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  • 11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी संग गाया पहला गीत फिर नाम बदलते ही बॉलीवुड पर छा गईं पूर्णिमा

    11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी संग गाया पहला गीत फिर नाम बदलते ही बॉलीवुड पर छा गईं पूर्णिमा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसी आवाजें उभरीं जिन्होंने फिल्मों को नई पहचान दी लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी रहे जिनकी कहानी उतनी चर्चा में नहीं आई जितनी उनकी गायकी। ऐसी ही एक मशहूर गायिका हैं सुषमा श्रेष्ठा जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी मधुर आवाज से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया और बाद में पूर्णिमा नाम से बॉलीवुड की सफल पार्श्व गायिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सफर संघर्ष प्रतिभा और सफलता का शानदार उदाहरण माना जाता है।

    नेपाल में जन्मी सुषमा श्रेष्ठा को बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि थी। उनके परिवार के परिचितों के माध्यम से उनकी मुलाकात फिल्म संगीत जगत से हुई और उनकी प्रतिभा ने संगीतकारों को प्रभावित कर दिया। महज 11 वर्ष की उम्र में उन्हें हिंदी फिल्म अंदाज के लिए मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर के साथ गाने का अवसर मिला। यह उपलब्धि किसी भी बाल कलाकार के लिए बेहद बड़ी मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने लगातार कई ऐसे गीत गाए जो आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।

    बचपन में उन्होंने तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई क्या हुआ तेरा वादा तेरी है जमीन तेरा आसमान और एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल जैसे कई यादगार गीतों में अपनी आवाज दी। उनकी मासूम आवाज ने बच्चों पर आधारित गीतों को एक नई पहचान दी। उस दौर में जब अधिकतर बाल गीत बड़े गायक अपनी आवाज बदलकर गाते थे तब सुषमा श्रेष्ठा ने बाल गायिका के रूप में अलग स्थान बनाया।

    समय के साथ उन्होंने विवाह किया और कुछ वर्षों तक संगीत जगत से दूरी बना ली। इसके बाद 90 के दशक में जब उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी की तो संगीत कंपनियों की सलाह पर उन्होंने अपना नाम बदलकर पूर्णिमा रख लिया। नाम बदलने के साथ उनकी नई पारी भी शानदार साबित हुई। उनकी आवाज ने उस दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को नई पहचान दिलाई और वे बॉलीवुड की व्यस्त प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हो गईं।

    पूर्णिमा ने जूही चावला के लिए तू तू तू तारा और माधुरी दीक्षित पर फिल्माए गए लोकप्रिय गीत चने के खेत में जैसे सुपरहिट गानों को अपनी आवाज दी। इसके बाद करिश्मा कपूर की फिल्मों में उनकी आवाज सबसे ज्यादा पसंद की गई। उन्होंने ऊंची है बिल्डिंग सोना कितना सोना है उई अम्मा उई अम्मा मैं पैदल से जा रहा था और मैं हूं बीवी नंबर वन जैसे कई लोकप्रिय गीत गाए जो आज भी लोगों की जुबान पर बने हुए हैं।

    पूर्णिमा की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आवाज की बहुमुखी शैली रही। वह रोमांटिक गीतों से लेकर डांस नंबर और बच्चों के गीतों तक हर शैली में सहज नजर आईं। यही वजह रही कि उन्होंने अलग अलग दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को अपनी आवाज देकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी गायकी में मिठास ऊर्जा और भावनाओं का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।

    आज भी जब 70 और 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों की चर्चा होती है तब पूर्णिमा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची प्रतिभा समय और परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानती। एक बाल गायिका से लेकर सफल पार्श्व गायिका बनने तक का उनका सफर भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में प्रेरणादायक अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

    रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे।

    सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

    सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

    बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।

    धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था।

    धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया।

    24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।

    धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।

  • प्रिया राजवंश: सिर्फ 7 फिल्मों में रातोंरात सुपरस्टार, चेतन आनंद संग लिव-इन रिलेशनशिप और रहस्यमयी मौत

    प्रिया राजवंश: सिर्फ 7 फिल्मों में रातोंरात सुपरस्टार, चेतन आनंद संग लिव-इन रिलेशनशिप और रहस्यमयी मौत

    नई दिल्ली:    हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो काम बेहद कम करने के बावजूद अपने अभिनय और व्यक्तित्व से हमेशा के लिए दर्शकों के दिलों में जगह बना लेते हैं. ऐसे ही कलाकार थीं दिवंगत अभिनेत्री प्रिया राजवंश जिन्होंने अपने करियर में केवल सात फिल्में कीं, लेकिन हर फिल्म में अपने किरदार की सादगी, गंभीरता और प्रभाव से एक अमिट छाप छोड़ी. 27 मार्च 2000 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका अभिनय और जीवन आज भी फिल्मों के चाहने वालों के बीच जीवित है.

    प्रिया राजवंश का असली नाम वीरा सुंदर सिंह था. उनका जन्म 30 दिसंबर 1936 को शिमला में हुआ था. उनके पिता सरकारी अधिकारी थे और परिवार का फिल्मों से कोई संबंध नहीं था. प्रिया ने अपनी पढ़ाई शिमला में पूरी की और इसके बाद अभिनय की ट्रेनिंग लेने के लिए लंदन चली गईं. लंदन में एक फोटोग्राफर ने उनकी कुछ तस्वीरें खींचीं और इन्हीं तस्वीरों ने उनकी किस्मत बदल दी. मशहूर निर्देशक चेतन आनंद ने उनकी तस्वीरें देखकर उन्हें अपनी फिल्म ‘हकीकत’ में काम करने का मौका दिया. यह फिल्म रिलीज होते ही हिट साबित हुई और प्रिया रातों-रात स्टार बन गईं.

    प्रिया ने अपने करियर में केवल सात फिल्में कीं, लेकिन हर फिल्म में उनका किरदार दर्शकों के दिल में घर कर गया. उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं ‘हीर रांझा’, ‘हंसते जख्म’, ‘हिंदुस्तान की कसम’, ‘कुदरत’ और ‘हाथों की लकीरें’. इन फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग रोल निभाए और हर किरदार में अपने अभिनय का पूरा जादू दिखाया. यही वजह थी कि उनके कम फिल्मों के बावजूद उनका नाम भारतीय सिनेमा में अमर हो गया.

    प्रिया के करियर का एक अनोखा पहलू यह भी रहा कि उन्होंने ज्यादातर फिल्में चेतन आनंद के निर्देशन में कीं. इस दौरान उनके और चेतन आनंद के बीच करीबी बढ़ी और यह रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में बदल गया. दोनों ने कभी शादी नहीं की, लेकिन लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे. हालांकि, इस रिश्ते का असर उनके करियर पर पड़ा क्योंकि उन्होंने अन्य फिल्ममेकरों के साथ काम नहीं किया और उनके फिल्मी सफर को सीमित कर दिया.

    1997 में चेतन आनंद के निधन के बाद प्रिया पूरी तरह अकेली पड़ गईं और उन्होंने खुद को एक्टिंग की दुनिया से अलग कर लिया. लेकिन 27 मार्च 2000 को प्रिया राजवंश अपने ही घर में मृत पाई गईं. जांच में यह सामने आया कि उनकी हत्या की गई थी. पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन सबूतों की कमी के कारण मामला कभी साबित नहीं हो सका. इस तरह उनकी मौत आज भी बॉलीवुड के इतिहास में एक रहस्यमयी और दुखद घटना के रूप में दर्ज है.

