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  • धार्मिक स्थल आवंटन पर नॉर्थस्टोव में विवाद, हिंदू संगठन का आवेदन खारिज, चर्च और मुस्लिम संस्थाओं को मिली जमीन

    धार्मिक स्थल आवंटन पर नॉर्थस्टोव में विवाद, हिंदू संगठन का आवेदन खारिज, चर्च और मुस्लिम संस्थाओं को मिली जमीन


    नई दिल्ली ।
    ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर स्थित नए विकसित शहर नॉर्थस्टोव में धार्मिक स्थल के लिए भूमि आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय काउंसिल द्वारा आरक्षित भूखंड चर्च नेटवर्क और एक मुस्लिम संगठन को 999 वर्ष की लीज पर दिए जाने के बाद हिंदू समुदाय ने फैसले पर निराशा व्यक्त की है। स्थानीय हिंदू संगठन का कहना है कि क्षेत्र में मंदिर नहीं होने के कारण लंबे समय से एक स्थायी पूजा स्थल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    मामला उस समय चर्चा में आया जब हिंदू समाज नॉर्थस्टोव नामक संगठन ने धार्मिक एवं सामुदायिक केंद्र स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया था। संगठन के प्रस्ताव में मंदिर के साथ एक इंटरफेथ सेंटर और वेलनेस सेंटर विकसित करने की योजना भी शामिल थी। हालांकि काउंसिल ने आवेदन को तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया और भूमि दूसरे आवेदकों को आवंटित कर दी।

    काउंसिल के निर्णय के बाद नॉर्थस्टोव और आसपास रहने वाले हिंदू परिवारों में निराशा देखी जा रही है। स्थानीय समुदाय का कहना है कि क्षेत्र में हिंदू आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब तक उनके लिए कोई स्थायी मंदिर उपलब्ध नहीं है। धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के लिए उन्हें दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे नियमित धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

    हिंदू समुदाय का दावा है कि यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती तो यह केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाला केंद्र भी बन सकता था। उनका कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों, आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सामुदायिक सहयोग को मजबूत करना था।

    दूसरी ओर चर्च और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भूमि आवंटन का स्वागत किया है। मुस्लिम संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि नॉर्थस्टोव में रहने वाले मुस्लिम परिवारों के लिए नियमित नमाज और धार्मिक शिक्षा के उद्देश्य से स्थायी स्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उनका मानना है कि नए परिसर से समुदाय की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक समानता और सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। स्थानीय स्तर पर कई लोगों का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में सभी प्रमुख समुदायों की धार्मिक आवश्यकताओं को संतुलित ढंग से ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि किसी भी वर्ग में उपेक्षा की भावना न पैदा हो।

    फिलहाल काउंसिल की ओर से यही कहा गया है कि आवेदन निर्धारित प्रक्रिया और तकनीकी मानकों के आधार पर परखे गए थे तथा उसी के अनुरूप निर्णय लिया गया। वहीं हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि आगे की संभावित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला स्थानीय प्रशासन, सामुदायिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

  • कैम्ब्रिजशायर में मंदिर के लिए हिंदूओं को नहीं दी जमीन, चर्च और मुस्लिम ग्रुप को कर दिया आवंटन

    कैम्ब्रिजशायर में मंदिर के लिए हिंदूओं को नहीं दी जमीन, चर्च और मुस्लिम ग्रुप को कर दिया आवंटन


    नई दिल्‍ली । ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर स्थित नए शहर नॉर्थस्टोव में अपना पहला पूजा स्थल बनाने की कोशिश कर रहे ब्रिटिश हिंदुओं को तगड़ा झटका लगा है। स्थानीय काउंसिल ने एक जमीन के टुकड़े को हिंदू चैरिटी को देने के बजाय एक चर्च और मुस्लिम ग्रुप को आवंटित कर दिया है। यह फैसला सामने आने के बाद इलाके में रहने वाले करीब 150 हिंदू परिवारों में काफी निराशा है।

    क्या है पूरा मामला?
    साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने 0.25 हेक्टेयर जमीन को 999 साल के लिए ‘नॉर्थस्टोव चर्च नेटवर्क’ (NCN) को लीज पर दे दिया है। इसके लिए उन्हें सिर्फ नाममात्र का किराया चुकाना होगा।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय निवासियों द्वारा बनाए गए ‘हिंदू समाज नॉर्थस्टोव’ (HSN) ने भी इस जमीन के लिए बोली लगाई थी। उन्होंने यहां एक मंदिर के साथ-साथ ‘सर्वधर्म’ और वेलबीइंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, बोलियों का आकलन करने वाले काउंसिल के अधिकारियों ने HSN के प्रस्ताव को 65% और NCN के प्रस्ताव को 81% अंक दिए, जिसके कारण जमीन चर्च नेटवर्क को मिल गई।

