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  • 13 जून 2026 का राशिफल: ग्रहों के महासंयोग से कई राशियों की चमकेगी किस्मत, कुछ को रहना होगा सतर्क

    13 जून 2026 का राशिफल: ग्रहों के महासंयोग से कई राशियों की चमकेगी किस्मत, कुछ को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार 13 जून 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का संयोग बन रहा है, वहीं पूरे दिन कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। चंद्रमा सुबह 09:25 तक वृषभ राशि में रहकर बाद में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ग्रहों की इस स्थिति से वाशि योग, सुनफा योग, शंख योग, सुकर्मा योग और सर्वाअमृत योग जैसे शक्तिशाली संयोग बन रहे हैं, जो कई राशियों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    मेष से कन्या तक का प्रभाव
    मेष राशि के जातकों के लिए यह दिन नई शुरुआत और आर्थिक लाभ का संकेत दे रहा है। व्यापार में विस्तार और करियर में सहयोग मिलने की संभावना है। वृषभ राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए आय स्रोत बन सकते हैं। मिथुन राशि के लिए दिन कुछ उतार-चढ़ाव भरा रहेगा, खर्च और तनाव बढ़ सकता है। कर्क राशि वालों को कार्यस्थल पर बड़ी जिम्मेदारी और सफलता मिलने के योग हैं। सिंह राशि के लिए नौकरी और व्यापार में बड़ी उपलब्धि के संकेत मिल रहे हैं। कन्या राशि के जातकों को करियर में तरक्की और प्रेम जीवन में सकारात्मकता मिलेगी।

    तुला से वृश्चिक तक का हाल
    तुला राशि के लिए यह दिन चुनौतीपूर्ण रह सकता है, खासकर करियर और खर्च को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय बेहद शुभ है, पार्टनरशिप और बिजनेस में बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।

    धनु से मीन तक की स्थिति
    धनु राशि के लिए दिन सामान्य रहेगा लेकिन भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। मकर राशि के जातकों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं लेकिन पारिवारिक तनाव भी संभव है। कुंभ राशि के लिए यह दिन कुछ कठिनाइयों भरा रहेगा, निवेश और विवादों से बचना चाहिए। मीन राशि के जातकों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ संकेत दे रहा है, करियर और व्यापार में बड़ी सफलता और लाभ मिलने की संभावना है।

    कुल मिलाकर 13 जून 2026 का दिन ग्रहों के विशेष योगों से प्रभावित रहेगा। जहां कुछ राशियों के लिए यह दिन भाग्यवृद्धि और आर्थिक उन्नति लेकर आएगा, वहीं कुछ राशियों को सावधानी और संयम से काम लेना होगा।

  • कालाष्टमी पर कालभैरव पूजा से मिलती है सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति..

    कालाष्टमी पर कालभैरव पूजा से मिलती है सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति..


    नई दिल्ली:सनातन परंपरा में तिथि, नक्षत्र और योग के आधार पर दिनचर्या और धार्मिक अनुष्ठानों का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली मासिक कालाष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस बार यह पावन तिथि शुक्रवार, 10 अप्रैल को पड़ रही है, जिसे कालभैरव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त श्रद्धा और आस्था के साथ उपवास रखकर भगवान कालभैरव की पूजा करते हैं और उनसे सुरक्षा, सुख तथा संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।

    कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और यह हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप कालभैरव की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त इस दिन विशेष रूप से रात्रि पूजा और भैरव स्तुति का पाठ करते हैं, जिससे उन्हें आध्यात्मिक शांति और संरक्षण की अनुभूति होती है।

    इस दिन के पंचांग अनुसार सूर्योदय सुबह 6 बजकर 1 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर रहेगा। अष्टमी तिथि रात 11 बजकर 15 मिनट तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। हालांकि उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन अष्टमी का ही मान रहेगा, जिससे दिनभर पूजा और व्रत का विशेष महत्व बना रहेगा। नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। शिव योग शाम 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए शुभ संकेत देता है।

    शुभ मुहूर्तों की दृष्टि से यह दिन अत्यंत अनुकूल माना जा रहा है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ समय है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जिसे संध्या पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। अमृत काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त है।

    वहीं, इस दिन कुछ अशुभ समय का ध्यान रखना भी आवश्यक है। राहुकाल सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्यों से बचना चाहिए। यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, जबकि गुलिक काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट और दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही वर्ज्य समय रात 8 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसे किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए टालना उचित माना जाता है।

