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  • आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    नई दिल्ली। आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की कृषि, बागवानी और निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन चुका है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित होने वाले आम महोत्सव में किसानों, बागवानों, कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और आम प्रेमियों को एक ही मंच पर जोड़ने की तैयारी की गई है। इस आयोजन में आम की आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बाजार प्रबंधन और नई तकनीकों पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता जैसे मनोरंजक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

    महोत्सव के दौरान कृषि विशेषज्ञ आम की बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगे। इसमें पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर कटाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय भी बताएंगे।

    उत्तर प्रदेश देश में आम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी कई प्रसिद्ध किस्मों के लिए उपयुक्त है। राज्य के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रटौल, बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसे आम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। विशेष रूप से मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है, जबकि वाराणसी का लंगड़ा और सहारनपुर का चौसा भी निर्यात बाजार में लगातार मांग बनाए हुए हैं।

    राज्य में आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों और गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फलों की पैकिंग और ट्रीटमेंट के कारण उत्तर प्रदेश से कई देशों में बड़ी मात्रा में आम और आम उत्पादों का निर्यात हो रहा है। भविष्य में जेवर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्रूट टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर से निर्यात प्रक्रिया को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। किसानों को फ्रूट बैग वितरण और पुराने बागों के पुनर्जीवन के लिए दी जा रही सब्सिडी जैसी योजनाएं भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    आम महोत्सव में विभिन्न किस्मों की विशेषताओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। दशहरी अपनी सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जबकि लंगड़ा का खट्टा-मीठा स्वाद इसे अलग पहचान देता है। चौसा अपनी रसीली बनावट के कारण पसंद किया जाता है और रटौल अपनी विशिष्ट खुशबू के लिए जाना जाता है। बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसी किस्में भी अपने स्वाद और समय से पहले पकने की विशेषता के कारण किसानों और उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

    महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म भी होगी, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। पकने पर इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी हो जाता है तथा इसका गूदा पूरी तरह रेशारहित होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है, जिससे इसका स्वाद अत्यंत मीठा माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों ने भी इसकी सफल खेती शुरू कर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यात उन्मुख खेती के माध्यम से भारत का आम उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

  • आलू डालने से बढ़ेगा पुदीना या सिर्फ सोशल मीडिया का दावा? जानिए वायरल ट्रिक कितनी कारगर और पौधे को हरा-भरा रखने के सही उपाय

    आलू डालने से बढ़ेगा पुदीना या सिर्फ सोशल मीडिया का दावा? जानिए वायरल ट्रिक कितनी कारगर और पौधे को हरा-भरा रखने के सही उपाय

    नई दिल्ली । घर में ताजा और हरा-भरा पुदीना उगाना आजकल गार्डनिंग के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी ट्रिक तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि गमले की मिट्टी में आलू का टुकड़ा दबाने से पुदीने की ग्रोथ तेजी से होती है और पौधा अधिक घना बनता है। हालांकि बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इसे केवल एक घरेलू प्रयोग के रूप में देखा जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी पौधे की अच्छी वृद्धि का आधार उसकी मिट्टी, पोषण, नमी और नियमित देखभाल होती है। पुदीना विशेष रूप से ऐसी मिट्टी में बेहतर बढ़ता है जो भुरभुरी, उपजाऊ और जैविक पदार्थों से भरपूर हो। साथ ही मिट्टी में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना भी आवश्यक है ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो और जड़ों को नुकसान न पहुंचे।

    वायरल वीडियो में यह दावा किया जाता है कि मिट्टी में रखा गया आलू धीरे-धीरे गलकर स्टार्च और कुछ जैविक तत्व छोड़ता है, जिससे पौधे को अतिरिक्त पोषण मिलता है। हालांकि बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया का पुदीने की वृद्धि पर कितना प्रभाव पड़ता है, इसे लेकर कोई प्रमाणित अध्ययन उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग मौसम, मिट्टी और वातावरण के अनुसार इसके परिणाम भी भिन्न हो सकते हैं। इसलिए केवल इस उपाय पर निर्भर रहना उचित नहीं माना जाता।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि पुदीने को घना और स्वस्थ बनाना है तो नियमित सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण है। मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। अत्यधिक पानी से जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है, जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। इसी प्रकार हर 20 से 25 दिनों के अंतराल पर वर्मी कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद देने से पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं।

    पुदीने की नियमित कटाई भी उसकी अच्छी बढ़त का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि समय-समय पर ऊपरी टहनियों और पत्तियों की छंटाई करने से नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और पौधा अधिक घना दिखाई देता है। यदि पौधा पुराना हो जाए तो उसकी स्वस्थ कटिंग लेकर नया पौधा तैयार करना भी एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

    धूप का संतुलन भी पुदीने की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधे को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां सुबह की हल्की धूप मिले, जबकि दोपहर की तेज धूप से बचाव हो। इससे पत्तियां ताजा बनी रहती हैं और पौधे की वृद्धि लगातार होती रहती है। उचित प्रकाश और संतुलित नमी के साथ पुदीना लंबे समय तक स्वस्थ बना रह सकता है।

    बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली कई गार्डनिंग ट्रिक्स रोचक जरूर होती हैं, लेकिन सभी उपाय हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं होते। इसलिए किसी भी वायरल दावे को अपनाने से पहले उसकी विश्वसनीयता और व्यावहारिक उपयोगिता को समझना आवश्यक है। यदि उद्देश्य लंबे समय तक हरा-भरा और घना पुदीना उगाना है, तो सही मिट्टी, जैविक खाद, संतुलित सिंचाई, नियमित छंटाई और उचित धूप जैसी बुनियादी बागवानी तकनीकों पर ध्यान देना सबसे अधिक लाभकारी और भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

