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  • SBI Home Loan: ₹40 लाख का लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी, EMI कितनी आएगी?

    SBI Home Loan: ₹40 लाख का लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी, EMI कितनी आएगी?


    नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक SBI ने होम लोन की शुरुआती ब्याज दर 7.25 प्रतिशत रखी है। रिजर्व बैंक की रेपो रेट में कटौती के बाद होम लोन की ब्याज दरें कम हुई हैं, जिससे EMI पर बोझ घटा है। अगर आप SBI से 30 साल के लिए ₹40 लाख का होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो जानना जरूरी है कि आपकी मंथली सैलरी कितनी होनी चाहिए और EMI कितनी लगेगी।₹40 लाख का होम लोन लेने के लिए मंथली सैलरी

    SBI के मुताबिक 7.25% की ब्याज दर से 30 साल के लिए ₹40 लाख का होम लोन लेने के लिए आपकी मंथली सैलरी कम से कम ₹55,000 होनी चाहिए।ध्यान दें कि यह तभी संभव है जब आपके नाम पर कोई अन्य एक्टिव लोन न हो।

    EMI का हिसाब
    30 साल 360 महीने के लिए ₹40 लाख के होम लोन पर मासिक EMI लगभग ₹27,500 होगी। होम लोन की EMI आमतौर पर आपकी सैलरी का लगभग आधा हिस्सा होती है।

    क्रेडिट स्कोर और अन्य जरूरी बातें
    होम लोन लेने के लिए आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होना जरूरी है। खराब क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक आवेदन रिजेक्ट कर सकता है।बैंक आपके पुराने लोन अकाउंट और भुगतान इतिहास की भी जांच करता है।अच्छे क्रेडिट स्कोर पर ब्याज दर में छूट भी मिल सकती है।बेहतर ऑफर पाने के लिए अलग-अलग बैंकों के लोन प्रोडक्ट्स की तुलना करना फायदेमंद है।SBI का नया होम लोन प्लान उन लोगों के लिए आकर्षक है जो लंबी अवधि के लिए बड़ा लोन लेना चाहते हैं और अपनी EMI को नियंत्रित रखना चाहते हैं।

  • ₹70,000 है मंथली सैलरी, 20 साल के लिए मैक्सिमम कितना मिल सकता है Home Loan? समझें EMI का गणित

    ₹70,000 है मंथली सैलरी, 20 साल के लिए मैक्सिमम कितना मिल सकता है Home Loan? समझें EMI का गणित

    नई दिल्ली। अगर आपकी मंथली सैलरी ₹70,000 है और आप अपना घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहला सवाल यही है कि बैंक आपको अधिकतम कितना होम लोन दे सकता है। लोन की राशि सीधे आपकी आय, मौजूदा खर्च, ब्याज दर और लोन अवधि पर निर्भर करती है। 20 साल की अवधि के लिए होम लोन लेते समय EMI कैसे तय होती है और आपकी सैलरी के हिसाब से बैंक कितना लोन अप्रूव कर सकता है, आइए इस EMI के गणित को आसान शब्दों में समझते हैं। इससे आपको प्लानिंग में मदद मिलेगी।
    सबसे सस्ता होम लोन
    कोई भी बैंक जिस सबसे शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन या अन्य लोन उपलब्ध कराते हैं, वही उस बैंक का सबसे सस्ता लोन होता है। उदाहरण के लिए मौजूदा समय में बैंक ऑफ इंडिया या बैंक ऑफ महाराष्ट्र महज 7.10 प्रतिशत की शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन ऑफर कर रहे हैं। बैंक ब्याज दर आपकी इनकम, उम्र, सिबिल स्कोर और लोन रीपेमेंट की अवधि के मुताबिक तय करती है। होम लोन में एक बात समझ लें होम लोन की रीपेमेंट अवधि जितनी कम होगी, ब्याज आप उतना कम चुकाएंगे। लोन की रीपेमेंट अवधि जितनी ज्यादा होगी तो आपको ब्याज उतना ही ज्यादा चुकाना होगा।