  • दर्श अमावस्या पर बन रहा खास संयोग विजय मुहूर्त और अमृत काल में करें पूजा मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

    दर्श अमावस्या पर बन रहा खास संयोग विजय मुहूर्त और अमृत काल में करें पूजा मिलेगा पितरों का आशीर्वाद


    नई दिल्ली, 18 मार्च का दिन हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है क्योंकि इस दिन दर्श अमावस्या मनाई जा रही है हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की अमावस्या को दर्श अमावस्या कहा जाता है इस दिन चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य होता है और इसे आत्मचिंतन तथा पितरों के स्मरण का समय माना जाता है

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों के तर्पण श्राद्ध और जल अर्पण का विशेष महत्व होता है ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं साथ ही दान पुण्य और स्नान करने से पितृ दोष दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

    पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 31 मिनट पर रहेगा कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगी जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी नक्षत्र पूर्व भाद्रपद सुबह 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा इसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रभावी होगा शुभ योग सुबह 4 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगा जबकि करण शकुनि सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगा

    शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा जो ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा जिसमें महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की जा सकती है गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जो पूजा पाठ के लिए उपयुक्त है वहीं अमृत काल रात 9 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा जो अत्यंत शुभ फलदायी समय माना गया है निशीथ मुहूर्त देर रात 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा हालांकि इस दिन अभिजित मुहूर्त नहीं है

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 2 बजे तक रहेगा यमगंड सुबह 7 बजकर 58 मिनट से 9 बजकर 28 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा इसके अलावा दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा इन समयों में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है

    इस दिन एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पूरा दिन पंचक प्रभावी रहेगा पंचक को ज्योतिष में संवेदनशील समय माना जाता है जिसमें कुछ विशेष कार्यों को टालना उचित माना जाता है हालांकि पूजा पाठ दान और पितृ तर्पण जैसे धार्मिक कार्य इस दौरान किए जा सकते हैं

    18 मार्च की दर्श अमावस्या आध्यात्मिक साधना पितृ तर्पण और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है इस दिन सही मुहूर्त में किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख शांति और समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं

  • चैत्र नवरात्र 2026: पहले तीन दिन रहेगा पंचक का साया, जानिए घटस्थापना पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव

    चैत्र नवरात्र 2026: पहले तीन दिन रहेगा पंचक का साया, जानिए घटस्थापना पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व वाला पर्व माना जाता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित होता है। हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इसकी शुरुआत होती है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। नवरात्र के पहले दिन होने वाली सबसे महत्वपूर्ण रस्म कलश स्थापना या घटस्थापना होती है जिसे देवी शक्ति के घर में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का वास होता है।

    हालांकि इस वर्ष नवरात्र की शुरुआत के साथ एक विशेष ज्योतिषीय स्थिति भी बन रही है। दरअसल नवरात्र के पहले दिन से पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार पंचक 16 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 21 मार्च 2026 तक रहेगा। इस तरह नवरात्र के शुरुआती तीन दिन पंचक की अवधि में ही पड़ेंगे। पंचक को ज्योतिष शास्त्र में ऐसा समय माना जाता है जब कुछ विशेष प्रकार के शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान वाहन खरीदना नया व्यवसाय शुरू करना गृह प्रवेश करना या विवाह जैसे बड़े और मांगलिक कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या उनका अपेक्षित फल नहीं मिल पाता। इसी कारण लोग पंचक के दौरान बड़े आर्थिक या सामाजिक निर्णय लेने में सावधानी बरतते हैं।

    हालांकि धार्मिक और नियत तिथि वाले पर्व त्योहारों पर पंचक का प्रभाव नहीं माना जाता। इसी वजह से नवरात्र की घटस्थापना पर पंचक का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना करना पूरी तरह से शुभ और शास्त्रसम्मत है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा अर्चना व्रत और मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

    इस वर्ष नवरात्र के पहले तीन दिन पंचक में पड़ने के कारण श्रद्धालुओं को यह सलाह दी जा रही है कि धार्मिक कार्यों को छोड़कर अन्य मांगलिक गतिविधियों से परहेज करें। जैसे वाहन खरीदना नया व्यापार शुरू करना गृह प्रवेश विवाह या मुंडन जैसे संस्कार इन दिनों में टाल देना बेहतर माना जाता है।

