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  • वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत के सबसे बड़े मंच फीफा वर्ल्ड कप के रोमांच के बीच अर्जेंटीना के महान कप्तान और दिग्गज स्ट्राइकर लियोनेल मेसी के परिवार पर दुखों का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। टूर्नामेंट के व्यस्त और उच्च दबाव वाले शेड्यूल के दौरान मेसी के परिवार ने उनके पिता जॉर्ज मेसी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है। परिवार ने पुष्टि की है कि 68 वर्षीय जॉर्ज मेसी इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें कड़े मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। इस संवेदनशील खबर के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और मेसी के प्रशंसकों में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है।

    मेसी परिवार की ओर से जारी किए गए इस आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि जॉर्ज मेसी इस समय एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से पूरी बहादुरी से लड़ रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक विशेष दल की सीधी निगरानी में उनका सघन उपचार किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि चिकित्सीय प्रक्रिया के बीच उनकी सेहत में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार भी दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से परिवार ने वर्तमान में इस गंभीर बीमारी के सटीक स्वरूप या उसके नाम को लेकर किसी भी प्रकार की विस्तृत तकनीकी जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने का फैसला किया है।

    यह आधिकारिक वक्तव्य अर्जेंटीना और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जॉर्ज मेसी के अचानक निधन की भ्रामक और अनियंत्रित अफवाहें तेजी से फैलने के तुरंत बाद सामने आया है। सोशल मीडिया और कुछ अनधिकृत पोर्टल्स पर प्रसारित की जा रही इन झूठी खबरों ने विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे कप्तान और उनके परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंचाई। स्थिति को बिगड़ते देख मेसी परिवार को स्वयं आगे आकर इन भ्रामक अटकलों का खंडन करना पड़ा। परिवार ने वैश्विक मीडिया और आम जनता से पुरजोर अपील करते हुए कहा है कि इस बेहद संवेदनशील समय में सभी को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, परम संयम और बुनियादी इंसानियत का परिचय देना चाहिए।

    जारी बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी व्यक्ति के नाजुक स्वास्थ्य और उसके परिवार की आंतरिक मानसिक शांति को गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग या सस्पेंस का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। परिवार ने स्पष्ट चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी वास्तविक और प्रामाणिक प्रगति केवल और केवल परिवार द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक बुलेटिन के माध्यम से ही साझा की जाएगी। इसलिए बाहरी स्रोतों या अपुष्ट दावों पर किसी को भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

    इससे पहले चालू वर्ल्ड कप के अपने शुरुआती मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम ने अल्जीरिया पर 3-0 की एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की थी। उस ऐतिहासिक मैच की समाप्ति के बाद स्वयं कप्तान लियोनेल मेसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को स्वीकार किया था कि वह अपनी निजी जिंदगी में एक बेहद कठिन और दर्दनाक दौर से गुजर रहे हैं। उस समय उन्होंने अपनी इस गहरी व्यक्तिगत परेशानी के मुख्य कारण का खुलासा तो नहीं किया था, लेकिन अब इस आधिकारिक बयान के आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि मेसी मैदान पर अपनी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने के साथ-साथ बैकग्राउंड में अपने पिता की नाजुक सेहत को लेकर कितने गहरे मानसिक तनाव और चिंता से घिरे हुए हैं।

  • कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    नई दिल्ली । मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकवादी हमलों की त्रासदी के बीच मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी अनसुनी गाथा अब बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है, जिसने चिकित्सा जगत के सर्वोच्च सेवा भाव को रेखांकित किया था। प्रख्यात अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर व्यापक रूप से चर्चा में हैं। इस फिल्म के माध्यम से मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिखाई गई अदम्य वीरता और अप्रतिम साहस की वास्तविक कहानी को देश के सामने लाया जा रहा है।

    इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कंगना रनौत ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब पूरा मुंबई शहर आतंकी हमलों और विस्फोटों से थर्रा रहा था, उस भयावह दौर में कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही संघर्ष चल रहा था। अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और भीतर लगातार गोलियां चल रही थीं और चारों तरफ दहशत का माहौल था। ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थितियों में भी अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। चिकित्सा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उस भीषण अफरा-तफरी के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी भी करवाई।

    फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और प्रेरणा के संबंध में जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर और नर्सें हर परिस्थिति में समाज के रक्षक बनकर सामने आते हैं। कंगना ने विशेष रूप से अस्पताल की उन नर्सों के साहस की सराहना की, जो बम धमाकों के बीच भी मरीजों की सुध लेने के लिए अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर दौड़ती रहीं और अपने मानवीय दायित्वों को पूरा किया।

    व्यावसायिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने फिल्म को राष्ट्र निर्माण में अदृश्य भूमिका निभाने वाले मेहनतकश लोगों को समर्पित करते हुए इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की आधिकारिक मांग की, जिस पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी प्राप्त हुआ है।

    फिल्म के शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ के चयन के पीछे की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष संबोधन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान देश के श्रमिकों, कारीगरों और समाज के निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश लोगों को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहकर सम्मानित किया था। इसी विचार को आत्मसात करते हुए फिल्म का नाम तय किया गया, जिसमें कंगना रनौत स्वयं एक साधारण स्टाफ नर्स के रूप में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

    फिल्म के हालिया आधिकारिक ट्रेलर में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले वार्ड बॉयज और नर्सों ने 26/11 के उस काले दौर में सूझबूझ का परिचय देते हुए 400 से अधिक नागरिकों की जान बचाई थी। यह फिल्म न केवल एक आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी थ्रिलर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले ग्राउंड स्टाफ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म आगामी 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।

  • महोबा में युवती ने सल्फास खाकर दी जान देने की कोशिश, हालत गंभीर, हायर सेंटर रेफर

    महोबा में युवती ने सल्फास खाकर दी जान देने की कोशिश, हालत गंभीर, हायर सेंटर रेफर


    नई दिल्ली। महोबा कोतवाली क्षेत्र के पचपहरा गांव में एक 23 वर्षीय युवती द्वारा सल्फास का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास करने का मामला सामने आया है। गंभीर हालत में परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।

    जानकारी के अनुसार, वीरसिंह की पुत्री पिंकी यादव ने यह कदम उठाया, हालांकि उसने ऐसा क्यों किया, इस बारे में अभी स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। परिजनों ने भी घटना के पीछे की वजह बताने से इनकार कर दिया है, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है।

    अस्पताल प्रशासन के मुताबिक युवती की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है और उसे विशेषज्ञ उपचार की जरूरत है। घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है।

    कोतवाली प्रभारी मनीष पांडेय ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। फिलहाल कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

  • MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी

    MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म हो गई है। इसमें राजधानी भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, NABH सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इन अस्पतालों में अब मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं होगा। वहीं, फुल NABH प्रमाणित अस्पताल “डीम्ड इंपैनलमेंट” का लाभ प्राप्त करेंगे और अस्पतालों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। साथ ही मरीजों के फीडबैक से अस्पतालों की निगरानी भी की जाएगी।

    NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाण होता है। इसमें 600 से अधिक मानकों पर अस्पतालों की जांच की जाती है। ये मानक मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणपत्र मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की गारंटी देता है।

    इस फैसले के बाद प्रभावित अस्पतालों के मरीजों को अब मुफ्त इलाज के विकल्प सीमित होंगे। मरीजों को अब अपने नजदीकी फुल NABH प्रमाणित अस्पतालों में इलाज कराने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में लोग असुविधा और परेशानियों का सामना कर सकते हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि आगामी दिनों में अस्पतालों को NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। वहीं, मरीजों से फीडबैक लेकर अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

    इस बदलाव से मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि फिलहाल लोगों को अस्पतालों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

