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  • बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल

    बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल


    नई दिल्ली । देश में बैंकों के कर्ज वितरण के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बैंकों ने घर खरीदने वाले ग्राहकों की तुलना में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अधिक कर्ज दिया। 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने NBFCs को करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया, जबकि आवास क्षेत्र को 1.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया। इस अवधि में गोल्ड लोन भी तेजी से बढ़ा और खुदरा कर्ज की वृद्धि में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।

    आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने कुल 16.1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण वितरित किया। इसमें बड़े उद्योगों को 2.04 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मिला, जबकि NBFCs को 1.83 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। आवास क्षेत्र में यह राशि 1.35 लाख करोड़ रुपये रही। गोल्ड लोन के रूप में 1.15 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज दिया गया। व्यापार क्षेत्र को 1.02 लाख करोड़ रुपये और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 91,366 करोड़ रुपये का ऋण मिला।

    गोल्ड लोन में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई है। पिछले एक साल में इस श्रेणी का बकाया कर्ज 82.5 प्रतिशत बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही इसमें 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च से सितंबर के बीच बैंकों ने सोना गिरवी रखकर 1.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इस वृद्धि के साथ गोल्ड लोन बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ने वाले ऋण खंडों में शामिल हो गया है।

    अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुल गैर-खाद्य ऋण सितंबर के अंत तक सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत बढ़कर 229 लाख करोड़ रुपये हो गया। मार्च के मुकाबले इसमें 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस कुल ऋण में सेवाओं का हिस्सा 4.9 लाख करोड़ रुपये, व्यक्तिगत कर्ज का 4.5 लाख करोड़ रुपये, उद्योगों का 3.7 लाख करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र का 1.8 लाख करोड़ रुपये रहा। आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में उद्योग, सेवा और व्यक्तिगत कर्ज की मांग बनी हुई है।

    सेवा क्षेत्र को मिलने वाला कर्ज भी तेजी से बढ़ा है। इस क्षेत्र का कुल ऋण सालाना आधार पर 28.3 प्रतिशत बढ़कर 64.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण में सेवाओं की हिस्सेदारी 30.6 प्रतिशत रही। सेवा क्षेत्र में NBFCs को दिया गया कर्ज 41.8 प्रतिशत बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट क्षेत्र को दिए गए ऋण में 23.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    उद्योगों को मिलने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। औद्योगिक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 49.8 लाख करोड़ रुपये हो गया। बड़ी कंपनियों को दिया गया कर्ज 16 प्रतिशत बढ़कर 33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। मध्यम आकार की कंपनियों के लिए ऋण में 33.2 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के कर्ज में 24.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्योगों को दिए गए अतिरिक्त 3.7 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 2 लाख करोड़ रुपये और छोटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1.6 लाख करोड़ रुपये रही।

    कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 28.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 23.6 लाख करोड़ रुपये था। व्यापार क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में भी 23.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, व्यक्तिगत कर्ज 17.3 प्रतिशत बढ़कर 74.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले दिए जाने वाले कर्ज में भी उल्लेखनीय तेजी आई। इस श्रेणी में बैंकों का बकाया ऋण 53.3 प्रतिशत बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले छह महीनों में इसमें 28.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मार्च से सितंबर के दौरान बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले 47,471 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बैंकिंग क्षेत्र में NBFCs, गोल्ड लोन और जमा राशि के बदले मिलने वाले कर्ज की मांग तेजी से बढ़ी है।

  • महंगाई, महंगे किराए और भ्रष्टाचार के खिलाफ यूरोप में उग्र प्रदर्शन, फ्रांस से बाल्कन तक बढ़ा जनाक्रोश

    महंगाई, महंगे किराए और भ्रष्टाचार के खिलाफ यूरोप में उग्र प्रदर्शन, फ्रांस से बाल्कन तक बढ़ा जनाक्रोश


    नई दिल्ली ।
    यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, महंगे आवास, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश तेज हो गया है। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और बाल्कन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरकर सरकारों की नीतियों के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। कई स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़पों, तोड़फोड़ और आगजनी में बदल गए हैं। युवाओं, छात्रों और कामगारों की भागीदारी ने इन आंदोलनों को व्यापक रूप दे दिया है।

