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  • नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    मध्य प्रदेश: के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।

    परिजनों का आरोप है कि महिला के उपचार के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से लापरवाही बरती गई। उनका दावा है कि महिला को गलत दवाएं दी गईं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले में परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नशे की हालत में थे और ऐसी स्थिति में मरीज का उपचार किया जा रहा था। परिजनों ने संबंधित कर्मचारियों की चिकित्सकीय जांच कराने और अल्कोहल टेस्ट कराए जाने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।

    महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और अन्य लोगों की भीड़ जुट गई। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि उपचार में लापरवाही या किसी कर्मचारी की गंभीर चूक सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद मृतका के शव को आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के लिए ले जाया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल नरसिंहगढ़ भेज दिया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इलाज से संबंधित रिकॉर्ड, दवाओं की जानकारी और अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के उपचार और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    बताया जा रहा है कि इसी अस्पताल को लेकर कुछ दिन पहले भी एक अन्य महिला के उपचार से संबंधित विवाद सामने आया था। इस कारण ताजा घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार प्रक्रिया को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका रही। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों को मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।

  • 104 डिग्री बुखार में भी अविका गौर करती रहीं शूटिंग, डेंगू की पुष्टि के बाद अस्पताल में भर्ती

    104 डिग्री बुखार में भी अविका गौर करती रहीं शूटिंग, डेंगू की पुष्टि के बाद अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री अविका गौर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभिनेत्री डेंगू से संक्रमित पाई गई हैं और पिछले कई दिनों से तेज बुखार से जूझ रही थीं। उनके पति मिलिंद चंदवानी ने सोशल मीडिया के जरिए अविका की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी साझा की और बताया कि वह 103 से 104 डिग्री तक तेज बुखार के बावजूद अपने काम से पीछे नहीं हटीं। हालत खराब होने के बावजूद उन्होंने अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट को पूरा करने के लिए लगातार शूटिंग की। अब अस्पताल में इलाज के दौरान उनके पति ने फैंस से अविका के जल्द स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने की अपील की है।

    मिलिंद चंदवानी के मुताबिक, अविका गौर को करीब पांच दिनों तक तेज बुखार रहा। इस दौरान उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें सामान्य रूप से उठने-बैठने और खाना खाने में भी परेशानी हो रही थी। इसके बावजूद एक प्रोजेक्ट की शूटिंग में उनका दो दिन का काम बाकी था। अविका ने तेज बुखार के बीच भी शूटिंग जारी रखी और अपने हिस्से की परफॉर्मेंस पूरी की। बताया गया कि उनका काम इतना प्रभावी रहा कि दो दिन का बचा हुआ शूट एक ही दिन में पूरा कर लिया गया।

    शूटिंग पूरी करने के बाद अविका को दो दिन का ब्रेक मिला। इस दौरान वह ज्यादातर समय बिस्तर पर रहीं और दवाइयां लेती रहीं। उनकी तबीयत सामान्य नहीं थी और चलने-फिरने के साथ-साथ खाना खाने में भी दिक्कत हो रही थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने दूसरे प्रोफेशनल कमिटमेंट को पूरा करने का फैसला किया। ब्रेक के बाद वह तेज बुखार की हालत में ही दिल्ली पहुंचीं, जहां उन्हें एक विज्ञापन की शूटिंग करनी थी।

    दिल्ली में एड शूट से पहले अविका का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया था। हालांकि, मुंबई लौटने के बाद सामने आई रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। इसके बाद उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके पति के अनुसार, उन्होंने अविका को आराम करने और शूटिंग आगे बढ़ाने के लिए कई बार समझाया था। उनका कहना था कि निर्माता उनकी स्थिति समझ सकते हैं और शूट को बाद में पूरा किया जा सकता है, लेकिन अविका अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध रहीं।

    अविका की टीम से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि दिल्ली में विज्ञापन की शूटिंग के दौरान उनकी हालत काफी खराब थी। वह ठीक से खड़ी तक नहीं हो पा रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शूट पूरा करने की कोशिश की। इस दौरान वह मुख्य रूप से ओआरएस के सहारे खुद को संभाल रही थीं और ठीक से खाना भी नहीं खा पा रही थीं। उनकी इस प्रतिबद्धता की जानकारी सामने आने के बाद इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों और फैंस ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    मिलिंद चंदवानी ने भी अविका की मेहनत और काम के प्रति समर्पण की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि अविका अपने काम के साथ-साथ दूसरों के समय और संसाधनों की भी कद्र करती हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद काम को प्राथमिकता देना कितना कठिन हो सकता है। डेंगू की पुष्टि के बाद अब अविका अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनके प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होकर वापस लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