    मुस्लिम ग्रुप कैसे बना हिस्सेदार?
    नॉर्थस्टोव चर्च नेटवर्क (NCN) के प्रस्ताव में नॉर्थस्टोव के मुसलमानों को मुख्य किरायेदार (एंकर टेनेंट) के रूप में शामिल किया गया था। इस प्रस्ताव में उनके लिए एक अलग इस्लामिक प्रार्थना कक्ष और शिक्षा केंद्र बनाने की बात शामिल है। नॉर्थस्टोव मुस्लिम ग्रुप के अध्यक्ष नवाश ने बताया कि शहर में लगभग 200 मुस्लिम हैं, जिन्हें दिन में पांच बार नमाज पढ़ने के लिए एक स्थायी जगह की जरूरत थी, क्योंकि कम्युनिटी स्पेस इतने लंबे समय तक खुले नहीं रहते। यही वजह है कि उन्होंने एंकर टेनेंट के तौर पर आवेदन किया था। वहीं, NCN के प्रवक्ता का कहना है कि स्थानीय समुदायों और आस्था समूहों को भी जगह किराए पर लेने की अनुमति दी जाएगी।

    हिंदू परिवारों की क्या है परेशानी?
    कैम्ब्रिजशायर में कई चर्च और मस्जिदें हैं, लेकिन एक भी हिंदू मंदिर नहीं है। हिंदुओं को पूजा करने के लिए दो घंटे का सफर तय करके बर्मिंघम या वेम्बली जाना पड़ता है। वे रात भर के लिए कम्युनिटी स्पेस किराए पर नहीं ले सकते, जिससे गणपति जैसे त्योहार मनाना मुश्किल हो जाता है। हालात ये हैं कि भगवान की मूर्तियों को कैरी बैग में रखकर गैराज में रखना पड़ता है। जगह-जगह ले जाने के कारण कई मूर्तियां खंडित भी हो गई हैं।

    उत्तर प्रदेश के कानपुर से यूके गए अभिषेक श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्हें कभी-कभी लगता है कि यूके आकर उन्होंने गलती कर दी, क्योंकि उनके 9 और 12 साल के बच्चे हिंदू त्योहारों में हिस्सा नहीं ले पाते। वहीं, 16 साल की इवा का कहना है कि उसने कभी रात भर शिवरात्रि नहीं मनाई और न ही कभी ‘हवन’ देखा है। वह कहती हैं, “मैं अक्सर भारत में अपने चचेरे भाई-बहनों को त्योहार मनाते देखती हूं। मेरी पीढ़ी यहां अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से पूरी तरह अलग हो रही है।”

    हिंदू चैरिटी ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
    HSN की अध्यक्ष अपर्णा निगम-सक्सेना ने फैसले पर निराशा जताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं। दरअसल, ‘वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड’ की कमी सहित कई कारणों से HSN की बोली के अंक काट लिए गए थे। अपर्णा ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि यह एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर काउंसिल को आर्किटेक्ट से तैयार कोटेशन चाहिए थे, तो उन्हें इसके लिए दिशानिर्देश देने चाहिए थे।

    दूसरी ओर, काउंसिलर डॉ. लिसा रेड्रुप ने फैसले का बचाव करते हुए कहा, “बोलियों का आकलन स्पष्ट मानदंडों के आधार पर किया गया था, जो सभी के लिए उपलब्ध थे। आवेदकों को अपने प्रोजेक्ट की जरूरत और अपनी धार्मिक प्रथाओं से जुड़ी बातों को स्पष्ट करना था।”

  • MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क

    MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) के सामने शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Historical Bhojshala) को लेकर एक अहम दलील पेश की गई. हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले।

    ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के सामने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को कानून का उल्लंघन बताया।

    अभी हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति है. जैन ने कहा कि ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958’ के तहत किसी भी स्मारक का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, यह व्यवस्था हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का हनन है।


