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  • मुरैना में चौथी मंजिल से कूदी महिला, पति की समझाइश और बच्चे की पुकार भी नहीं रोक सकी, गंभीर हालत में दिल्ली रेफर

    मुरैना में चौथी मंजिल से कूदी महिला, पति की समझाइश और बच्चे की पुकार भी नहीं रोक सकी, गंभीर हालत में दिल्ली रेफर

    मध्य प्रदेश: के मुरैना शहर में सोमवार तड़के एक महिला द्वारा चौथी मंजिल से छलांग लगाने का मामला सामने आया है। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के नैनागढ़ रोड स्थित एक मकान में सुबह करीब चार बजे हुई। महिला को रोकने के लिए उसके पति, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्यों ने काफी कोशिश की, लेकिन वे उसे समझाने में सफल नहीं हो सके। चौथी मंजिल से गिरने के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक होने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    छत पर पहुंचकर रेलिंग के पास खड़ी हुई महिला

    जानकारी के अनुसार, सोमवार तड़के महिला मकान की चौथी मंजिल पर पहुंच गई और रेलिंग के पास से नीचे कूदने की कोशिश करने लगी। यह देखकर नीचे मौजूद परिजनों ने उसे रोकने का प्रयास किया। पति लगातार उसे समझाकर नीचे उतरने के लिए कहता रहा। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उसे शांत करने और ऐसा कदम नहीं उठाने की अपील की।

    इस दौरान महिला का बच्चा उसे लगातार ‘मम्मी-मम्मी’ कहकर पुकारता रहा। बच्चे की आवाज और पति की समझाइश के बावजूद महिला ने छलांग लगा दी। घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वे उसे बचा नहीं सके।

    मोहल्ले के लोगों ने भी समझाने की कोशिश की

    महिला के छत पर होने और परिजनों की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी महिला को समझाने और नीचे आने के लिए मनाने का प्रयास किया। काफी कोशिशों के बाद भी महिला नहीं मानी और चौथी मंजिल से नीचे कूद गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    महिला के गिरने से गंभीर रूप से घायल होने के बाद परिजन उसे तत्काल कार से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में उसका उपचार जारी है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

    घटना का वीडियो आया सामने

    इस घटना के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में महिला को रोकने के लिए की जा रही कोशिशों और बच्चे की आवाज सुनाई देने की बात सामने आई है। घटना से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। हालांकि, वीडियो से महिला के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं होती।

    महिला ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी वजह फिलहाल सामने नहीं आई है। किन परिस्थितियों में वह चौथी मंजिल पर पहुंची और छलांग लगाने का फैसला किया, यह अभी स्पष्ट नहीं है। घटना के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल सबसे अहम बात महिला की गंभीर हालत और उसका इलाज है। उपलब्ध जानकारी में महिला की पहचान, उसकी उम्र और घटना के पीछे की परिस्थितियों से जुड़ा विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

  • रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    मध्य प्रदेश: के रीवा में एक युवक की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया। मृतक परिवार का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों पर अधिक मात्रा में दवा देने की बात कही। बेटे की मौत से परिवार में शोक का माहौल है। अस्पताल में हुए हंगामे के दौरान परिजनों ने इलाज के तरीके पर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

    परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज को दवा की अधिक मात्रा दी गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल में नाराजगी जताई। परिवार का कहना है कि बेटे की मौत से उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है। हालांकि, दवा की मात्रा, मरीज की स्थिति और मौत के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

    अस्पताल में हंगामे के बाद मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मरीज को किस बीमारी के कारण भर्ती कराया गया था, उसका इलाज किस तरह किया जा रहा था और उसकी हालत में गिरावट कब आई। इन तथ्यों की जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही उपचार में किसी तरह की लापरवाही के आरोपों की पुष्टि हो सकती है।

    मौत के कारणों की जांच जरूरी

    इस तरह के मामले में मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, दी गई दवाओं की मात्रा, चिकित्सकीय निगरानी और मौत से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती हैं। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा जरूरी होगी। केवल आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरीज की मौत ओवरडोज के कारण हुई।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मृतक की उम्र, अस्पताल का नाम, भर्ती होने की तारीख, इलाज करने वाले डॉक्टरों का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है। इन जानकारियों के बिना घटना के पूरे क्रम और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।

    मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। जांच में यह सामने आ सकेगा कि मरीज को कौन-सी दवाएं दी गई थीं और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। परिजनों के आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

  • देवास में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 20 से अधिक ग्रामीण घायल और 11 अस्पताल में भर्ती

    देवास में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 20 से अधिक ग्रामीण घायल और 11 अस्पताल में भर्ती

    मध्यप्रदेश: के देवास जिले के रजोदा गांव में मंगलवार सुबह जवारा विसर्जन के पारंपरिक अनुष्ठान के दौरान मधुमक्खियों के अचानक हमले से अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में 20 से अधिक ग्रामीण घायल हो गए। घायलों में से 11 लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्साकर्मी घायलों का उपचार कर रहे हैं। धार्मिक आयोजन के दौरान हुई इस घटना से मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई ग्रामीणों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार सुबह करीब 9 बजे की है। रजोदा गांव में ग्रामीण जवारा विसर्जन की परंपरा निभाने के लिए एक कुएं के पास एकत्रित हुए थे। इसी दौरान पांच से छह लोग नहाने के लिए कुएं में कूद गए। कुएं के ठीक ऊपर स्थित एक बड़े पीपल के पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता बना हुआ था। नहाते समय पानी की कुछ छींटें छत्ते पर जा गिरीं। इसके बाद मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया।

    अचानक हुए हमले के कारण लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। मधुमक्खियों के झुंड ने ग्रामीणों को निशाना बनाया और कई लोगों के सिर, हाथ तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर डंक मारे। हमले के बाद घटनास्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग मधुमक्खियों से बचने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए करीब दो किलोमीटर तक दौड़ते रहे।

    मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए ग्रामीणों ने अलग-अलग तरीके अपनाए। कुछ लोगों ने नीम की टहनियों का सहारा लिया और हाथों से मधुमक्खियों को दूर भगाने की कोशिश की। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने खुद को जालों से ढककर सुरक्षित रखने का प्रयास किया। ऐसे लोग करीब 15 मिनट तक जाल के नीचे छिपे रहे। इस दौरान मधुमक्खियों का झुंड उनके आसपास मंडराता रहा। वे तब तक बाहर नहीं निकले, जब तक मधुमक्खियां वहां से चली नहीं गईं।

    घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कुल 20 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 11 ग्रामीणों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्साकर्मी घायलों का प्राथमिकता के आधार पर इलाज कर रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी घायलों की स्थिति और उन्हें लगी चोटों की गंभीरता का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    देवास जिले में इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है। सोनकच्छ क्षेत्र के अगेरा गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। उस घटना में लगभग 25 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 13 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने धार्मिक आयोजनों के दौरान आसपास के वातावरण और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है।

    रजोदा गांव की घटना के बाद सामूहिक कार्यक्रमों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते होने की स्थिति में उनके आसपास भीड़ जुटाने या ऐसी गतिविधियां करने से बचना जरूरी है, जिनसे मधुमक्खियां उत्तेजित हो सकती हैं। विशेष रूप से कुओं, तालाबों और खुले स्थानों पर होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान आसपास के पेड़ों तथा संभावित जोखिम वाले स्थानों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    जवारा विसर्जन के दौरान हुई इस घटना में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के घायल होने से गांव में चिंता का माहौल बना। फिलहाल अस्पताल में भर्ती लोगों का उपचार जारी है। यह घटना बताती है कि पारंपरिक आयोजनों के दौरान आसपास मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है और थोड़ी सी सावधानी से ऐसी परिस्थितियों में नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

  • लालकृष्ण आडवाणी की सेहत में हुआ सुधार…. अस्पताल से हुए डिस्चार्ज

    लालकृष्ण आडवाणी की सेहत में हुआ सुधार…. अस्पताल से हुए डिस्चार्ज


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ( Hospital) से डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया गया है. अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी बयान के अनुसार, 98 वर्षीय वरिष्ठ नेता की सेहत में सुधार हुआ है, इसलिए उन्हें सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है. अस्पताल प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि आडवाणी को छाती में संक्रमण के कारण 16 अक्टूबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और राहत मिलने के बाद उन्हें छुट्टी दी जा रही है. आडवाणी न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीत सूरी की देखरेख में थे और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।

    पूर्व उपप्रधानमंत्री को 16 अक्टूबर की शाम 7:30 बजे छाती में संक्रमण के चलते इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के पल्मोनरी (फेफड़ों से संबंधित) विभाग में भर्ती कराया गया था।


    दिग्गजों ने जाना हाल

    इससे पहले शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अस्पताल में आडवाणी से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना. ऐसा पहली बार नहीं है जब हाल के महीनों में इस वरिष्ठ नेता को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है. इससे पहले, इस साल मई में भी उन्हें उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तब वे कुछ दिनों तक डॉक्टरों की देखरेख में रहे और फिर उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।

    इसके अलावा, दिसंबर 2024 में भी आडवाणी को इलाज और जांच के लिए इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था. उनका इलाज एक न्यूरोलॉजिस्ट की देखरेख में हुआ था।


    शानदार सफर

    8 नवंबर 1927 को कराची में जन्मे आडवाणी भाजपा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं. उन्होंने भाजपा को एक छोटी राजनीतिक ताकत से बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।

    आडवाणी कई बार भाजपा के अध्यक्ष रहे और उन्होंने पूरे देश में पार्टी के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 1990 में उनकी देशव्यापी ‘राम रथ यात्रा’ भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुई, जिससे भाजपा की राजनीतिक पहुंच का विस्तार हुआ।

    उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में 2002 से 2004 तक भारत के उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया. अपने राजनीतिक करियर के दौरान, उन्होंने गृह मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों (पोर्टफोलियो) की जिम्मेदारी भी संभाली. सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को देखते हुए, आडवाणी को 2024 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

    इससे पहले, 2015 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था. आडवाणी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के राजनीतिक इतिहास का एक अहम हिस्सा रहे हैं।

  • रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद नुसरत भरूचा ने अस्पताल से साझा की पहली तस्वीर, लिखा- पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

    रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद नुसरत भरूचा ने अस्पताल से साझा की पहली तस्वीर, लिखा- पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद अस्पताल से अपनी पहली तस्वीर साझा की है। बाली में छुट्टियों के दौरान हुए हादसे में उन्हें गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद उन्हें मुंबई लाया गया और यहां उनकी सर्जरी हुई। अभिनेत्री की सेहत को लेकर चिंतित प्रशंसकों के बीच उनकी इस पोस्ट को पहला सार्वजनिक अपडेट माना जा रहा है। नुसरत ने सोशल मीडिया पर अस्पताल के कमरे से एक तस्वीर साझा की। इसके साथ उन्होंने जिंदगी को देखने के अपने नजरिए में आए बदलाव का जिक्र करते हुए लिखा, “हमेशा से सनसेट यानी सूर्यास्त के पीछे भागती रही हूं, और बस ऐसे ही… मेरा नजरिया बदल गया। लेकिन, पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।” अभिनेत्री ने इस संदेश के जरिए अपने इलाज की विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन उनकी पोस्ट से उनके प्रशंसकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    नुसरत ने शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर यह तस्वीर साझा की थी। तस्वीर में अस्पताल के कमरे में एक बड़ी खिड़की के पास खाली रिक्लाइनिंग व्हीलचेयर दिखाई दे रही है। खिड़की के बाहर सूर्यास्त का दृश्य नजर आ रहा है। तस्वीर के साथ लिखे संदेश में अभिनेत्री ने सूर्यास्त को देखने के अपने पुराने शौक और हादसे के बाद बदले नजरिए का उल्लेख किया। उनका “पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त” वाला संदेश उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हादसे के बाद से प्रशंसक उनकी सेहत को लेकर लगातार चिंतित थे। ऐसे में अस्पताल से आई इस तस्वीर को उनके स्वास्थ्य से जुड़ा पहला सार्वजनिक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, अभिनेत्री ने अपनी मौजूदा स्थिति, सर्जरी के नतीजे या आगे के इलाज को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    जानकारी के अनुसार, नुसरत काम के सिलसिले में बाली गई थीं। बाद में यह यात्रा काम के साथ छुट्टियां बिताने का अवसर भी बन गई। इसी दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई। उनकी टीम ने बाद में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने की पुष्टि की थी। चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मुंबई लाया गया, जहां उनकी सर्जरी हुई। मुंबई पहुंचने के बाद अभिनेत्री के कुछ वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर दिखाई दी थीं। इसके बाद अस्पताल से उनकी कोई तस्वीर सामने नहीं आई थी। अब उनकी नई पोस्ट से प्रशंसकों को उनके बारे में जानकारी मिली है, हालांकि उनकी रिकवरी को लेकर कोई विस्तृत चिकित्सकीय अपडेट उपलब्ध नहीं है।

