Tag: Hospital Safety

  • आग से बचाव पर बड़ा एक्शन, इमारतों में आपातकालीन निकासी व्यवस्था की होगी जांच

    आग से बचाव पर बड़ा एक्शन, इमारतों में आपातकालीन निकासी व्यवस्था की होगी जांच


    विदिशा । विदिशा में जिला प्रशासन ने नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी बड़े प्रतिष्ठानों की जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम दिल्ली की हालिया आगजनी घटना के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
    फायर सेफ्टी से लेकर निकासी व्यवस्था तक जांच
    जांच टीम होटल, लॉज, अस्पताल और बहुमंजिला इमारतों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा करेगी, जैसे:
    फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशीलता
    आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था
    फायर एनओसी (No Objection Certificate) की वैधता
    विद्युत सुरक्षा मानक
    भवन निर्माण नियमों का पालन
     नियमों की अनदेखी पर होगी सख्त कार्रवा
    प्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी प्रतिष्ठान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अवैध निर्माण पाया गया, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

    संयुक्त टीम करेगी निरीक्षण
    इस अभियान के लिए प्रशासन ने नगर पालिका, फायर ब्रिगेड, लोक निर्माण विभाग और अन्य विभागों की संयुक्त टीम बनाई है। यह टीम जिलेभर में चरणबद्ध तरीके से सभी प्रमुख प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी।

     पहले से रोकथाम पर जोर
    अधिकारियों का मानना है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि पहले ही सुरक्षा मानकों की जांच कर कमियों को दूर किया जाए। इसी सोच के तहत यह अभियान शुरू किया गया है।

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए


    नई दिल्ली। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बाहर सोमवार रात को बायोमेडिकल कचरे के ढेर में अचानक आग लग गई। अस्पताल के पिछले हिस्से में सड़क किनारे जमा कचरे से उठी लपटें देखते ही देखते फैल गईं, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना पाते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    सौभाग्य रहा कि आग और धुआं अस्पताल की मुख्य इमारतों तक नहीं पहुँचा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगते समय शीशियों के टूटने और पटाखों जैसी आवाजों से अंदाजा लगाया जा रहा था कि सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी वहां मिला हुआ था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट को अलग रंग के बैग (पीला, लाल, सफेद, नीला) में संग्रहित करना और अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ही नष्ट करना जरूरी है। खुले में पड़ा संक्रमित कचरा संक्रमण फैलाने का बड़ा खतरा बन सकता है, खासकर अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में जहां रोजाना हजारों मरीज और परिजन आते हैं।

    डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने आग को गंभीर मामले के रूप में लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों की लापरवाही से कचरा खुले में पड़ा रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मेडिकल अधीक्षक को कहा गया कि भविष्य में बायोमेडिकल कचरे का निपटान नियमों के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाए।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आग लगने के समय किसी मरीज या कर्मचारी को चोट नहीं आई। डीन ने मामले की पूरी जांच के निर्देश देते हुए बताया कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस घटना ने प्रशासन और अस्पताल अधिकारियों की सतर्कता की चुनौती सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया होता, तो यह न केवल संपत्ति के नुकसान बल्कि स्वास्थ्य जोखिम के लिए भी गंभीर साबित हो सकता था।

    मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा कि भविष्य में सभी बायोमेडिकल कचरे का समय पर निपटान और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी और नियमित ऑडिट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।