Tag: Hockey

  • पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का असर एक बार फिर खेल आयोजनों पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और वहां के गृह मंत्रालय ने जनवरी 2027 में भारत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में अपनी 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की टीम को भेजने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के कारण पाकिस्तान की वेटरंस क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इससे पहले पाकिस्तान की पुरुष राष्ट्रीय हॉकी टीम को भी भारत में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भेजने से इनकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में भाग लेने के लिए पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने अपनी टीम भेजने की तैयारी की थी। संघ के प्रमुख फवाद एजाज के अनुसार, आयोजकों को टीम का नाम वापस लेने की आधिकारिक जानकारी दे दी गई है, ताकि वे टूर्नामेंट के लिए किसी दूसरी टीम की व्यवस्था कर सकें। पाकिस्तान की टीम को अनुमति नहीं मिलने से आयोजकों को अब भाग लेने वाली टीमों की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    फवाद एजाज ने बताया कि भारतीय आयोजकों और मेजबान देश की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वीजा तथा उच्चस्तरीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मांगा था। हालांकि, अनुमति नहीं मिलने के कारण टीम भारत आने की तैयारी आगे नहीं बढ़ा सकी।

    बताई गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री और क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी ने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों का हवाला देते हुए टीम को भारत जाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके चलते पाकिस्तान की टीम अगले साल होने वाले इस टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकेगी। पाकिस्तान ने पिछला वेटरंस विश्व कप श्रीलंका में जीता था। ऐसे में आगामी प्रतियोगिता से उसका बाहर रहना टीम के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है।

    क्रिकेट के अलावा हॉकी में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ ने हाल ही में संवेदनशील द्विपक्षीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी पुरुष राष्ट्रीय टीम को भारत भेजने से इनकार कर दिया था। इसके बाद एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बांग्लादेश को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव का प्रभाव केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर भी पड़ रहा है।

    पाकिस्तान पहले भी भारत में आयोजित कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से हट चुका है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उसने तमिलनाडु में आयोजित जूनियर विश्व कप और जूनियर एशिया कप से भी अपना नाम वापस लिया था। हालांकि, अलग-अलग प्रतियोगिताओं में फैसलों के पीछे परिस्थितियां और आधिकारिक कारण अलग हो सकते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय खेल संबंध लंबे समय से प्रभावित हैं। वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों में बड़ा बदलाव आया। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने जुलाई 2008 में एशिया कप के लिए पाकिस्तान का दौरा किया था। वहीं, द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने के लिए भारतीय टीम वर्ष 2005-06 में पाकिस्तान गई थी।

    वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों की क्रिकेट टीमें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और एशियाई क्रिकेट परिषद के बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में आमने-सामने आती हैं। ऐसे मुकाबले भी अक्सर संयुक्त अरब अमीरात या श्रीलंका जैसे तटस्थ स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं। द्विपक्षीय तनाव के कारण नियमित घरेलू दौरे और श्रृंखलाएं बहाल नहीं हो पाई हैं।

    जनवरी 2027 के मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान की अनुपस्थिति और हॉकी टीम को भारत नहीं भेजने के फैसले से दोनों देशों के खेल संबंधों में जारी चुनौतियां फिर सामने आई हैं। अब आयोजकों को क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए वैकल्पिक टीम की व्यवस्था करनी होगी, जबकि दोनों देशों के बीच भविष्य में खेल आयोजनों में भागीदारी की स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

  • एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, कबड्डी में दो गोल्ड समेत एक दिन में जीते 7 पदक

    एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, कबड्डी में दो गोल्ड समेत एक दिन में जीते 7 पदक


    नई दिल्ली । एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। 26 सितंबर का दिन भारत के लिए खास रहा, जब खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक अपने नाम किए। इनमें दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ भारत की कुल पदक संख्या बढ़कर 30 हो गई। शनिवार का सबसे बड़ा आकर्षण कबड्डी रहा, जहां भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

    पुरुष कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 40-34 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मुकाबला शुरुआत से ही कड़ा रहा और ईरानी टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को लगातार चुनौती दी। हालांकि, निर्णायक समय में भारतीय टीम ने बेहतर खेल दिखाया और मुकाबले को अपने पक्ष में कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    महिला कबड्डी टीम ने भी फाइनल में ईरान को 37-34 से मात दी। भारतीय महिलाओं ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और करीबी मुकाबले में जीत हासिल कर अपना खिताब बरकरार रखा। महिला टीम की इस सफलता से भारत को दिन का दूसरा स्वर्ण पदक मिला।

    एथलेटिक्स में तेजिंदरपाल सिंह तूर ने शॉटपुट में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। उनके प्रदर्शन से भारत को एथलेटिक्स में महत्वपूर्ण पदक मिला। पुरुषों की मैराथन में सावन बारवाल ने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए रजत पदक हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि लंबी दूरी की दौड़ में भारत के लिए महत्वपूर्ण रही।

    शूटिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में तिलोत्तमा सेन, विदर्सा के. विनोद और आशी चौकसी की तिकड़ी ने रजत पदक जीता। भारतीय टीम ने कुल 1,763 अंक हासिल किए और स्वर्ण जीतने वाली चीन की टीम से 10 अंक पीछे रही। चीन ने 1,773 अंक बनाए।

    400 मीटर दौड़ में प्राची चौधरी ने 53.21 सेकंड का समय निकालकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कांस्य पदक जीता। उन्होंने फाइनल में बेहतर रणनीति के साथ दौड़ पूरी की और कई ऊंची रैंकिंग वाली प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए पोडियम पर जगह बनाई।

    स्क्वैश में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की भारतीय जोड़ी ने मिश्रित युगल सेमीफाइनल में हांगकांग की ली का यी और तांग मिंग होंग की जोड़ी को कड़ी चुनौती दी। भारतीय जोड़ी को 1-2 से हार मिली, लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उन्होंने कांस्य पदक पक्का कर लिया।

    हॉकी में भी भारतीय पुरुष टीम ने जापान को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। अभिषेक ने शुरुआती दौर में गोल कर भारत को बढ़त दिलाई, जबकि कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर टीम की जीत सुनिश्चित की। इस तरह 26 सितंबर को कबड्डी के दो स्वर्ण समेत सात पदकों के साथ भारत की पदक तालिका और मजबूत हुई।

  • India Hockey Team: अर्जेंटीना ने दूसरे राउंड में हराया, भारतीय टीम अब सातवें स्थान के लिए बेल्जियम से भिड़ेगी

    India Hockey Team: अर्जेंटीना ने दूसरे राउंड में हराया, भारतीय टीम अब सातवें स्थान के लिए बेल्जियम से भिड़ेगी

    नई दिल्ली ।भारतीय पुरुष हॉकी टीम का 2026 विश्व कप में खिताब जीतने का सपना अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 की हार के साथ समाप्त हो गया। दूसरे राउंड के इस महत्वपूर्ण मुकाबले में भारतीय टीम को सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए जीत की जरूरत थी, लेकिन अर्जेंटीना ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाते हुए मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। भारत ने अंतिम चरण में वापसी की कोशिश की, लेकिन शुरुआती नुकसान की भरपाई नहीं कर सका।

    मुकाबले की शुरुआत भारतीय टीम के लिए अच्छी नहीं रही। अर्जेंटीना ने शुरुआती मिनटों में ही गोल करके भारत पर दबाव बना दिया। भारतीय खिलाड़ियों को अपनी रक्षापंक्ति संभालने और गेंद पर नियंत्रण बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अर्जेंटीना ने लगातार हमले किए और भारतीय सर्किल में कई बार प्रवेश करते हुए गोल करने के अवसर बनाए।