    ₹70,000 है मंथली सैलरी पर मैक्सिमम होम लोन
    बैंक ऑफ इंडिया के होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर आपकी मंथली सैलरी 70,000 रुपये है। आपका पिछला कोई बकाया लोन या ईएमआई नहीं चल रहा है तो 7.10 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 साल की रीपेमेंट अवधि के लिए आपको मैक्सिमम ₹50,40,000 तक होम लोन मिल सकेगा। 20 साल के लिए इसकी ईएमआई ₹39,378 बनेगी। इस आधार पर आप इस होम लोन पर ₹44,10,760 सिर्फ ब्याज के तौर पर चुकाएंगे। यानी आखिर में बैंक को ₹94,50,760 चुकाएंगे। इतनी सैलरी पर अगर आप 15 साल के लिए होम लोन लेते हैं तो आपको मैक्सिमम ₹46,43,818 होम लोन मिलेगा।

  • IIFL कैपिटल का दावा: 2025 की बड़ी कटौती के बाद भी 50 बेसिस पॉइंट्स की गुंजाइश

    IIFL कैपिटल का दावा: 2025 की बड़ी कटौती के बाद भी 50 बेसिस पॉइंट्स की गुंजाइश


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंकRBI साल 2026 में एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। IIFL कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 1.25 प्रतिशत की बड़ी कटौती के बाद भी केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत दरों को 0.50 प्रतिशत यानी 50 बेसिस पॉइंट्स तक और घटाने की गुंजाइश बनी हुई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो होम लोन ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की EMI और सस्ती हो सकती है जिससे आम लोगों को सीधी राहत मिलेगी।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल रेपो रेट और कोर इन्फ्लेशन के बीच का अंतर करीब 2.8 प्रतिशत है जो पिछले सात वर्षों के औसत 1.1 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि महंगाई के नियंत्रण में रहने और इस बड़े अंतर के कारण RBI के पास तकनीकी और आर्थिक दोनों आधार मौजूद हैं जिनके सहारे वह ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। यही वजह है कि 2026 में रेट कट की संभावना को बाजार पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि साल 2025 में RBI ने आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के मकसद से ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। दिसंबर 2025 में आखिरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था। अब बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में रेपो रेट 5 प्रतिशत से नीचे या उसके आसपास पहुंच सकता है। यह स्तर कर्ज को और सस्ता बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अगर 2026 में 0.50 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती होती है तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर लेंडिंग रेट घटाने का दबाव बढ़ेगा। इसका फायदा न सिर्फ नए लोन लेने वालों को मिलेगा बल्कि पहले से कर्ज चुका रहे लोगों की EMI भी कम हो सकती है। खासतौर पर होम लोन और कार लोन की मासिक किस्तें घटने से घरेलू बजट पर दबाव कम होगा। दूसरी ओर कंपनियों को सस्ता कर्ज मिलने से निवेश विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वालों को ब्याज दरों में मामूली गिरावट झेलनी पड़ सकती है।

    IIFL कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरों में नरमी और सरकार के सुधारात्मक कदम मिलकर देश की GDP ग्रोथ को मजबूती दे सकते हैं। बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बेहतर रहने और वित्तीय हालात मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है जिससे महंगाई पर नियंत्रण बना रह सकता है। यह स्थिति RBI के लिए रेट कट के पक्ष में एक मजबूत कारक मानी जा रही है।

    निवेशकों के लिहाज से भी यह संकेत अहम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में संभावित कटौती से शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है। बैंकिंग रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। कुछ विश्लेषक निफ्टी में मौजूदा स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना जता रहे हैं जबकि स्मॉल कैप शेयरों में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कुल मिलाकर 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना आम लोगों कारोबार और बाजार—तीनों के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।