    प्रिया राजवंश की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी. उनके अभिनय, उनके रिश्ते और उनका व्यक्तित्व आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है. उनकी फिल्मों की सादगी और उनकी अदाकारी ने उन्हें केवल एक अभिनेत्री ही नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की यादगार हस्ती बना दिया. भले ही उन्होंने कम फिल्में की हों, लेकिन प्रिया राजवंश का नाम और उनका योगदान हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिट रहेगा.

  • सलमान खान की आंखों में आंसूधर्मेंद्र को याद कर बोले- 'हमने सबसे कमाल का इंसान खो दिया'

    सलमान खान की आंखों में आंसूधर्मेंद्र को याद कर बोले- 'हमने सबसे कमाल का इंसान खो दिया'



    नई दिल्‍ली ।
    आज दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र का 90वां जन्मदिन हैऔर इस खास मौके पर उनकी यादों को संजीवनी देने वाले उनके चाहने वाले और करीबी लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। धर्मेंद्रजो भारतीय सिनेमा के एक महानायक के तौर पर जाने जाते हैंअब हमारे बीच नहीं हैंलेकिन उनकी फिल्मी धरोहर और व्यक्तित्व हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। इस दिन धर्मेंद्र की याद में उनके परिवार और फैंस के साथ-साथ बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान भी भावुक हो गए और अपनी भावनाओं का इजहार किया।

    धर्मेंद्र के निधन ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि उनके करीबी दोस्तों और सिनेमा जगत के कई लोगों को गहरे सदमे में डाला। सलमान खानजो धर्मेंद्र के बहुत करीबी थेउनके जाने को लेकर कई बार अपने दुख का इजहार कर चुके हैं। लेकिन हाल ही में बिग बॉस 19 के ग्रैंड फिनाले के दौरान सलमान ने एक बार फिर धर्मेंद्र को याद करते हुए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। मंच पर धर्मेंद्र का नाम लेते ही सलमान इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों में आंसू आ गए और वह सिसक पड़े। यह पल दर्शकों के लिए भी बहुत भावनात्मक थाक्योंकि सलमान ने खुलकर कहा कि “हमने सबसे कमाल का इंसान खो दिया है।

    सलमान ने धर्मेंद्र को एक बेहतरीन इंसान और एक प्रेरणा माना। उनके अनुसारधर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं थेबल्कि वह एक शानदार इंसान थेजिन्होंने अपने जीवन में हमेशा अपने काम और रिश्तों को ईमानदारी और सच्चाई से निभाया। सलमान ने बताया कि धर्मेंद्र का जो योगदान सिनेमा जगत में रहावह अनमोल है और उनकी यादें हमेशा बनी रहेंगी।

    सलमान ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र के साथ बिताए गए समय को वह हमेशा याद रखेंगे और उनका मार्गदर्शन उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। धर्मेंद्र की हंसीउनकी सरलता और उनका सहज स्वभाव हमेशा सलमान के दिल में रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में धर्मेंद्र की जो जगह हैवह कोई नहीं ले सकताऔर उनकी कमी सिनेमा की दुनिया में हमेशा खलेगी। धर्मेंद्र के निधन के बाद सलमान खान ने उनके योगदान को कई बार सराहा है और उन्हें एक आदर्श इंसान बताया।

    सलमान का यह इमोशनल पल यह दर्शाता है कि वह केवल अपने परिवार और फैंस के लिए नहींबल्कि फिल्म इंडस्ट्री में अपने गुरु की तरह धर्मेंद्र को मानते थे। धर्मेंद्र के जाने से बॉलीवुड ने एक महान अभिनेता और एक सच्चे इंसान को खो दिया हैलेकिन उनके योगदान और उनकी यादें हमेशा उनके फैंस और चाहने वालों के दिलों में जीवित रहेंगी। धर्मेंद्र के प्रति सलमान का यह श्रद्धांजलि भावुक और दिल छूने वाला थाऔर यह दिखाता है कि बॉलीवुड में रिश्तों की असल अहमियत क्या होती है।