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  • अल-बद्र आतंकी हमजा बुरहान के जनाजे में दिखे मोस्ट वॉन्टेड चेहरे, तस्वीरों ने पाकिस्तान की पोल खोली

    अल-बद्र आतंकी हमजा बुरहान के जनाजे में दिखे मोस्ट वॉन्टेड चेहरे, तस्वीरों ने पाकिस्तान की पोल खोली




    नई दिल्ली। पाकिस्तान एक बार फिर आतंकियों को पनाह देने के आरोपों के घेरे में आ गया है। अल-बद्र कमांडर हमजा बुरहान के जनाजे से सामने आई तस्वीरों ने इस्लामाबाद के उन दावों की पोल खोल दी, जिनमें वह अपनी जमीन पर आतंकियों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मारे गए हमजा बुरहान के अंतिम संस्कार में कई मोस्ट वॉन्टेड आतंकी खुलेआम नजर आए, जबकि पूरे इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात थी।

    जानकारी के मुताबिक, पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हमजा बुरहान की शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जा रहा है कि हमजा एक शैक्षणिक संस्थान के बाहर मौजूद था, जहां हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। सिर में कई गोलियां लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    हमजा बुरहान, जिसे “डॉक्टर” कोडनेम से भी जाना जाता था, मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। कई साल पहले वह सीमा पार पाकिस्तान चला गया था और बाद में प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-बद्र का बड़ा चेहरा बन गया। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह कश्मीरी युवाओं की भर्ती, आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और सीमा पार आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

    हमजा के जनाजे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इनमें हिज्बुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र चीफ बख्त जमीन खान साफ तौर पर नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में भारी हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि अगर पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, तो आखिर इन मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों को इतनी सुरक्षा और खुली मौजूदगी कैसे मिली।

    सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों की मौजूदगी की भी चर्चा है। यही वजह है कि भारत समेत कई देश लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं। हमजा बुरहान का नाम 2019 के पुलवामा हमले से भी जुड़ा रहा है, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे।

    हमजा की मौत और उसके जनाजे में आतंकियों की मौजूदगी ने एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर दोहरी नीति को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।

  • पाकिस्तान में ‘टारगेट किलिंग’ से दहशत: भारत विरोधी आतंकियों का एक हफ्ते में खात्मा, खुफिया नेटवर्क पर उठे सवाल

    पाकिस्तान में ‘टारगेट किलिंग’ से दहशत: भारत विरोधी आतंकियों का एक हफ्ते में खात्मा, खुफिया नेटवर्क पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकी संगठनों से जुड़े कमांडरों और कार्यकर्ताओं की रहस्यमयी मौतों ने सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर हिजबुल, लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कम से कम तीन आतंकियों की हत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत सामने आई है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

    सबसे ताजा मामला हिजबुल आतंकी सज्जाद अहमद का है, जिसे इस्लामाबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। सज्जाद लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय माना जाता था और उसे हिजबुल का स्थानीय कमांडर बताया जा रहा था। उसकी मौत की पुष्टि उसके पड़ोसी द्वारा की गई, जबकि आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

    लगातार निशाने पर आतंकी नेटवर्क
    इसके कुछ दिन पहले जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर सलमान अजहर की मौत की खबर आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी मौत एक संदिग्ध सड़क हादसे में हुई, हालांकि कई सुरक्षा विशेषज्ञ इसे सामान्य घटना मानने से इनकार कर रहे हैं। सलमान को जैश प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था और संगठन की कई अहम गतिविधियों की जिम्मेदारी उसके पास थी।

    इसी तरह, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े शेख यूसुफ अफरीदी की भी खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा मार्च में मसूद अजहर के भाई ताहिर अजहर की भी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो चुकी है।

    20 से अधिक मौतों का पैटर्न
    सूत्रों के अनुसार 2019 के बाद से पाकिस्तान में इस तरह की टारगेट किलिंग की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। अब तक 20 से अधिक आतंकी या तो मारे जा चुके हैं या संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि इन मामलों में पाकिस्तान सरकार या उसकी खुफिया एजेंसियां कोई स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करतीं।

    सुरक्षा तंत्र पर सवाल
    विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाएं पाकिस्तान के भीतर चल रहे गुप्त संघर्ष और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों की ओर इशारा करती हैं। आतंकियों के खिलाफ हो रही इन लगातार घटनाओं ने एक अनदेखे नेटवर्क की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पाकिस्तान में लश्कर और जैश जैसे संगठनों से जुड़े हजारों आतंकी सक्रिय बताए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में इनकी अचानक हो रही मौतें क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी असर डाल सकती हैं।

    रहस्य बरकरार
    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन लगातार हो रही हत्याओं के पीछे कौन है और क्या यह किसी संगठित रणनीति का हिस्सा है या आंतरिक संघर्ष का परिणाम। पाकिस्तान सरकार की चुप्पी ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है।