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  • केवल एक फूल नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है मंत्र पुष्पांजलि, जानिए क्यों हर धार्मिक अनुष्ठान इसके बिना माना जाता है अधूरा

    केवल एक फूल नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है मंत्र पुष्पांजलि, जानिए क्यों हर धार्मिक अनुष्ठान इसके बिना माना जाता है अधूरा

    नई दिल्ली  : सनातन धर्म में जब कभी भी पूजा-पाठ, हवन या कोई बड़ा अनुष्ठान किया जाता है, तो उसकी समाप्ति पर पु्ष्पांजलि की जाती है. पूजन के बाद मंत्र पुष्पांजलि की परंपरा सदियों पुरानी है. कहा जाता है कि यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, जो आज के भौतिकवादी युग में भी जीवंत है. वैसे तो पूजा-पाठ करने वाला हर व्यक्ति ‘पुष्पांजलि’ इस शब्द से परिचित होता है, लेकिन कई बार लोग इसका महत्व और वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाते, जिसकी वजह से अनुष्ठान का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. ऐसे में आइए जानते हैं कि पूजा-पाठ या हवन इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुष्पांजलि क्यों की जाती है, इसका महत्व क्या है और इसके फायदे क्या हैं.

    क्या होती है मंत्र पुष्पांजलि?

    किसी भी पूजा-पाठ या हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति पर देवी-देवताओं के प्रति आदर प्रकट करने के लिए दोनों हाथों को जोड़कर उसमें फूल रखे जाते हैं. इसके बाद विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए उस फूल को देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, इसे ही पुष्पांजलि का जाता है. चूंकि यह प्रक्रिया विशेष मंत्र और फूल के साथ की जाती है, इसलिए इसे मंत्र पुष्पांजलि भी कहते हैं.

    क्या है मंत्र पुष्पांजलि का महत्व?

    शास्त्रों के अनुसार, मंत्र पुष्पांजलि देवी-देवताओं के प्रति भक्ति और निष्ठा को प्रकट करने के लिए की जाती है. कहा जाता है देवी-देवताओं को मंत्रों के साथ पुष्प अर्पित करने से मन रहता है और विचारों में शुद्धता आती है. ऐसा करने से आत्मिक शांति और संतोष मिलता है. पुराणों के मुताबिक, मंत्र पुष्पांजलि भगवान को धन्यवाद ज्ञापित करने और परिवार के सदस्यों की सुख-शांति के लिए की जाती है. मान्यतानुसार, मंत्र पुष्पांजलि करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.
    पुष्पांजलि मंत्र
    “ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन्
    ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा:”
    “ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने
    नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे
    स मस कामान् काम कामाय मह्यं
    कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय
    महाराजाय नम:”
    “ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं
    वैराज्यं पारमेष्ट्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं
    समन्तपर्यायीस्यात् सार्वभौमः सार्वायुषः आन्तादापरार्धात्
    पृथीव्यै समुद्रपर्यंताया एकराळ इति”

  • अप्रैल 2026 के व्रत त्योहारों की पूरी लिस्ट हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक जानें सभी तिथियां

    अप्रैल 2026 के व्रत त्योहारों की पूरी लिस्ट हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक जानें सभी तिथियां


    नई दिल्ली । मार्च माह के समापन के साथ ही अब अप्रैल 2026 की शुरुआत होने जा रही है जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस माह में जहां एक ओर चैत्र मास का समापन होगा वहीं दूसरी ओर पवित्र वैशाख माह का आरंभ भी होगा। इस पूरे महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं जिनका विशेष धार्मिक महत्व है और जिनका पालन करने से श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है।

    अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही 2 अप्रैल को हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा का व्रत मनाया जाएगा। यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसके अगले दिन 3 अप्रैल से वैशाख माह का आरंभ हो जाएगा जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

    महीने के प्रारंभिक दिनों में 5 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा जबकि 9 अप्रैल को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी और 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जाएगा। इसके बाद 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इसी दिन वल्लभाचार्य जयंती भी मनाई जाएगी।

    14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व मनाया जाएगा जबकि 15 अप्रैल को मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का संयोग रहेगा। 17 अप्रैल को वैशाख अमावस्या का दिन होगा जो पितरों के तर्पण और दान पुण्य के लिए विशेष माना जाता है।

    अप्रैल माह के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल अक्षय माना जाता है यानी कभी समाप्त नहीं होता। इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।

    इसके अलावा 21 अप्रैल को आदि शंकराचार्य जयंती और सूरदास जयंती मनाई जाएगी जबकि 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 24 अप्रैल को बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का संयोग रहेगा।

    महीने के अंतिम दिनों में 25 अप्रैल को सीता नवमी व्रत रखा जाएगा और 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का महत्व रहेगा। इसके बाद 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत और 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती मनाई जाएगी जो भगवान विष्णु के अवतार से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

    वैशाख माह का विशेष महत्व भी इस पूरे महीने को और अधिक पावन बनाता है। इस दौरान गंगा स्नान दान पुण्य और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अक्षय होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है।

    इस प्रकार अप्रैल 2026 का महीना आस्था भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है जिसमें अनेक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेंगे।