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  • दिग्विजय सिंह बोले- ‘मैं सनातन धर्म का समर्थक हूं, हिंदुत्व का नहीं’, सावरकर को लेकर किया दावा

    दिग्विजय सिंह बोले- ‘मैं सनातन धर्म का समर्थक हूं, हिंदुत्व का नहीं’, सावरकर को लेकर किया दावा


    शाजापुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह सनातन धर्म का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंदुत्व का नहीं। सिंह ने दावा किया कि ‘हिंदुत्व’ शब्द विनायक दामोदर सावरकर ने दिया था। अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के सिलसिले में शाजापुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने कहा कि सनातन धर्म का संदेश प्रेम, स्नेह और करुणा है। उन्होंने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सभी धर्मों के लोगों से इससे जुड़ने की अपील भी की।

    बोले- मां ने सनातन धर्म की सीख दी

    शाजापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें सनातन धर्म के बारे में सिखाया था। उनके अनुसार, सनातन धर्म प्रेम, स्नेह और करुणा का प्रतीक है।

    सिंह ने कहा, “मैं सनातन धर्म का समर्थन करता हूं, हिंदुत्व का नहीं।” उन्होंने दावा किया कि हिंदुत्व शब्द सावरकर ने दिया था। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि हिंदुत्व का समानता से कोई लेना-देना नहीं है।

    कुरान का भी किया जिक्र

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुरान का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुरान पढ़ी है। कांग्रेस नेता ने ‘काफिर’ शब्द का अर्थ बताते हुए दावा किया कि इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए होता है, जो किसी धर्म का पालन नहीं करता और ‘अधर्म’ यानी गलत रास्ते पर चलता है।

    उज्जैन से शुरू हुई यात्रा अयोध्या में होगी समाप्त

    दिग्विजय सिंह इन दिनों ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर हैं। यह यात्रा इसी सप्ताह उज्जैन से शुरू हुई थी और अयोध्या में समाप्त होगी। शाजापुर के बाद यात्रा राजगढ़ जिले की ओर बढ़ेगी।

    सिंह ने इस यात्रा को गैर-राजनीतिक पहल बताया। उन्होंने कहा, “अगर यह राजनीतिक होती, तो इसमें केवल कांग्रेस कार्यकर्ता ही शामिल होते।” उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि सभी धर्मों के लोग यात्रा से जुड़ें।

    यात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह सनातन धर्म से जुड़े अपने विचार रख रहे हैं। शाजापुर में उनके बयान के बाद सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई है।

  • बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान

    बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कथा के लिए पहुंचे बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण और घर वापसी के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। हावड़ा में आयोजित कथा के दौरान उन्होंने कहा, “यह देश अकबर का नहीं, रघुवर यानी भगवान राम का है।” उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में अब तक जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ है, उनकी जल्द ही घर वापसी कराई जाएगी।

    धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनके बंगाल आने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे थे कि बाबा को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन अब वे बंगाल आ चुके हैं। मंच से सीएम शुभेंदु की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को उनके विचारों, संस्कृति और हिंदुत्व की बातों पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोलकाता का पत्ता-पत्ता ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजेगा।

    ‘बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं’

    सीमा के रास्ते देश में आने वाले लोगों को लेकर भी शास्त्री ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि सीमा के सहारे भारत में घुसने वाले ‘देशद्रोही’ यह बात कान खोलकर सुन लें कि अब यहां बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं। उन्होंने कहा, “छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा।”

    हालांकि, इसी दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई मुसलमानों या ईसाइयों से नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध उन लोगों से है जो भारत का खाते हैं और पाकिस्तान का गाते हैं। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म में तीनों के पूजा-पद्धति के रास्ते अलग नजर आते हैं, लेकिन अंत में सबका बाप कन्हैया लाल ही निकलता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने बंगाल के लोगों से मिलजुलकर रहने की अपील की और कहा, “कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।”

    बॉर्डर इलाकों में कथा करने की इच्छा

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभी हावड़ा में कथा हुई है, लेकिन आगे वह पश्चिम बंगाल के उन इलाकों में भी कथा करना चाहते हैं, जो सीमा से सटे हुए हैं। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों में धर्मांतरण अधिक हुआ है। उन्होंने राम और मां काली से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे इलाकों तक सनातन की आवाज पहुंचनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से किसी प्रदेश का पूरी तरह कायाकल्प नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए लोगों के भीतर भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने ‘मन परिवर्तन’ पर जोर देते हुए कहा कि जब सनातनी एकजुट होंगे और हर व्यक्ति के मन में राम का भाव जागेगा, तभी बंगाल में वास्तविक रामराज्य की नींव मजबूत होगी।

