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  • नौतपा में तपेगा मौसम ही नहीं, बदल सकती है जीवन की दिशा

    नौतपा में तपेगा मौसम ही नहीं, बदल सकती है जीवन की दिशा

    नई दिल्ली। साल 2026 में Nautapa की शुरुआत 25 मई से होने जा रही है। इस अवधि को हिंदू पंचांग और ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और पृथ्वी पर उनकी ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों के दौरान भीषण गर्मी अपने चरम पर होती है और लू चलने की संभावना अधिक रहती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नौतपा केवल मौसम का बदलाव नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष समय भी होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से तापमान में वृद्धि होती है और यह समय साधना, दान और आत्मशुद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में किए गए दान और धार्मिक कार्य सूर्य देव को प्रसन्न करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    नौतपा के दौरान सबसे अधिक महत्व जल दान को दिया गया है। इस समय राहगीरों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना और मिट्टी के घड़े में ठंडा पानी वितरित करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके साथ ही शरबत, छाछ, तरबूज और अन्य शीतल पेय पदार्थों का दान भी विशेष फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि ऐसे कार्य न केवल लोगों को गर्मी से राहत देते हैं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी शुभ परिणाम देते हैं।

    इसके अलावा अन्न दान को भी इस अवधि में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। गेहूं, चावल, दाल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थों का दान करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और आर्थिक समस्याओं में धीरे-धीरे कमी आती है।

    नौतपा के दौरान वस्त्र दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। सूती कपड़े, चप्पल, छाता और तौलिया जैसी आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंदों को देने से सेवा भाव बढ़ता है और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। इसे पुण्य और कल्याणकारी कार्य माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय सुबह सूर्य को जल अर्पित करना और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है। कई लोग इस अवधि में उपवास भी रखते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य मजबूत होने से व्यक्ति के नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि होती है।

    कुल मिलाकर नौतपा 2026 केवल भीषण गर्मी का संकेत नहीं, बल्कि एक ऐसा समय है जिसे सही दिशा में उपयोग करके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है।

  • आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..

    आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..


    नई दिल्ली।आज बुधवार, 4 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। पंचांग के अनुसार यह दिन भगवान गणेश की उपासना और बुधवार व्रत के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुद्धि, विवेक और बाधा निवारण के प्रतीक गणेश जी को समर्पित माना जाता है। साथ ही यह दिन बुध ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसे वाणी, व्यापार, शिक्षा और तर्कशक्ति का कारक ग्रह कहा गया है। इस कारण आज का दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी शुभ माना जाता है।

    फाल्गुन मास का पहला बुधवार होने के कारण आज का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजन करने से बुध ग्रह की स्थिति सुदृढ़ होती है। इसका असर करियर, शिक्षा और व्यापार में स्थिरता के रूप में देखने को मिलता है। विद्यार्थी नौकरीपेशा और कारोबारी वर्ग आज के दिन पूजा और संकल्प को विशेष महत्व देते हैं।

    आज तृतीया तिथि रात 12:09 बजे तक प्रभावी रहेगी उसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। दिन में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 10:12 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रभाव में आएगा। आज अतिगण्ड योग बना हुआ है, जो 5 फरवरी की रात 1:05 बजे तक रहेगा, इसके पश्चात सुकर्मा योग का आरंभ होगा। चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा और बाद में कन्या राशि में प्रवेश करेगा।सूर्योदय आज सुबह 7:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 8:37 बजे और चंद्रास्त सुबह 8:36 बजे है। ये समय व्रत, पूजा और दान कार्य के लिए शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 से 6:15 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:24 से 3:08 बजे तक और अमृत काल 3:48 से 5:24 बजे तक रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त 6:00 से 6:26 बजे तक प्रभावी रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 12:35 से 1:57 बजे, भद्रा दोपहर 12:19 बजे से रात 12:09 बजे तक (5 फरवरी) रहेगा। इसके अतिरिक्त यमगण्ड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त भी दिन में पड़ रहे हैं। उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण आज इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    गणेश पूजा करने के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। लाल पुष्प, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। हरी वस्तुओं का दान करना, कटु वाणी से बचना और व्रत के नियमों का पालन करना शुभ माना गया है।आज का यह दिन बुद्धि, व्यापार और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। सरल उपाय और विधि-विधान से गणेश पूजन करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और बुध ग्रह का सकारात्मक प्रभाव मिलता है।