Tag: Hindu fasting rules

  • वैभव लक्ष्मी व्रत कथा: जानें शुक्रवार के दिन क्यों माना जाता है खास

    वैभव लक्ष्मी व्रत कथा: जानें शुक्रवार के दिन क्यों माना जाता है खास


    नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने का भी विधान है, जिसे करने से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव और शांति का संचार होता है। मान्यता है कि यह व्रत न केवल आर्थिक समस्याओं को दूर करता है, बल्कि दांपत्य जीवन में भी खुशहाली लाता है।

    इस व्रत की शुरुआत संकल्प लेकर की जाती है, जिसमें श्रद्धालु 11, 21 या अपनी इच्छा अनुसार जितने शुक्रवार तक व्रत रखने का निर्णय लेते हैं। हर शुक्रवार को पूरे नियम और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। व्रत के दौरान भक्त मां लक्ष्मी को लाल फूल, मिठाई और विशेष रूप से खीर का भोग अर्पित करते हैं।

    व्रत कथा के अनुसार, एक समय एक शहर में लोग भक्ति और धर्म से दूर होकर भोग-विलास में डूब गए थे। उसी शहर में शीला नाम की एक धार्मिक और संतोषी स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। समय के साथ उसका पति बुरी संगत में पड़कर अपना सारा धन गंवा बैठा और जीवन संघर्षों से भर गया।

    शीला ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद भगवान पर आस्था बनाए रखी। एक दिन उसके घर एक दिव्य तेज से युक्त वृद्ध महिला आई, जिन्होंने शीला को मां लक्ष्मी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह व्रत सरल है और श्रद्धा से करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    उनके मार्गदर्शन पर शीला ने पूरे विश्वास के साथ यह व्रत प्रारंभ किया। हर शुक्रवार वह पूरी विधि से पूजा करती और कथा सुनती। धीरे-धीरे उसके जीवन में परिवर्तन आने लगा। उसके पति का स्वभाव सुधरने लगा और वह मेहनत करके व्यापार करने लगा। कुछ समय बाद घर में फिर से धन-समृद्धि लौट आई और सुख-शांति स्थापित हो गई।

    कथा के अनुसार, व्रत के अंतिम चरण में उद्यापन किया जाता है, जिसमें सात सुहागिन महिलाओं को पूजा सामग्री या व्रत कथा की पुस्तक भेंट की जाती है। यह प्रक्रिया व्रत को पूर्ण करने के लिए आवश्यक मानी जाती है।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मां लक्ष्मी की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है। विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने से आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।

    आज के समय में भी हजारों श्रद्धालु इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा के साथ करते हैं और इसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि का माध्यम मानते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती और मां लक्ष्मी अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखती हैं।

  • शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार व्रत में इन नियमों का पालन जरूरी

    शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार व्रत में इन नियमों का पालन जरूरी


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है, जो व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनिवार व्रत का उद्देश्य जीवन में शांति, स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करना होता है। ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती का प्रभाव होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

    शनिवार व्रत की विधि और नियम

    शनिवार व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इस दिन काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा में शनिदेव को काले तिल, काली उड़द दाल, सरसों का तेल और काले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कुछ भक्त पीपल वृक्ष की पूजा भी करते हैं, जिसमें दीपक जलाकर धागा बांधने की परंपरा है। व्रत के दौरान कई लोग दिनभर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

    शनिवार व्रत के प्रमुख लाभ
    शनिवार व्रत के कई आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ बताए गए हैं। यह व्रत शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। इस व्रत से व्यक्ति में अनुशासन, संयम और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है। मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार और कार्यों में सफलता मिलने की भी मान्यता है।

    दान और सेवा का विशेष महत्व
    शनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन काले तिल, उड़द दाल, तेल, लोहे की वस्तुएं और काले कपड़ों का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा जरूरतमंदों की सेवा और गरीबों को भोजन कराना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

    हनुमान जी और पीपल पूजा का महत्व
    मान्यता है कि शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा भी अत्यंत लाभकारी होती है। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना शनि दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है।

    शनिवार व्रत का आध्यात्मिक महत्व
    शनिवार व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का माध्यम माना जाता है। यह व्रत व्यक्ति को आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

  • साल की आखिरी एकादशी पर भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का दान, नहीं तो 2026 में भी रहेंगे परेशान

    साल की आखिरी एकादशी पर भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का दान, नहीं तो 2026 में भी रहेंगे परेशान

    नई दिल्ली/सनातन धर्म के लोगों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी का खास महत्व है, जिसका व्रत हर साल पौष माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. पंचांग के मुताबिक, इस बार 30 दिसंबर 2025 को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य मिलता है. इसके अलावा जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.पूजा-पाठ के अलावा पौष पुत्रदा एकादशी पर दान करना भी शुभ होता है. हालांकि, कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनका दान एकादशी पर करना अशुभ होता है. आज हम आपको शास्त्रों में बताई गई उन 5 चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करने से व्यक्ति साल 2026 में भी परेशान रह सकता है.
    लोहा
    लोहे से बनी किसी भी वस्तु का दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करना अशुभ होता है. इससे न सिर्फ आपको पाप लगेगा, बल्कि पूजा का फल भी नहीं मिलेगा.
    नमक
    पौष पुत्रदा एकादशी पर नमक का दान करने से घर में अशांति फैलती है. साथ ही व्रत खंडित हो जाता है और पाप लगता है.ये भी पढ़ें- Mahayuti 2025 Rashifal: 2026 के शुरू से पहले ये 3 राशियां होंगी मालामाल; बनेगी मंगल, सूर्य, शुक्र और बुध की महायुति

    नुकीली चीजें

    यदि कोई व्यक्ति पौष पुत्रदा एकादशी पर किसी भी तरह की नुकीली चीज का दान करता है तो उससे भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं. इसके अलावा घर में लड़ाई-झगड़े होंगे और सेहत पर भी नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.

    तेल

    पौष पुत्रदा एकादशी पर तेल का दान करने से ग्रह दोष लगता है. साथ ही घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. इसके अलावा धन हानि भी हो सकती है.

    अनाज

    गेहूं, चावल, मक्का, राई, जौ, जई, बाजरा और बीज आदि अनाज का दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करना अशुभ होता है. इससे न सिर्फ व्रती को पाप लगता है बल्कि घरवालों को भी विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है.डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.