    ‘दिक्कत है तो बांग्लादेश चले जाएं’

    अपने संबोधन में पड़ोसी देश बांग्लादेश का जिक्र करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिन्हें भारत में रहने में परेशानी महसूस होती है, वे वहां जा सकते हैं। भाषण के अंत में उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और न ही वे किसी विशेष राजनीतिक चेहरे के समर्थक हैं। उनका कहना था कि वे पहले भी सनातन के थे, आज भी सनातन के हैं और आगे भी सनातन के ही रहेंगे।

  • राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व और राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति अब सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक सुविधा पर आधारित हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पहले हिंदुत्व की विचारधारा से दूरी बना ली थी, वे अब राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने पर भगवान राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    एकनाथ शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व किसी अवसर के अनुसार अपनाई या छोड़ी जाने वाली विचारधारा नहीं है। उनके अनुसार यह एक स्थायी आस्था और जीवन मूल्यों से जुड़ा विषय है, जिसे राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया और अब जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए राम और हिंदुत्व का सहारा लिया जा रहा है।

    राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। इसी विषय को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने राज्यभर में ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    इसी घटनाक्रम के बीच नागपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे ने भी राज्य सरकार और अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने हिंदुत्व और भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।

    उद्धव ठाकरे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब राजनीतिक आधार कमजोर पड़ने लगा तो भगवान राम का नाम लिया जाने लगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब भगवा लगा घटने तब राम का नाम लगे रटने।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों से दूर है, वह जनता के विश्वास पर भी खरा नहीं उतर सकता। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में हिंदुत्व, राम मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। विभिन्न दल इन विषयों पर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जनता के बीच संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बयानबाजी और वैचारिक टकराव का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह विवाद केवल नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदुत्व की विरासत, राजनीतिक पहचान और जनसमर्थन की प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • जंतर-मंतर पर तनाव: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ लामबंदी, सोशल मीडिया पर लाठियां लेकर पहुंचने की दी गई खुली धमकी

    जंतर-मंतर पर तनाव: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ लामबंदी, सोशल मीडिया पर लाठियां लेकर पहुंचने की दी गई खुली धमकी

    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव का गवाह बनने जा रहा है। इंटरनेट जगत से शुरू होकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस आंदोलन के जरिए देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रदर्शन की घोषणा के साथ ही दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं क्योंकि कई संगठन इस आंदोलन के पुरजोर विरोध में उतर आए हैं।

    सोशल मीडिया मंचों पर पिछले चौबीस घंटों से कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध और समर्थन को लेकर एक बड़ी वैचारिक और हिंसक जंग छिड़ गई है। एक तरफ जहां देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र और युवा इस प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख हिंदूवादी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन को रोकने के लिए सीधे तौर पर बल प्रयोग की चेतावनी दी है। इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो और पोस्ट प्रसारित हो रहे हैं जिनमें कार्यकर्ताओं को लाठियां और डंडे लेकर जंतर-मंतर पहुंचने के लिए उकसाया जा रहा है।

    अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने इस मामले में खुलकर धमकी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक संदेश जारी करते हुए कहा है कि वे इस कॉकरोच जनता पार्टी के खेल को पूरी तरह समझ रहे हैं। चौधरी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया है कि वे छह जून को पूरी ताकत के साथ और हाथों में लाठियां लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन और जंतर-मंतर पहुंचें। उन्होंने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाने और पीटने की बात कही है, जिससे माहौल में बेहद कड़वाहट आ गई है।

    पिंकी चौधरी के अलावा अवैध धार्मिक निर्माणों के खिलाफ कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले एक्टिविस्ट प्रीत सिरोही ने भी सीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिरोही ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से बड़ी संख्या में लाठियों के साथ दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जंतर-मंतर पर मुस्तैद रहेंगे और यदि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा देश विरोधी या समाज विरोधी बातें की गईं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और तुरंत बल प्रयोग का सहारा लिया जाएगा। इन बयानों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक गहरा गया है।

    इस भारी विरोध और हिंसा की धमकियों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बेहद सधी हुई और शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने समर्थकों से लगातार अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के उकसावे में न आएं। पार्टी प्रवक्ताओं ने आधिकारिक बयान जारी कर कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पूरा प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक, अनुशासित और संवैधानिक दायरे में होना चाहिए। समर्थकों से हाथ में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और किताबें लेकर आने को कहा गया है।

    पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि वे प्रदर्शन के दौरान अपने मोबाइल फोन से लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करते रहें। सीजेपी नेतृत्व को अंदेशा है कि कुछ असामाजिक तत्व उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने या उसमें हिंसा भड़काने के उद्देश्य से भीड़ में शामिल हो सकते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पार्टी ने पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताया है और समर्थकों से कहा है कि यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो उसका वीडियो बनाकर तुरंत वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सौंप दिया जाए ताकि कानून सम्मत कार्रवाई की जा सके।

  • बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा

    बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय पहचान और वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। ऊपर से चुनावी शोर और आरोप-प्रत्यारोप भले ही हावी हों, लेकिन भीतर ही भीतर हिंदुत्व की लहर एक अहम भूमिका निभाती दिख रही है। यह ऐसा कारक बन चुका है, जो स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे रहा है और सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

    राज्य की राजनीति अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। यह मुकाबला एक तरह से शक्ति उपासना और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच खिंचती रेखा जैसा बन गया है, जहां हर रैली और बयान का अलग राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर दौरों को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, मतुआ धाम और कालीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। इसके चलते राज्य में ‘जय महाकाली’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा भी तेजी से राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है।

    भाजपा का मानना है कि पहले चरण के मतदान में मतदाताओं की सक्रियता बदलाव के संकेत दे रही है। पार्टी रणनीतिकार इसे मौन मतदाता की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी रणनीति के स्तर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मैदान में उतरकर कमान संभाली है। कोलकाता में लगातार सक्रिय रहते हुए वे उन क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं, जहां पहले भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती थी। उनके साथ संगठनात्मक स्तर पर सुनील बंसल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रही है।

    जिन सीटों पर मुकाबला होना है, वे तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा यहां सीमित सफलता हासिल कर सकी थी, लेकिन इस बार पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा और चुनाव के बाद भी केंद्रीय बलों की मौजूदगी को लेकर दिए गए संदेश को भाजपा समर्थकों के लिए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का जवाब अपनी अलग रणनीति से देने का प्रयास किया है। उन्होंने बंगाली अस्मिता और धार्मिक समावेश को केंद्र में रखते हुए प्रचार तेज किया है। मंदिरों में जाकर वे यह संदेश दे रही हैं कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बाहरी नजरिये से नहीं समझा जा सकता।

    इस रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। तृणमूल के अन्य नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर चुनावी विमर्श को धार्मिक मुद्दों से हटाकर विकास, अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रतीकों, पहचान और विचारधाराओं की टकराहट का रूप ले चुका है, जहां हर पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

  • हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत

    हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत


    मुंबई।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में कहा कि हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है। भाषा, भूषा, खान-पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं। संघ प्रमुख डॉ. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित “नए क्षितिज” कार्यक्रम के दूसरे सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा, भूषा, खान पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं, ऐसा कहने से आपको कुछ भी छोडऩा नहीं होगा और न ही आपकी पहचान संकट नहीं पैदा होगा। इसके लिए संवाद की आवश्यकता होती है। हिन्दू-मुस्लिम एक हैं, यह नारा ही गलत है। हम एक ही थे। वह भूल गए उसे याद दिलाने की आवश्यकता है। एक कालखंड में उन्होंने पूजा-पद्धति बदली, अब उसे छोड़ नहीं सकते। लेकिन अपना मूल याद कर अपनी संस्कृति के आधार पर जुड़ तो सकते हैं। संघ की शाखा में आकर एक घंटे शरीर मन बुद्धि से व्यायाम करना और शेष 23 घंटे अपनी सुविधा और सामथ्र्य के अनुसार अपने समाज के लिए कार्य करना ,यह भी एक मार्ग है। भारत अपने स्वत्व के आधार पर सब प्रकार से खड़ा हो, इसके लिए आप कुछ भी कर रहे हैं तो एक प्रकारसे आप संघ का ही कार्य कर रहे हैं। संघ के बारे में संघ को देखकर मन और मत बनाइये, यही मेरा आग्रह है। सही स्रोत से संघ को समझिए। संघ की शाखा, संघ के कार्यक्रम, संघ स्वयंसेवकों के आचरण और उनके घर से आपको संघ समझ में आएगा। तथ्यों के आधार पर यदि आप हमारा विरोध करेंगे तो भी हम आपका स्वागत करेंगे।

