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  • टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    नई दिल्ली ।टी20 क्रिकेट के आधुनिक दौर में बल्लेबाजी के तौर-तरीकों और रन बनाने की गति में व्यापक परिवर्तन आया है। पावर हिटिंग, उन्नत फिटनेस और नई रणनीतियों के कारण खेल का स्वरूप काफी आक्रामक हो चुका है। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट के लंबे इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे लगभग तीन दशकों के बीत जाने के बाद भी कोई देश पार नहीं कर सका है। वर्ष 1997 में श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम द्वारा भारत के विरुद्ध कोलंबो में बनाया गया 952 रनों का ऐतिहासिक स्कोर आज भी सर्वोच्च बना हुआ है।

    कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में आयोजित उस ऐतिहासिक टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 537 रनों का विशाल स्कोर बनाकर पारी घोषित की थी। भारत की ओर से कप्तान सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू ने शानदार शतकीय पारियां खेली थीं। उस दौर में 500 से अधिक रनों का स्कोर मैच में बेहद मजबूत स्थिति माना जाता था, किंतु इसके जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी में सलामी बल्लेबाज सनत जयसूर्या ने 340 रनों की मैराथन पारी खेली, जबकि रोशन महानामा ने 225 रनों का योगदान दिया। इन दोनों दिग्गजों ने दूसरे विकेट के लिए 576 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई, जो आज भी टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त मध्यक्रम के प्रमुख बल्लेबाज अरविंद डी सिल्वा ने भी 126 रन बनाए। श्रीलंकाई टीम ने 271 ओवरों की लंबी बल्लेबाजी के बाद 6 विकेट पर 952 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की थी।

    क्रिकेट आंकड़ों के दृष्टिकोण से श्रीलंका का यह स्कोर टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर है। इस सूची में इंग्लैंड द्वारा बनाया गया 903/7 का स्कोर दूसरे स्थान पर आता है, जबकि हाल के वर्षों में इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ 823/7 का स्कोर बनाकर इस आंकड़े के समीप पहुंचने का प्रयास अवश्य किया था। हालांकि 952 रनों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि पिछले 29 वर्षों से एवरेस्ट की भांति अडिग खड़ी है।

    वर्तमान टी20 युग में यह प्रश्न बार-बार उठता है कि क्या आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में कोई टीम 1000 रनों के तिलिस्म को तोड़ सकती है। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, 1000 रन के आंकड़े को छूने के लिए केवल तेज गति से रन बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अत्यंत सपाट पिच, दो से तीन बड़ी और लंबी साझेदारियों तथा विपक्षी गेंदबाजों के पूरी तरह प्रभावहीन रहने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही टीम के कप्तान को व्यक्तिगत या टीम रिकॉर्ड तथा मैच के परिणाम के बीच संतुलन बनाना होगा। मध्य प्रदेश सहित देश भर के खेल प्रेमी इस रिकॉर्ड के महत्व को भली-भांति समझते हैं।

    अधिकांश अवसरों पर टेस्ट मैच जीतने के लिए कप्तानों को समय रहते पारी घोषित करनी पड़ती है, ताकि विपक्षी टीम के 20 विकेट निकाले जा सकें। ऐसे में केवल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से बल्लेबाजी जारी रखना मैच के नतीजे को जोखिम में डाल सकता है। श्रीलंका ने 1997 में यह दर्शाया था कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी की क्या सीमाएं हो सकती हैं। आज के आक्रामक दौर में भी 952 रनों की यह क्रिकेटीय दीवार पूरी मजबूती से खड़ी है।