    मंदिर बनाम मस्जिद

    याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने परिसर की बनावट पर बड़े सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि इस ढांचे में न तो कोई मीनार है और न ही वजूखाना, जो एक पारंपरिक मस्जिद की पहचान होते हैं. उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि भोजशाला एक जैन मंदिर था; उन्होंने कहा कि यह स्मारक असल में एक सरस्वती मंदिर है, जिसकी स्थापना 1034 ईस्वी में परमार वंश के राजा भोज ने की थी।


    मुस्लिम पक्ष और 1991 के कानून की दलील

    मुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ‘पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991’ का सहारा लिया. 15 अगस्त 1947 को यह परिसर एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में था, इसलिए कानूनन इसके स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता। विष्णु शंकर जैन ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है, इसलिए 1991 का अधिनियम इस पर लागू नहीं होता।

    हाई कोर्ट इस परिसर के धार्मिक स्वरूप से जुड़ी कुल पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर एक साथ सुनवाई कर रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है।

  • बांग्लादेश में हिन्दुओं पर फिर हमले…. मुस्लिम युवक की हत्या के बाद फूंके अल्पसंख्यकों के घर और दुकानें

    बांग्लादेश में हिन्दुओं पर फिर हमले…. मुस्लिम युवक की हत्या के बाद फूंके अल्पसंख्यकों के घर और दुकानें


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के उत्तर-पश्चिमी जिले रंगपुर (Northwestern district Rangpur) और पश्चिमी जिले कुश्तिया (Western district Kushtia) में शनिवार को भारी हिंसा और तनाव की खबरें सामने आईं। एक मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु की हत्या के बाद भड़की भीड़ ने रंगपुर में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया। हैरानी की बात यह है कि मृतक के परिजनों द्वारा हिंदुओं का हाथ होने से इनकार किए जाने के बावजूद भीड़ ने इस समुदाय पर हमला बोल दिया। पुलिस इसे मुख्य मामले से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश करार दे रही है।

    ढाका से लगभग 300 किलोमीटर दूर रंगपुर के दासपारा बाजार इलाके में शनिवार को एक मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु रकीब हसन की बेरहमी से हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच के अनुसार, हसन की हत्या कथित तौर पर एक ड्रग तस्कर मोहम्मद मोमिन ने पुरानी रंजिश के चलते की थी।

    हालांकि, हत्या के कुछ ही घंटों बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। एक उग्र भीड़ ने दासपारा बाजार में स्थित हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमला बोल दिया। स्थानीय समाचार पत्र ‘प्रथम आलो’ के अनुसार, इस क्षेत्र में हिंदू समुदाय के लगभग सौ से अधिक परिवार रहते हैं। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावरों ने तोड़फोड़ के साथ-साथ लूटपाट की भी कोशिश की।


    ध्यान भटकाने के लिए हुए हमले

    रंगपुर के पुलिस कमिश्नर मोहम्मद मजीद अली ने मीडिया को बताया कि पुलिस असली हत्यारों की तलाश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा एक तीसरे पक्ष की साजिश है ताकि पुलिस का ध्यान रकीब हसन की हत्या के मामले से भटकाया जा सके। उन्होंने कहा, “हमने उन लोगों की पहचान कर ली है जिन्होंने हिंदू घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक रकीब की मां नूरजहां बेगम ने स्वयं बयान दिया कि इस हत्या में हिंदू समुदाय का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमारा हिंदुओं साथ कोई विवाद नहीं है। हम सिर्फ अपने बेटे के असली हत्यारों की गिरफ्तारी चाहते हैं।”


    इस्लाम के अपमान का आरोप

    रंगपुर की घटना के समांतर ही ढाका से 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित कुश्तिया जिले में भी हिंसा की एक बड़ी वारदात हुई। यहां एक स्कूल शिक्षक और आध्यात्मिक हस्ती शमीम रजा जहांगीर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। उन पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया गया था। दौलतपुर थाना पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने न केवल जहांगीर की जान ली, बल्कि उनके कम से कम सात अनुयायियों को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। उग्र भीड़ ने जहांगीर के आश्रम को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने बताया कि जहांगीर को इससे पहले 2021 में भी कट्टरपंथी संगठनों की शिकायतों पर विवादास्पद गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया था।


    स्थिति संभालने की कोशिश

    इन दोहरे हमलों के बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रंगपुर और कुश्तिया में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) की तैनाती की है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के आंकड़े डराने वाले हैं। ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच देश में सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वे कट्टरपंथी तत्वों पर नकेल कसें और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

  • घाटी से सौहार्द्रपूर्ण तस्वीर… 36 साल बाद इस मंदिर में हुई रामनवमी पूजा, हिन्दुओं का साथ मुस्लिमों ने भी बढ़-चढ़कर लिया भाग

    घाटी से सौहार्द्रपूर्ण तस्वीर… 36 साल बाद इस मंदिर में हुई रामनवमी पूजा, हिन्दुओं का साथ मुस्लिमों ने भी बढ़-चढ़कर लिया भाग


    श्रीनगर।
    देश भर के कई हिस्सों में जहां रामनवमी (Ram Navami) के मौके पर सांप्रदायिक दंगे और हिंसा की खबरें आती हैं, वहीं कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) से एक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण तस्वीर सामने आई है, जहां दशकों बाद साम्प्रदायिक एकता (Communal Unity) की मिसाल देखने को मिली। यहां के रघुनाथ मंदिर (Raghunath Temple) में 36 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार राम नवमी पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदू श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। ऐसे में श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित रघुनाथ मंदिर गुरुवार को फिर से जीवंत हो उठा। करीब तीन दशक बाद यह मंदिर खुला है।

    हालांकि, इस मंदिर में नवीनीकरण और जीर्णोद्धार का काम अभी भी चल रहा है, फिर भी मंदिर प्रबंधन समिति ने रामनवमी के अवसर पर पूजा का आयोजन किया। प्रबंधन समिति के महासचिव सुनील कुमार ने कहा, “इस मंदिर में 36 साल में पहली बार रामनवमी पूजा आयोजित की जा रही है। हममें से कुछ लोग जम्मू से आए हैं, लेकिन देश और विदेश में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने दान देकर जीर्णोद्धार के कामों में सहयोग दिया है।” उन्होंने बताया कि मंदिर में चल रहे काम के कारण “मूर्ति स्थापना” (मूर्ति की स्थापना) नहीं हो पाई।


    कश्मीरी पंडितों का वापसी का समर्थन करें मुसलमान
    घाटी में कश्मीरी पंडित प्रवासियों की संभावित वापसी के बारे में कुमार ने कहा कि कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के सहयोग के बिना ऐसी वापसी संभव नहीं होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “सरकार को हमें फिर से बसाने में एक साल भी नहीं लगेगा, लेकिन कश्मीरी मुसलमानों को हमारी वापसी का समर्थन करना होगा।”

    पर्यटक और सुरक्षा बलों के जवान भी शरीक
    स्थानीय मुस्लिम गुलाम हसन भी समारोह में शामिल होने के लिए मंदिर में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “कश्मीरी पंडित और मुस्लिम भाई हैं। हम दशकों से एक साथ रहते आए हैं।” रामनवमी मनाने के लिए शहर के विभिन्न मंदिरों में, जिनमें शंकराचार्य मंदिर भी शामिल है, विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं। पर्यटक और सुरक्षा बल भी इन उत्सवों में स्थानीय हिंदू आबादी के साथ शामिल हुए।

  • बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या

    बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों (Minorities) के लिए हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। नई सरकार (New government) आने के बाद भी हिंदुओं और हिंदू मंदिरों (Hindu Temples) पर हमले का सिलसिला नहीं रुका है। पिछले एक हफ्ते में अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। वहीं, चार अन्य लोग, जिसमें एक पुजारी भी शामिल है, मंदिर के बाहर बम धमाके में घायल हो गए हैं। बांग्लादेश के दक्षिणपंथी ग्रुप, जातियो हिंदुओ मोहाजोतो ने इसकी जानकारी दी है। 6 मार्च और 7 मार्च को बोगुरा और कॉक्स बाजार में दो व्यक्तियों की हत्या कर दी गई, जबकि 8 मार्च को चुमिल्ला शहर में पूजा के दौरान एक हिंदु मंदिर पर क्रूड बम फेंके गए, जिससे काफी डर फैल गया।