    फ्रांस में आंदोलन की शुरुआत माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और शैक्षणिक संसाधनों की कमी के विरोध से हुई। छात्र तीन सप्ताह से अधिक समय तक स्कूलों की नाकेबंदी कर रहे थे। बाद में श्रमिक संगठन सीजीटी और आम नागरिक भी इसमें शामिल हो गए। इसके बाद प्रदर्शन महंगाई और पेंशन नीतियों के विरोध तक फैल गया। पेरिस, मार्सिले, ल्योन और बोर्डो में झड़पों तथा लूटपाट की घटनाएं हुईं। लिमोज में 19वीं सदी के ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग लगाए जाने से भारी नुकसान हुआ। देशभर में अब तक 2,400 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि गणराज्य और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।

    इटली में महंगाई और घटती क्रय शक्ति के खिलाफ ‘इटालिया इन पियाजा’ आंदोलन के तहत हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या में निकाले गए मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा भड़क गई। दुकानों में लूटपाट और वाहनों में आग लगाने की घटनाएं हुईं, जबकि सुरक्षा बलों के 14 जवान घायल हो गए। मिलान में दो दिनों के दौरान 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अधिकांश नाबालिग बताए गए हैं। प्रदर्शनकारी रोजगार की सुरक्षा, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अधिक बजट की मांग कर रहे हैं।

    स्पेन और पुर्तगाल में आवास संकट विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख कारण बन गया है। स्पेन में न्यूनतम मासिक वेतन 1,221 यूरो बताया गया है, जबकि 80 वर्ग मीटर के सामान्य अपार्टमेंट का औसत किराया 1,130 यूरो तक पहुंच गया है। इस अंतर के कारण कई लोगों के लिए भोजन, परिवहन और अन्य जरूरतों पर खर्च करना मुश्किल हो रहा है। बार्सिलोना और मैड्रिड के पुएर्ता डेल सोल चौक पर प्रदर्शनकारियों ने कई सप्ताह से तंबू लगा रखे हैं। 87 वर्षीय मारिकारमेन को घर से बेदखल किए जाने और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु की घटना ने भी आक्रोश बढ़ाया है। मैड्रिड में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने वेतन वृद्धि की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। लिस्बन और पोर्टो में भी विरोध जारी है।

    बाल्कन क्षेत्र में अल्बानिया और सर्बिया में सरकारों के खिलाफ असंतोष प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। अल्बानिया की राजधानी तिराना में लगातार छठे दिन विरोध प्रदर्शन हिंसक रहे। छात्रों और युवाओं के ‘फ्लेमिंगो’ आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय के बाहर बैरिकेड्स में आग लगाई और प्रधानमंत्री एदि रामा के इस्तीफे की मांग की। रामा ने आरोप लगाया कि अति-वामपंथी एंटीफा समूह प्रदर्शनकारियों को भड़का रहे हैं। सर्बिया में विश्वविद्यालय के छात्र पिछले दो वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। वे 25 अक्टूबर 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की सत्ता में वापसी की संभावनाओं को चुनौती दे रहे हैं।

    इन घटनाओं ने यूरोप में राजनीतिक अस्थिरता और आगामी चुनावों को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। कई देशों में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी दल आर्थिक असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सीमाएं पूरी तरह बंद करने की मांग की है। हालांकि, फ्रांस के स्थानीय प्रशासन ने विरोध के पीछे आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों और जीवन स्तर में गिरावट को प्रमुख कारण बताया है। महंगाई, आवास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं पर सरकारें कितनी प्रभावी राहत देती हैं, इसका असर आने वाले महीनों में यूरोप की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।

  • यूरोप में महंगाई और कम वेतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, फ्रांस में हिंसा और आगजनी के बाद हजार से ज्यादा गिरफ्तार