  • स्वरा भास्कर को डेंगू के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खुद दी बीमारी की जानकारी

    स्वरा भास्कर को डेंगू के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खुद दी बीमारी की जानकारी

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभिनेत्री ने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी हेल्थ अपडेट साझा करते हुए बताया कि वह डेंगू से संक्रमित हो गई हैं। अस्पताल के बेड से तस्वीर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों में चिंता बढ़ गई और सोशल मीडिया पर लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। हालांकि अभिनेत्री ने अपनी तबीयत को लेकर अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    स्वरा भास्कर ने अस्पताल से अपनी एक तस्वीर इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डेंगू होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। उनकी पोस्ट सामने आने के बाद प्रशंसकों और चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर उनके जल्द ठीक होने की कामना की। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में इलाज करा रही हैं।

    बारिश के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामले बढ़ने के बीच स्वरा भास्कर के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आई है। इस मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और कई इलाकों में लोग इससे प्रभावित होते हैं। स्वरा के साथ ही टीवी अभिनेत्री अविका गौर की तबीयत खराब होने की खबर भी हाल में सामने आई है, जिसके बाद उनके प्रशंसक भी चिंतित हैं।

    स्वरा भास्कर के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह हाल ही में टेलीविजन शो ‘पति पत्नी और पंगा’ में नजर आई थीं। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने पति फहाद अहमद के साथ हिस्सा लिया था। अभिनेत्री सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहती हैं और अपनी निजी जिंदगी के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय साझा करती रही हैं। फिलहाल उनके किसी नए फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इसी बीच अभिनेत्री अविका गौर की तबीयत खराब होने की जानकारी भी सामने आई है। उनके पति मिलिंद चांदवानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर बताया था कि अविका को पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार था। उनका तापमान 103 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक, तबीयत खराब होने के बावजूद अविका ने अपने काम को जारी रखा और जिस प्रोजेक्ट की शूटिंग शुरू की थी, उसका बचा हुआ काम भी पूरा किया।

    स्वरा भास्कर की ओर से अस्पताल से साझा की गई तस्वीर के बाद उनके प्रशंसक उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। अभिनेत्री ने फिलहाल अपनी स्थिति से जुड़ी सीमित जानकारी ही साझा की है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर आगे की जानकारी उनके या परिवार की ओर से मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर फैंस उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।

  • अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    नई दिल्ली । अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के नेता मिथुन चक्रवर्ती के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई खबर के बाद उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में चिंता का माहौल बन गया था। इसी बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल पहुंचकर मिथुन चक्रवर्ती से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। मुलाकात के बाद सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती का पिछली रात एक छोटा ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने खुद उन्हें और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सामिक भट्टाचार्य को ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, मिथुन चक्रवर्ती नहीं चाहते थे कि उनके स्वास्थ्य से जुड़ी यह जानकारी सार्वजनिक की जाए।

    सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक मिथुन चक्रवर्ती अब पूरी तरह ठीक हैं और उनकी हालत सामान्य है। उन्होंने अभिनेता के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। मिथुन चक्रवर्ती के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब सामने आई जानकारी के बाद उन्हें राहत मिली है। बताया गया है कि ऑपरेशन छोटा था और इसके बाद उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। अस्पताल में डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने हिंदी और बंगाली फिल्मों में लंबे समय तक अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। उन्होंने वर्ष 1976 में मशहूर निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। पहली ही फिल्म में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने बंगाली और हिंदी सिनेमा में लगातार काम किया और अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    वर्ष 1978 में आई बंगाली फिल्म ‘नदी थेके सागरे’ से उन्हें लोकप्रियता मिली। इसके बाद ‘सुरक्षा’, ‘तराना’, ‘हम पांच’ और ‘हम से बढ़कर कौन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया। हालांकि वर्ष 1982 में रिलीज हुई ‘डिस्को डांसर’ उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। फिल्म की सफलता ने मिथुन को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय बना दिया। उनके डांस और अभिनय की अलग शैली ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

    इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने ‘शौकीन’, ‘अशांति’, ‘कसम पैदा करने वाले की’, ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘गुलामी’, ‘स्वर्ग से सुंदर’, ‘डांस डांस’, ‘प्यार का मंदिर’, ‘स्वामी विवेकानंद’, ‘गुरु’, ‘गोलमाल 3’, ‘हाउसफुल 2’, ‘ओएमजी-ओह माय गॉड!’, ‘किक’, ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ समेत कई फिल्मों में काम किया। अपने लंबे फिल्मी करियर के दौरान उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। फिलहाल उनके छोटे ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य सामान्य बताए जाने से प्रशंसकों को राहत मिली है और सभी उनके जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

    रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घरेलू विवाद का एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। टेलीविजन पर मनपसंद चैनल देखने और रिमोट कंट्रोल को लेकर पति-पत्नी के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। तैश में आई पत्नी ने घर में रखे धारदार हंसिए से पति पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    मिली जानकारी के अनुसार यह घटना भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की है। पीड़ित व्यक्ति पेशे से मजदूर है और अपने परिवार के साथ रहता है। घटना वाले दिन वह काम निपटाकर घर पर टीवी देख रहा था। इसी दौरान उसने रिमोट लेकर अपनी पसंद का चैनल लगा दिया। इस बात पर पत्नी की उससे कहासुनी हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर महिला ने पास रखा हंसिया उठाकर पति के सिर और चेहरे पर वार कर दिया।

    अचानक हुए हमले में पति लहूलुहान होकर गिर पड़ा। चीख-पुकार और शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव किया। स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल पति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया।

    छोला मंदिर पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल पति के बयान दर्ज किए और आरोपी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पड़ताल में टीवी का चैनल बदलने को लेकर हुआ विवाद ही हमले की मुख्य वजह सामने आया है। दंपती के दो बच्चे हैं और पड़ोसियों के अनुसार उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में कहासुनी होती रहती थी।

    इस घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप का माहौल है। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपी महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के जिम्नास्टिक पुरुष टीम फाइनल मुकाबले के दौरान एक बेहद गंभीर और भयावह हादसा देखने को मिला। ब्रिटेन के उन्नीस वर्षीय युवा जिम्नास्ट गेब्रियल लैंगटन हाई बार स्पर्धा में अपना प्रदर्शन प्रस्तुत कर रहे थे, तभी अचानक ग्रिप छूट जाने के कारण वे बेहद अनियंत्रित होकर सिर के बल सीधे फ्लोर पर गिर पड़े। इस अचानक घटी घटना के बाद एरिना में मौजूद दर्शक, कोच और साथी खिलाड़ी स्तब्ध रह गए और परिसर में कुछ देर के लिए गहरा सन्नाटा छा गया।

    घटना के तुरंत बाद आयोजन स्थल पर मौजूद मेडिकल टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोर्चा संभाला। चोटिल खिलाड़ी जमीन से उठने में पूरी तरह असमर्थ थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू किया। खिलाड़ी की गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए विशेष मेडिकल सपोर्ट लगाया गया और उन्हें तुरंत स्ट्रेचर के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। इस गंभीर आपात स्थिति के कारण प्रतियोगिता को कुछ समय के लिए रोक देना पड़ा।

    चिकित्सकीय जांच और अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद खिलाड़ी पूरी तरह होश में आ गए थे और डॉक्टरों से संवाद कर रहे थे। उनके सिर और रीढ़ की हड्डी के कई विस्तृत स्कैन और परीक्षण किए गए, जिनकी रिपोर्ट सकारात्मक आई है। किसी भी प्रकार की गंभीर या जानलेवा आंतरिक चोट की पुष्टि न होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी, जिसके बाद वे अपनी टीम के पास वापस लौट आए हैं जहां डॉक्टरों की देखरेख जारी है।

    इस दुर्घटना के कारण प्रतियोगिता में भाग ले रहे अन्य खिलाड़ियों के मनोबल पर गहरा असर पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने अपने खेल को आगे बढ़ाया और फाइनल मुकाबला पूरा किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की टीम ने अपने नाम किया, जबकि पूर्व विजेता ब्रिटेन को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई दल ने इस मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

