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  • एचआईवी से बचाव के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन को भारत में मंजूरी, ज्यादा जोखिम वाले वयस्कों और किशोरों को मिलेगा लाभ

    एचआईवी से बचाव के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन को भारत में मंजूरी, ज्यादा जोखिम वाले वयस्कों और किशोरों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली ।एचआईवी संक्रमण से बचाव की दिशा में भारत में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। देश में पहली बार एचआईवी संक्रमण के ज्यादा जोखिम वाले लोगों के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है। यह इंजेक्शन एचआईवी-1 संक्रमण से बचाव के लिए प्री-एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस यानी PrEP के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की विशेषज्ञ समितियों ने इसके निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रस्ताव पर अहम सिफारिशें की हैं।

    लेनाकैपाविर का विकल्प खास तौर पर उन वयस्कों और किशोरों के लिए प्रस्तावित है जिनका वजन कम से कम 35 किलोग्राम है और जिनमें एचआईवी-1 संक्रमण का खतरा अधिक है। इसका उद्देश्य संक्रमण होने से पहले शरीर में दवा की मौजूदगी के जरिए एचआईवी के जोखिम को कम करना है। ऐसे लोगों के लिए यह रोकथाम के उपलब्ध विकल्पों में एक नया विकल्प जोड़ सकता है।

    हालांकि, लेनाकैपाविर शुरू करने से पहले एचआईवी जांच का निगेटिव होना जरूरी होगा। इसका कारण यह है कि PrEP का इस्तेमाल संक्रमण से पहले बचाव के लिए किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में पहले से एचआईवी संक्रमण मौजूद है, तो उसके लिए केवल रोकथाम वाली दवा का इस्तेमाल उचित उपचार का विकल्प नहीं माना जाता।

    एचआईवी से बचाव के लिए PrEP उन लोगों को दिया जाता है जिनमें संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। जोखिम की स्थिति व्यक्ति की परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी कारकों पर निर्भर करती है। ऐसे लोगों में चिकित्सकीय मूल्यांकन और एचआईवी जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि PrEP उनके लिए उपयुक्त है या नहीं।

    लेनाकैपाविर एक लंबे समय तक असर करने वाली एंटीरेट्रोवायरल दवा है। इसकी खासियत यह है कि इसे नियमित रूप से रोजाना गोली लेने के बजाय लंबे अंतराल पर दिए जाने वाले इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि एचआईवी रोकथाम के क्षेत्र में इस दवा को महत्वपूर्ण विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें भारत में एचआईवी रोकथाम की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। लंबे समय तक असर करने वाले विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिन्हें रोजाना दवा लेने में परेशानी होती है या नियमित रूप से दवा लेना व्यावहारिक रूप से कठिन लगता है।

    हालांकि लेनाकैपाविर को एचआईवी का इलाज या वैक्सीन नहीं माना जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल संक्रमण से पहले बचाव के लिए किया जाता है। इंजेक्शन लेने वाले व्यक्ति को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एचआईवी जांच और आवश्यक स्वास्थ्य निगरानी करानी होगी। इसके साथ सुरक्षित व्यवहार और अन्य उपलब्ध रोकथाम उपायों की भूमिका भी बनी रहेगी।

    इसी प्रक्रिया के दौरान अन्य दवाओं से जुड़े प्रस्तावों पर भी विशेषज्ञ समिति ने विचार किया है। एटॉपिक डर्मेटाइटिस के हल्के से मध्यम मामलों में गैर-प्रतिरक्षा-कमजोर वयस्कों के लिए रक्सोलिटिनिब 1.5 प्रतिशत क्रीम के निर्माण और बिक्री की अनुमति की सिफारिश की गई है। इसके अलावा पेट और आंत से जुड़ी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली रिफैक्सिमिन को 400 और 550 मिलीग्राम के सैशे में उपलब्ध कराने की दिशा में भी सिफारिश की गई है।

    लेनाकैपाविर की मंजूरी से एचआईवी रोकथाम के क्षेत्र में एक नया चिकित्सकीय विकल्प जुड़ा है। अब इसके प्रभावी और सुरक्षित इस्तेमाल के लिए निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया, एचआईवी जांच और पात्र लोगों की पहचान महत्वपूर्ण होगी। ज्यादा जोखिम वाले लोगों तक रोकथाम के प्रभावी विकल्प पहुंचाना एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित करने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा।

  • एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव

    एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली । पंजाब में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि राज्य को संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। बीते पांच महीनों के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के आठ जिलों से हर महीने करीब 2500 एचआईवी जांच के नमूने राजकीय मेडिकल कॉलेज जीएमसी जम्मू की अत्याधुनिक वायरोलॉजी लैब भेजे जा रहे हैं। यहां जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जिलों को भेजी जाती है। लगातार बढ़ती जांच और सामने आ रहे मामलों ने संकेत दिया है कि संक्रमण की चुनौती अब पहले से कहीं अधिक गंभीर होती जा रही है।