    नवरात्र के नौ दिनों में भक्त माता दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं भजन कीर्तन करते हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और घरों तथा मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन करते हैं। श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से जीवन में मानसिक शांति सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।

    इस प्रकार पंचक के प्रभाव के बावजूद चैत्र नवरात्र की घटस्थापना और पूजा अर्चना पूरी तरह शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु इस पावन पर्व को पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाते हैं और मां दुर्गा से सुख समृद्धि तथा कल्याण की कामना करते हैं।

  • Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी साधक को कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और मानसिक बाधाओं पर विजय दिलाने वाली मानी गई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा के साथ उपासना करता है, उसे कार्यों में सिद्धि और अटके हुए कामों में सफलता प्राप्त होती है।

    विजया एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज में समुद्र तट पर पहुँचे और लंका पर चढ़ाई की चुनौती सामने थी, तब मुनि वकदालभ्य के निर्देश पर उन्होंने अपनी सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य प्रताप से ही उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय पाने में सफलता मिली। तभी से इसे ‘जीत’ का आशीर्वाद देने वाली एकादशी कहा जाता है।

    विजया एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि की प्रधानता के कारण व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

    एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे।

    एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे।

    व्रत की तारीख: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)।

    पूजा के विशेष मुहूर्त:

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक।

    अमृत काल (सर्वोत्तम): सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक।

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक।

    पारण का समय और नियम
    एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) शुभ समय और विधि के साथ किया जाए। विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को होगा।

    पारण समय: सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक।

    विशेष सावधानी: चूंकि हरि वासर सुबह 08:20 बजे समाप्त हो रहा है, इसलिए पारण के लिए सुबह 08:21 से 09:14 के बीच का समय सबसे उत्तम रहेगा।

    इस दिन साधक को पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।

    विजया एकादशी 2026 का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। यह व्रत शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। भगवान राम ने भी लंका विजय के लिए यह व्रत किया था। 14 फरवरी की सुबह 07:00 से 09:14 के बीच व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।

  • 19 January 2026 Panchang: गुप्त नवरात्रि की शुरुआत, सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग

    19 January 2026 Panchang: गुप्त नवरात्रि की शुरुआत, सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग


    नई दिल्ली। अगर आप अपने दिन की शुरुआत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करना चाहते हैं तो 19 जनवरी 2026 का पंचांग आपके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। सोमवार के दिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और इसी दिन से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो 27 जनवरी तक चलेगी।

    गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधना, तंत्र-मंत्र और देवी उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन मां दुर्गा की गुप्त रूप से आराधना की जाती है। साथ ही आज सोमवार व्रत रखा जाएगा जो भगवान शिव को समर्पित होता है। शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है।

    शुभ योग और ग्रह स्थिति
    19 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ, व्रत, जप-तप और निवेश के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
    इस दिन चंद्रमा मकर राशि में संचार करेगा और सूर्य भी मकर राशि में स्थित रहेगा, जिससे कार्यों में स्थिरता और अनुशासन का प्रभाव देखने को मिलेगा।

    शुभ काल Auspicious Timings
    ब्रह्म मुहूर्त: 05:10 AM – 05:58 AM

    अमृत काल: 02:09 AM – 03:50 AM

    अभिजीत मुहूर्त: 11:52 AM – 12:35 PM

    इन समयों में पूजा, ध्यान, मंत्र जाप और महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ माना जाता है।

    अशुभ काल Inauspicious Timings
    राहु काल: 08:09 AM – 09:30 AM

    यम गण्ड: 10:52 AM – 12:14 PM

    कुलिक काल: 01:35 PM – 02:57 PM

    दुर्मुहूर्त:

    12:35 PM – 01:19 PM

    02:46 PM – 03:29 PM

    वर्ज्यम्: 04:04 PM – 05:45 PM

    इन समयों में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

    सूर्य और चंद्रमा का समय
    सूर्योदय: 06:47 AM

    सूर्यास्त: 05:40 PM

    चन्द्रोदय: 07:06 AM

    चन्द्रास्त: 06:16 PM

    क्या करें इस दिन
    मां दुर्गा और भगवान शिव की पूजा करें

    गुप्त नवरात्रि के संकल्प लें

    मंत्र जाप, ध्यान और साधना के लिए दिन उत्तम

    नए कार्यों की योजना बनाना शुभ  इस प्रकार 19 जनवरी 2026 का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही मुहूर्त और पंचांग के अनुसार कार्य करने से दिन सफल और फलदायी बन सकता है।