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  • मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़

    मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़


    नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश में मां नर्मदा प्रकटोत्सव का पावन पर्व रविवार को पूरे श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई। नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध और पवित्र बरमान घाट पर रविवार तड़के से ही नर्मदा भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
    नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर बरमान घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शनिवार रात से ही शुरू हो गई थी। आधी रात के बाद से ही घाट पर भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा। जैसे ही सुबह सूर्य की पहली किरण मां नर्मदा के जल पर पड़ी श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की। पूरा घाट नर्मदे हर के जयघोष से गूंज उठा।

    कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़ों में घाट पहुंचे लेकिन स्नान के समय आस्था ने ठंड पर जीत हासिल कर ली। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां नर्मदा में स्नान मात्र से तन-मन दोनों पवित्र हो जाते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरमान घाट का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने कठोर तपस्या की थी। यही कारण है कि नर्मदा प्रकटोत्सव के अवसर पर यहां स्नान और पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते आज लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां रेवा के दर्शन और पूजन के लिए बरमान घाट पहुंचे।

    घाट पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा की आरती की, दीपदान किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पैदल यात्रा कर यहां पहुंचे। भक्तों का कहना है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी मां हैं जिनके दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है। प्रशासन की ओर से भी आयोजन को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा, वहीं गोताखोरों की टीम और स्वास्थ्य अमला भी घाट पर मौजूद रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल और यातायात व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।

    नर्मदा प्रकटोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। दोपहर तक घाट पर श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहने की संभावना है। कुल मिलाकर, मां नर्मदा प्रकटोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे ठंड, दूरी और कठिनाइयां कोई मायने नहीं रखतीं। मां नर्मदा के प्रति श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास हर साल इसी तरह बरमान घाट पर उमड़ता रहता है।

  • प्रयागराज माघ मेला हर हर गंगे के उद्घोष में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई

    प्रयागराज माघ मेला हर हर गंगे के उद्घोष में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के तीसरे दिन संगम घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। 3 जनवरी से शुरू हुआ यह मेला 15 फरवरी तक चलेगा और दिन-ब-दिन श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। सोमवार सुबह से ही संगम के त्रिवेणी घाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर हर गंगे और जय गंगे के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई और पुण्य लाभ लिया।

    श्रद्धालुओं की आस्था और उनके अनुभव

    देशभर से आए श्रद्धालुओं ने माघ मेले में शामिल होने के लिए लंबी यात्रा की। एक श्रद्धालु ने बताया “हम हैदराबाद से आए हैं। पहले महाकुंभ में भी आए थे और अब माघ मेले में डुबकी लगाई है। स्नान के बाद गंगा यमुना और सरस्वती के आशीर्वाद से आज रात काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे। फिर अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करेंगे और उसके बाद हैदराबाद लौट जाएंगे। योगी सरकार ने बहुत अच्छे इंतजाम किए हैं हर-हर गंगे।

    अनेक श्रद्धालुओं ने प्रशासन के द्वारा किए गए व्यवस्थाओं की सराहना की। एक भक्त ने कहा “सरकार ने यहां भीड़ को बहुत अच्छे से मैनेज किया है। ट्रैफिक और पार्किंग के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। मैं लोगों को यहां आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा। कोई दिक्कत नहीं होगी सभी व्यवस्थाएं बढ़िया हैं।

    एक अन्य श्रद्धालु ने कहा “माघ मेला का अपना अलग आकर्षण है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है। पिछली बार भी प्रशासन ने अच्छे इंतजाम किए थे और इस साल भी वैसा ही है। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। पुलिस हर समय मौजूद है और श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैयार रहती है। युवाओं में आस्था की भावना बहुत ज्यादा है। कुल मिलाकर इंतजाम बहुत अच्छे हैं। कई सुविधाएं उपलब्ध हैं और साफ-सुथरे चेंजिंग रूम भी दिए गए हैं।

    सुरक्षा और सुविधाएं

    माघ मेला 2026 के पहले तीन दिनों में लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया और पुण्य की प्राप्ति की। प्रशासन ने सुरक्षा स्वच्छता ट्रैफिक और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। ठंडी हवाओं और घने कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है।

    कलपवास और धार्मिक आयोजन

    माघ मेला एक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है जहां कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या है। संगम घाटों पर स्नान के साथ-साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन भी हो रहे हैं जिससे धार्मिक माहौल और भी पवित्र हो गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।माघ मेला भारतीय संस्कृति आस्था और एकता का प्रतीक है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु एक साथ जुटते हैं जो अपनी धार्मिक आस्थाओं को पूरी श्रद्धा के साथ व्यक्त करते हैं।

    माघ मेला का महत्व

    माघ मेला विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए है जो अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यहां आते हैं। संगम में स्नान करने को वे एक पवित्र कार्य मानते हैं जिससे न केवल शारीरिक सफाई होती है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को आस्था और विश्वास की ओर अग्रसर करते हैं।