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  • स्मार्ट बॉर्डर से घुसपैठ पर कड़ा प्रहार, अमित शाह ने तकनीक आधारित सुरक्षा ग्रिड और एआई निगरानी की व्यापक रणनीति बताई

    स्मार्ट बॉर्डर से घुसपैठ पर कड़ा प्रहार, अमित शाह ने तकनीक आधारित सुरक्षा ग्रिड और एआई निगरानी की व्यापक रणनीति बताई

    नई दिल्ली । देश की सीमा सुरक्षा को अधिक मजबूत, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में सीमा प्रबंधन को पूरी तरह स्मार्ट तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे अवैध घुसपैठ, ड्रोन गतिविधियों, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए पारंपरिक व्यवस्था के साथ अत्याधुनिक तकनीक का समन्वय अब समय की आवश्यकता बन गया है।

    नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट सुपरिंटेंडेंट्स ऑफ पुलिस कॉन्फ्रेंस-2026 को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनका कहना था कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही प्रभावी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

    उन्होंने बताया कि सरकार “स्मार्ट बॉर्डर” की अवधारणा पर तेजी से काम कर रही है। इस व्यवस्था के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली, डिजिटल सर्विलांस, स्मार्ट सेंसर, एंटी-ड्रोन तकनीक तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों की मदद से सीमा पर होने वाली गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।

    गृह मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार एक “क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी ग्रिड” विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा की जाएगी। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें समय रहते रोकना है। इस दिशा में आधुनिक तकनीक और सूचनाओं के बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।

    अमित शाह ने कहा कि सरकार की सीमा सुरक्षा नीति तीन प्रमुख आधारों पर केंद्रित है, जिनमें सुरक्षित सीमाएं, समृद्ध सीमावर्ती क्षेत्र और जागरूक समाज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, सुरंग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन कम होगा और स्थानीय नागरिक भी राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के सक्रिय भागीदार बन सकेंगे।

    उन्होंने कहा कि संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ के खिलाफ अगले तीन वर्षों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार का लक्ष्य केवल घुसपैठियों की पहचान करना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित करना है जिससे अवैध प्रवेश की संभावनाओं को ही न्यूनतम किया जा सके।

    गृह मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमावर्ती गांवों में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। साथ ही भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। उनका कहना था कि यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवैध घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी, कट्टरपंथ तथा संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और मजबूत बुनियादी ढांचे के माध्यम से देश की सीमाओं को अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाना है।

  • आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी कार्रवाई, जैश-लश्कर से जुड़े 23 आतंकियों को UAPA के तहत घोषित किया व्यक्तिगत आतंकवादी

    आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी कार्रवाई, जैश-लश्कर से जुड़े 23 आतंकियों को UAPA के तहत घोषित किया व्यक्तिगत आतंकवादी


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और मजबूत करते हुए जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के माध्यम से इन सभी के नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल अधिकांश व्यक्ति पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय बताए गए हैं। इन पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने, आतंकियों की भर्ती करने, प्रशिक्षण देने, हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति कराने, घुसपैठ में सहायता देने तथा ड्रोन के माध्यम से हथियार भेजने जैसे गंभीर आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये सभी विभिन्न आतंकी संगठनों के संचालन और विस्तार में अलग-अलग भूमिकाएं निभाते रहे हैं।

    सरकार का मानना है कि UAPA के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने से उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो जाती है। इससे संबंधित एजेंसियों को आतंकवादी गतिविधियों के वित्तीय, लॉजिस्टिक और परिचालन नेटवर्क पर कार्रवाई करने में भी सहायता मिलती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझा करने की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलती है।

    अधिसूचना में शामिल कई व्यक्तियों पर सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों की साजिश, सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ, हथियारों की आपूर्ति तथा भारत में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल को सहायता उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ व्यक्तियों के बारे में यह भी कहा गया है कि वे लंबे समय से पाकिस्तान में रहकर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए संचालन, भर्ती और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में ऐसे व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है जिन पर ड्रोन के माध्यम से हथियार और गोला-बारूद भारत भेजने, आतंकी हमलों की योजना तैयार करने तथा युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ने का आरोप है। इसके अलावा कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से संपर्क होने का दावा किया गया है।

    सरकार लगातार आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती तंत्र और सीमा पार से संचालित आतंकी ढांचे के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसी नीति के तहत समय-समय पर प्रतिबंधित संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। हालिया निर्णय को भी उसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।