    मंदिर पर हमले की पुष्टि

    बांग्लादेश समाचार की एक रिपोर्ट में कालीगाछ टाला काली मंदिर पर हमले की पुष्टि की है। कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी तौहीदुल अनवर ने बताया कि पुरोहित केशोब चक्रवर्ती, साथ ही अन्य दो लोगों को अस्पताल में उपचार मिला। मंदिर समिति के अध्यक्ष सजोल कुमार चंदा ने कहाकि धमाका धार्मिक समारोह के दौरान हुआ। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर एक नकाबपोश व्यक्ति को धमाके से थोड़ी देर पहले मंदिर में प्रवेश करते और एक बैग छोड़ते हुए दिखाया गया। घायल पुजारी केशब चक्रवर्ती ने बताया कि बम विस्फोट के बाद, मेरे सामने एक सफेद चीज गिरी…बाद में, धुआं देखकर, दूसरों ने मुझे बताया कि यह एक बम था।


    क्षेत्र में फैल गई घबराहट

    विस्फोट के बाद क्षेत्र में घबराहट फैल गई। पहले धमाके के बाद, हमलावरों ने कथित तौर पर नजदीकी बौद्ध मंदिर और एक निजी ऑफिस के पास दो और साधारण बम फोड़ दिए। मेट्रोपॉलिटन पूजा उत्सव फ्रंट के संयोजक श्यामल कृष्ण ने स्थल का दौरा किया और जिम्मेदारों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।

    उन्होंने कहाकि जो लोग शांतिपूर्ण वातावरण को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें जल्दी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों, जिनमें कुमिला के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अनीसुज्जमान भी शामिल थे, ने स्थल का दौरा किया और जांच में सहायता के लिए एक एंटी बम स्क्वॉड को बुलाया गया।

  • US में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समुदाय, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    US में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समुदाय, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समूह (Hindus most Educated Religious Group) हैं। प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की नई रिपोर्ट (New report ) से यह सामने आया है। 2023-24 के रिलिजियस लैंडस्केप स्टडी (RLS) में पाया गया कि यूएस में रहने वाले 70 प्रतिशत हिंदू वयस्कों के पास कम से कम बैचलर डिग्री या उससे उच्च शिक्षा है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जहां सभी अमेरिकी वयस्कों में मात्र 35 प्रतिशत के पास ही बैचलर डिग्री या उससे ज्यादा है। यह अध्ययन अमेरिका में धर्म और सार्वजनिक जीवन पर सबसे व्यापक सर्वेक्षणों में से एक माना जाता है, जिसमें 36908 वयस्कों से जुलाई 2023 से मार्च 2024 तक जानकारी ली गई।

    रिपोर्ट 19 फरवरी 2026 को जारी की गई। हिंदू समुदाय की यह उपलब्धि इमिग्रेशन पैटर्न से जुड़ी हुई है, क्योंकि अधिकांश हिंदू उच्च शिक्षा या कुशल वीजा के माध्यम से अमेरिका आए हैं। इस अध्ययन में हिंदुओं के बाद यहूदी दूसरे स्थान पर हैं, जहां 65 प्रतिशत वयस्कों के पास बैचलर डिग्री या उससे अधिक शिक्षा है। मुसलमान, बौद्ध और ऑर्थोडॉक्स ईसाई भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं। इनमें 40 प्रतिशत से अधिक (मुसलमानों में 44 प्रतिशत) वयस्कों के पास उच्च शिक्षा है। ये अल्पसंख्यक धार्मिक समूह अमेरिकी आबादी का छोटा हिस्सा हैं- हिंदू लगभग 0.5-1 प्रतिशत, मुसलमान 1-1.3 प्रतिशत और यहूदी लगभग 2 प्रतिशत।

    ईसाई समुदाय कुल आबादी का 70%
    अमेरिका में ईसाई समुदाय कुल आबादी का बड़ा हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत है, लेकिन उनके कई उपसमूह जैसे इवैंजेलिकल प्रोटेस्टेंट (29 प्रतिशत) और ऐतिहासिक रूप से ब्लैक प्रोटेस्टेंट (24 प्रतिशत) में कॉलेज ग्रेजुएट्स का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा स्तर में अंतर मुख्य रूप से इमिग्रेशन और जनसांख्यिकीय कारकों से जुड़ा है। हिंदू, मुसलमान और बौद्ध समुदायों में से अधिकांश विदेशी मूल के हैं, जो अमेरिका में उच्च शिक्षा या स्किल्ड जॉब वीजा पर आते हैं। इससे इन समूहों में उच्च शिक्षित व्यक्तियों का अनुपात बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए हिंदुओं में 77 प्रतिशत विदेश में जन्मे हैं।