    खेल विशेषज्ञों और साथी एथलीटों ने इस घटना के बाद कहा कि जिम्नास्टिक एक अत्यधिक जोखिम भरा और कठिन खेल है, जिसमें मामूली सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है। हालांकि खिलाड़ी की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री स्मिता पाटिल की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच: गंभीर संक्रमण और असमय चिकित्सा ने छीना दिग्गज कलाकार

    भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री स्मिता पाटिल की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच: गंभीर संक्रमण और असमय चिकित्सा ने छीना दिग्गज कलाकार

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार स्मिता पाटिल के असमय निधन की कहानी आज भी कला जगत को झकझोर देती है। समानांतर और व्यावसायिक सिनेमा दोनों में अपनी सशक्त अदाकारी की छाप छोड़ने वाली इस महान अभिनेत्री की जीवन यात्रा बेहद दर्दनाक परिस्थितियों में समाप्त हुई थी। वर्ष 1986 में अपने पहले बच्चे के जन्म के ठीक दो सप्ताह बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका निधन हो गया था। प्रसव के बाद शरीर में फैले घातक संक्रमण और सही समय पर चिकित्सीय सलाह न लेने की वजह से उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

    पुत्र के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन प्रसवोत्तर संक्रमण ने अभिनेत्री को अपनी चपेट में ले लिया था। शुरुआती दौर में स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे संक्रमण धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलता चला गया। स्थानीय चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार और ड्रिप दिए जाने के बावजूद उनके शरीर का तापमान लगातार बढ़ता रहा। अपने नवजात शिशु के प्रति अत्यधिक लगाव के कारण वे अस्पताल जाने से बचती रहीं, जिससे स्थिति लगातार नियंत्रण से बाहर होती चली गई।

    निधन वाले दिन अभिनेत्री की स्थिति में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। शाम के समय उनका चेहरा पीला पड़ने लगा और उन्हें लगातार खून की उल्टियां होने लगीं। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल मुंबई के जसलोक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वे कोमा की स्थिति में जा चुकी थीं। विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने के भरसक प्रयास किए और स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टरों से भी संपर्क साधने की कोशिशें की गईं, परंतु संक्रमण मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका था।

    अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ ही घंटों भीतर आंतरिक रक्तस्राव और अंगों के काम न करने की वजह से स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई। अंततः देर रात चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केवल इकत्तीस वर्ष की आयु में स्मिता पाटिल का इस तरह अचानक चले जाना संपूर्ण भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक कभी न पूरा होने वाला घाटा था। उनके निधन के बाद उनके नवजात शिशु का पालन-पोषण उनके माता-पिता द्वारा किया गया, जबकि भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को आज भी अत्यंत सम्मान के साथ याद किया जाता है।

  • रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा

    रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के जाने-माने और दिग्गज अभिनेता राजेश शर्मा की तबीयत अचानक बेहद खराब होने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में व्यस्त चल रहे अभिनेता को सेट पर किसी बेहद जहरीले कीड़े ने काट लिया, जिसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इस समय डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह खतरनाक संक्रमण उनके फेफड़ों (लंग्स) तक पहुंच गया, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक और जानलेवा हो सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

    ‘भूत बंगला’, ‘भूल भुलैया 2’, ‘भूल भुलैया 3’, ‘क्रू’, ‘लक्ष्मी’ और ‘डार्लिंग्स’ जैसी कई सुपरहिट और कद्दावर फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवा चुके राजेश शर्मा को फिलहाल पश्चिम बंगाल के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में वेंटिलेशन और गहन चिकित्सा इकाई की निगरानी में रखा गया है। अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा के परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए उनके स्वास्थ्य की ताजा स्थिति (हेल्थ अपडेट) के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें किसी सांप, बिच्छू या मकड़ी में से किसने काटा है, लेकिन इस बाइट का असर पूरी बॉडी पर बेहद घातक साबित हुआ।

