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  • जंतर-मंतर पर तनाव: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ लामबंदी, सोशल मीडिया पर लाठियां लेकर पहुंचने की दी गई खुली धमकी

    जंतर-मंतर पर तनाव: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ लामबंदी, सोशल मीडिया पर लाठियां लेकर पहुंचने की दी गई खुली धमकी

    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव का गवाह बनने जा रहा है। इंटरनेट जगत से शुरू होकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस आंदोलन के जरिए देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रदर्शन की घोषणा के साथ ही दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं क्योंकि कई संगठन इस आंदोलन के पुरजोर विरोध में उतर आए हैं।

    सोशल मीडिया मंचों पर पिछले चौबीस घंटों से कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध और समर्थन को लेकर एक बड़ी वैचारिक और हिंसक जंग छिड़ गई है। एक तरफ जहां देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र और युवा इस प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख हिंदूवादी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन को रोकने के लिए सीधे तौर पर बल प्रयोग की चेतावनी दी है। इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो और पोस्ट प्रसारित हो रहे हैं जिनमें कार्यकर्ताओं को लाठियां और डंडे लेकर जंतर-मंतर पहुंचने के लिए उकसाया जा रहा है।

    अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने इस मामले में खुलकर धमकी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक संदेश जारी करते हुए कहा है कि वे इस कॉकरोच जनता पार्टी के खेल को पूरी तरह समझ रहे हैं। चौधरी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया है कि वे छह जून को पूरी ताकत के साथ और हाथों में लाठियां लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन और जंतर-मंतर पहुंचें। उन्होंने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाने और पीटने की बात कही है, जिससे माहौल में बेहद कड़वाहट आ गई है।

    पिंकी चौधरी के अलावा अवैध धार्मिक निर्माणों के खिलाफ कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले एक्टिविस्ट प्रीत सिरोही ने भी सीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिरोही ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से बड़ी संख्या में लाठियों के साथ दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जंतर-मंतर पर मुस्तैद रहेंगे और यदि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा देश विरोधी या समाज विरोधी बातें की गईं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और तुरंत बल प्रयोग का सहारा लिया जाएगा। इन बयानों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक गहरा गया है।

    इस भारी विरोध और हिंसा की धमकियों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बेहद सधी हुई और शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने समर्थकों से लगातार अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के उकसावे में न आएं। पार्टी प्रवक्ताओं ने आधिकारिक बयान जारी कर कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पूरा प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक, अनुशासित और संवैधानिक दायरे में होना चाहिए। समर्थकों से हाथ में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और किताबें लेकर आने को कहा गया है।

    पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि वे प्रदर्शन के दौरान अपने मोबाइल फोन से लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करते रहें। सीजेपी नेतृत्व को अंदेशा है कि कुछ असामाजिक तत्व उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने या उसमें हिंसा भड़काने के उद्देश्य से भीड़ में शामिल हो सकते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पार्टी ने पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताया है और समर्थकों से कहा है कि यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो उसका वीडियो बनाकर तुरंत वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सौंप दिया जाए ताकि कानून सम्मत कार्रवाई की जा सके।

  • बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा

    बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय पहचान और वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। ऊपर से चुनावी शोर और आरोप-प्रत्यारोप भले ही हावी हों, लेकिन भीतर ही भीतर हिंदुत्व की लहर एक अहम भूमिका निभाती दिख रही है। यह ऐसा कारक बन चुका है, जो स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे रहा है और सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

    राज्य की राजनीति अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। यह मुकाबला एक तरह से शक्ति उपासना और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच खिंचती रेखा जैसा बन गया है, जहां हर रैली और बयान का अलग राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर दौरों को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, मतुआ धाम और कालीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। इसके चलते राज्य में ‘जय महाकाली’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा भी तेजी से राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है।

    भाजपा का मानना है कि पहले चरण के मतदान में मतदाताओं की सक्रियता बदलाव के संकेत दे रही है। पार्टी रणनीतिकार इसे मौन मतदाता की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी रणनीति के स्तर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मैदान में उतरकर कमान संभाली है। कोलकाता में लगातार सक्रिय रहते हुए वे उन क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं, जहां पहले भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती थी। उनके साथ संगठनात्मक स्तर पर सुनील बंसल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रही है।

    जिन सीटों पर मुकाबला होना है, वे तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा यहां सीमित सफलता हासिल कर सकी थी, लेकिन इस बार पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा और चुनाव के बाद भी केंद्रीय बलों की मौजूदगी को लेकर दिए गए संदेश को भाजपा समर्थकों के लिए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का जवाब अपनी अलग रणनीति से देने का प्रयास किया है। उन्होंने बंगाली अस्मिता और धार्मिक समावेश को केंद्र में रखते हुए प्रचार तेज किया है। मंदिरों में जाकर वे यह संदेश दे रही हैं कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बाहरी नजरिये से नहीं समझा जा सकता।

    इस रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। तृणमूल के अन्य नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर चुनावी विमर्श को धार्मिक मुद्दों से हटाकर विकास, अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रतीकों, पहचान और विचारधाराओं की टकराहट का रूप ले चुका है, जहां हर पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

  • हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत

    हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत


    मुंबई।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में कहा कि हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है। भाषा, भूषा, खान-पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं। संघ प्रमुख डॉ. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित “नए क्षितिज” कार्यक्रम के दूसरे सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा, भूषा, खान पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं, ऐसा कहने से आपको कुछ भी छोडऩा नहीं होगा और न ही आपकी पहचान संकट नहीं पैदा होगा। इसके लिए संवाद की आवश्यकता होती है। हिन्दू-मुस्लिम एक हैं, यह नारा ही गलत है। हम एक ही थे। वह भूल गए उसे याद दिलाने की आवश्यकता है। एक कालखंड में उन्होंने पूजा-पद्धति बदली, अब उसे छोड़ नहीं सकते। लेकिन अपना मूल याद कर अपनी संस्कृति के आधार पर जुड़ तो सकते हैं। संघ की शाखा में आकर एक घंटे शरीर मन बुद्धि से व्यायाम करना और शेष 23 घंटे अपनी सुविधा और सामथ्र्य के अनुसार अपने समाज के लिए कार्य करना ,यह भी एक मार्ग है। भारत अपने स्वत्व के आधार पर सब प्रकार से खड़ा हो, इसके लिए आप कुछ भी कर रहे हैं तो एक प्रकारसे आप संघ का ही कार्य कर रहे हैं। संघ के बारे में संघ को देखकर मन और मत बनाइये, यही मेरा आग्रह है। सही स्रोत से संघ को समझिए। संघ की शाखा, संघ के कार्यक्रम, संघ स्वयंसेवकों के आचरण और उनके घर से आपको संघ समझ में आएगा। तथ्यों के आधार पर यदि आप हमारा विरोध करेंगे तो भी हम आपका स्वागत करेंगे।

    सर संघचालक ने कहा कि ग्राम विकास, गोसेवा आदि सर्वमान्य कार्यों से व्यवस्था परिवर्तन भले न हो पर इससे समाज में परिवर्तन आता है। समाज की सज्जन शक्ति को अच्छी तरीके से सक्रिय होने की आवश्यकता है और सभी एक दूसरे के पूरक हों। समाज की सज्जन शक्ति की सक्रियता और उनके बीच समन्वय के लिए ही पंच परिवर्तन का अभियान है। सामाजिक समरसता अर्थात अपने समाज के बीच बिना किसी भेदभाव के अपने संचार के क्षेत्र में सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सभी वर्गों में अपने एक मित्र होने चाहिए। इसके लिए अलग से कुछ खर्च नहीं लगता और अलग से अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता। अपने घर के निकट चर्मकार का कार्य करने वाला या आपका माली ही हो, उसके साथ अपने कुटुम्ब के सदस्यों के समान व्यवहार करना, इससे अपने आप संदेश जाएगा। बच्चों के भीतर परिवार के संस्कार, यह 12 वर्ष की आयु तक दिए जाते हैं तो यह जीवन भर प्रभावी होते हैं। वर्तमान समय में परिवार के सभी सदस्य मोबाइल में अधिक समय बिताते हैं। आवश्यकता है कि सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ सामूहिक चर्चा करना, साथ ही भोजन करना। सभी को प्रामाणिकता और निस्वार्थ बुद्धि से अपने समाज की सेवा करना और उसकी चर्चा परिवार में करना, इसे मंगल संवाद कहते हैं। ऐसा करने से परिवार और समाज में बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। अपने घर की चारदीवारी के बीच भाषा, भूषा, भजन, हवन, भोजन, भ्रमण अपना ही होना चाहिए। अपनी भाषा में हस्ताक्षर से ही शुरू करें। उसके लिए किसी दूसरी या विदेशी भाषा की आवश्यकता क्या है। पंच परिवर्तन की बात स्वयंसेवकों ने अपने घरों में शुरू कर दी है। यह एक दिन में नहीं होगा लेकिन यह एक दिन अवश्य होगा। हम सम्पूर्ण समाज को भी पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों को अपनाने का आग्रह करते हैं।

  • राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा

    राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा


    पुणे/अयोध्या। प्रसिद्ध ओजस्वी वक्ता साध्वी ऋतंभरा ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता पर बड़ा बयान दिया है। पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का संघर्ष एक ऐसे संकल्प की परिणति थी जिसका कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सूचना क्रांति और सोशल मीडिया का बोलबाला है लेकिन राम मंदिर आंदोलन उस समय सफल हुआ जब ये आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।इसका कारण यह था कि आंदोलन का संदेश सीधे लोगों के दिलों में गूँज रहा था।साध्वी ऋतंभरा ने मानवीय इच्छाशक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारा काम राम जी के कार्य के लिए समर्पित है। मानवीय संकल्प में पर्वतों को उखाड़ फेंकने और पत्थर को पानी में बदल देने की शक्ति होती है बशर्ते वह आत्मसंयम और चरित्र की प्रमाणिकता पर आधारित हो।

    राष्ट्र की मजबूती चरित्र और एकजुटता में

    साध्वी ने समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक दृढ़ संकल्पित समाज क्या हासिल कर सकता है। उनके अनुसार किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भौतिक संपदा में नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और आंतरिक विभाजनों को दूर करने की क्षमता में निहित होती है। उन्होंने दमितों और वंचितों की रक्षा के लिए समाज से आगे आने का आह्वान भी किया। अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ का उल्लास: 29 दिसंबर से शुरू होंगे कार्यक्रम एक ओर जहाँ साध्वी ऋतंभरा ने आंदोलन की वैचारिक विजय को रेखांकित किया वहीं दूसरी ओर अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के पांच दिवसीय भव्य आयोजन की रूपरेखा जारी कर दी गई है।

    आयोजन की मुख्य विशेषताएं

    प्रारंभ: राम मंदिर ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र के अनुसार समारोह की शुरुआत 29 दिसंबर से होगी।मुख्य अतिथि: 31 दिसंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करेंगे।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में नियमित रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन होगा।समय: सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन शाम से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलेंगे।यह आयोजन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद के महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है जिसमें देश भर से श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।