  • उज्जैन में रंग पंचमी के गेर में पटाखा फटने से 5 घायल, भगदड़ जैसी स्थिति

    उज्जैन में रंग पंचमी के गेर में पटाखा फटने से 5 घायल, भगदड़ जैसी स्थिति

    उज्जैन।  उज्जैन में रंग पंचमी के मौके पर आयोजित गेर के दौरान अचानक एक रंगीन पटाखा फट गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। धमाके के कारण कई लोग डर के मारे इधर-उधर भागे और कुछ महिलाएं जमीन पर गिर गईं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, आसपास के लोगों और आयोजकों ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया।

    इस हादसे में पांच लोग घायल हुए, जिनमें कुछ लोग नीचे गिरने और पटाखे के धमाके के कारण चोटिल हुए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को सुरक्षित घर भेज दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि कोई गंभीर चोट या जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

    स्थानीय प्रशासन और आयोजकों ने कहा कि गेर के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, लेकिन भीड़ और अचानक हुए धमाके के कारण यह छोटा हादसा हुआ। पुलिस ने आगे से पर्व और उत्सव के दौरान और अधिक सतर्कता बरतने की हिदायत दी है।

    स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भीड़ वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें, बच्चों और बुजुर्गों पर नजर रखें और आतिशबाजी या रंगीन पटाखों के दौरान नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा उपायों के कारण बड़े हादसे से बचाव संभव हो सका।

    गेर और रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में उत्सव का माहौल बना रहा, लेकिन यह घटना लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी भी दे गई। प्रशासन और आयोजकों ने भविष्य में ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और आपातकालीन इंतजाम और मजबूत करने का भरोसा दिया।

  • सोनिया गांधी की तबियत, सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती, हेल्थ अपडेट का इंतजार

    सोनिया गांधी की तबियत, सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती, हेल्थ अपडेट का इंतजार



    नई दिल्ली।
    सोनिया गांधी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हुईं हैं. बीते कुछ दिनों से सोनिया गांधी की तबीयत खराब चल रही थी, इसलिए बीती रात उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. बताया जा रहा है कि थोड़ी देर में अस्पताल की तरफ से आधिकारिक जानकारी दी जाएगी.

    सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को यहां सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्होंने बताया कि उनकी हालत ठीक है और उन्हें चेस्ट फिजिशियन की देखरेख में रखा गया है. अस्पताल के एक सूत्र ने PTI को बताया कि यह एक रूटीन एडमिशन है, लेकिन उन्हें पुरानी खांसी की समस्या है.

    बताया गया कि सोनिया गांधी खासकर शहर में प्रदूषण के कारण चेक-अप के लिए आती रहती हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें सोमवार शाम को भर्ती कराया गया था. सोनिया गांधी दिसंबर 2025 में 79 साल की हो गई थीं.

  • अंगकृष रघुवंशी को अस्पताल से मिली छुट्टीविजय हजारे ट्रॉफी मैच में सिर और कंधे में लगी चोट

    अंगकृष रघुवंशी को अस्पताल से मिली छुट्टीविजय हजारे ट्रॉफी मैच में सिर और कंधे में लगी चोट


    नई दिल्ली । मुंबई के सलामी बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान सिर और कंधे में गंभीर चोट लगने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। शुक्रवार को उत्तराखंड के खिलाफ खेले गए मैच में रघुवंशी ने एक मुश्किल कैच लपकने की कोशिश कीलेकिन इस दौरान वह गिर पड़े और उनके सिर और कंधे में चोट लग गई।

    यह घटना पारी के 30वें ओवर में हुईजब ऑफ स्पिनर तनुष कोटियान गेंदबाजी कर रहे थे। सौरभ रावत ने स्लॉग-स्वीप खेलते हुए डीप मिडविकेट पर खड़े रघुवंशी की दिशा में गेंद मारी। रघुवंशी ने एक हाथ से गेंद को लपकने की कोशिश कीलेकिन यह प्रयास विफल रहा और वह गिर पड़े। इस गिरावट के दौरान उनके कंधे में चोट लगी और सिर जमीन से टकरायाजिससे उन्हें कनकशन सिर में चोटहो गया।