    कामकाज की बात करें तो नुसरत भरूचा जल्द ही अभिनेता टाइगर श्रॉफ के साथ एक फिल्म में नजर आ सकती हैं। दोनों पहली बार किसी फिल्म में साथ काम करते दिखाई देंगे। हालांकि, इस परियोजना के शीर्षक और कलाकारों से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में अभिनेत्री की आगामी फिल्म को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। नुसरत इससे पहले भी विदेश में मुश्किल परिस्थिति का सामना कर चुकी हैं। साल 2023 में वह इजराइल में उस समय फंस गई थीं, जब वहां इजराइल-हमास युद्ध शुरू हुआ था। वह तेल अवीव में एक फिल्म महोत्सव में शामिल होने गई थीं। उस दौरान बम धमाकों और सायरन की आवाज के बीच उन्हें एक बेसमेंट में शरण लेनी पड़ी थी। भारतीय दूतावास और सरकार के प्रयासों के बाद 8 अक्टूबर 2023 को उन्हें सुरक्षित मुंबई वापस लाया गया था।

  • सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    नई दिल्ली । दिल्ली में एसिड अटैक की शिकार हुई महिला के इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सर गंगा राम अस्पताल को निर्देश दिया कि पीड़िता को भर्ती रखकर सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसमें दवाएं, प्लास्टिक सर्जरी और जरूरत के अनुसार अन्य उपचार भी शामिल हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को तब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाए, जब तक वह वहां से जाने के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट न हो जाए और उसे केवल बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में उपचार की जरूरत न रह जाए। अदालत ने इलाज पर होने वाले खर्च की परवाह किए बिना उपचार जारी रखने और उसका बिल अदालत में जमा करने को भी कहा।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले पर तत्काल सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिका में सामने आए तथ्यों को चिंताजनक बताया। यह मामला एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन ब्रेव सोल्स फाउंडेशन की ओर से उठाया गया था। संगठन की प्रमुख शाहीन मलिक के मुताबिक, महिला पर छह अक्टूबर को दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एसिड अटैक हुआ था। इस हमले में वह लगभग 45 प्रतिशत तक झुलस गई थी।

    शाहीन मलिक ने अदालत को बताया कि कानून के तहत मुफ्त इलाज का अधिकार होने के बावजूद महिला को दिल्ली के बड़े निजी अस्पतालों में पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा था। उनके आरोप के मुताबिक, सर गंगा राम अस्पताल और अपोलो अस्पताल ने बर्न वार्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर इलाज से इनकार किया था। पीड़िता को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा। इस स्थिति के बाद संगठन ने मामले में हस्तक्षेप किया और पीड़िता के उपचार के लिए न्यायिक मदद मांगी।

