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  • इंदौर में छात्राओं की समस्याओं पर राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब, बोले- रहने की जगह नहीं मिलने से पढ़ाई छूटती है

    इंदौर में छात्राओं की समस्याओं पर राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब, बोले- रहने की जगह नहीं मिलने से पढ़ाई छूटती है

    इंदौर : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं और छात्रावासों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया है। उन्होंने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा की ओर से पूछे गए सवाल का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के पास दीये जलाने के लिए पैसा है, लेकिन छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने के लिए क्यों नहीं है।

    राहुल गांधी ने कहा कि यह सवाल उनसे इंदौर में एक छात्रा ने पूछा था। उनके मुताबिक छात्रा गांव से उच्च शिक्षा के लिए शहर आई है, लेकिन उसे रहने के लिए हॉस्टल नहीं मिला। ऐसे में उसे पीजी में रहना पड़ रहा है। छात्रा ने रहने और सुरक्षित रहने की लागत को लेकर अपनी परेशानी सामने रखी।

    राहुल गांधी ने इसी सवाल के आधार पर छात्राओं के सामने आने वाली आवास संबंधी समस्याओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गांवों से शहरों में पढ़ाई के लिए आने वाली कई छात्राओं के सामने रहने की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन जाती है। हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें निजी आवास या पीजी पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और किसी भी देश की मजबूती में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राहुल गांधी ने छात्रों की जिज्ञासा और सवाल पूछने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक छात्रों में सबसे बड़ा गुण सवाल पूछने का होना चाहिए, क्योंकि सवालों के जरिए व्यवस्था से जवाब मांगा जा सकता है।

    राहुल गांधी ने छात्राओं की शिक्षा से जुड़े आवास और सुरक्षा के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई लड़कियां केवल इसलिए पढ़ाई छोड़ देती हैं क्योंकि उनके लिए रहने की उचित जगह उपलब्ध नहीं होती। उनके अनुसार उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर जाने वाली छात्राओं के सामने पढ़ाई के साथ सुरक्षित आवास की चिंता भी बनी रहती है।

    उन्होंने सरकार से छात्रावासों और छात्रों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को लेकर जवाब मांगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए छात्रा के सवाल का जवाब देने की मांग की और कहा कि सरकार को युवाओं की शिक्षा तथा उनके रहने की जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।

    राहुल गांधी ने आवास सहायता से जुड़े मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए मिलने वाली आवास संबंधी सहायता बढ़ती महंगाई के अनुरूप पर्याप्त नहीं है और इसके साथ अनियमितताओं की समस्या भी जुड़ी हुई है। उन्होंने इस विषय पर भी सरकार से जवाब मांगा।

    इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार और छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान छात्रावासों की कमी और छात्राओं की सुरक्षा का विषय भी सामने आया। राहुल गांधी ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनना और उनके सवालों पर जवाब मांगना जरूरी है।

    उन्होंने छात्राओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा हासिल करने के लिए शहरों में आने वाले विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना नहीं करना चाहिए। उनके बयान में छात्रावासों की उपलब्धता को उच्च शिक्षा और छात्र सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया।

  • महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया

    महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नागपुर में आदिवासी छात्राओं ने छात्रावासों से जुड़ी कई समस्याएं सामने रखीं। अभिजीत दीपके के साथ हुई बातचीत के दौरान छात्राओं ने हॉस्टल में रहने की परिस्थितियों, बुनियादी सुविधाओं, छात्रवृत्ति, वॉशरूम और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। कुछ छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित यौन शोषण और प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।

    बातचीत में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र से आई कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। छात्राओं का कहना था कि आदिवासी आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी निजता और सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।

    भंडारा के एक आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा भी बातचीत के दौरान सामने आया। एक छात्रा ने बताया कि वहां करीब 15 लड़कियों को एक ही कमरे में रखा जाता है। छात्राओं ने हॉस्टल में जगह की कमी के अलावा वॉशरूम से जुड़ी परेशानियों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित तौर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि कुछ छात्राओं को ऐसी जांच से गुजरना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर छात्राओं ने अपनी नाराजगी और असहजता व्यक्त की। हालांकि, सामने रखे गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।

    छात्राओं ने कथित यौन शोषण से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को ही आरोपी बनाया जा रहा है। छात्राओं ने ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

    हॉस्टल की समस्याओं में केवल सुरक्षा और जांच से जुड़े मुद्दे ही शामिल नहीं थे। छात्राओं ने छात्रवृत्ति, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की। उनका कहना था कि सरकारी आदिवासी स्कूलों और आवासीय संस्थानों में विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि पढ़ाई और रहने के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    इन शिकायतों के बीच अभिजीत दीपके ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में छात्र अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों से उनकी परेशानियों और हॉस्टल की स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा गया है। इसके लिए आपसी संपर्क और जानकारी जुटाने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई।

    अभिजीत दीपके ने 17 सितंबर से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से करने की बात कही गई है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों और आवासीय विद्यालयों की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं और स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।

    आदिवासी छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद हॉस्टल की व्यवस्थाओं, बुनियादी सुविधाओं, छात्राओं की सुरक्षा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट से जुड़े आरोपों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इन आरोपों की जांच और संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।