। किसान उत्पादक संगठन सामूहिक रूप से उपज जुटाने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और बड़े खरीदारों की जरूरतों के अनुसार आपूर्ति करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वित्तीय सहायता और निर्यात संबंधी मार्गदर्शन से ऐसी इकाइयों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भागीदारी आसान हो सकती है।

    इस बीच, मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए के लाभों को कारोबारियों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। गांधीनगर में हुई राज्यस्तरीय कार्यशाला में 200 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें राज्य सरकार के अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधि और निर्यातक शामिल थे। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को मुक्त व्यापार समझौतों के तहत उपलब्ध अवसरों की जानकारी देना था।

    पीयूष गोयल ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय कारोबारियों और निर्यातकों की भागीदारी बढ़ाने से एफटीए का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे भारत के कुल निर्यात में गुजरात की हिस्सेदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

    मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में हुए मुक्त व्यापार समझौतों ने भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोले हैं। सरकार का जोर इन समझौतों का लाभ किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचाने पर है, ताकि देश में बने उत्पादों को वैश्विक बाजारों में अधिक अवसर मिल सकें।

    गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की ओर से स्थानीय कारोबारियों को नए निर्यात बाजार तलाशने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयासों की भी सराहना की गई। केंद्र सरकार के वाणिज्य विभाग की योजना राज्यों के साथ मिलकर ऐसी और पहल आयोजित करने की है। इससे राज्यों को अपनी विशिष्ट निर्यात क्षमता पहचानने, मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने और देश के निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी

    देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देशभर में मौसम प्रणालियों (Weather systems) की सक्रियता के चलते उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम हिस्सों में 11 सितंबर तक तेज बारिश (Heavy rain), आंधी-तूफान की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली भी गिर सकती है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड (Uttarakhand) के आठ और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के एक जिले में अगले 24 घंटे के दौरान अचानक बाढ़ (Flash flood) का खतरा है। बिहार में प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से बाढ़ का कहर बरकरार है और 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई है।


    आईएमडी की बुलेटिन में क्या?

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 6 सितंबर सुबह 11:30 बजे तक अचानक बाढ़ आ सकती है। पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 8 सितंबर तक व्यापक वर्षा के आसार हैं।

    एमपी में बारिश का कहर जारी: आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    मध्यप्रदेश में मानसून अब बाढ़ और उफनती नदियों वाला दौर दिखा रहा है। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद अब पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी मानसून सक्रिय है। नर्मदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत के साथ बरगी बांध के गेट भी खोले गए हैं। नदी-नालों के उफान और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। मौसम केंद्र ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।


    राजस्थान में मानसून फिर एक्टिव, 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शनिवार को जयपुर समेत कई जिलों में दिनभर बारिश हुई। आज भी 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। लगातार बारिश के कारण कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा में कई जगह नदी की रपट डूब गईं। बारिश के कारण पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में दिन के तापमान में 6 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। इससे दिन में भी मौसम ठंडा हो गया। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर 8 सितंबर तक जारी रह सकता है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।


    हिमाचल में परियोजना को नुकसान

    हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के काशापाट पंचायत के कंडे में शुक्रवार रात बादल फटने से नोगली खड्ड में बाढ़ आ गई। इससे सेरीपुल स्थित गंगाधारी जलविद्युत परियोजना के भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा लेकर आया, जो प्रोजेक्ट की संरचनाओं के आसपास जमा हो गया है। प्रदेश में 85 सड़कें, 51 पेयजल योजनाएं और 29 बिजली ट्रांसफार्मर भी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में शनिवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। गुमरी-जोजिला मार्ग के ऊंचे पहाड़ों, गुलमर्ग के ऊंचे इलाकों और पीर पंजाल रेंज में ऊंचे इलाके बर्फ से चमक उठे। ताटाकूटी पीक की चोटी और ऊपरी ढलानों पर भी हल्की बर्फबारी दर्ज की गई।


    मध्य और पूर्वी भारत में बढ़ा खतरा

    आईएमडी के अनुसार, मध्य भारत में पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6-7 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 5-8 सितंबर, छत्तीसगढ़ में 8-11 सितंबर और विदर्भ में 11 सितंबर को व्यापक वर्षा का अनुमान है। पूर्वी भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 11 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। बिहार में 7 से 11 सितंबर तक भारी बारिश होगी।


    क्यों हो रही है इतनी बारिश?

    मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार सुबह कमजोर होकर उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश व दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित हो गया है, जिसके अगले दो दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही निचले क्षोभमंडल में दक्षिणी हरियाणा से दक्षिणी असम तक और दक्षिणी गुजरात से उत्तरी बांग्लादेश तक दो अलग-अलग निम्न दबाव के क्षेत्र सक्रिय हैं।

  • हिमाचल के चम्बा में मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही… घर में घुसा मलबा…कई वाहन दबे

    हिमाचल के चम्बा में मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही… घर में घुसा मलबा…कई वाहन दबे


    चंबा।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के चंबा जिले (Chamba district) में सोमवार रात मूसलाधार बारिश (Torrential Rain) ने भारी तबाही मचाई। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया। इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद, राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, जिले के कई इलाकों में आवासीय घरों, व्यावसायिक दुकानों और निजी वाहनों को भारी क्षति पहुंची है।

    जिले के उदयपुर, घोलटी, नवोदय मार्ग और भरियाड जैसे क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही। इन इलाकों में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे बड़ी मात्रा में मलबा सड़कों और आवासीय क्षेत्रों में आ गया। मलबे की चपेट में आकर करीब 12 वाहन दब गए।

    इन दबे हुए वाहनों में निजी कारें, मालवाहक ट्रक, दोपहिया बाइक और स्कूटियां शामिल थीं। भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तडोली नाला भी बारिश के कारण उफान पर आ गया। नाले का बहाव इतना तेज था कि वह अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी का मलबा बहाकर लाया।


    संपत्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान

    तडोली नाले के तेज बहाव में आया मलबा और पत्थर एक स्टोर में घुस गए। इससे वह स्टोर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अतिरिक्त, आसपास के कई घरों में भी मलबा घुस गया, जिससे निवासियों को काफी परेशानी हुई। सुल्तानपुर नाले ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

    इस नाले के तेज बहाव में भी कई बाइक और स्कूटियां बहकर क्षतिग्रस्त हो गईं। भरियाड गांव में पानी का रुख अचानक बदल गया, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई। मलबा सीधे कई घरों तक पहुंच गया, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।


    जनजीवन पर गहरा असर

    बारिश और नाले के उफान से उत्पन्न खतरे को देखते हुए कई परिवारों ने अपने मकान खाली कर दिए। इन प्रभावित परिवारों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रातों-रात पड़ोसियों के घरों में शरण ली। यह विस्थापन अचानक आई आपदा के कारण हुआ।


    चमोली

    घरों में मलबा घुसने से लोगों की दैनिक दिनचर्या बाधित हुई। संपत्ति के नुकसान से आर्थिक चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। स्थानीय निवासियों को अब अपने घरों की मरम्मत और सफाई का सामना करना पड़ेगा।

  • हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा

    हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा


    शिमला।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मौसम ने अचानक करवट ले ली है. एक तरफ अटल टनल (Atal Tunnel) के पास हिमस्खलन (एवलांच) (Avalanche) का खतरा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी-बारिश (Hailstorm and Heavy storm – Rain) को लेकर ओरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है. लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

    प्रशासन के मुताबिक, टनल के पास बाईं ओर की पहाड़ियां, आसपास का इलाका, चंद्रा ब्रिज और उससे जुड़ा क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गया है. हाल के दिनों में यहां पर्यटकों की भीड़ और अनधिकृत गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।

    जिला प्रशासन ने साफ आदेश दिया है कि इन संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. साथ ही ठेले-फेरी, अस्थायी दुकानें, फोटो प्वाइंट और किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि आपात स्थिति में राहत और ट्रैफिक प्रबंधन में कोई बाधा न आए।

    इधर शिमला समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार को ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को बिगाड़ दिया. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ओरेन्ज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए 3 और 4 अप्रैल को येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं 5 और 6 अप्रैल को भी कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. 7 अप्रैल को राज्य के ज्यादातर मैदानी जिलों में भी ऐसा ही मौसम बना रह सकता है.

    मौसम विभाग के अनुसार 3 से 6 अप्रैल के बीच मनाली, कुफरी, नारकंडा, सोलंग वैली और सिस्सू जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इसके पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर बताया गया है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी और जनजीवन प्रभावित हो सकता है.