    अर्जेंटीना ने इसके बाद अपनी बढ़त को और मजबूत किया। भारतीय टीम को लगातार दो गोल का नुकसान झेलना पड़ा, जिससे मुकाबले में वापसी की चुनौती बढ़ गई। भारत ने जवाबी हमलों के जरिए दबाव बनाने का प्रयास किया और सुखजीत सिंह ने गोल कर टीम की उम्मीदों को कुछ हद तक जीवित रखा। हालांकि अर्जेंटीना ने अपनी आक्रामक रणनीति में कोई बड़ी कमी नहीं आने दी।

    दूसरे और तीसरे क्वार्टर में भी अर्जेंटीना का दबदबा बना रहा। भारतीय डिफेंस को लगातार हमलों का सामना करना पड़ा। अर्जेंटीना ने पेनल्टी कॉर्नर और तेज आक्रमण का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए भारतीय गोलपोस्ट पर खतरा बनाए रखा। टॉमस डोमेन ने भी गोल कर अर्जेंटीना की बढ़त को मजबूत किया और भारत के लिए मुकाबला और कठिन हो गया।

    अंतिम क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रामक रुख अपनाया। सुखजीत सिंह ने अपना दूसरा गोल किया, जबकि हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदलकर भारत के स्कोर को तीन तक पहुंचाया। इन गोलों के बाद भारतीय टीम ने दबाव बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन अर्जेंटीना की बढ़त इतनी मजबूत थी कि मुकाबले का परिणाम बदलना संभव नहीं हो सका।

    अर्जेंटीना की ओर से जोआक्विन टोस्कानी ने दो गोल किए, जबकि निकोलस डेला टोरे और टॉमस डोमेन ने भी टीम के लिए महत्वपूर्ण गोल दागे। अर्जेंटीना ने पूरे मुकाबले में आक्रमण और रक्षात्मक संयोजन के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखा। भारत को कई मौकों पर गोल करने के अवसर मिले, लेकिन उन्हें निर्णायक परिणाम में बदलने में टीम सफल नहीं रही।

    इस हार के साथ भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद पूरी तरह समाप्त हो गई। दूसरे राउंड में भारतीय टीम के लिए मुकाबले बेहद चुनौतीपूर्ण रहे और लगातार हार ने उसकी स्थिति कमजोर कर दी। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा था, लेकिन टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    विश्व कप में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद भारतीय टीम के सामने अब टूर्नामेंट का समापन बेहतर स्थिति में करने की चुनौती है। भारत सातवें और आठवें स्थान के लिए मुकाबला खेलेगा, जहां उसका सामना बेल्जियम से होना है। टीम की कोशिश इस मुकाबले में जीत दर्ज कर विश्व कप अभियान का सकारात्मक अंत करने की होगी।

  • हॉकी : फाइनल में इंग्लैंड हराया, फिर भी भारत ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई

    हॉकी : फाइनल में इंग्लैंड हराया, फिर भी भारत ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई


    हैदराबाद।
    एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 क्वालिफायर्स के फाइनल में भारत की महिला हॉकी टीम को इंग्लैंड के हाथों 0-2 की हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस हार के बावजूद भारतीय टीम ने आगामी हॉकी वर्ल्ड कप, बेल्जियम और नीदरलैंड्स 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया।

    जीएमसी बालयोगी हॉकी ग्राउंड में खेले गए मैच में इंग्लैंड की ग्रेस बाल्सडॉन (13’) और एलिजाबेथ नील (43’) ने गोल किए, जबकि भारतीय टीम कोई गोल नहीं कर सकी।

    भारत ने मैच की शुरुआत आक्रामक रूप से की। नवीत कौर की मदद से पहले दो मिनट में ही भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन उनका ड्रैग फ्लिक इंग्लैंड की गोलकीपर ने रोका। पहले क्वार्टर के अंत में इंग्लैंड ने पेनल्टी कॉर्नर का फायदा उठाते हुए ग्रेस बाल्सडॉन ने गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई।