    पीड़िता की मां के अनुसार, हमले के बाद पुलिस कंट्रोल रूम की मदद से उनकी बेटी को सबसे पहले जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेज दिया गया। मां ने बताया कि बेटी को दर्द से जूझते देखना उनके लिए बेहद मुश्किल था और उन्हें लगा कि उसकी परेशानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनके मुताबिक, गुरुवार दोपहर बेटी को गुरु तेग बहादुर अस्पताल से छुट्टी दिलाकर सर गंगा राम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद परिवार को उसके इलाज को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    मां ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात सर गंगा राम अस्पताल के कर्मचारियों ने परिवार से बाहर से दवाएं खरीदने को कहा। जब उन्होंने बताया कि उनके पास दवाएं खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, तो शनिवार सुबह उन्हें बेटी को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया। हालांकि, गुरु तेग बहादुर अस्पताल के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने वहां इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने मरीज की जरूरत के अनुसार पूरा उपचार दिया था। उनके मुताबिक, परिवार अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहता था, इसलिए मरीज को वहां से छुट्टी दिलाई गई।

    याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 397 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों को एसिड अटैक पीड़ितों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराना होता है। शाहीन मलिक ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए थे। उन्होंने एसिड पर प्रतिबंध के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में इसकी बिक्री जारी रहने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पीड़िता को इलाज दिलाने के लिए संगठन और वकीलों को हस्तक्षेप करना पड़ा तथा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

  • मरीज के अटेंडर ने दीवार पर किया पेशाब, गुस्साए लोगों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर-स्टाफ को पीटा

    मरीज के अटेंडर ने दीवार पर किया पेशाब, गुस्साए लोगों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर-स्टाफ को पीटा


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मुरार इलाके में दीवार पर पेशाब करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अस्पताल में मारपीट और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। आरोप है कि पड़ोसी के घर की दीवार पर पेशाब करने की घटना से नाराज चार लोगों ने श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में घुसकर डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। आरोपियों ने अस्पताल के मुख्य गेट का शीशा भी तोड़ दिया। घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दीवार पर पेशाब करने से शुरू हुआ विवाद

    घटना 8 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। पंचशील नगर निवासी डॉ. हिरदेश जाटव श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के संचालक हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक, घटना के समय वह और विनोद शर्मा अस्पताल में मौजूद थे। इसी दौरान अस्पताल में भर्ती एक मरीज का अटेंडर पड़ोस में रहने वाले दीपक किरार के मकान की दीवार पर पेशाब करके आया।

    इस बात से नाराज होकर दीपक किरार, बंटी किरार, कालू किरार और अन्नू किरार अस्पताल के बाहर पहुंच गए। आरोप है कि चारों ने वहां मौजूद स्टाफ के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद अस्पताल के मुख्य गेट का शीशा तोड़कर वे अंदर घुस आए और विवाद करने लगे।

    विरोध करने पर डॉक्टर और स्टाफ से मारपीट का आरोप

    डॉ. हिरदेश जाटव के अनुसार, जब उन्होंने और अस्पताल के कर्मचारियों ने आरोपियों को गाली-गलौज करने से रोका, तो वे कथित तौर पर जातिसूचक गालियां देने लगे। विरोध करने पर चारों ने डॉक्टर और स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।

    शिकायत के मुताबिक, मारपीट में अस्पताल कर्मचारी सुनील कुशवाह के सिर के पिछले हिस्से में चोट आई। विवेक अहिरवार की बाईं कलाई और पीठ पर चोट लगी, जबकि अभिषेक चौरसिया के बाएं कान के पीछे सिर में चोट आई। करन बाल्मीक की कमर में भी चोट लगने की बात कही गई है।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद ललित मोहन शुक्ला, सागर राजावत और आसपास के अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। इसके बाद स्थिति को संभाला जा सका। अस्पताल में हुई मारपीट और तोड़फोड़ की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की बात कही गई है।

    चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

    डॉ. हिरदेश जाटव की शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने दीपक किरार, बंटी किरार, कालू किरार और अन्नू किरार के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, तोड़फोड़ तथा एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना की जांच कर रही है। ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जयराज कुबेर ने भी मामले को लेकर बयान दिया है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • गाजियाबाद में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत, 12 की तबीयत बिगड़ी

    गाजियाबाद में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत, 12 की तबीयत बिगड़ी


