Tag: Hormuz Strait crisis

  • इजरायल-ईरान तनाव चरम पर, लेबनान और गाजा में भीषण हमले, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता

    इजरायल-ईरान तनाव चरम पर, लेबनान और गाजा में भीषण हमले, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां इजरायल, ईरान, अमेरिका और हिजबुल्लाह के बीच हालात और ज्यादा विस्फोटक हो गए हैं। इजरायल में एक टेस्टिंग ग्राउंड पर हुए बड़े धमाके के बाद आसमान में उठे धुएं के बाद ‘मशरूम क्लाउड’ जैसे दृश्य देखे जाने से दहशत फैल गई, हालांकि इसे एक पहले से तय परीक्षण बताया जा रहा है।

    इसी बीच इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने दावा किया है कि उसने सीजफायर के बावजूद लेबनान में हिजबुल्लाह के करीब 100 ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले किए हैं। इन हमलों में आतंकी ढांचे, ऑब्जर्वेशन पोस्ट और हथियार डिपो को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह भी इजरायली सेना पर ड्रोन और मोर्टार हमलों के वीडियो जारी कर रहा है, जिससे तनाव और गहराता जा रहा है।

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया संघर्ष में अब तक लगभग 2,969 लोगों की मौत और 9,000 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई है। सिर्फ पिछले कुछ दिनों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    गाजा पट्टी में भी हालात खराब हैं, जहां खान यूनिस से लेकर गाजा सिटी तक इजरायली सेना की भारी गोलाबारी और नौसैनिक हमले जारी हैं। शरणार्थी कैंप और रिहायशी इलाकों में भी फायरिंग से आम नागरिकों में दहशत का माहौल है।

    इधर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि नया ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके तहत जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा और कुछ जहाजों पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी दबाव और नाकेबंदी की रणनीति का जवाब दिया जाएगा।

    अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण कई जहाजों को वापस लौटाया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है, जहां ईरान ने कुछ देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल उसके विरोधियों के लिए न होने दें। वहीं क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और बयानबाजी ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

  • होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?

    होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात उस समय और बिगड़ गए, जब फ्रांस की शिपिंग कंपनी CMA CGM के एक कार्गो जहाज पर हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ‘सैन एंटोनियो’ नाम का यह जहाज जब होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए। हालांकि कंपनी ने पुष्टि की है कि सभी घायलों को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए भेज दिया गया है।

    इस हमले के बाद क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और गहरा गया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन सैकड़ों जहाज गुजरते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह संख्या बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को अचानक बंद कर दिया। यह ऑपरेशन होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन दो दिनों में महज तीन जहाजों को ही सुरक्षित निकाल पाने के बाद इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन को रोकने के पीछे क्षेत्रीय दबाव और बढ़ते सैन्य जोखिम बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस संकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, समुद्री मार्ग सुरक्षित रखने और अवरोध हटाने की मांग की है। वहीं, चीन ने भी दोनों देशों से तुरंत तनाव कम करने और युद्ध जैसे हालात खत्म करने की अपील की है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी क्षेत्र में हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में 40 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 26 सीधे हमले शामिल हैं। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियां और जहाजों के अपहरण की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इस तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। तेल सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, जबकि हजारों नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं। अनुमान है कि इस इलाके में 1500 से ज्यादा जहाज और हजारों क्रू मेंबर अभी भी जोखिम के बीच मौजूद हैं।

    कुल मिलाकर, होर्मुज में बढ़ता टकराव अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे या हालात और बिगड़ेंगे

  • अमेरिका-चीन हाई-लेवल डिप्लोमेसी पर संकट की छाया: ट्रम्प-जिनपिंग मीटिंग टली, होर्मुज तनाव से वैश्विक कूटनीति पर असर

    अमेरिका-चीन हाई-लेवल डिप्लोमेसी पर संकट की छाया: ट्रम्प-जिनपिंग मीटिंग टली, होर्मुज तनाव से वैश्विक कूटनीति पर असर


    नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच होने वाली संभावित उच्च स्तरीय बैठक को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-हॉर्मुज संकट के बीच यह अहम मुलाकात फिलहाल टाल दी गई है। यह बैठक पहले अप्रैल में प्रस्तावित थी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही थी, लेकिन हालात बदलने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।

    चीन के लिए क्यों अहम है यह बैठक?
    चीन इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण अवसर मान रहा है क्योंकि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्तियों के बीच लंबे समय तक स्थिर संबंध बनाने की दिशा तय कर सकती है।

    लेकिन बीजिंग के अंदर इस पर एकमत नहीं है। सरकार के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच आगे रणनीति क्या होनी चाहिए।

    सबसे बड़ी चिंता: होर्मुज स्ट्रेट
    सबसे गंभीर मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से चीन अपनी लगभग एक-तिहाई तेल और गैस आपूर्ति पूरी करता है।अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या मार्ग बाधित होता है, तो इसका सीधा असर चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा और अमेरिका-चीन वार्ता भी प्रभावित हो सकती है।

    ट्रम्प की यात्रा पर भी असर
    चीनी अधिकारियों के अनुसार, अगर मिडिल ईस्ट संकट जारी रहता है तो ट्रम्प की संभावित चीन यात्रा सामान्य राजनयिक दौरे जैसी नहीं रह जाएगी।एक चीनी अधिकारी के मुताबिक, यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

    बड़ा संकेत क्या है?
    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक सिर्फ एक डिप्लोमैटिक इवेंट नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला मोड़ हो सकती है—चाहे भविष्य में किसी भी देश में सत्ता परिवर्तन क्यों न हो।

  • ट्रंप की धमकी को बताया शोर ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने होर्मुज संकट पर कूटनीतिक पहल का भरोसा दिया

    ट्रंप की धमकी को बताया शोर ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने होर्मुज संकट पर कूटनीतिक पहल का भरोसा दिया

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि ब्रिटेन का प्राथमिक फोकस अपने राष्ट्रीय हित ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक समाधान पर केंद्रित है उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को लेकर चिंता जायज है और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है

    स्टार्मर ने जनता को भरोसा दिलाया कि ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की योजनाएं असर दिखा रही हैं उन्होंने कहा कि बजट में उठाए गए कदमों के कारण लोगों के ऊर्जा बिल में कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी हों फिलहाल कीमतें निर्धारित अवधि तक स्थिर रहेंगी इससे आम लोगों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नाटो को लेकर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टार्मर ने उन्हें दबाव बनाने की कोशिश और शोर करार दिया उन्होंने साफ कहा कि नाटो दुनिया का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन है और ब्रिटेन इसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है उन्होंने यह भी दोहराया कि कोई भी निर्णय केवल राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा

    स्टार्मर ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन किसी भी प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं होगा उन्होंने कहा कि यह हमारी लड़ाई नहीं है लेकिन इसके बावजूद यूरोप और सहयोगी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना जरूरी है ताकि सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उन्होंने कूटनीतिक पहल की घोषणा की स्टार्मर ने बताया कि ब्रिटेन इस सप्ताह उन देशों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेगा जो इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से सुचारू करने में सहयोग करना चाहते हैं इस बैठक की अध्यक्षता यवेट कूपर करेंगी जिसमें समुद्री मार्ग की सुरक्षा फंसे जहाजों और नाविकों की रक्षा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी

    उन्होंने बताया कि ब्रिटेन पहले से ही इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है विदेश मंत्री और आर्थिक प्रमुख जी7 देशों के साथ लगातार संवाद में हैं जबकि रक्षा मंत्री मध्य पूर्व के साझेदार देशों से संपर्क बनाए हुए हैं इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ब्रिटेन ने 35 देशों को एक साझा पहल के तहत जोड़ा है

    स्टार्मर ने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन में महंगाई को नियंत्रित करने और जीवन यापन की लागत कम करने का सबसे प्रभावी तरीका मध्य पूर्व में तनाव को कम करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास किए जाएंगे

    इस बयान से साफ है कि ब्रिटेन वर्तमान वैश्विक संकट को सैन्य के बजाय कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और साथ ही अपने नागरिकों को आर्थिक राहत देने के लिए भी प्रतिबद्ध है

  • होर्मुज संकट से न्यूजीलैंड में तनाव, पीएम लक्सन बोले- ईरान ने स्ट्रेट बंद करने पर मजबूर किया

    होर्मुज संकट से न्यूजीलैंड में तनाव, पीएम लक्सन बोले- ईरान ने स्ट्रेट बंद करने पर मजबूर किया


    नई दिल्ली हाल ही में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। इस फैसले के बाद तेल की झील में उछाल देखा जा रहा है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। कुल 20 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इस कदम पर प्लायबोल्लाम को शामिल किया है, जिसमें न्यूजीलैंड भी शामिल है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने मध्य पूर्व में ढलानों और ईरान की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान ने फूल पेट्रोल और जरूरी सामान ले जाने वाले साथियों के स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे न्यूजीलैंड और अन्य देशों में तेल और जरूरी सामान ले जाने लगे हैं।

    पीट लक्सन ने कहा, “न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड हमेशा से खुला स्टॉक शेयरहोल्डिंग और बहुप्रतिक्षित साझेदारी के माध्यम से ग्लोबल ट्रेड को सुरक्षित बनाए रखने का है। होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी हमारी इंडस्ट्री इसी दिशा में काम करती है।”

    संयुक्त बयान में देशों की सूची में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनिश, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया शामिल हैं। इन ईस्ट ने मिलकर कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लाभ पहुंचाता है और आतंकवादियों पर हमले करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

    बयान में यह स्पष्ट किया गया कि इस तरह के कदम वैश्विक ऊर्जा परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए खतरा हैं। इसमें मांग की गई कि ईरान सागर, मिसाइल हमले और माइन प्लांट जैज़ को तुरंत बंद करें। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का पालन किया जाये।

    होर्मुज स्ट्रीट दुनिया के लिए साम्राज्य के रूप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय एस्ट्राडोल लाइन का मुख्य मार्ग है। किसी भी तरह की रोक या बाधा से वैश्विक बाजार और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

    न्यूजीलैंड और अन्य देशों ने यह भी कहा कि स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए बहुप्रतीक्षित प्रयास का समर्थन जारी रखें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि सभी देशों को समुद्री कानून का सम्मान दिया जाए और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परमाणु ऊर्जा की आजादी बरकरार रखी जाए।

    यह घटना केवल मध्य पूर्व का नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान की कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।