    दूसरे क्वार्टर में खेल समान रूप से संतुलित रहा। भारत ने पहले हाफ में आठ बार सर्कल में प्रवेश किया और इंग्लैंड की रक्षा को चुनौती दी, लेकिन गोलकीपर पर दबाव डालने में सफल नहीं रही। इंग्लैंड ने अपनी एक गोल की बढ़त को पहले हाफ के अंत तक बनाए रखा।

    तीसरे क्वार्टर में इंग्लैंड ने खेल की गति को नियंत्रित किया और गेंद पर कब्जा बनाए रखा। इस दौरान भारत को कुछ मौके मिले, लेकिन वे गोल में बदल नहीं सके। एलिजाबेथ नील का गोल भारतीय डिफेंडर से टकराने के बाद गोलपोस्ट में गया, जिससे इंग्लैंड की बढ़त 2-0 हो गई।

    चौथे क्वार्टर में भारत लगातार गोल की तलाश में आगे बढ़ता रहा और अंतिम क्षणों में पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया। लेकिन टीम गोल नहीं कर पाई और इंग्लैंड ने 2-0 की जीत दर्ज की।

    हालांकि इस हार के बावजूद भारतीय महिला टीम ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर सभी भारतीय हॉकी प्रशंसकों के लिए उत्साहजनक संदेश दिया। कोच और खिलाड़ियों ने मैच के दौरान अनुशासन और टीम वर्क का शानदार प्रदर्शन किया।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

     
    मध्य प्रदेश /मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एफ.आई.एच. हॉकी पुरुष जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय जूनियर हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने पर टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह उपलब्धि न केवल भारतीय हॉकी के लिए गौरवपूर्ण है बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपलब्धि ने दिखा दिया है कि समर्पण अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा -यह अभूतपूर्व उपलब्धि हमारे युवा खिलाड़ियों की मेहनत संघर्ष और टीम भावना का परिणाम है। जूनियर्स टीम ने हर मुकाबले में अपने कौशल और धैर्य का लोहा मनवाया और विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।-

    उन्होंने कहा कि यह पदक केवल एक जीत नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए नई प्रेरणा और उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे इसी उत्साह और मेहनत के साथ आगे बढ़ें और भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर और ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की उपलब्धियों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएँ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव सुनिश्चित करने में लगातार प्रयास कर रही है।एफ.आई.एच. जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय टीम ने कठिन मुकाबलों के बाद कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम ने सेमीफाइनल में चुनौतीपूर्ण मैचों का सामना किया और हार के बावजूद अपने आत्मविश्वास और सामूहिक रणनीति से कांस्य पदक जीतने में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि ने खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीम के प्रत्येक सदस्य का नाम लेते हुए उनके योगदान की सराहना की और कहा कि उनके खेल में अनुशासन और समर्पण ने ही टीम को इस सफलता तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि यह जीत भारतीय हॉकी के उज्जवल भविष्य की ओर संकेत करती है और आने वाले वर्षों में देश की हॉकी को और मजबूत बनाने में मदद करेगी। डॉ. यादव ने कहा कि सरकार खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केंद्र और अकादमिक कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके तहत खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाले कोचिंग आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में और अधिक युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस सफलता ने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है बल्कि पूरे देश में खेलों के प्रति उत्साह और विश्वास को भी बढ़ाया है। उन्होंने टीम के कोच और सपोर्ट स्टाफ को उनके समर्पण के लिए धन्यवाद दिया जिन्होंने खिलाड़ियों को हर स्थिति में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से कहाआपकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। यह दिखाती है कि मेहनत धैर्य और टीम भावना के साथ किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। हमें आप पर गर्व है और हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।-इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी और अन्य खेलों के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों की सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है और इसे राष्ट्रीय गौरव के रूप में देखा जाना चाहिए।