Tag: Hormuz Crisis

  • होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरानी जहाज छोड़ा, US का रेस्क्यू मिशन शुरू, क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?

    होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरानी जहाज छोड़ा, US का रेस्क्यू मिशन शुरू, क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और चीन से जुड़ी घटनाओं ने वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल ही में अमेरिका ने जब्त किए गए ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को पाकिस्तान के हवाले कर दिया है, जिससे इस पूरे विवाद में नया मोड़ आ गया है। अब इस जहाज को उसके क्रू मेंबर्स के साथ ईरान भेजा जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब होर्मुज स्ट्रेट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

    दरअसल, अमेरिका ने 21 अप्रैल को इस जहाज को उस वक्त कब्जे में लिया था, जब यह चीन से लौट रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि जहाज पर हथियार बनाने से जुड़ा सामान मौजूद था, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज करते हुए इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया था। अब जहाज की रिहाई को कई जानकार कूटनीतिक संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं।

    इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने मदद मांगी है और अमेरिका इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सोमवार से ऑपरेशन शुरू करेगा। ट्रम्प ने यह भी साफ कर दिया कि अगर इस मिशन में ईरान ने कोई रुकावट डाली, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि, ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी नेवी ने होर्मुज में प्रवेश करने की कोशिश की, तो उस पर हमला किया जाएगा। IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने तो यहां तक कह दिया कि यह क्षेत्र अमेरिकी सेना की “कब्रगाह” बन सकता है।

    तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Strait of Hormuz में इस समय करीब 2,000 जहाज फंसे हुए हैं। इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, इन जहाजों पर करीब 20,000 नाविक मौजूद हैं, जो लगातार बिगड़ती स्थिति के बीच फंसे हुए हैं। खाने-पीने का सामान, ईंधन और जरूरी संसाधनों की कमी तेजी से बढ़ रही है।

    स्थिति को और जटिल बनाते हुए, हाल के दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। छोटे नावों के जरिए कार्गो शिप पर हमला किया गया, जबकि अब तक कम से कम 49 जहाज अपने रास्ते बदल चुके हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार पर भी असर पड़ा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर 4.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं।

    इस पूरे संकट के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने एक ईरानी कंटेनर जहाज से 22 क्रू मेंबर्स को पाकिस्तान के हवाले किया है, जिन्हें बाद में ईरान भेजा जाएगा। इसे मानवीय पहल के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इससे तनाव पूरी तरह कम होता नजर नहीं आ रहा।

    उधर, वैश्विक कूटनीति भी तेजी से सक्रिय हो गई है। Xi Jinping और Donald Trump के बीच 14-15 मई को संभावित मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह बैठक पहले अप्रैल में होनी थी, लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण टाल दी गई थी। चीन इस बैठक को बेहद अहम मान रहा है, क्योंकि इससे दोनों महाशक्तियों के बीच लंबे समय के लिए स्थिर संबंध बन सकते हैं।

    हालांकि, चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता भी होर्मुज ही है, जहां से वह अपनी करीब एक-तिहाई तेल और गैस की जरूरत पूरी करता है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट इस वक्त दुनिया का सबसे संवेदनशील फ्लैशपॉइंट बन चुका है, जहां एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि कूटनीति हालात संभालती है या यह संकट और गहराता है।

  • रिकॉर्ड समय में बढ़ता जहाजों का आवागमन और बंदरगाह विस्तार की भविष्य की योजनाएं..

    रिकॉर्ड समय में बढ़ता जहाजों का आवागमन और बंदरगाह विस्तार की भविष्य की योजनाएं..


    नई दिल्ली। वैश्विक समुद्री व्यापार के मार्ग में उत्पन्न हुए होर्मुज संकट ने भारत के पहले डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विजिनजम की महत्ता को पूरी दुनिया के सामने सिद्ध कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां एक सुरक्षित और भरोसेमंद मार्ग की तलाश में हैं और केरल स्थित यह बंदरगाह इस आवश्यकता को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विजिनजम पोर्ट पर जहाजों का आवागमन इस कदर बढ़ गया है कि वर्तमान में करीब सौ जहाज यहां प्रवेश की प्रतीक्षा में कतारबद्ध खड़े हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि दक्षिण एशिया में समुद्री व्यापार के केंद्र अब तेजी से बदल रहे हैं और भारत वैश्विक लॉजिस्टिक्स के मानचित्र पर एक नए मानक स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

    विजिनजम पोर्ट की संकल्पना तीन दशक पहले अंतरराष्ट्रीय कार्गो के भार को व्यवस्थित करने और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष दो हजार पंद्रह में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्तमान में यह बंदरगाह रिकॉर्ड समय में दस लाख टीईयू का आंकड़ा पार कर चुका है। भारी दबाव के बावजूद इस पोर्ट की कार्यक्षमता उल्लेखनीय रही है और पिछले महीने ही यहां साठ से अधिक जहाजों का सफल संचालन किया गया जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट की सुविधा होने के कारण यहां बड़े जहाजों को आसानी से संभाला जा सकता है जिससे यह अंतरराष्ट्रीय कार्गो परिवहन के लिए एक अनिवार्य विकल्प बन गया है।

    ट्रांसशिपमेंट सुविधा किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग के लिए रीढ़ की हड्डी के समान होती है जहां कंटेनरों को एक बड़े जहाज से दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किया जाता है ताकि वे अपने अंतिम गंतव्य तक सुगमता से पहुंच सकें। भारत पारंपरिक रूप से इस कार्य के लिए पड़ोसी देशों के हब पर निर्भर रहा है लेकिन विजिनजम के उदय ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान विस्तार कार्यों के पूरा होने के बाद यहां एक साथ पांच बड़े मदरशिप्स को संभालने की क्षमता विकसित हो जाएगी। यह विस्तार न केवल भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक स्तर के बड़े समुद्री केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम बनाएगा।

    समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि विजिनजम पोर्ट का विकास अब केवल एक राष्ट्रीय परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह एक वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे गतिरोध के बीच शिपिंग उद्योग को एक ऐसे केंद्र की तलाश थी जो सुरक्षित होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी उन्नत हो। विजिनजम ने इन सभी मानकों पर खरा उतरकर खुद को एक भरोसेमंद समुद्री दिग्गज के रूप में स्थापित किया है। जैसे-जैसे इसके दूसरे चरण का काम गति पकड़ रहा है उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखने में भारत का सबसे महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।

  • तेल की कीमतों में उछाल से हवाई यात्रा पर संकट चीन की एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं

    तेल की कीमतों में उछाल से हवाई यात्रा पर संकट चीन की एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज संकट का सीधा असर अब वैश्विक हवाई यात्रा पर दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ गई है जिससे कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हो रही हैं। इसी क्रम में चीन की कई प्रमुख एयरलाइन कंपनियों ने अपने अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों को रद्द करना शुरू कर दिया है जिससे यात्रियों में असमंजस और परेशानी का माहौल है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार चीनी एयरलाइनों द्वारा अचानक की गई फ्लाइट कैंसिलेशन से दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों की यात्रा करने वाले यात्री सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें आखिरी समय पर टेक्स्ट संदेश के जरिए उड़ान रद्द होने की सूचना दी गई जिससे उनकी यात्रा योजनाएं पूरी तरह बिगड़ गईं।

    ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में छुट्टियां मना रही एक यात्री ली हुओयू ने बताया कि उनकी वापसी की फ्लाइट जो सिचुआन एयरलाइंस द्वारा संचालित थी अप्रैल के अंत में अचानक रद्द कर दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी योजना अगले दिन काम पर लौटने की थी लेकिन अब उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह हेबेई प्रांत की एक छात्रा ऊना हान ने बताया कि बीजिंग से थाईलैंड जाने वाली उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई जिससे उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना प्रभावित हुई।

    विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है जिसका सीधा असर एविएशन फ्यूल पर पड़ता है। ईंधन लागत बढ़ने के कारण एयरलाइंस अपने रूट्स और फ्लाइट शेड्यूल में कटौती करने को मजबूर हो रही हैं। यही कारण है कि कई कंपनियां घाटे से बचने के लिए उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित कर रही हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि चीन का सबसे व्यस्त ट्रैवल सीजन माने जाने वाला गोल्डन वीक भी इस फैसले से प्रभावित हो सकता है। इस दौरान लाखों यात्री अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं लेकिन फ्लाइट कैंसिलेशन से उनकी योजनाएं बाधित हो रही हैं।

    हालांकि अब तक किसी भी चीनी एयरलाइन ने इस मुद्दे पर विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है लेकिन कुछ कंपनियों ने नीति समायोजन और परिचालन कारणों का हवाला देते हुए उड़ानें रद्द करने की पुष्टि की है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतों और क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई यात्रा उद्योग पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।