Tag: Hooda

  • NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    नई दिल्ली ।भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा और लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) पवित्रन राजन के रणनीतिक अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। NATO से जुड़े हाइब्रिड वॉरफेयर पर तैयार एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में दोनों अधिकारियों के काम का कम से कम 10 बार उल्लेख किया गया है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने इसे भारतीय रणनीतिक सोच के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

    डीएस हुड्डा नॉर्दर्न आर्मी के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। हुड्डा और पवित्रन राजन ने मिलकर ‘बियॉन्ड द काइनेटिक: डीकंस्ट्रक्टिंग वॉरफेयर इन द सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ नाम से एक पेपर तैयार किया था। यह पेपर जनवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च की ओर से प्रकाशित किया गया था।

    जनरल वीके सिंह ने दोनों अधिकारियों के काम को हाइब्रिड, कॉग्निटिव और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय रणनीतिक सोच की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना महत्वपूर्ण है और दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    हुड्डा और राजन के अध्ययन का मुख्य विषय आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति है। उनके अनुसार युद्ध अब केवल आमने-सामने के सैन्य संघर्ष या भौतिक लक्ष्यों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र ऐसा भी बन गया है, जिसे उन्होंने ‘सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ यानी STCB के रूप में समझाया है।

    इस अवधारणा में सूचना, तकनीक और लोगों की सोच के बीच संबंध को महत्वपूर्ण माना गया है। दोनों अधिकारियों के अध्ययन के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाली सूचनाएं उनकी राय और निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। इसका रणनीतिक प्रभाव युद्ध के पारंपरिक क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के प्रभाव जैसा हो सकता है।

    पेपर में कॉग्निटिव वॉरफेयर को आधुनिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसमें कहा गया कि विरोधी सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर सूचना के प्रवाह को प्रभावित कर पहले से मौजूद सामाजिक विभाजन और सूचना की कमी का फायदा उठा सकते हैं। उद्देश्य केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि लोगों के घटनाओं को देखने और फैसले लेने के तरीके को प्रभावित करना भी हो सकता है।

    अध्ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अनुसार AI की मदद से गलत सूचना फैलाने वाले अभियान ज्यादा सटीक और बड़े स्तर पर चलाए जा सकते हैं। व्यक्तिगत या सामाजिक कमजोरियों को ध्यान में रखकर संदेश तैयार करना भी संभव हो सकता है।

    इस चुनौती से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता, मजबूत संस्थानों, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और विदेशी नियंत्रण वाले डिजिटल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जांच-पड़ताल के जरिए मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    NATO से जुड़े प्रकाशन में हुड्डा और राजन के पेपर का उल्लेख विशेष रूप से ‘AI एंड कॉग्निटिव वॉरफेयर’ अध्याय में किया गया। इस अध्याय में कॉग्निटिव वॉरफेयर और OODA लूप पर चर्चा की गई है। OODA का अर्थ ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट है, जिसके जरिए सैन्य कमांडर किसी स्थिति को समझकर निर्णय लेते हैं और कार्रवाई करते हैं।

    प्रकाशन में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में तकनीक, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई है। यूक्रेन द्वारा स्टारलिंक जैसी निजी सैटेलाइट कम्युनिकेशन व्यवस्था के इस्तेमाल और Clearview AI के जरिए रूसी सैनिकों की पहचान से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

    पावर-ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की समीक्षा वाले हिस्से में भी कॉग्निटिव वॉरफेयर, गलत सूचना, मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन और AI से पैदा होने वाली अव्यवस्था को जनता के भरोसे तथा निर्णय प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़ा गया है। दोनों अधिकारियों का जनवरी 2026 का पेपर इस प्रकाशन की संदर्भ सूची में भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

  • सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने के दौरान की गई अपनी कथित टिप्पणी को लेकर विवाद में घिरने के बाद सफाई दी है। हुड्डा ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनकी मंशा सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बिल्कुल नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख समाज के साथ उनका रिश्ता परिवार जैसा है और जरूरत के समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।

    सज्जन कुमार का हाल ही में निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता थे। उनके निधन के बाद श्रद्धांजलि देते हुए हुड्डा की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने सज्जन कुमार के सार्वजनिक जीवन और लोगों से जुड़ाव की प्रशंसा की।

    इस टिप्पणी के बाद हुड्डा पर सवाल उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि हरियाणा कांग्रेस के नेता कुलदीप शर्मा ने भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई। इसके बाद हुड्डा ने अपने बयान को लेकर विस्तृत सफाई सामने रखी और कहा कि उनकी बात का अर्थ उस तरह नहीं था, जिस तरह उसे सार्वजनिक चर्चा में पेश किया जा रहा है।

    हुड्डा ने कहा कि पिछले दो दिनों से वह देख रहे हैं कि उनके बयान को अलग संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान में एक ऐसा अंग्रेजी शब्द भी जोड़ा गया, जिसका उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कोई भी भावना सिख समाज के किसी व्यक्ति को ठेस पहुंचाने वाली नहीं थी।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिख समाज देश का गौरवशाली समाज है और उसके बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी बात से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समुदाय के साथ उनके परिवार और राजनीतिक जीवन का पुराना संबंध रहा है।

    हुड्डा ने अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परदादा चौधरी मातूराम का संबंध पंजाब के पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन से रहा था। उन्होंने शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ उनके परदादा के संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि यह इतिहास दोनों समुदायों के बीच पुराने संबंधों को दर्शाता है।

    उन्होंने किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। हुड्डा के मुताबिक, जब पंजाब से किसान आंदोलन के दौरान किसान हरियाणा पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह सहयोग किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बना हुआ है।

    1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी हुड्डा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में वह सिख समाज के साथ हैं और दंगों के मामलों में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है।

    इस सफाई के बाद हुड्डा ने विवादित टिप्पणी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। अब राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।