  • हर मौसम में खिलेंगे रंग-बिरंगे गुलाब, जानिए पौधा लगाने से लेकर देखभाल तक के जरूरी मंत्र

    हर मौसम में खिलेंगे रंग-बिरंगे गुलाब, जानिए पौधा लगाने से लेकर देखभाल तक के जरूरी मंत्र

    नई दिल्ली । घर के बगीचे में खिले रंग-बिरंगे गुलाब न केवल वातावरण को आकर्षक बनाते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति लगाव को भी बढ़ाते हैं। अपनी मनमोहक खुशबू और सुंदरता के कारण गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है। हालांकि कई लोगों की शिकायत रहती है कि गुलाब के पौधों में अपेक्षित संख्या में फूल नहीं आते या पौधे कुछ समय बाद कमजोर पड़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से पौधारोपण और नियमित देखभाल अपनाई जाए तो गुलाब का पौधा लंबे समय तक स्वस्थ रहकर भरपूर फूल दे सकता है।

    गुलाब की अच्छी वृद्धि के लिए सबसे पहले उपयुक्त स्थान का चयन करना आवश्यक है। यह पौधा भरपूर धूप पसंद करता है और प्रतिदिन कम से कम पांच से छह घंटे सीधी सूर्य किरणों की आवश्यकता होती है। पर्याप्त धूप मिलने से पौधा मजबूत बनता है और फूलों की संख्या भी बढ़ती है। छायादार स्थान पर लगाए गए पौधों में अक्सर फूल कम आते हैं और उनकी वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है।

    मिट्टी की गुणवत्ता भी गुलाब की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बागवानी विशेषज्ञ दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी को गुलाब के लिए सबसे उपयुक्त मानते हैं। पौधा लगाने से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या जैविक कंपोस्ट मिलाने से जड़ों को आवश्यक पोषण मिलता है। इससे पौधे की विकास गति बेहतर होती है और नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं।

    सिंचाई के मामले में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अत्यधिक पानी पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि पानी की कमी भी वृद्धि को प्रभावित करती है। गर्म मौसम में नियमित और हल्की सिंचाई पौधे को स्वस्थ बनाए रखती है। वहीं ठंड के मौसम में पानी की मात्रा कम रखनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि गमले या क्यारी में पानी जमा न हो, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

    पौधे को नियमित पोषण देना भी आवश्यक है। हर पंद्रह से बीस दिनों के अंतराल पर जैविक खाद या वर्मी कंपोस्ट डालने से पौधे को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं। इससे नई कलियां बनने की प्रक्रिया तेज होती है और फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। नीम खली जैसी प्राकृतिक खाद पौधे को पोषण देने के साथ कई प्रकार के कीटों से भी बचाने में मदद करती है।

    गुलाब के पौधों में समय-समय पर छंटाई करना भी जरूरी माना जाता है। सूखी, कमजोर या पुरानी टहनियों को हटाने से पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं और कलियों के विकास में लगती है। नियमित प्रूनिंग से पौधा अधिक घना दिखाई देता है और फूलों का उत्पादन भी बढ़ता है। बागवानी विशेषज्ञ इसे गुलाब की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

    कीट और रोगों से सुरक्षा भी गुलाब की अच्छी ग्रोथ के लिए आवश्यक है। कई बार पौधों पर छोटे कीट हमला कर देते हैं, जिससे पत्तियां और कलियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में नीम तेल का छिड़काव या हल्के साबुन वाले घोल का प्रयोग प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। इससे पौधा सुरक्षित रहता है और रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी कम पड़ती है।

    यदि बगीचे को और अधिक आकर्षक बनाना हो तो विभिन्न रंगों के गुलाबों का संयोजन लगाया जा सकता है। लाल, गुलाबी, पीले और सफेद गुलाब एक साथ खिलने पर बगीचे को जीवंत और बेहद सुंदर स्वरूप प्रदान करते हैं। सही देखभाल और थोड़ी सी मेहनत से घर की बगिया पूरे वर्ष रंगों और खुशबू से महक सकती है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 जनवरी को करेंगे राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 जनवरी को करेंगे राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


    भोपाल । कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अवसर पर राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार, 30 जनवरी को दोपहर 3 बजे शासकीय गुलाब उद्यान, लिंक रोड क्रमांक-1, भोपाल में इस प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। प्रदर्शनी का आयोजन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग और मध्यप्रदेश रोज़ सोसायटी के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य में पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देना और उद्यानिकी गतिविधियों में नई प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करना है।

    प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के फूलों की विस्तृत रेंज को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें स्थानीय और विदेशी प्रजातियों के गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी, और अन्य सजावटी पौधे शामिल होंगे। इसके अलावा, प्रदर्शनी में फूलों की खेती, कटिंग, पौधरोपण तकनीक और उद्यानिकी से जुड़े नवाचारों के स्टाल भी लगेंगे।

    इस प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों और उद्यानिक प्रेमियों को फूलों की खेती और उनके व्यवसायिक अवसरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। आयोजकों का कहना है कि यह पहल उद्यानिकी क्षेत्र को न सिर्फ रोजगार के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मौके पर पौधरोपण करेंगे और प्रदर्शनी के प्रमुख स्टालों का अवलोकन करेंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रदर्शनी में आएं और पुष्प उत्पादन की महत्वता को समझें।