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  • ओम पुरी जयंती पर याद आया संघर्ष का वह दौर, जब ढाबे पर बर्तन मांजने वाले इस अभिनेता ने दुनिया में बनाई पहचान

    ओम पुरी जयंती पर याद आया संघर्ष का वह दौर, जब ढाबे पर बर्तन मांजने वाले इस अभिनेता ने दुनिया में बनाई पहचान

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ओम पुरी की जयंती 18 अक्टूबर को मनाई जाती है। 18 अक्टूबर 1950 को हरियाणा के अंबाला में जन्मे ओम पुरी ने अपने जीवन में गरीबी, पारिवारिक परेशानियों और संघर्ष का सामना किया। इसके बावजूद उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी प्रभावशाली अदाकारी के दम पर उन्होंने न केवल हिंदी फिल्मों में नाम कमाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनका सफर उन कलाकारों में गिना जाता है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत से अभिनय के क्षेत्र में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया।

    ओम पुरी का जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय रेलवे में काम करते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके बचपन पर एक बड़ी परेशानी तब आई, जब वह लगभग छह साल के थे। उनके पिता को सीमेंट चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया था। इसके बाद परिवार के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया। परिवार को घर छोड़ना पड़ा और कम उम्र में ही ओम पुरी तथा उनके भाई को जिम्मेदारियां उठानी पड़ीं।

    परिवार की मदद के लिए उनके भाई ने कुली का काम किया, जबकि ओम पुरी ने एक ढाबे पर बर्तन मांजे। वह आसपास से कोयला इकट्ठा करके भी लाते थे, ताकि घर में खाना बनाने के लिए चूल्हा जल सके। इन कठिन परिस्थितियों के बाद वह अपने ननिहाल चले गए, जहां उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। आर्थिक परेशानियों के बीच भी अभिनय के प्रति उनकी रुचि बनी रही और धीरे-धीरे यही रुचि उनके करियर का आधार बन गई।

    पढ़ाई के दौरान ओम पुरी ने एक वकील के यहां मुंशी के रूप में भी काम किया। एक बार नाटक में भाग लेने के कारण वह काम पर नहीं पहुंच सके, जिसके बाद वकील ने उन्हें नौकरी से हटा दिया। इस घटना के बाद उनके कॉलेज के प्राचार्य ने उन्हें रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में सहायक की नौकरी दिलाई। कॉलेज में नाटकों में हिस्सा लेते हुए उनकी मुलाकात हरपाल और नीना तिवाना से हुई। उनके सहयोग से वह पंजाब कला मंच नामक नाट्य संस्था से जुड़े। इसके बाद अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का रुख किया।

    ओम पुरी ने वर्ष 1975 में बच्चों की फिल्म ‘चोर चोर छुप जा’ में काम किया। शुरुआती दौर में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने एक्टर्स स्टूडियो में भी काम किया। वहां गुलशन ग्रोवर और अनिल कपूर जैसे कलाकार उनके विद्यार्थी रहे। बाद में उन्होंने ‘घाशीराम कोतवाल’ के जरिए मुख्यधारा के सिनेमा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वर्ष 1983 में आई फिल्म ‘अर्ध सत्य’ उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। इस फिल्म में उनके अभिनय ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।

    टेलीविजन पर भी ओम पुरी ने अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1988 में प्रसारित ‘भारत एक खोज’ में उन्होंने कई भूमिकाएं निभाईं। हिंदी के अलावा उन्होंने पंजाबी, मराठी, गुजराती, उर्दू और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया। ‘आक्रोश’, ‘स्पर्श’, ‘मंडी’, ‘आरोहण’, ‘मिर्च मसाला’, ‘जाने भी दो यारो’, ‘चाची 420’, ‘हेराफेरी’ और ‘मालामाल वीकली’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदार दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुए।

    उनकी अभिनय यात्रा भारतीय फिल्मों तक सीमित नहीं रही। ओम पुरी ने ‘ईस्ट इज ईस्ट’, ‘सिटी ऑफ जॉय’, ‘वुल्फ’ और ‘द घोस्ट एंड द डार्कनेस’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया। उनके अभिनय की खासियत यह थी कि वह अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में सहजता से ढल जाते थे।अनिल कपूर के साथ जुड़ा एक किस्सा भी उनके शुरुआती दिनों की याद दिलाता है। एक नाटक में ओम पुरी को अमीर व्यक्ति की भूमिका निभानी थी। इसके लिए उन्होंने अपने विद्यार्थी अनिल कपूर से सोने की चेन मांगी थी। अनिल कपूर ने बिना देर किए अपनी चेन उन्हें दे दी थी।

    निजी जीवन में ओम पुरी ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी सीमा से तलाक के बाद उन्होंने नंदिता पुरी से विवाह किया। उनका एक बेटा ईशान है। ओम पुरी का निधन 6 जनवरी 2017 को 66 वर्ष की उम्र में हुआ था। अपने पीछे वह ऐसी फिल्मी विरासत छोड़ गए, जिसमें संघर्ष, विविधता और सशक्त अभिनय की छाप आज भी दिखाई देती है।

  • अमेरिका दौरे पर अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो से की मुलाकात, बोले- हर बार उनसे मिलना मेरे लिए खुशी की बात

    अमेरिका दौरे पर अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो से की मुलाकात, बोले- हर बार उनसे मिलना मेरे लिए खुशी की बात

    नई दिल्ली ।अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों अपने नाटक ‘जाने पहचाने अनजाने’ के साथ अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं। इसी दौरान उन्होंने हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और अपने करीबी दोस्त रॉबर्ट डी नीरो से उनके घर पर मुलाकात की। अनुपम खेर ने इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और इसे अपने मौजूदा दौरे की खास यादों में शामिल बताया।

    अनुपम खेर ने मुलाकात से जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनमें वह रॉबर्ट डी नीरो के साथ नजर आ रहे हैं। पोस्ट के साथ उन्होंने कहा कि अमेरिका आने के बाद अपने सबसे प्यारे दोस्त डी नीरो से मिले बिना उनका दौरा पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने रॉबर्ट डी नीरो को दुनिया के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक बताया और कहा कि उनसे मिलना हर बार उनके लिए खुशी की बात होती है।

    अनुपम खेर ने बताया कि अमेरिका और कनाडा में अपने म्यूजिकल प्ले ‘जाने पहचाने अनजाने’ के साथ चल रहे दौरे के बीच रॉबर्ट डी नीरो से हुई मुलाकात उनके लिए सबसे खास अनुभवों में से एक रही। उन्होंने अपने दोस्त के घर पहुंचने और उनके साथ समय बिताने को लेकर भी खुशी जाहिर की। दोनों की मुलाकात के दौरान उनके बीच दोस्ताना संबंध दिखाई दिए, जिसकी झलक अनुपम खेर की साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में भी नजर आई।

    अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो को अपने घर पर आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उनके घर पर मिले स्वादिष्ट भोजन का भी जिक्र किया। अनुपम के मुताबिक, दोनों के बीच हुई बातचीत और डी नीरो की ओर से दिया गया समय उनके लिए काफी मायने रखता है। उन्होंने कहा कि जब भी वह डी नीरो से मिलते हैं, तो उनके भीतर का प्रशंसक भी उतना ही उत्साहित होता है, जितना एक दोस्त अपने दोस्त से मिलकर होता है।

    अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो के प्रति एक अभिनेता और इंसान, दोनों रूपों में सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि दुनिया के इस महान अभिनेता को अपना दोस्त कह सकते हैं। उन्होंने डी नीरो के परिवार का भी आभार जताया और कहा कि परिवार की मौजूदगी ने इस मुलाकात को उनके लिए और खूबसूरत याद बना दिया। अनुपम ने कहा कि वह इन पलों को अपने साथ लेकर जाएंगे और लंबे समय तक याद रखेंगे। उन्होंने डी नीरो की ओर से दिए गए कैप गिफ्ट के लिए भी धन्यवाद दिया और बताया कि यह उपहार उनके लिए बहुत मायने रखता है।

  • 1973 में आई द एक्सॉर्सिस्ट ने हॉरर सिनेमा को बदल दिया, नौ ऑस्कर नामांकन में दो जीत और आज भी 8.1 IMDb रेटिंग

    1973 में आई द एक्सॉर्सिस्ट ने हॉरर सिनेमा को बदल दिया, नौ ऑस्कर नामांकन में दो जीत और आज भी 8.1 IMDb रेटिंग

    नई दिल्ली । हॉलीवुड की हॉरर फिल्मों की दुनिया में कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिनका प्रभाव रिलीज के कई दशक बाद भी कायम है। द एक्सॉर्सिस्ट ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। विलियम फ्राइडकिन के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1973 में रिलीज हुई थी और उस दौर में दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी। फिल्म की कहानी, डरावने दृश्य और धार्मिक पृष्ठभूमि ने इसे सामान्य हॉरर फिल्मों से अलग पहचान दिलाई।

    द एक्सॉर्सिस्ट की कहानी 12 साल की लड़की रेगन के इर्द-गिर्द घूमती है। रेगन अपनी मां के साथ रहती है और एक बोर्ड के जरिए कथित तौर पर आत्माओं से संपर्क करने की कोशिश करती है। इसके बाद उसके व्यवहार और व्यक्तित्व में खतरनाक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। मां अपनी बेटी की हालत को समझने और उसका इलाज कराने की कोशिश करती है, लेकिन परिस्थितियां लगातार भयावह होती जाती हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ फिल्म में धार्मिक विश्वास, डर और अलौकिक शक्तियों के बीच संघर्ष देखने को मिलता है।

    फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उसका ऑस्कर प्रदर्शन शामिल है। द एक्सॉर्सिस्ट को अकादमी पुरस्कारों की नौ श्रेणियों में नामांकन मिला था। हॉरर शैली की किसी फिल्म के लिए इतने बड़े स्तर पर ऑस्कर मान्यता मिलना उस समय बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई। फिल्म ने दो पुरस्कार अपने नाम किए। उसे सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा और सर्वश्रेष्ठ ध्वनि के लिए ऑस्कर मिला था। इस उपलब्धि ने हॉरर फिल्मों को केवल मनोरंजन तक सीमित मानने वाली धारणा को भी चुनौती दी।

    फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा आज भी उसकी IMDb रेटिंग से लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार द एक्सॉर्सिस्ट को 8.1 की IMDb रेटिंग मिली हुई है। पांच दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी इतनी मजबूत रेटिंग फिल्म की स्थायी लोकप्रियता को दर्शाती है। फिल्म को हॉरर सिनेमा के इतिहास में एक प्रभावशाली कृति के तौर पर देखा जाता है।

    फिल्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात अभिनेत्री लिंडा ब्लेयर से भी संबंधित है। उन्होंने रेगन का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके किरदार के भयावह बदलाव और अभिनय ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। रिलीज के बाद उन्हें धमकियों का सामना भी करना पड़ा था। धार्मिक आधार पर फिल्म की विषयवस्तु को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इसमें शैतान से जुड़े तत्वों को अनुचित तरीके से प्रस्तुत किया गया है। स्थिति को देखते हुए फिल्म के वितरण से जुड़े लोगों ने उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की थी।

    द एक्सॉर्सिस्ट की खासियत केवल उसके डरावने दृश्यों में नहीं थी, बल्कि इसकी कहानी और वातावरण ने दर्शकों के मन में लंबे समय तक असर छोड़ा। फिल्म ने यह साबित किया कि हॉरर सिनेमा भी गंभीर विषयों, मजबूत पटकथा और प्रभावशाली अभिनय के जरिए बड़े पुरस्कारों तक पहुंच सकता है।

    आज के दौर में हॉरर फिल्मों में आधुनिक तकनीक, विशेष प्रभाव और बड़े बजट का इस्तेमाल आम हो चुका है, लेकिन द एक्सॉर्सिस्ट की चर्चा अब भी बनी हुई है। फिल्म की विरासत को उसके पुरस्कारों, आलोचनात्मक सम्मान और दर्शकों की प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है। पांच दशक बाद भी यह फिल्म उन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो हॉरर सिनेमा के इतिहास की चर्चित फिल्मों को देखना चाहते हैं। भारतीय दर्शक भी इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता के अनुसार रेंट पर देख सकते हैं।

  • सड़क के ऊपर हवा में कैसे टंगा घर? हॉलीवुड के इस अनोखे नजारे का सच जानकर चौंक जाएंगे

    सड़क के ऊपर हवा में कैसे टंगा घर? हॉलीवुड के इस अनोखे नजारे का सच जानकर चौंक जाएंगे


    नई दिल्ली। हॉलीवुड की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जिसने राह चलते लोगों से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक सभी को हैरान कर दिया है। एक बड़े से बिलबोर्ड के अंदर करीब 30 फीट की ऊंचाई पर एक शख्स आराम से बैठा दिखाई दे रहा है। बाहर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे सड़क के ऊपर हवा में ही किसी ने छोटा सा घर बना दिया हो और कोई व्यक्ति उसमें रहने लगा हो। वायरल वीडियो सामने आने के बाद लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठा कि आखिर यह शख्स इतनी ऊंचाई पर क्यों रह रहा है। हालांकि इस अजीबोगरीब नजारे के पीछे की कहानी सामने आने के बाद पूरा मामला काफी दिलचस्प हो जाता है।

    दरअसल यह कोई असली घर नहीं बल्कि हॉलीवुड की सनसेट स्ट्रिप पर फिल्म प्रमोशन के लिए तैयार किया गया एक खास सेट है। सनसेट बुलेवार्ड और सेल्मा एवेन्यू के व्यस्त इलाके में लगाए गए विशाल बिलबोर्ड के अंदर एक छोटे से लिविंग रूम जैसा सेट बनाया गया है। इसमें सोफा और फर्नीचर समेत घर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें रखी गई हैं। बिलबोर्ड जमीन से करीब 30 फीट ऊपर है और अंदर मौजूद शख्स को इस तरह रखा गया है कि नीचे सड़क से गुजरने वाले लोगों को वह आसानी से नजर आ सके।

