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  • भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण

    भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण


    बड़वानी।
    धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाईकोर्ट द्वारा आए फैसले के बाद बड़वानी शहर सहित पूरे जिले में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। फैसले में भोजशाला को मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के बाद सकल हिंदू समाज के लोगों ने शुक्रवार देर रात बड़े पैमाने पर जश्न मनाया।

    शहर के पाटी नाका, मोटी माता चौक, रणजीत चौक सहित कई प्रमुख स्थानों पर लोग एकत्रित हुए और आतिशबाजी की गई। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठा। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।

    जय श्रीराम के नारों से गूंजा शहर
    जश्न के दौरान पूरे शहर में “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के जोरदार नारे लगाए गए। युवाओं की बड़ी संख्या चौराहों पर मौजूद रही, जहां उन्होंने उत्साहपूर्वक आतिशबाजी की और खुशी साझा की। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा बन गया। स्थानीय लोगों ने मां वाग्देवी और भारत माता की पूजा-अर्चना करते हुए महाआरती भी की। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर धार्मिक आस्था व्यक्त की और फैसले को ऐतिहासिक बताया।

    वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया फैसला
    समाज के लोगों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चल रहे संघर्ष और जनजागरण का परिणाम है। उनका कहना था कि वर्षों से विभिन्न स्तरों पर आंदोलन और प्रयास किए जा रहे थे, जिनका परिणाम अब सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने इस फैसले को केवल एक कानूनी निर्णय नहीं बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण बताया। लोगों के अनुसार यह निर्णय समाज की एकजुटता और संघर्ष की जीत का प्रतीक है।

    देर रात तक बना रहा जश्न का माहौल
    शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे से शुरू हुआ जश्न देर रात तक जारी रहा। शहर के कई हिस्सों में लोग समूहों में एकत्रित होकर खुशी मनाते रहे। पूरे बड़वानी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और चौराहों पर युवाओं की भारी भीड़ रही। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति सामान्य रही और कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

  • केरल का 1000 साल पुराना शिव मंदिर, जहां ‘घी’ आज भी नहीं पिघलता, न खराब होता

    केरल का 1000 साल पुराना शिव मंदिर, जहां ‘घी’ आज भी नहीं पिघलता, न खराब होता

    नई दिल्ली: केरल के त्रिशूर शहर में स्थित वडक्कुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिकता, अनोखी वास्तुकला और गहरी धार्मिक आस्थाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। एक छोटी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर हरियाली और शांत वातावरण से घिरा हुआ है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। हर साल यहां लाखों भक्त और पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव का केंद्र भी यही मंदिर माना जाता है।

    भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यता
    पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। मान्यता है कि केरल भूमि के निर्माण के बाद उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की परंपरा शुरू करवाई थी। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराना है, हालांकि समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण और मरम्मत भी होती रही है। मंदिर की बनावट पारंपरिक केरल शैली में है, जिसमें लकड़ी की नक्काशी और तांबे की छत इसकी खास पहचान है।

    सदियों पुरानी परंपरा: शिवलिंग पर घी अर्पण
    वडक्कुनाथन मंदिर की सबसे चर्चित मान्यता यहां स्थापित शिवलिंग से जुड़ी है। कहा जाता है कि सदियों से यहां प्रतिदिन घी चढ़ाया जाता है और वह कभी खराब नहीं होता। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लंबे समय तक घी चढ़ाए जाने के बावजूद यह न तो पिघलता है और न ही उसमें कोई दुर्गंध आती है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

    धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
    यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि केरल की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह और शाम की आरती के दौरान यहां का वातावरण मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और भक्तिमय माहौल से गूंज उठता है। त्रिशूर पूरम के दौरान मंदिर परिसर भव्य सजावट और हाथियों की शोभायात्रा से और भी आकर्षक बन जाता है।

    कैसे पहुंचे
    वडक्कुनाथन मंदिर पहुंचने के लिए केरल के त्रिशूर शहर जाना होता है, जहां यह मंदिर शहर के केंद्र में स्थित है। नजदीकी रेलवे स्टेशन त्रिशूर रेलवे स्टेशन है और सबसे निकटतम हवाई अड्डा कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। वहां से टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से उपलब्ध है। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।