    चोट के बाद रघुवंशी कुछ सेकंड के लिए घुटनों के बल बैठेफिर जमीन पर लेट गए। तुरंत मुंबई के फिजियो मैदान पर पहुंचे और चूंकि रघुवंशी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे थेतो स्ट्रेचर मंगवाया गया। उन्हें पास के एसडीएमएच अस्पताल ले जाया गयाजहां उनके सिर और गर्दन का सीटी स्कैन किया गया। रिपोर्ट्स में कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई और अंगकृष को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्हें बीसीसीआई के ‘कनकशन प्रोटोकॉल’ के तहत कुछ दिनों का आराम करने की सलाह दी गई है।

    विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई ने उत्तराखंड को 51 रनों से हराया। मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 331 रन बनाएजिसमें हार्दिक तमोरे ने 93 रनसरफराज खान ने 55 रन और मुशीर खान ने 55 रन बनाए। मुशीर ने गेंदबाजी में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 57 रन पर दो विकेट लिए। उत्तराखंड की टीम युवराज चौधरी की 96 रनों की आक्रामक पारी के बावजूद 280 रन ही बना सकी। अंगकृष रघुवंशी की चोट के बाद क्रिकेट प्रेमी उनके जल्दी ठीक होने की कामना कर रहे हैं।

  • MP में खून की दलाली का पर्दाफाश एसडीएम ने फिल्मी अंदाज में पुलिस के साथ किया स्टिंग ऑपरेशन 3 दलाल रंगे हाथ पकड़े गए

    MP में खून की दलाली का पर्दाफाश एसडीएम ने फिल्मी अंदाज में पुलिस के साथ किया स्टिंग ऑपरेशन 3 दलाल रंगे हाथ पकड़े गए


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना में खून की दलाली का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां अस्पताल के बाहर खून बेचने वाले दलालों का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा था। प्रशासन ने इस अवैध धंधे का पर्दाफाश करने के लिए एक फिल्मी अंदाज में स्टिंग ऑपरेशन किया और तीन दलालों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

    सतना जिला अस्पताल के बाहर खून के सौदागरों का यह नेटवर्क सक्रिय था जो मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें 5000 रुपये में खून बेच रहे थे। गुरुवार को एसडीएम राहुल सिलाड़िया और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी ने इस काले कारोबार को उजागर करने के लिए सुनियोजित तरीके से स्टिंग ऑपरेशन किया।

    एसडीएम ने इस ऑपरेशन के लिए 500 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपये की गड्डी तैयार की और उनके सीरियल नंबर पहले से दर्ज कर लिए। फिर एक व्यक्ति को नकली ग्राहक बनाकर दलालों के पास भेजा गया। जैसे ही ग्राहक ने दलाल को पैसे दिए और दलाल ने कहा कि डोनर आ रहा है पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की और दलालों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान वही चिन्हित नोट बरामद हुए जिन्हें पहले से नोट किया गया था जिससे उनके खून की दलाली में शामिल होने की पुष्टि हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के सामने स्थित चाय की दुकानों और फल के ठेले पर ये दलाल अक्सर बैठे रहते थे। वे मरीजों के परेशान परिजनों से संपर्क करते थे और उन्हें खून दिलाने के नाम पर मोटी रकम लेते थे। पुलिस ने इस ऑपरेशन में तीन दलालों रजनीश साहू करसरामोहम्मद कैफ कामता टोलाऔर अनिल गुप्ता टिकुरिया टोला को गिरफ्तार किया।

    एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने इस कार्रवाई के बारे में बताया कि उन्हें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी और उसी आधार पर उन्होंने योजना बनाई। जब एक दलाल ने 4500 रुपये में खून उपलब्ध कराने का वादा किया तो पुलिस ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया और उसके पास से वही नोट बरामद किए गए जो पहले चिन्हित किए गए थे।

    इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि इस रैकेट के चलने में अस्पताल के भीतर से भी मदद मिल रही हो सकती है। अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है और पुलिस इस संभावना पर भी गहन जांच कर रही है।यह कार्रवाई एक सख्त संदेश देती है कि प्रशासन अब ऐसे अवैध कारोबारों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगा।