    यूरोप में महंगाई और कम वेतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, फ्रांस में हिंसा और आगजनी के बाद हजार से ज्यादा गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।
    यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, कम वेतन, महंगे मकानों और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति के खिलाफ 17 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। फ्रांस, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल में हजारों से लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने जीवनयापन की बढ़ती लागत और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को लेकर नाराजगी जताई। फ्रांस में कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग किया। फ्रांस में अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनों में 5.5 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों के अनुमान इससे ज्यादा बताए गए।

    फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के साथ हुई थी। बाद में आंदोलन का दायरा बढ़ा और इसमें ईंधन की बढ़ती कीमतों, महंगाई, कम वेतन तथा जीवनयापन की लागत जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए। पेरिस, मार्सेई, नीस, नांत, बोर्डो, लिमोज, लिली, टूलूज और स्ट्रासबर्ग समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कई दुकानों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ तथा लूटपाट की घटनाएं भी दर्ज की गईं।

    लिमोज शहर में 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई। इस घटना में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आग के कारण उसकी छत नीचे की मंजिलों पर गिर गई। शुरुआती जानकारी में इमारत के बाहरी हिस्से का करीब दो-तिहाई भाग नष्ट होने की बात कही गई। अधिकारियों ने इसे शहर की ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ा नुकसान बताया। हिंसा के दौरान कई अन्य स्थानों पर भी आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च में भी हिस्सा लिया।

    फ्रांस में हिंसा के बाद गिरफ्तारियों का आंकड़ा एक हजार से अधिक पहुंच गया। अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में गिरफ्तारी की संख्या में अंतर रहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों के घायल होने और नाबालिगों के साथ पुलिस के व्यवहार पर विवाद का उल्लेख किया गया। इन मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक जानकारी पर निर्भर करेगी।

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर करते हुए सार्वजनिक इमारतों, दुकानों और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सरकार ने स्पष्ट किया कि आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों को कानून के तहत जवाबदेह बनाया जाएगा।

    बेल्जियम में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव देखने को मिला। राजधानी ब्रसेल्स में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं और आगजनी की घटनाएं भी हुईं। लीज शहर में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। वहां शिक्षा की बढ़ती लागत और उच्च शिक्षा तक पहुंच को लेकर चिंताएं भी विरोध के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं।

    पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन समेत कई शहरों में हजारों लोगों ने महंगाई, कम वेतन और आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने बेहतर वेतन, पेंशन और सार्वजनिक सेवाओं की मांग उठाई। मकानों की कीमतों और किराये में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों के लिए घर खरीदना या किराये पर लेना मुश्किल हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से वहां मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं। नए किरायेदारी समझौतों में भी किराये में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री कार्लोस अब्रू अमोरिम ने कहा था कि सरकार सड़कों पर उठने वाले नारों के दबाव में नहीं झुकेगी। प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेतृत्व पर आम लोगों की समस्याओं से दूर रहने का आरोप लगाया।

    इटली के मिलान और बोलोन्या में भी जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और अधिकारियों के साथ झड़प की, जबकि अन्य स्थानों पर मार्च शांतिपूर्ण रहे। अलग-अलग देशों में विरोध के स्थानीय मुद्दे भले ही अलग थे, लेकिन महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर असंतोष प्रमुख रहा। इन प्रदर्शनों ने यूरोपीय सरकारों पर आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बढ़ाया है।

  • दिल्ली में 200 वर्ग किमी में बसेगी नई टाउनशिप, 12 लाख घरों के साथ 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनाने की योजना

    दिल्ली में 200 वर्ग किमी में बसेगी नई टाउनशिप, 12 लाख घरों के साथ 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनाने की योजना

    नई दिल्ली ।देश की राजधानी दिल्ली में शहरी विकास को विस्तार देने के लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नई टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 12 लाख नए घर बनाने पर विचार किया जा रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण की लैंडपूलिंग नीति को आगे बढ़ाते हुए किसानों और जमीन मालिकों के साथ बातचीत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य जमीन के नियोजित इस्तेमाल के जरिए आवासीय और अन्य शहरी सुविधाओं का विकास करना है। योजना में खास तौर पर मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