    नई दिल्ली ।
    गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित पीएसी की 47वीं बटालियन के मैदान में उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत हो गई। यह घटना पांच और छह अक्टूबर को आयोजित दौड़ के दौरान हुई। मृतकों में मथुरा निवासी 26 वर्षीय अतुल कुमार और शामली निवासी 23 वर्षीय विवेक कुमार शामिल हैं। वहीं, मंगलवार को दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 12 अभ्यर्थियों को संयुक्त जिला अस्पताल ले जाया गया। इनमें कुछ अभ्यर्थियों को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कमजोरी की शिकायत हुई, जबकि तीन के पैर में फ्रैक्चर भी सामने आया।

    पुलिस के अनुसार, मथुरा जिले के गांव कारब निवासी अतुल कुमार पुत्र सतीश चंद्र 5 अक्टूबर को सिपाही भर्ती की दौड़ में शामिल हुए थे। दौड़ के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, शामली जिले के गांव पुरमाफी निवासी 23 वर्षीय विवेक कुमार पुत्र बालेंद्र सिंह की मंगलवार को दौड़ के बाद तबीयत बिगड़ गई। उन्हें संयुक्त जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

    एसीपी कविनगर अभय डागा के मुताबिक, दोनों अभ्यर्थियों की दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ी थी और इसी दौरान उनकी मौत हुई। मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पुलिस ने मामले में मौत के सटीक कारण का पता लगाने के लिए रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।

    संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार, मंगलवार को 12 अभ्यर्थियों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया। इनमें विवेक को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया था। अन्य अभ्यर्थियों में किसी को सांस लेने में परेशानी हुई तो किसी ने सीने में दर्द और कमजोरी की शिकायत की। शामली निवासी अंकुर के दाएं पैर में परेशानी थी, जबकि मथुरा निवासी योगेश को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत के बाद उपचार दिया गया। गोविंदपुरम निवासी राहुल को सामान्य कमजोरी की शिकायत थी। भाविक और गौरव को सांस लेने में परेशानी हुई, जबकि सूरज को सीने में दर्द के बाद इमरजेंसी में इलाज दिया गया।

    मथुरा निवासी हेमेंद्र और बंटी को भी सांस संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया। मथुरा निवासी अंकित को सीने में दर्द होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया, जबकि सचिन को सांस लेने में परेशानी के कारण इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इलाज के बाद कुछ अभ्यर्थियों की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का उपचार जारी रहा। इससे पहले सोमवार को भी दौड़ के दौरान कई अभ्यर्थियों को चोट और तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल पहुंचाया गया था। मेरठ निवासी गौरव और मुकीमपुर निवासी कृष्णा के पैर में फ्रैक्चर होने पर उन्हें रेफर किया गया था। मेरठ के भासुमा गांव निवासी सौरव भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

    यूपी पुलिस आरक्षी भर्ती की दौड़ 3 से 9 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है। 3, 5 और 6 अक्टूबर को पुरुष अभ्यर्थियों की दौड़ हुई, जिसमें प्रतिदिन करीब 875 अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। 7 अक्टूबर को महिला अभ्यर्थियों की दौड़ निर्धारित है, जिसमें करीब 650 अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। दौड़ के लिए सुबह पांच बजे से प्रवेश शुरू होता है और पूरी प्रक्रिया सुबह नौ बजे तक पूरी की जाती है। अतुल और विवेक के परिजन उन्हें पुलिस की वर्दी में देखने का सपना लेकर भर्ती में भेजे थे, लेकिन दोनों की मौत के बाद परिवारों में मातम छा गया।

  • कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    नई दिल्ली ।अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार को कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल अदाणी आरोग्य मंदिर के शिलान्यास के मौके पर इसे पश्चिम बंगाल के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ के इस्तेमाल पर भी केंद्रित होगा।

    गौतम अदाणी ने अस्पताल की शुरुआत के अवसर को विशेष दिन बताते हुए कहा कि 2,000 बेड वाला यह गैर-लाभकारी संस्थान आधुनिक मेडिकल कॉलेज, उन्नत शोध और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाओं से जुड़ा होगा। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ को इसमें महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा, जिससे बंगाल में चिकित्सा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि अदाणी आरोग्य मंदिर बंगाल के प्रति समूह की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसके तहत विश्वस्तरीय भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में योगदान देने की बात कही गई है।