  • इंदौर में 1450 बेड के नए एमवाय अस्पताल का भूमिपूजनलागत 713 करोड़ रुपये

    इंदौर में 1450 बेड के नए एमवाय अस्पताल का भूमिपूजनलागत 713 करोड़ रुपये


    इंदौर । इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालएमवाय हॉस्पिटलके नए भवन का भूमिपूजन रविवार को किया गया। इस नई इमारत में 1450 बेड की क्षमता होगीजो शहर के बढ़ते स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा। नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नौ मंजिलों में बनेगाजिसमें एक तल मंजिल भी शामिल होगी। इसके साथ ही नर्सिंग होस्टलपार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा।

    इस ऐतिहासिक भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में आए हैं। नए अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 713 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगीजिसमें जीएसटी और अन्य टैक्स शामिल हैं। इसमें से 570 करोड़ रुपये अस्पताल भवन के निर्माण के लिए होंगे और बाकी का खर्च पार्किंगनर्सिंग होस्टल आदि पर होगा।

    वर्तमान मेंएमवाय अस्पताल का संचालन एक पुरानी बिल्डिंग से हो रहा हैजिसमें 1150 बेड की क्षमता है। यहां रोजाना लगभग 4,000 मरीज इलाज के लिए आते हैंऔर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। हालांकिपुरानी बिल्डिंग में दीवारों में सीलिंग की समस्या उत्पन्न हो रही हैजो अब मरम्मत के लिए चुनौती बन गई है। इस कारण नए अस्पताल भवन का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो गया था।

    नए अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी प्रदान की जाएंगीजिससे इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त  अस्पताल के पास पर्याप्त पार्किंग और कर्मचारियों के लिए नर्सिंग होस्टल जैसी सुविधाएं भी होंगीजो मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं।

    एमवाय अस्पताल का नया भवन न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को एक नई दिशा देने वाला कदम साबित होगा। यह अस्पताल मरीजों को बेहतर इलाज के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा।

  • मप्र के दमोह में अरंडी के बीज खाने से 30 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में भर्ती

    मप्र के दमोह में अरंडी के बीज खाने से 30 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में भर्ती


    दमोह।
    मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक के किशनगंज गांव में मंगलवार शाम स्कूल में खेलते समय कुछ बच्चों ने अरंडी के बीज खा लिए। इसके बाद घर लौटते ही बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं। एक के बाद एक 30 बच्चे बीमार हो गए, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत सभी बच्चों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

    एक बच्चे की मां जानकी पटेल ने बताया कि बच्चे मूंगफली जैसी दिखने वाली बीज खाने के बाद बीमार हुए। सभी बच्चों को ऑटो और एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार जारी है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ सुनील जैन ने बताया कि फिलहाल बच्चों की हालत स्थिर है।

    कलेक्टर के निर्देश पर छह से अधिक डॉक्टरों की टीम ने बच्चों का इलाज शुरू किया। जिला अस्पताल में डॉक्टर विक्रांत चौहान, डॉक्टर सोनू शर्मा और सिविल सर्जन डॉक्टर प्रहलाद पटेल की मौजूदगी में सभी बच्चों का उपचार किया गया। इलाज के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।

    घटना की जानकारी लगते ही एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी और पथरिया एसडीएम निखत चौरसिया जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों और उनके परिजनों से स्थिति के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम को किशनगंज गांव भेजकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए। एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने निर्देश पर पुलिस गांव में मुनादी कर बीमार बच्चों को अस्पताल भेजने की अपील कर रही है।

    एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि चंपत पिपरिया गांव में अरंडी के बीज खाने से 30 से अधिक बच्चे बीमार हुए हैं। जिनको जिला अस्पताल लाया गया है। वह अस्पताल पहुंचे हैं और परिजनों से जानकारी ली है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की एक टीम भी गांव भेजी गई है। वहीं, एसडीएम निखत चौरसिया ने बताया कि बच्चों की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। कल स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल और उसके आसपास का निरीक्षण करेगी। यदि स्कूल परिसर में अरंडी के पौधे पाए गए, तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। साथ ही परिजनों को विषैले पौधों और उनके फलों के खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी।