Tag: Hospital Negligence

  • मध्य प्रदेश के पन्ना में दर्दनाक लापरवाही, एंबुलेंस और पोस्टमार्टम व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश के पन्ना में दर्दनाक लापरवाही, एंबुलेंस और पोस्टमार्टम व्यवस्था पर उठे सवाल


    पन्ना । मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला की समय पर उपचार न मिलने और एंबुलेंस की देरी के कारण मौत हो गई जिसके बाद भी परिजनों को अस्पताल में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    घटना पड़रहा गांव की है जहां 40 वर्षीय विद्या कुशवाहा ने कथित तौर पर अज्ञात कारणों के चलते जहरीला पदार्थ खा लिया। परिजनों के अनुसार महिला पहले से ही मानसिक तनाव में थी क्योंकि इसी वर्ष उनके बेटे की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद परिजनों ने तुरंत ‘108’ एंबुलेंस सेवा को कॉल किया लेकिन आरोप है कि एंबुलेंस करीब ढाई घंटे बाद मौके पर पहुंची।

    महिला को पहले अजयगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां से गंभीर हालत देखते हुए उसे जिला अस्पताल पन्ना रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि यहां भी एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी जिसके चलते वे निजी वाहन से महिला को लेकर निकले लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

    इसके बाद भी परिजनों की परेशानियां खत्म नहीं हुईं। सुबह पुलिस द्वारा पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया लेकिन आरोप है कि वहां करीब तीन घंटे तक कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुआ। परिजन लगातार अस्पताल परिसर में अधिकारियों और डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

    लंबे इंतजार और लगातार अनदेखी से नाराज परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा किया जिसके बाद आनन-फानन में डॉक्टर को बुलाकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। यह पूरा मामला एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • कानपुर में सनसनी: मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

    कानपुर में सनसनी: मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप



    कानपुर। कानपुर में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ITBP जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। यह मामला कथित तौर पर निजी अस्पताल की लापरवाही और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, विकास सिंह की मां को 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर कानपुर के जीटी रोड स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगाए जाने से उनके दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया, जिसके बाद हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

    परिजनों के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने पर महिला को दूसरे अस्पताल पारस हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण को रोकने के लिए हाथ काटने की सलाह दी। इसके बाद 17 मई को महिला का दाहिना हाथ ऑपरेशन के जरिए काटना पड़ा।

    इसी घटना से आहत ITBP जवान विकास सिंह का आरोप है कि यह स्थिति कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण बनी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कई बार थाना रेल बाजार में शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

    इसी से नाराज होकर वह कथित सबूत के तौर पर अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल बॉक्स में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। इस घटना के बाद वहां हड़कंप मच गया और मामला तुरंत उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के निर्देश दिए हैं। अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा, जो यह तय करेगा कि इलाज में लापरवाही हुई थी या नहीं।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीज सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • भोपाल हॉस्पिटल कांड: युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टर नदारद, नर्स करती रही CPR

    भोपाल हॉस्पिटल कांड: युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टर नदारद, नर्स करती रही CPR




    भोपाल।
    भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र स्थित अक्षय अस्पताल में इलाज के दौरान 32 वर्षीय युवक की मौत के बाद शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की। इस बीच एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक नर्स मरीज को सीपीआर देकर रिवाइव करने की कोशिश करती दिख रही है, जबकि वार्ड में कोई डॉक्टर मौजूद नजर नहीं आ रहा। यही वीडियो परिजनों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया है।

    जानकारी के अनुसार, बरखेड़ी निवासी विशाल जोगी को इलाज के लिए अक्षय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम से ही उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी थी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अस्पताल स्टाफ से सीनियर डॉक्टर को बुलाने की मांग की, लेकिन लंबे समय तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। देर रात विशाल की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

    मृत्यु से पहले का जो वीडियो सामने आया है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के बेड पर लेटे विशाल को एक नर्स सीपीआर देकर बचाने का प्रयास कर रही है। आसपास मौजूद परिजन रोते-बिलखते दिखाई दे रहे हैं और वीडियो बना रहा व्यक्ति अस्पताल में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी का आरोप लगा रहा है। परिजनों का कहना है कि गंभीर स्थिति में भी अस्पताल में सिर्फ नर्स ही मौजूद थी, जबकि डॉक्टर और अन्य स्टाफ नजर नहीं आए।

    वहीं, अस्पताल स्टाफ की ओर से इस मामले में अलग ही दावा किया गया है। स्टाफ का कहना है कि विशाल की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी और इसकी जानकारी परिजनों को समय रहते दे दी गई थी। डॉक्टरों ने मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हालत ज्यादा बिगड़ने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, मौत के बाद करीब 30 से ज्यादा लोग एक साथ अस्पताल में आ गए और हंगामा करने लगे।

    अस्पताल स्टाफ का यह भी कहना है कि परिजनों और उनके साथ आए लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की।

    गुस्साए लोगों ने अस्पताल के कांच, कुर्सियां, बोर्ड और अन्य सामान तोड़ दिए। हालात बेकाबू होते देख अस्पताल का स्टाफ और गार्ड अपनी जान बचाने के लिए मौके से निकल गए। स्टाफ के अनुसार, उस वक्त अस्पताल में सिर्फ नाइट ड्यूटी पर तैनात दो सफाई कर्मचारी ही मौजूद रह गए थे।

    हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस को बुलाया गया। हबीबगंज थाना पुलिस के अनुसार, मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सवाल यह उठ रहा है कि गंभीर मरीज की हालत में डॉक्टरों की मौजूदगी क्यों नहीं दिखी और क्या इलाज में वास्तव में लापरवाही बरती गई। अब पूरे मामले पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।