    इस पहल को दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 के प्रावधानों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अंतर्गत राजधानी के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़े भूभाग को सुनियोजित तरीके से विकसित करने की तैयारी है। प्रस्तावित विकास मॉडल में जमीन मालिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें लैंडपूलिंग नीति की प्रक्रिया, विकास की रूपरेखा और इसमें उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके लिए संबंधित किसानों और भू-स्वामियों के साथ बैठकें की जा रही हैं।

    प्रस्तावित योजना के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर जमीन पर आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी। इसमें लगभग 12 लाख घर बनाने की योजना है। इन घरों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मध्यम आय वर्ग के लोगों को राजधानी में आवास पाने के अधिक अवसर मिल सकें। इसके साथ ही नियोजित विकास के माध्यम से अनधिकृत कॉलोनियों के विस्तार को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    योजना का एक प्रमुख हिस्सा बुनियादी ढांचे का विकास है। लैंडपूलिंग नीति के तहत घरों का निर्माण शुरू होने से पहले सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके लिए 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाना है। प्रस्तावित योजना में 600 किलोमीटर से ज्यादा अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य है। इससे नए विकसित होने वाले क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा देने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

    इस टाउनशिप योजना में दिल्ली के कई नियोजन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें द्वारका और वसंत कुंज के K-1 जोन, द्वारका और नजफगढ़ के L जोन, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला, बवाना और कंझावला क्षेत्र के N तथा P-2 जोन और दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी क्षेत्र का J जोन शामिल हैं। इन इलाकों में शहरी विकास के लिए जमीन और बुनियादी ढांचे की योजना बनाई जा रही है।

    प्रस्तावित क्षेत्रों में अकबरपुर माजरा, बुराड़ी, बापरौला, धूलसिरस, बवाना, इब्राहिमपुर, झड़ौदा माजरा, घेवरा, नजफगढ़ और नंगली पूना जैसे गांव भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों को नियोजित विकास से जोड़ने के लिए जमीन के इस्तेमाल और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है।

    योजना में एक डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी है। इसके तहत आवासीय सुविधाओं के साथ व्यावसायिक जमीन, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसी गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इससे आवास और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ विकसित करने का अवसर मिल सकता है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, भंडारण सुविधाओं और अन्य गतिविधियों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य भी जुड़ा है।

    लैंडपूलिंग नीति के जरिए दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर शहरी विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। हालांकि, प्रस्तावित 12 लाख घरों, सड़क नेटवर्क और अन्य सुविधाओं को जमीन पर उतारने के लिए विकास प्रक्रिया, जमीन मालिकों की भागीदारी और बुनियादी ढांचे का चरणबद्ध निर्माण महत्वपूर्ण रहेगा। योजना का उद्देश्य आवासीय जरूरतों को पूरा करने के साथ राजधानी के विस्तार को व्यवस्थित स्वरूप देना है।

  • अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सशस्त्र बलों के जवानों और उनके परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तथा कल्याणकारी योजनाओं को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नई और व्यापक बहस छिड़ गई है। हाल ही में एक भारतीय मूल की महिला और उनके अमेरिकी सैन्यकर्मी पति द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरणों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस विवरण में अमेरिकी सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों को मिलने वाले विभिन्न दीर्घकालिक और तात्कालिक लाभों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच विभिन्न देशों की रक्षा कल्याण नीतियों और उनकी प्रभावशीलता को लेकर तुलनात्मक समीक्षाएं शुरू हो गई हैं।

    सशस्त्र बलों के कल्याणकारी ढांचे के तहत मिलने वाले मुख्य लाभों में शिक्षा, चिकित्सा और आवास संबंधी नीतियां सर्वोपरि होती हैं। साझा किए गए विवरणों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य व्यवस्था के अंतर्गत कर्मियों को जीवनभर के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता, उच्च शिक्षा के दौरान मासिक भत्ता तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स’ के माध्यम से संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, गृह निर्माण या खरीद प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क पर आवास आवंटन की प्रक्रिया को भी मुख्य लाभ के रूप में रेखांकित किया गया है। इन जानकारियों के सार्वजनिक होते ही दुनिया भर के सैन्य परिवारों और आम नागरिकों ने अपने-अपने देशों के सैन्य सेवा नियमों से इसकी तुलना करना शुरू कर दिया है।

    भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां अनेक पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय सशस्त्र बलों की कल्याणकारी नीतियों को भी उतना ही सुदृढ़ और व्यापक बताया है। चर्चा के दौरान यह तथ्य प्रमुखता से उभरा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को भी अत्यंत सुव्यवस्थित स्वास्थ्य योजनाएं, रियायती दरों पर राशन, सैन्य छावनियों में आवास सुविधाएं और विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। भारतीय रक्षा कल्याण तंत्र के तहत पूर्व सैनिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजना जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जो देश भर में विस्तृत अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से मुफ्त चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करती हैं।

    आवास और पारिश्रमिक के अतिरिक्त, विदेशी रक्षा कर्मियों के परिवारों को मिलने वाली आव्रजन संबंधी सुलभता भी इस वैश्विक चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। सैन्य सेवा में कार्यरत कर्मियों के विदेशी जीवनसाथियों के लिए वीजा और स्थायी निवास संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्राथमिकता दिए जाने के मामलों को लेकर भी विशेषज्ञ अपनी राय रख रहे हैं। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से सैन्य कर्मियों के परिवारों को प्रशासनिक स्तर पर शीघ्रता से नागरिक सुविधाएं प्रदान करना कई देशों की आधिकारिक नीति का हिस्सा होता है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल आम नागरिकों के बीच रक्षा बलों के प्रति आकर्षण और जागरूकता को बढ़ाया है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया है कि आधुनिक युग में रक्षा बल केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की एक व्यापक गारंटी प्रदान करते हैं। सोशल मीडिया पर जारी यह बहस अब केवल सुविधाओं के आंकड़ों तक सीमित न रहकर इस बात का विश्लेषण बन चुकी है कि विभिन्न विकसित और विकासशील देश अपने सैनिकों के जीवन स्तर को सुरक्षित करने के लिए किस प्रकार की नीतियां अपनाते हैं।

  • तेलंगाना में विकास को मिली नई रफ्तार, छात्रों के लिए मिड-डे मील से लेकर लाखों घरों तक सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा

    तेलंगाना में विकास को मिली नई रफ्तार, छात्रों के लिए मिड-डे मील से लेकर लाखों घरों तक सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा


    नई दिल्ली। तेलंगाना में विकास को नई गति देने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर राज्य के भविष्य की बड़ी तस्वीर पेश करने की कोशिश की है। शिक्षा, आवास, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े नए निर्णयों ने यह संकेत दिया है कि सरकार अब विकास के बहुआयामी मॉडल पर काम कर रही है। हालिया फैसलों को राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल तात्कालिक लाभ देना नहीं बल्कि लंबे समय में राज्य की विकास यात्रा को नई पहचान देना भी माना जा रहा है।

    सरकार ने छात्रों से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पोषण संबंधी सुविधा का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। माना जा रहा है कि यह फैसला छात्रों की सेहत, पढ़ाई में एकाग्रता और विद्यालयों में नियमित उपस्थिति बढ़ाने में सहायक हो सकता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय से इस तरह की पहल की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। अब इसे लागू किए जाने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    इसी के साथ आवास क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर घरों को स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवासीय जरूरतों को देखते हुए इसे सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि पक्के घर केवल रहने की सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का आधार भी होते हैं।

    विकास की इस योजना में रोजगार और औद्योगिक निवेश को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। राज्य को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए नई नीतियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं। सरकार आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। यदि योजनाएं तय लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो इससे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

    इसके अलावा सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बिजली व्यवस्था, सिंचाई परियोजनाएं और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास विकास के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य की प्रगति केवल नई योजनाओं से नहीं बल्कि उनकी मजबूत आधारभूत संरचना से तय होती है।

    राज्य में लगातार बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों के बीच विकास की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में शिक्षा, आवास, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ प्राथमिकता देना संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव जमीन पर किस स्तर तक दिखाई देता है, इस पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