    इस अनोखे प्रमोशनल कैंपेन का संबंध साइंस फिक्शन थ्रिलर फिल्म द लास्ट हाउस से है। फिल्म की कहानी में एक परिवार रहस्यमयी परिस्थितियों में अपने ही घर के अंदर फंस जाता है। उनके सामने बाहर निकलने की चुनौती होती है और समय बीतने के साथ खाने पीने जैसी जरूरी चीजों की कमी भी सामने आने लगती है। इसी कहानी को वास्तविक जिंदगी के अनुभव से जोड़ने के लिए फिल्म निर्माताओं ने बिलबोर्ड के अंदर एक इंसान को रखने का आइडिया तैयार किया।

    इस प्रमोशन के तहत एक परफॉर्मर को 6 अगस्त से 8 अगस्त तक बिलबोर्ड के अंदर बने कमरे में रहने के लिए रखा गया है। वायरल वीडियो में वह कभी सोफे पर आराम करता दिखाई देता है तो कभी नीचे सड़क से गुजर रहे लोगों की तरफ हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करता है। इस पूरे सेटअप को इस तरह तैयार किया गया है कि देखने वालों को कुछ पलों के लिए सचमुच ऐसा महसूस हो कि कोई व्यक्ति जमीन से बहुत ऊपर एक अजीब जगह में फंस गया है।

    इस प्रमोशन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिलबोर्ड के अंदर मौजूद शख्स नीचे मौजूद लोगों से बातचीत भी करता है। इसके लिए वह व्हाइटबोर्ड का इस्तेमाल करता है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में वह व्हाइटबोर्ड पर मैसेज लिखकर लोगों को जवाब देता नजर आता है। कहीं वह पूछता दिखाई देता है कि आखिर क्या हो रहा है तो कहीं फंस जाने से जुड़ा संदेश लिखता है। इस वजह से पूरा नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लगता।

    बिलबोर्ड के बाहर फिल्म की कहानी से जुड़ा एक सवाल भी लिखा गया है कि आप कितने दिन तक सर्वाइव कर सकते हैं। यही सवाल फिल्म की मूल कहानी से जुड़ा हुआ है। जब किसी व्यक्ति के लिए उसका घर ही कैदखाना बन जाए और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाए तो वह कितने समय तक परिस्थितियों का सामना कर सकता है। प्रमोशनल कैंपेन इसी सवाल को लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा है।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों के रिएक्शन भी काफी दिलचस्प हैं। कुछ लोगों ने कहा कि वे रोज इस रास्ते से गुजरते हैं और अब बिलबोर्ड में बैठे शख्स को देखकर हाथ हिलाते हैं। कुछ यूजर्स ने इस आइडिया की तारीफ करते हुए इसे फिल्म प्रमोशन का शानदार तरीका बताया। वहीं कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में सवाल किया कि इतनी ऊंचाई पर बने इस कमरे में एसी और बाथरूम जैसी सुविधाएं कैसे होंगी।

    कुल मिलाकर जिस वीडियो को देखकर लोग समझ रहे थे कि किसी शख्स ने मजबूरी में बिलबोर्ड के अंदर अपना घर बना लिया है उसके पीछे असल में एक सोची समझी प्रमोशनल रणनीति है। फिल्म की कहानी को वास्तविक दुनिया के एक अनोखे अनुभव से जोड़कर तैयार किए गए इस कैंपेन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सड़क से गुजरने वाले लोग रुककर इसे देख रहे हैं वीडियो बना रहे हैं और सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इस तरह फिल्म की कहानी का एक हिस्सा जमीन से करीब 30 फीट ऊपर बिलबोर्ड के अंदर दिखाई देकर खुद एक वायरल कहानी बन गया है।

  • जब एक अभिनेता बना 165 किरदारों की पूरी दुनिया, फिल्म के एक सीन में बहाई गई 12.5 लाख लीटर चॉकलेट

    जब एक अभिनेता बना 165 किरदारों की पूरी दुनिया, फिल्म के एक सीन में बहाई गई 12.5 लाख लीटर चॉकलेट


    नई दिल्ली । हॉलीवुड फिल्मों में शानदार विजुअल इफेक्ट्स और अनोखे प्रयोग अक्सर दर्शकों को हैरान कर देते हैं लेकिन साल 2005 में रिलीज हुई चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे आज भी बेहद खास माना जाता है। आमतौर पर किसी अभिनेता के डबल रोल या ट्रिपल रोल की चर्चा होती है जबकि कई फिल्मों में दस तक किरदार निभाने के उदाहरण भी मिलते हैं। लेकिन इस फिल्म में अभिनेता दीप रॉय ने अकेले 165 अलग अलग किरदार निभाकर ऐसा इतिहास रच दिया जिसे दोहराना बेहद मुश्किल माना जाता है।