    सर संघचालक ने कहा कि ग्राम विकास, गोसेवा आदि सर्वमान्य कार्यों से व्यवस्था परिवर्तन भले न हो पर इससे समाज में परिवर्तन आता है। समाज की सज्जन शक्ति को अच्छी तरीके से सक्रिय होने की आवश्यकता है और सभी एक दूसरे के पूरक हों। समाज की सज्जन शक्ति की सक्रियता और उनके बीच समन्वय के लिए ही पंच परिवर्तन का अभियान है। सामाजिक समरसता अर्थात अपने समाज के बीच बिना किसी भेदभाव के अपने संचार के क्षेत्र में सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सभी वर्गों में अपने एक मित्र होने चाहिए। इसके लिए अलग से कुछ खर्च नहीं लगता और अलग से अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता। अपने घर के निकट चर्मकार का कार्य करने वाला या आपका माली ही हो, उसके साथ अपने कुटुम्ब के सदस्यों के समान व्यवहार करना, इससे अपने आप संदेश जाएगा। बच्चों के भीतर परिवार के संस्कार, यह 12 वर्ष की आयु तक दिए जाते हैं तो यह जीवन भर प्रभावी होते हैं। वर्तमान समय में परिवार के सभी सदस्य मोबाइल में अधिक समय बिताते हैं। आवश्यकता है कि सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ सामूहिक चर्चा करना, साथ ही भोजन करना। सभी को प्रामाणिकता और निस्वार्थ बुद्धि से अपने समाज की सेवा करना और उसकी चर्चा परिवार में करना, इसे मंगल संवाद कहते हैं। ऐसा करने से परिवार और समाज में बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। अपने घर की चारदीवारी के बीच भाषा, भूषा, भजन, हवन, भोजन, भ्रमण अपना ही होना चाहिए। अपनी भाषा में हस्ताक्षर से ही शुरू करें। उसके लिए किसी दूसरी या विदेशी भाषा की आवश्यकता क्या है। पंच परिवर्तन की बात स्वयंसेवकों ने अपने घरों में शुरू कर दी है। यह एक दिन में नहीं होगा लेकिन यह एक दिन अवश्य होगा। हम सम्पूर्ण समाज को भी पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों को अपनाने का आग्रह करते हैं।

  • राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा

    राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा


    पुणे/अयोध्या। प्रसिद्ध ओजस्वी वक्ता साध्वी ऋतंभरा ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता पर बड़ा बयान दिया है। पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का संघर्ष एक ऐसे संकल्प की परिणति थी जिसका कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सूचना क्रांति और सोशल मीडिया का बोलबाला है लेकिन राम मंदिर आंदोलन उस समय सफल हुआ जब ये आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।इसका कारण यह था कि आंदोलन का संदेश सीधे लोगों के दिलों में गूँज रहा था।साध्वी ऋतंभरा ने मानवीय इच्छाशक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारा काम राम जी के कार्य के लिए समर्पित है। मानवीय संकल्प में पर्वतों को उखाड़ फेंकने और पत्थर को पानी में बदल देने की शक्ति होती है बशर्ते वह आत्मसंयम और चरित्र की प्रमाणिकता पर आधारित हो।

    राष्ट्र की मजबूती चरित्र और एकजुटता में

    साध्वी ने समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक दृढ़ संकल्पित समाज क्या हासिल कर सकता है। उनके अनुसार किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भौतिक संपदा में नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और आंतरिक विभाजनों को दूर करने की क्षमता में निहित होती है। उन्होंने दमितों और वंचितों की रक्षा के लिए समाज से आगे आने का आह्वान भी किया। अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ का उल्लास: 29 दिसंबर से शुरू होंगे कार्यक्रम एक ओर जहाँ साध्वी ऋतंभरा ने आंदोलन की वैचारिक विजय को रेखांकित किया वहीं दूसरी ओर अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के पांच दिवसीय भव्य आयोजन की रूपरेखा जारी कर दी गई है।

    आयोजन की मुख्य विशेषताएं

    प्रारंभ: राम मंदिर ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र के अनुसार समारोह की शुरुआत 29 दिसंबर से होगी।मुख्य अतिथि: 31 दिसंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करेंगे।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में नियमित रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन होगा।समय: सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन शाम से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलेंगे।यह आयोजन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद के महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है जिसमें देश भर से श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।