    यह दर्दनाक हादसा हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में हुआ, जहां राजेश शर्मा सुपरस्टार प्रभास की मुख्य भूमिका वाली एक बड़ी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग का पैकअप होने के बाद राजेश फिल्म सिटी के पास स्थित घने जंगलों से घिरे एक सुनसान इलाके में स्थानीय तकनीशियनों के साथ किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें अपने पैर में किसी जीव के काटने का तीखा अहसास हुआ। शुरुआती पलों में यह मामला बहुत गंभीर नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने सेट पर मौजूद टीम से कोई तात्कालिक मेडिकल सपोर्ट नहीं लिया और लगातार अपना काम करते रहे। उनकी यही लापरवाही बाद में उन पर भारी पड़ गई।

    हादसे के करीब 6 घंटे बीत जाने के बाद अभिनेता राजेश शर्मा को अपने दाएं पैर में असहनीय और तेज दर्द महसूस होने लगा, जिसके साथ ही उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। सेहत में आ रही इस गिरावट के बावजूद उन्होंने कोलकाता वापस लौटने के लिए फ्लाइट पकड़ी। हवाई सफर के दौरान ही उन्हें अत्यधिक तेज बुखार ने जकड़ लिया और शरीर में भारी बेचैनी होने लगी। अगले दिन सुबह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने पर उन्हें आनन-फानन में कोलकाता के ढाकुरिया स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनका तेज बुखार कम नहीं हो रहा है और उन्हें सांस लेने में भी भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश। अस्पताल से आ रही ताजा चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार, जहरीला इन्फेक्शन अब उनके दाएं पैर की उंगलियों से लेकर घुटने तक बहुत तेजी से फैल चुका है। शरीर के जिस-जिस हिस्से में यह जहर और संक्रमण पहुंच रहा है, वहां त्वचा पर बड़े-बड़े और दर्दनाक छाले पड़ गए हैं। मुख्य चिकित्सक डॉ. अविजित भट्टाचार्य और उनकी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार अभिनेता की स्थिति को स्थिर करने के प्रयास में जुटी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजेश शर्मा खतरे से पूरी तरह बाहर हैं, क्योंकि संक्रमण के चलते उनके शरीर के भीतर ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) बनने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ये ब्लड क्लॉट्स खून के बहाव के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज़्म जैसी घातक स्थिति पैदा कर सकता है जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित होती है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और उनके पारिवारिक सदस्य लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सुदीपा चटर्जी की इस भावुक पोस्ट के वायरल होने के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सह-कलाकार, निर्देशक और फैंस राजेश शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने और उनके सुरक्षित दीर्घायु जीवन के लिए लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

  • MP में सरकारी व्यवस्था पर सवाल: 6 साल में नहीं बना अस्पताल, कागजों में चलती रहीं 87 कर्मचारियों की पोस्टिंग

    MP में सरकारी व्यवस्था पर सवाल: 6 साल में नहीं बना अस्पताल, कागजों में चलती रहीं 87 कर्मचारियों की पोस्टिंग


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। खजराना क्षेत्र में छह वर्ष पहले 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन आज तक अस्पताल का भवन तैयार नहीं हो सका। इसके बावजूद अस्पताल के नाम पर 87 पद स्वीकृत हुए और वर्षों तक डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्तियां तथा तबादले होते रहे।

    जानकारी के अनुसार, 23 जून 2020 को खजराना में 100 बेड के सिविल अस्पताल की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 87 पद स्वीकृत किए गए थे। हालांकि छह साल बीतने के बाद भी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित नहीं हो सकी और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।

    भवन नहीं बना, फिर भी होती रहीं पोस्टिंग
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित था, तब उसके नाम पर कर्मचारियों की पदस्थापना और तबादले कैसे किए जाते रहे। जानकारी के मुताबिक, 15 जून 2026 को भी एक लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना सिविल अस्पताल, खजराना के नाम पर की गई।

    स्वास्थ्य विभाग ने बताई वजह
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन उपलब्ध कराना आसान नहीं है। इसी कारण अस्पताल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के लिए स्वीकृत नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को फिलहाल शहर के संजीवनी क्लीनिकों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देने के लिए तैनात किया गया है।

    स्वास्थ्य मंत्री बोले- पोर्टल बंद किया गया
    उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि संबंधित स्थान पर पहले अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर (UPHC) था, जिसे बाद में सिविल अस्पताल के रूप में अपग्रेड किया गया। लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि अस्पताल का नाम विभागीय पोर्टल पर दर्ज रहने की वजह से नियुक्तियों और तबादलों की प्रक्रिया जारी रही। अब ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संबंधित पोर्टल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

    कांग्रेस ने उठाए सवाल
    इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इसे बड़ा प्रशासनिक घोटाला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का निर्माण हुए बिना कर्मचारियों की नियुक्तियां और तबादले होना गंभीर मामला है और कांग्रेस आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।

    तीन लाख से अधिक आबादी प्रभावित
    फिलहाल इस अस्पताल के लिए स्वीकृत स्टाफ पीसी सेठी अस्पताल, हुकुमचंद अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहा है। वहीं खजराना, मुसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आसपास के तीन लाख से अधिक लोगों को आज भी इलाज के लिए एमवाय अस्पताल, एमटीएच और जिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यदि समय पर सिविल अस्पताल का निर्माण पूरा हो जाता, तो इन अस्पतालों पर मरीजों का दबाव काफी हद तक कम हो सकता था।

  • वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत के सबसे बड़े मंच फीफा वर्ल्ड कप के रोमांच के बीच अर्जेंटीना के महान कप्तान और दिग्गज स्ट्राइकर लियोनेल मेसी के परिवार पर दुखों का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। टूर्नामेंट के व्यस्त और उच्च दबाव वाले शेड्यूल के दौरान मेसी के परिवार ने उनके पिता जॉर्ज मेसी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है। परिवार ने पुष्टि की है कि 68 वर्षीय जॉर्ज मेसी इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें कड़े मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। इस संवेदनशील खबर के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और मेसी के प्रशंसकों में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है।

    मेसी परिवार की ओर से जारी किए गए इस आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि जॉर्ज मेसी इस समय एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से पूरी बहादुरी से लड़ रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक विशेष दल की सीधी निगरानी में उनका सघन उपचार किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि चिकित्सीय प्रक्रिया के बीच उनकी सेहत में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार भी दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से परिवार ने वर्तमान में इस गंभीर बीमारी के सटीक स्वरूप या उसके नाम को लेकर किसी भी प्रकार की विस्तृत तकनीकी जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने का फैसला किया है।

    यह आधिकारिक वक्तव्य अर्जेंटीना और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जॉर्ज मेसी के अचानक निधन की भ्रामक और अनियंत्रित अफवाहें तेजी से फैलने के तुरंत बाद सामने आया है। सोशल मीडिया और कुछ अनधिकृत पोर्टल्स पर प्रसारित की जा रही इन झूठी खबरों ने विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे कप्तान और उनके परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंचाई। स्थिति को बिगड़ते देख मेसी परिवार को स्वयं आगे आकर इन भ्रामक अटकलों का खंडन करना पड़ा। परिवार ने वैश्विक मीडिया और आम जनता से पुरजोर अपील करते हुए कहा है कि इस बेहद संवेदनशील समय में सभी को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, परम संयम और बुनियादी इंसानियत का परिचय देना चाहिए।

    जारी बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी व्यक्ति के नाजुक स्वास्थ्य और उसके परिवार की आंतरिक मानसिक शांति को गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग या सस्पेंस का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। परिवार ने स्पष्ट चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी वास्तविक और प्रामाणिक प्रगति केवल और केवल परिवार द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक बुलेटिन के माध्यम से ही साझा की जाएगी। इसलिए बाहरी स्रोतों या अपुष्ट दावों पर किसी को भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

    इससे पहले चालू वर्ल्ड कप के अपने शुरुआती मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम ने अल्जीरिया पर 3-0 की एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की थी। उस ऐतिहासिक मैच की समाप्ति के बाद स्वयं कप्तान लियोनेल मेसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को स्वीकार किया था कि वह अपनी निजी जिंदगी में एक बेहद कठिन और दर्दनाक दौर से गुजर रहे हैं। उस समय उन्होंने अपनी इस गहरी व्यक्तिगत परेशानी के मुख्य कारण का खुलासा तो नहीं किया था, लेकिन अब इस आधिकारिक बयान के आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि मेसी मैदान पर अपनी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने के साथ-साथ बैकग्राउंड में अपने पिता की नाजुक सेहत को लेकर कितने गहरे मानसिक तनाव और चिंता से घिरे हुए हैं।