    दीप रॉय ने फिल्म में ऊम्पा लूम्पा नाम के छोटे कद वाले किरदार निभाए थे। फिल्म की कहानी में इन पात्रों की बड़ी भूमिका थी और निर्देशक टिम बर्टन चाहते थे कि सभी किरदार एक जैसे दिखाई दें लेकिन उनकी बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार अलग अलग हो। एक जैसे दिखने वाले इतने कलाकार मिलना लगभग असंभव था इसलिए यह जिम्मेदारी दीप रॉय ने अपने कंधों पर उठाई।

    यह काम सुनने में जितना आसान लगता है वास्तव में उससे कहीं ज्यादा कठिन था। हर सीन के लिए दीप रॉय को अलग अलग एक्सप्रेशन अलग चाल अलग डांस स्टेप और अलग अभिनय करना पड़ता था। एक ही फ्रेम में कई ऊम्पा लूम्पा दिखाने के लिए उन्हें बार बार शूट किया गया और बाद में आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स की मदद से सभी शॉट्स को जोड़कर एक दृश्य तैयार किया गया। यही वजह है कि दर्शकों को ऐसा महसूस होता है जैसे दर्जनों कलाकार एक साथ स्क्रीन पर मौजूद हों जबकि वास्तव में हर किरदार दीप रॉय ने ही निभाया था।

    फिल्म का सबसे चर्चित दृश्य विशाल चॉकलेट नदी का था जिसने रिलीज के समय दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं। इस दृश्य को वास्तविक और आकर्षक बनाने के लिए मेकर्स ने लगभग 12.5 लाख लीटर चॉकलेट मिश्रण का इस्तेमाल किया। यह सीन बच्चों और बड़ों दोनों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ और फिल्म की सबसे यादगार झलकियों में शामिल हो गया। सेट डिजाइन और विजुअल इफेक्ट्स के कारण यह दृश्य आज भी हॉलीवुड के बेहतरीन सिनेमाई प्रयोगों में गिना जाता है।

    चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री बच्चों के लिए मनोरंजक फैंटेसी फिल्म जरूर है लेकिन इसकी कहानी में मेहनत ईमानदारी लालच और अच्छे व्यवहार जैसे कई सामाजिक संदेश भी छिपे हुए हैं। यही कारण है कि यह फिल्म सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रही बल्कि हर उम्र के दर्शकों ने इसे पसंद किया। शानदार अभिनय आकर्षक सेट और बेहतरीन तकनीक ने इसे एक क्लासिक फिल्म का दर्जा दिलाया।

    दीप रॉय की मेहनत और समर्पण इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। एक ही कलाकार द्वारा 165 किरदार निभाना केवल अभिनय की चुनौती नहीं बल्कि धैर्य तकनीकी समझ और लंबे समय तक लगातार काम करने का भी उदाहरण था। यही वजह है कि उनका यह रिकॉर्ड आज भी फिल्म जगत में अनोखा माना जाता है और चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री को हॉलीवुड की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है।

  • हॉलीवुड फिल्मों में नया बेंचमार्क बना 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे', दूसरे दिन भी भारत में शानदार कमाई का सिलसिला जारी

    हॉलीवुड फिल्मों में नया बेंचमार्क बना 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे', दूसरे दिन भी भारत में शानदार कमाई का सिलसिला जारी

    नई दिल्ली । मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ भारत में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाका कर रही है। फिल्म ने पहले दिन शानदार कमाई के साथ हॉलीवुड फिल्मों के लिए नया रिकॉर्ड बनाया और दूसरे दिन भी इसकी रफ्तार कम होती नजर नहीं आ रही है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन दोपहर तक ही 70 करोड़ रुपये से अधिक का कुल कलेक्शन दर्ज कर लिया है।

    टॉम हॉलैंड स्टारर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पहले दिन बड़ी संख्या में दर्शकों के सिनेमाघरों तक पहुंचने के बाद दूसरे दिन भी कई शहरों में फिल्म के शो हाउसफुल नजर आए। फिल्म की एडवांस बुकिंग और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने इसकी मजबूत शुरुआत में अहम भूमिका निभाई है।

    ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने अपने पहले दिन भारत में करीब 60.60 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म ने भारत में सबसे बड़ी हॉलीवुड ओपनिंग का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। फिल्म का शुरुआती ग्रॉस कलेक्शन भी 70 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिसने इसे भारतीय बाजार में हॉलीवुड फिल्मों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया।

    फिल्म की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने पहले दिन करीब 72 प्रतिशत से ज्यादा ऑक्यूपेंसी दर्ज की। अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला। हिंदी वर्जन ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा है।

    दूसरे दिन भी फिल्म की कमाई का सिलसिला जारी रहा। शुरुआती रुझानों के अनुसार दोपहर तक फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली थी। इसके साथ ही फिल्म का दो दिनों का कुल कलेक्शन 70 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। माना जा रहा है कि दिन खत्म होने तक फिल्म की कमाई में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    इस फिल्म ने हॉलीवुड की सबसे सफल फिल्मों में शामिल ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ के शुरुआती रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। इससे पहले भारत में सबसे बड़ी हॉलीवुड ओपनिंग का रिकॉर्ड ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ के नाम था। लेकिन ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने अपनी दमदार शुरुआत के साथ नया इतिहास बना दिया है।

    फिल्म की सफलता के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। मार्वल फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता, स्पाइडर-मैन किरदार के प्रति दर्शकों का लगाव और बड़े पैमाने पर किए गए प्रचार ने फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ाई है। युवा दर्शकों के साथ-साथ परिवारों में भी इस फिल्म को लेकर काफी क्रेज देखा जा रहा है।

    भारतीय बॉक्स ऑफिस पर हॉलीवुड फिल्मों की बढ़ती पकड़ के बीच ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ की सफलता एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। फिल्म की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए आने वाले दिनों में इसके कई और रिकॉर्ड बनाने की संभावना जताई जा रही है। अगर फिल्म इसी तरह दर्शकों को आकर्षित करती रही तो यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्मों की सूची में एक नया स्थान बना सकती है।

  • वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    नई दिल्ली । अगर आप वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ थिएटर में नई फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं तो यह सप्ताह आपके लिए शानदार रहने वाला है। 27 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बड़े पर्दे पर एक्शन सुपरहीरो कॉमेडी फैमिली ड्रामा और रोमांस से भरपूर कई फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक अलग अलग जॉनर की फिल्मों के साथ दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर मौका मिलेगा।

    स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    इस सप्ताह की सबसे बड़ी रिलीज हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे है। फिल्म में पीटर पार्कर अपनी सुपरहीरो पहचान से दूर एक सामान्य कॉलेज छात्र की जिंदगी जीने की कोशिश करता है। लेकिन जब उसके करीबियों पर नया खतरा मंडराता है तो उसे फिर से स्पाइडर मैन बनकर दुनिया की रक्षा के लिए मैदान में उतरना पड़ता है। एक्शन और सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म खास आकर्षण होगी।

    भाई तेरा स्टार है
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    राघव जुयाल अभिनीत यह फिल्म कॉमेडी और फैमिली ड्रामा का अनोखा मिश्रण है। कहानी एक ऐसे अभिनेता की है जो क्रिकेट सट्टेबाजी के कारण कर्ज में फंस जाता है। मुश्किलों से निकलने की कोशिश में बोला गया एक झूठ उसे और उसके परिवार को हास्यास्पद और रोमांचक घटनाओं के बीच पहुंचा देता है। राघव जुयाल की कॉमिक टाइमिंग इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।

    ओह माय डॉग
    नई रिलीज डेट – 7 अगस्त
    यह फिल्म पहले 31 जुलाई को रिलीज होने वाली थी लेकिन निर्माताओं ने इसकी रिलीज टाल दी है। अब यह 7 अगस्त को सिनेमाघरों में आएगी। फिल्म एक छोटे बच्चे और एक बेघर कुत्ते के बीच बने भावनात्मक रिश्ते की कहानी है। पेट लवर्स और पारिवारिक दर्शकों के लिए यह एक भावुक और प्रेरणादायक फिल्म मानी जा रही है।

    दिल दीवाना हो गया
    रिलीज डेट – 31 जुलाई
    रोमांस और फैमिली ड्रामा से भरपूर यह फिल्म राहुल नैना और राज की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है। प्यार विश्वास त्याग और रिश्तों की खूबसूरती को दर्शाती यह म्यूजिकल फिल्म पूरे परिवार के साथ देखने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। साफ सुथरी कहानी और पारिवारिक भावनाओं के कारण यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आ सकती है।

    इस सप्ताह सिनेमाघरों में हर वर्ग के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है। जहां सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए स्पाइडर मैन सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा वहीं कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए भाई तेरा स्टार है और पारिवारिक दर्शकों के लिए दिल दीवाना हो गया अच्छी पसंद साबित हो सकती है। हालांकि ओह माय डॉग देखने के लिए दर्शकों को अब 7 अगस्त तक इंतजार करना होगा।

  • अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया बनीं निम्मी एक फैसले ने दिलाई दुनिया भर में पहचान हॉलीवुड के ऑफर भी लौटाए

    अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया बनीं निम्मी एक फैसले ने दिलाई दुनिया भर में पहचान हॉलीवुड के ऑफर भी लौटाए


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चर्चित अभिनेत्री निम्मी ने अपने अभिनय और मासूमियत से करोड़ों दर्शकों का दिल जीता। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के दौर से लेकर रंगीन सिनेमा तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। दिलीप कुमार राज कपूर और भारत भूषण जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने वाली निम्मी उस दौर की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। उनकी खूबसूरती और सादगी के किस्से आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं।