    रिसर्च के नतीजे क्या कह रहे
    यह पैटर्न दिखाता है कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियां कुशल और शिक्षित प्रवासियों को आकर्षित करती हैं, जिससे छोटे धार्मिक समूहों में शिक्षा का स्तर ऊंचा रहता है। कुल मिलाकर यह अध्ययन US में धार्मिक विविधता और शिक्षा के बीच संबंध को उजागर करता है। हिंदू और यहूदी जैसे समूह सबसे आगे हैं, जबकि मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक भी औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह निष्कर्ष अमेरिकी समाज में अल्पसंख्यक समुदायों की सफलता और योगदान को सामने रखता है। साथ ही, इमिग्रेशन के सकारात्मक प्रभाव को भी दर्शाता है।

  • Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद

    Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद


    ढाका।
    बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Election) पूरा हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) को 209 सीटों पर जीत हासिल हुई है. तारिक रहमान (Tariq Rahman) पीएम बन सकते हैं. जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) को 68 और छात्रों वाली पार्टी NCP को सिर्फ 6 सीटों पर वोट मिला. चुनाव के बाद अब जो आंकड़े आए हैं, वह हैरान करने वाले हैं. खासकर हिंदुओं की जीत को लेकर. दरअसल बांग्लादेश की कुल आबादी करीब 16.5 करोड़ है. 2022 की जनगणना के मुताबिक इनमें 1 करोड़ 31 लाख से ज्यादा हिंदू हैं. यानी देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हिंदू समुदाय से आती है. यह कोई छोटी संख्या नहीं है. लेकिन 2026 के ताजा संसदीय चुनाव में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद कम रह गया है. 300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं. यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है।


    बांग्लादेश चुनाव में कितने हिंदू जीते?

    पहले हिंदुओं की बड़ी संख्या अवामी लीग (AL) से होती थी. AL क्योंकि बैन है, इसलिए तीनों हिंदू उम्मीदवार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जीते हैं.
    गायेश्वर चंद्र रॉय- ढाका-3 सीट से
    निताई रॉय चौधरी – मगरी-2 सीट से
    एडवोकेट दिपेन देवान – रंगामाटी सीट से
    इसके अलावा साचिंग प्रू नाम के एक और अल्पसंख्यक उम्मीदवार ने बंदरबन से जीत दर्ज की, लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम है.


    जमात का हिंदू कैंडिडेट हारा

    ध्यान देने वाली बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने इस बार एक हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से मैदान में उतारा था. लेकिन वे चुनाव हार गए. इसका मतलब यह हुआ कि जमात के टिकट पर कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीत नहीं पाया.


    पहले क्या स्थिति थी?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी.
    2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे
    2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची
    2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थे
    यानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है. 2006-09 तक बांग्लादेश में केयरटेकर सरकार रही. ऐसे में हम कह सकते हैं कि यह 20 साल में सबसे कम संख्या है. यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है।


    कितने हिंदू उम्मीदवार मैदान में थे?

    इस चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. 60 में से 22 राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे थे. BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 4 जीत पाए. लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम रही.


    सवाल क्यों उठ रहे हैं?

    देश की लगभग 8 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद संसद में 1 प्रतिशत से भी कम प्रतिनिधित्व होना चिंता का विषय माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय कई इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाता है, लेकिन टिकट वितरण और चुनावी गणित में उनकी हिस्सेदारी सीमित रह जाती है. इसके अलावा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा।

    बांग्लादेश चुनाव में कितनी महिलाएं जीतीं?
    इस बार चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी बहुत कम रही. हालांकि 7 महिलाओं ने जीत दर्ज की, जिनमें ज्यादातर बीएनपी से थीं. जमात-ए-इस्लामी के कुछ बयानों ने महिलाओं की भागीदारी पर भी विवाद खड़ा किया था।

  • Greater Noida में बड़े पैमाने पर चल रहा धर्मांतरण का खेल… हिन्दुओं को लालच देकर बनाया जा रहा ईसाई

    Greater Noida में बड़े पैमाने पर चल रहा धर्मांतरण का खेल… हिन्दुओं को लालच देकर बनाया जा रहा ईसाई


    ग्रेटर नोएडा।
    गौतम बुद्ध नगर जिले (Gautam Buddha Nagar District) में धर्मांतरण (Conversion.) के लिए लोगों को प्रलोभन देकर उकसाने का मामला पिछले पन्द्रह साल से चल रहा है। दादरी (Dadri) से इसकी शुरुआत हुई जो धीरे-धीरे कस्बे से निकलकर शहर की ओर बढ़ रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि पुलिस इसमें कार्रवाई करती है लेकिन, इसकी जड़ तक नहीं पहुंच पाती। इससे यह मामला अब बड़े स्तर पर पहुंच गया है।