    फिलहाल सरकार के इन फैसलों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य विकास की गति को तेज करने और समाज के विभिन्न वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले वर्षों में इन पहलों के परिणाम राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकते हैं।

  • यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी

    यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia and Ukraine war) को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन (Ukraine) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के उत्तरी रूस में स्थित एक आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की. रूस का दावा है कि इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया. शांति समझौतों पर बातचीत के बीच हुए इस हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खासा नाराज हैं. उनकी पुतिन से बात भी हुई है।

    यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे रूस की ओर से “झूठ का एक और दौर” बताया और कहा कि ऐसे बयान शांति वार्ता को कमजोर करने के लिए दिए जा रहे हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बीच में आना पड़ा. ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी. फ्लोरिडा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि पुतिन ने सुबह-सुबह उन्हें बताया कि उन पर हमला हुआ है. ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह दावा गलत भी हो सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “एक बात युद्ध के दौरान हमला करने की होती है और दूसरी बात किसी नेता के घर पर हमला करने की. यह ऐसा करने का सही समय नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यह घटना सच साबित होती है, तो यह तनाव को और बढ़ा सकती है.

    बीते 24 घंटों में ट्रंप ने पुतिन से दो बार बात की है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत “काफी सकारात्मक” रही और कुछ जटिल मुद्दों के बावजूद शांति की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है.

    हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के जापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं. क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग की है कि यूक्रेन अपने सैनिकों को डोनबास के उन इलाकों से हटा ले, जहां अब भी उसकी मौजूदगी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ड्रोन हमले का यह दावा सच साबित होता है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और बड़ा तनावपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे पहले से नाजुक शांति प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है.

  • भोपाल में पांच राज्यों के शहरी विकास की नई योजनाओं पर होगी बैठककेंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर होंगे शामिल

    भोपाल में पांच राज्यों के शहरी विकास की नई योजनाओं पर होगी बैठककेंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर होंगे शामिल


    भोपाल । भोपाल में 20 दिसंबर को पांच राज्यों के शहरी विकास की नई योजनाओं पर एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रीमनोहर लाल खट्टरसहित मध्य प्रदेशदिल्लीउत्तर प्रदेशमहाराष्ट्रऔर छत्तीसगढ़ के शहरी विकास मंत्री और अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य इन राज्यों में शहरी विकास के रोडमैप को तैयार करना है और इसके साथ ही विभिन्न शहरी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करना है।

    बैठक का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया जाएगा। इसमें पांचों राज्य अपने नवाचारोंशहरी विकास योजनाओंऔर केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी चर्चा करेंगे। मध्य प्रदेश की ओर से पीएम आवासलीगेसी वेस्टऔर शहरी विकास योजनाओं पर किए गए कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया जाएगा।

    इसके अलावाइस बैठक में भूमि विकास नियमों में संशोधनग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास पर भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। खासकर20 दिसंबर से भोपाल में मेट्रो का संचालन आम लोगों के लिए शुरू हो जाएगाजिसका लोकार्पण कार्यक्रम मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवसुभाष नगर मेट्रो डिपो या एम्स मेट्रो स्टेशन जाकर मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

    भोपाल मेट्रो की शुरुआत

    भोपाल मेट्रो के पहले चरण में 7.5 किलोमीटर लंबा ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर शुरू किया जाएगा। यह रूट एम्स मेट्रो स्टेशन से लेकर सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक होगा। इस मेट्रो रूट के शुरू होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और दोनों प्रमुख स्टेशनों के बीच यात्रा समय भी काफी घट जाएगा।सूत्रों के अनुसारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हो सकते हैं।
    कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश मेट्रो कार्पोरेशन द्वारा किया जा रहा हैऔर इस कार्यक्रम में शहरी विकास के क्षेत्र में नई दिशा निर्धारित की जाएगी।भोपाल में 20 दिसंबर को पांच राज्यों के शहरी विकास पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगीजिसमें केंद्र सरकार की योजनाओं पर चर्चा होगी। साथ हीभोपाल मेट्रो का लोकार्पण भी इसी दिन होगाजो शहर में यात्रा के नए दौर की शुरुआत करेगा।