    निम्मी का असली नाम नवाब बानो था। फिल्म निर्माता और निर्देशक राज कपूर ने उन्हें अपनी चर्चित फिल्म बरसात के जरिए फिल्मी दुनिया में मौका दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। उनकी सहज अदायगी और भावपूर्ण अभिनय ने उन्हें उस दौर की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।

    निम्मी के करियर का एक बेहद चर्चित किस्सा फिल्म आन से जुड़ा है। इस फिल्म का प्रीमियर लंदन के रियाल्टो थिएटर में आयोजित किया गया था जहां कई अंतरराष्ट्रीय मेहमान और हॉलीवुड से जुड़े कलाकार भी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान हॉलीवुड अभिनेता एरल फ्लिन ने पश्चिमी परंपरा के अनुसार निम्मी का हाथ चूमने की कोशिश की। लेकिन भारतीय संस्कारों में विश्वास रखने वाली निम्मी ने विनम्रता से ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनका यह व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।

    इस घटना के बाद विदेशी मीडिया ने निम्मी को अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया का नाम दिया। देखते ही देखते यह उपनाम पूरी दुनिया में उनकी पहचान बन गया। उस दौर में यह खबर अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां बनी और निम्मी की लोकप्रियता भारत के बाहर भी तेजी से बढ़ गई।

    लंदन प्रीमियर के बाद निम्मी के सामने हॉलीवुड से चार फिल्मों के प्रस्ताव आए। किसी भी भारतीय अभिनेत्री के लिए उस समय यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। हालांकि निम्मी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इन सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। इसकी वजह केवल एक थी। वह अपनी व्यक्तिगत मर्यादाओं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहती थीं। उस समय हॉलीवुड फिल्मों में किसिंग और अंतरंग दृश्यों का होना सामान्य माना जाता था जबकि निम्मी ऐसे दृश्य करने के पक्ष में नहीं थीं।

    निम्मी का मानना था कि सफलता तभी सार्थक है जब वह अपने सिद्धांतों और आत्मसम्मान के साथ मिले। उन्होंने कभी लोकप्रियता या बड़े अवसरों के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी उन्हें केवल एक सफल अभिनेत्री ही नहीं बल्कि मजबूत व्यक्तित्व वाली कलाकार के रूप में भी याद किया जाता है।

    अपने फिल्मी सफर में निम्मी ने बरसात दीदार आन दाग कुंदन भाई भाई उड़नखटोला और बसंत बहार जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों और अभिनय ने हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी। निम्मी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची पहचान केवल सफलता से नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने से भी बनती है। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है।

  • जेठालाल कहीं नहीं जा रहे तारक मेहता के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम दिलीप जोशी रहेंगे शो का हिस्सा

    जेठालाल कहीं नहीं जा रहे तारक मेहता के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम दिलीप जोशी रहेंगे शो का हिस्सा


    नई दिल्ली । फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड रखना आम बात है लेकिन हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म के सेट पर ऐसा भी दौर आया जब एक अभिनेता की सुरक्षा नहीं बल्कि उससे बाकी कलाकारों और पूरी यूनिट को बचाने के लिए बॉडीगार्ड तैनात करने पड़े। यह दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साल 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म प्रिडेटर की शूटिंग से जुड़ा है।

    इस फिल्म में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग मैक्सिको के दूरदराज जंगलों में बेहद कठिन परिस्थितियों में की जा रही थी। भीषण गर्मी उमस और चुनौतीपूर्ण लोकेशन के बीच कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए काम करना आसान नहीं था। लंबे समय तक कठिन माहौल में शूटिंग होने से पूरी यूनिट मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रही थी।

    इसी दौरान फिल्म में बिली का किरदार निभाने वाले अभिनेता सॉनी लैंडहम का व्यवहार लगातार बदलने लगा। बताया जाता है कि वह सेट पर असहज महसूस करने लगे थे। फिल्म में कई लंबे और मजबूत कदकाठी वाले कलाकार मौजूद थे और इसी वजह से सॉनी लैंडहम खुद को असुरक्षित और हीन भावना से घिरा हुआ महसूस करने लगे। धीरे धीरे इसका असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सॉनी लैंडहम कई बार शूटिंग के दौरान सहयोग नहीं करते थे और गुस्से में साथी कलाकारों व क्रू के सदस्यों के साथ आक्रामक रवैया अपनाने लगते थे। स्थिति तब और गंभीर हो जाती थी जब वह जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते थे। उनके गुस्से और अनियंत्रित व्यवहार से पूरी यूनिट में तनाव का माहौल बनने लगा था।