    15 साल से चल रहा धर्मांतरण का रैकेट

    दादरी कस्बे के गौतमपुरी मोहल्ले में करीब पन्द्रह साल पहले ईसाई धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों को प्रलोभन देने के लिए रविवार को प्रार्थना सभा कराते थे। एक हिंदू संगठन से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि मोहल्ले में सार्वजनिक स्थल पर चोरी छिपे सभा आयोजित की जाती थी, लेकिन इस धर्मांतरण को लेकर लोग जागरुक नहीं थे। कोई विरोध भी नहीं करता था। एक लाख रुपये का प्रलोभन देकर धर्म के प्रति लोगों को उकसाया जाता था। उसे दौरान कुछ लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी। पुलिस मौके पर पहुंचती थी। इसके बाद धर्म परिवर्तन कराने वाले लोग वहां से भाग जाते थे।


    सेक्टर डेल्टा दो में भी ऐसा मामला सामने आया था

    सेक्टर डेल्टा-2 में हिंदू परिवार की महिला को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच देने पहुंचीं महिलाओं समेत चार के खिलाफ केस दर्ज किया गया। सभी आरोपी घर में हिंदू परिवार की महिला को धन का लालच देकर धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे।

  • असम के CM बोले- मुस्लिम आबादी से मुकाबले के लिए 3 बच्चे पैदा करें हिन्दू… वरना घर की देखभाल के लिए नहीं बचेंगे लोग

    असम के CM बोले- मुस्लिम आबादी से मुकाबले के लिए 3 बच्चे पैदा करें हिन्दू… वरना घर की देखभाल के लिए नहीं बचेंगे लोग


    इंफाल।
    असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने हिंदुओं को सलाह दी कि वे राज्य में मुसलमानों (Muslims) की तुलना में गिरती जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए, अगर संभव हो तो 3 बच्चे पैदा करें। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि हिंदू अधिक बच्चे पैदा नहीं करेंगे, तो घर की देखभाल करने के लिए लोग नहीं बचेंगे। उनका यह बयान राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिसके अगले साल मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। बारपेटा जिले में एक आधिकारिक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से बात करते हुए सरमा ने कहा, ‘अल्पसंख्यक क्षेत्रों में उनकी जन्म दर अधिक है। हिंदुओं में जन्म दर दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। इसलिए वहां अंतर बना हुआ है।’

    वह असम के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी में कथित वृद्धि पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, ‘इसीलिए हम हर हिंदू व्यक्ति से कहते हैं कि आपको एक बच्चे पर नहीं रुकना चाहिए और कम से कम 2 बच्चे पैदा करने चाहिए। यदि संभव हो तो 3 बच्चे पैदा करें।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरी ओर मुस्लिम लोगों को यह सलाह दी जाती है कि वे 7–8 बच्चे पैदा न करें और अपनी संतान की संख्या कम रखें। उन्होंने दावा किया कि हम हिंदुओं से थोड़े अधिक बच्चे पैदा करने के लिए कहते हैं, अन्यथा घर की देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ है, इसलिए जनसंख्या पैटर्न की सटीक प्रकृति उन्हें तुरंत ज्ञात नहीं है।

    2 बच्चों के नियम में ढील
    असम सरकार ने 5 दिसंबर को एसटी, एससी, चाय बागान, मोरन और मटक समुदायों के लिए 2 बच्चों के नियम में ढील दी, जिससे पूरे राज्य के लिए परिवार नियोजन नियम को धीरे-धीरे लागू करने का सरकार का रुख बदला। सीएम सरमा ने पहले कहा था कि असम सरकार विशिष्ट राज्य योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के वास्ते लोगों के लिए दो-बच्चे के मानदंड को लागू करेगी। मुख्यमंत्री ने 9 नवंबर को दावा किया था कि हिंदू आबादी की वृद्धि कम हो रही है, जबकि मुसलमानों की वृद्धि बढ़ रही है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी 3.12 करोड़ थी जिसमें से मुस्लिम जनसंख्या 1.07 करोड़ थी (34.22 प्रतिशत) थी। राज्य में 1.92 करोड़ हिंदू थे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 61.47 प्रतिशत थे।