    शिलान्यास कार्यक्रम में गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनका आभार भी जताया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की प्रस्तावित सुविधाओं और इसके सामाजिक उद्देश्य को लेकर जानकारी साझा की।

    अदाणी के अनुसार अदाणी आरोग्य मंदिर एक विश्वस्तरीय और गैर-लाभकारी चिकित्सा संस्थान होगा। इसमें कुल 2,000 बेड होंगे। इनमें से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित किए जाएंगे। ऐसे लोग जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं, उनके लिए इन बेड की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।

    अस्पताल के केंद्र में एक मेडिकल कॉलेज भी होगा। इसके साथ उन्नत शोध और चिकित्सा देखभाल से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गौतम अदाणी ने कहा कि इस व्यवस्था से बंगाल में कुशल स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार करने की नींव रखी जाएगी।

    उन्होंने बताया कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के निर्माण में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। उनके अनुसार इस संस्थान से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में 10,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    गौतम अदाणी ने कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल में समूह के व्यापक निवेश की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि 2035 तक बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

    प्रस्तावित निवेश में कई अलग-अलग क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली ट्रांसमिशन और वितरण, सड़कें, पुल और रोपवे के साथ ग्रीन सीमेंट तथा हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    अदाणी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की इस परियोजना के साथ राज्य में बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में भी निवेश की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। 2,000 बेड वाला अदाणी आरोग्य मंदिर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

    परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए प्रस्तावित 1,000 बेड की व्यवस्था को भी प्रमुख हिस्सा बताया गया है। इसके अलावा मेडिकल शिक्षा और उन्नत शोध के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    इस तरह शिलान्यास कार्यक्रम में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, शोध, डिजिटल तकनीक और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सामने रखी गई। साथ ही पश्चिम बंगाल में 2035 तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना भी बताई गई।

  • CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए पहुंचे तृणमूल कांग्रेस विधायक परेश राम दास की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान उन्होंने सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके बाद उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    परेश राम दास दक्षिण 24 परगना जिले की कैनिंग पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्हें पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से संबंधित मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। विधायक सोमवार सुबह करीब 11 बजे भवानी भवन स्थित जांच कार्यालय पहुंचे थे।

    पूछताछ के दौरान शाम करीब चार बजे उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। अस्पताल पहुंचने पर उनका इलाज शुरू किया गया और डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखा।

    इस मामले में विधायक को इससे पहले भी पूछताछ के लिए तलब किया जा चुका है। जांच 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान कैनिंग इलाके में हुई हिंसा और उससे जुड़े आरोपों पर केंद्रित है। इसी सिलसिले में विधायक से मामले से संबंधित जानकारी और घटनाक्रम को लेकर सवाल किए जा रहे थे।

    पूछताछ के लिए पहुंचने से पहले विधायक ने सोशल मीडिया पर एक संदेश भी पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कैनिंग को अलविदा कहने और दोबारा मिलने तथा बातचीत करने की बात कही थी। उनके इस संदेश को लेकर समर्थकों के बीच भी चर्चा हुई।

    परेश राम दास के करीबी लोगों के अनुसार, वह पहले स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण इलाज करा चुके हैं। हाल ही में वह इलाज के लिए चेन्नई भी गए थे। सोमवार को जांच के लिए पहुंचते समय उनके पास इनहेलर भी मौजूद था।

    पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। कैनिंग क्षेत्र से जुड़े मामले की जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई है। विधायक से भी इसी जांच के तहत पूछताछ की जा रही थी।

    करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब आगे की पूछताछ और जांच से संबंधित कार्रवाई विधायक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तय की जा सकती है।

    फिलहाल परेश राम दास अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनकी तबीयत को लेकर डॉक्टरों की निगरानी जारी है। मामले में जांच एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य स्थिति और जांच की जरूरत के अनुसार की जाएगी।