    हालात इतने बिगड़ गए कि फिल्म के निर्माताओं और प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सॉनी लैंडहम के साथ हर समय एक विशेष बॉडीगार्ड तैनात कर दिया। यह बॉडीगार्ड उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इस बात का ध्यान रखने के लिए रखा गया था कि यदि अभिनेता का व्यवहार बेकाबू हो जाए तो वह तुरंत स्थिति संभाल सके और बाकी कलाकारों व क्रू को सुरक्षित रखे।

    बताया जाता है कि मेकर्स ने इसके लिए करीब 6 फुट 8 इंच लंबे और बेहद मजबूत व्यक्ति को चुना था। उसका काम चौबीसों घंटे सॉनी लैंडहम के साथ रहना और किसी भी अप्रिय स्थिति में हस्तक्षेप करना था। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिल्म की शूटिंग बिना किसी बड़े विवाद या हादसे के पूरी की जा सके।

    हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रिडेटर सफलतापूर्वक पूरी हुई और रिलीज के बाद जबरदस्त हिट साबित हुई। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की यह फिल्म आज भी हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित एक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। दूसरी ओर सॉनी लैंडहम का यह किस्सा फिल्म इंडस्ट्री के उन दुर्लभ घटनाक्रमों में शामिल हो गया जिसमें किसी अभिनेता की वजह से पूरी यूनिट की सुरक्षा के लिए अलग से बॉडीगार्ड नियुक्त करने पड़े।

  • फिल्म के हीरो नहीं बने सबसे बड़ी चुनौती इस अभिनेता की हरकतों से परेशान होकर मेकर्स ने उठाया बड़ा कदम

    फिल्म के हीरो नहीं बने सबसे बड़ी चुनौती इस अभिनेता की हरकतों से परेशान होकर मेकर्स ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली । फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड रखना आम बात है लेकिन हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म के सेट पर ऐसा भी दौर आया जब एक अभिनेता की सुरक्षा नहीं बल्कि उससे बाकी कलाकारों और पूरी यूनिट को बचाने के लिए बॉडीगार्ड तैनात करने पड़े। यह दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साल 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म प्रिडेटर की शूटिंग से जुड़ा है।

    इस फिल्म में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग मैक्सिको के दूरदराज जंगलों में बेहद कठिन परिस्थितियों में की जा रही थी। भीषण गर्मी उमस और चुनौतीपूर्ण लोकेशन के बीच कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए काम करना आसान नहीं था। लंबे समय तक कठिन माहौल में शूटिंग होने से पूरी यूनिट मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रही थी।

    इसी दौरान फिल्म में बिली का किरदार निभाने वाले अभिनेता सॉनी लैंडहम का व्यवहार लगातार बदलने लगा। बताया जाता है कि वह सेट पर असहज महसूस करने लगे थे। फिल्म में कई लंबे और मजबूत कदकाठी वाले कलाकार मौजूद थे और इसी वजह से सॉनी लैंडहम खुद को असुरक्षित और हीन भावना से घिरा हुआ महसूस करने लगे। धीरे धीरे इसका असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सॉनी लैंडहम कई बार शूटिंग के दौरान सहयोग नहीं करते थे और गुस्से में साथी कलाकारों व क्रू के सदस्यों के साथ आक्रामक रवैया अपनाने लगते थे। स्थिति तब और गंभीर हो जाती थी जब वह जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते थे। उनके गुस्से और अनियंत्रित व्यवहार से पूरी यूनिट में तनाव का माहौल बनने लगा था।

    हालात इतने बिगड़ गए कि फिल्म के निर्माताओं और प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सॉनी लैंडहम के साथ हर समय एक विशेष बॉडीगार्ड तैनात कर दिया। यह बॉडीगार्ड उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इस बात का ध्यान रखने के लिए रखा गया था कि यदि अभिनेता का व्यवहार बेकाबू हो जाए तो वह तुरंत स्थिति संभाल सके और बाकी कलाकारों व क्रू को सुरक्षित रखे।

    बताया जाता है कि मेकर्स ने इसके लिए करीब 6 फुट 8 इंच लंबे और बेहद मजबूत व्यक्ति को चुना था। उसका काम चौबीसों घंटे सॉनी लैंडहम के साथ रहना और किसी भी अप्रिय स्थिति में हस्तक्षेप करना था। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिल्म की शूटिंग बिना किसी बड़े विवाद या हादसे के पूरी की जा सके।

    हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रिडेटर सफलतापूर्वक पूरी हुई और रिलीज के बाद जबरदस्त हिट साबित हुई। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की यह फिल्म आज भी हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित एक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। दूसरी ओर सॉनी लैंडहम का यह किस्सा फिल्म इंडस्ट्री के उन दुर्लभ घटनाक्रमों में शामिल हो गया जिसमें किसी अभिनेता की वजह से पूरी यूनिट की सुरक्षा के लिए अलग से बॉडीगार्ड नियुक्त करने पड़े।