    जीएमसी जम्मू की माइक्रोबायोलॉजी लैब को इस वर्ष फरवरी में नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की मान्यता मिलने के बाद इसकी जांच क्षमता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने वाली यह प्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त वायरोलॉजी लैब है। इसी वजह से पंजाब के होशियारपुर पठानकोट जालंधर रोपड़ मोगा बटाला नवांशहर और कपूरथला जैसे जिलों के एचआईवी जांच नमूनों की जिम्मेदारी भी इसी लैब को सौंपी गई है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जांच रिपोर्टों में सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि संक्रमण के मामलों में बड़ी संख्या 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों का इंजेक्शन के माध्यम से सेवन संक्रमण फैलने का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। इसके साथ ही असुरक्षित यौन संबंध और समय पर जांच नहीं कराना भी संक्रमण बढ़ने की अहम वजह मानी जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि जीएमसी जम्मू में केवल सैंपलों की जांच की जाती है जबकि संक्रमित मरीजों का उपचार पंजाब में ही किया जाता है। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित स्वास्थ्य विभाग को भेज दी जाती है ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

    एनएबीएल मान्यता मिलने के बाद जीएमसी जम्मू की जांच क्षमता में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 90 नमूनों की जांच हो पाती थी वहीं अब आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं की मदद से 24 घंटे में 1200 से अधिक नमूनों की जांच संभव हो गई है। इससे न केवल जम्मू कश्मीर बल्कि दूसरे राज्यों के सैंपलों की भी तेजी से जांच की जा रही है। भविष्य में नई मशीनों के जुड़ने के बाद यह क्षमता और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए समय पर जांच जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही नशे की रोकथाम नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यदि संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को समय रहते नहीं रोका गया तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार स्वास्थ्य विभाग और समाज सभी को मिलकर जागरूकता अभियान तेज करने और जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष ध्यान देना होगा।

  • HIV की चपेट में देश का यह राज्य… प्रसार दर 2.75 प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक

    HIV की चपेट में देश का यह राज्य… प्रसार दर 2.75 प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक


    नई दिल्ली।
    मिजोरम (Mizoram) में निवारक उपायों (Preventive measures) में सुधार के बावजूद वयस्कों में HIV प्रसार दर देश में सबसे अधिक 2.75 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 0.20 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। मिजोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (Mizoram State AIDS Control Society) की परियोजना निदेशक डॉ. जेन आर राल्टे ने कहा कि राज्य में 2018 से एचआईवी संक्रमण के नए मामलों (New cases of HIV infection) में गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि मिजोरम राष्ट्रीय एचआईवी रोकथाम रैंकिंग में वर्ष 2025-26 में दो पायदान चढ़कर तीसरे स्थान पर आ गया है जबकि 2024-25 में यह पांचवें स्थान पर था।

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के अनुसार, एड्स निवारक उपायों और इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों के मामले में मिजोरम ने अभूतपूर्व प्रगति की है। नए एचआईवी संक्रमण के मामलों में साल 2018 से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘इस सकारात्मक रुझान के बावजूद, मिजोरम अब भी देश में सबसे अधिक वयस्क एचआईवी प्रसार दर (2.75 प्रतिशत) वाला राज्य बना हुआ है, जो 0.20 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।’ राल्टे ने बताया कि अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच 1.4 लाख से अधिक रक्त नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से कम से कम 3,257 में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इन संक्रमित व्यक्तियों में 179 गर्भवती महिलाओं समेत 953 महिलाएं शामिल थीं।


    अब तक कुल 33,781 मामले सामने आए

    डॉ. राल्टे ने बताया कि एचआईवी के सर्वाधिक मामले 25-34 वर्ष के आयु वर्ग में पाए गए हैं। मिजोरम में एचआईवी का पहला मामला अक्टूबर 1990 में सामने आया था और अब तक कुल 33,781 मामले सामने आ चुके हैं। एमएसएसीएस के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल राज्य में लगभग 26,321 लोग HIV से संक्रमित हैं। राल्टे ने यह जानकारी भी दी कि अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच सामने आए 3,257 नए एचआईवी मामलों में से 70.4 प्रतिशत में संक्रमण का कारण यौन संबंध था। उन्होंने बताया कि इसके अलावा मादक पदार्थों का सेवन करने और विभिन्न लोगों द्वारा एक ही सुई से इंजेक्शन लगाने के कारण 27.3 प्रतिशत, माता-पिता से बच्चों में संक्रमण फैलने के 1.8 प्रतिशत, और अज्ञात कारणों से संक्रमण फैलने के 0.8 प्रतिशत मामले सामने आए।


    HIV संक्रमण की उच्च दर को करो नियंत्रित

    स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने कहा कि राज्य सरकार HIV संक्रमण की उच्च दर को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि मिजोरम में 14 एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां फिलहाल 18,355 संक्रमित मरीजों को मुफ्त उपचार किया जा रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार अब गिरजाघरों के साथ मिलकर विवाह से पहले एचआईवी का परीक्षण कराने के लिए जागरूकता फैलाने पर विचार कर रही है ताकि लोग अपनी सेहत को लेकर अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनें।