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  • हूती हमलों के बीच सऊदी के साथ तुर्की, बोला- जरूरत पड़ी तो सैन्य और तकनीकी मदद देंगे

    हूती हमलों के बीच सऊदी के साथ तुर्की, बोला- जरूरत पड़ी तो सैन्य और तकनीकी मदद देंगे


    नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच तुर्की ने रियाद के समर्थन में बड़ा बयान दिया है। तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने कहा कि सऊदी अरब को अगर सैन्य मदद की जरूरत पड़ती है तो अंकारा सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने खास तौर पर तकनीकी सैन्य जरूरतों को पूरा करने की बात कही। यह बयान तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बीच आया है।

    फिदान ने कहा कि सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर गंभीर हमले हो रहे हैं और इस मुद्दे पर तुर्की पूरी मजबूती के साथ रियाद के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि तीनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते में गठबंधन का प्रावधान है। ऐसे में सऊदी अरब को किसी भी तरह की सैन्य जरूरत, विशेष रूप से तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है तो तुर्की उसे पूरा करने में पीछे नहीं हटेगा।

    क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

    तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच अगस्त में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इसी समझौते को मौजूदा हूती हमलों के बीच पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, समझौते के बावजूद अभी तक तुर्की या पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा नहीं की है। पाकिस्तान ने कहा है कि मक्का समझौते के तहत हूती हमलों के जवाब में तत्काल सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन जरूरत के मुताबिक वह आगे कदम उठाएगा।

    ईरान-अमेरिका संघर्ष में सऊदी को घसीटना स्वीकार्य नहीं: फिदान

    तुर्की के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे व्यापक संघर्ष का हिस्सा बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है। उनके मुताबिक रियाद की इस युद्ध में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है।

    फिदान ने कहा कि तुर्की ने संघर्ष खत्म करने के उद्देश्य से सभी संबंधित पक्षों के सामने कई प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने कहा कि कई पहल की गई हैं, लेकिन अब संबंधित पक्षों को उन्हें स्वीकार करना होगा। उन्होंने नए प्रस्तावों की भी जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि सभी पक्ष उन्हें मानेंगे।

    हूतियों का रियाद पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा

    इस बीच शनिवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में संवेदनशील ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। यह दावा रियाद के मुख्य एयरपोर्ट के पास आग और धुएं का गुबार दिखाई देने के कुछ घंटे बाद किया गया।

    सऊदी अरब के अधिकारियों के मुताबिक, उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रियाद की ओर आ रही एक मिसाइल को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने रातभर संभावित हवाई हमले को लेकर लोगों को अलर्ट पर रखा। शनिवार सुबह स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी गई।

    पाकिस्तान ने भी सऊदी की सुरक्षा को लेकर जताई प्रतिबद्धता

    हूती हमलों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। इस्लामाबाद ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन अभी तक मक्का समझौते के तहत किसी संयुक्त सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि उचित समय आने पर वह समझौते के तहत अपनी भूमिका निभाएगा।

    हूती हमलों के बढ़ने के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की व्यावहारिक भूमिका भी चर्चा में आ गई है। फिलहाल तुर्की ने सऊदी की सैन्य जरूरतों को पूरा करने की तैयारी जताई है, जबकि सीधे युद्ध में उतरने की घोषणा नहीं की है।

  • मक्का तक पहुंचा हूती हमलों का खतरा, सऊदी के छह शहरों में बजे इमरजेंसी सायरन; 13 लोग घायल

    मक्का तक पहुंचा हूती हमलों का खतरा, सऊदी के छह शहरों में बजे इमरजेंसी सायरन; 13 लोग घायल

    रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मंगलवार को देश के छह प्रमुख शहरों में आपातकालीन चेतावनी जारी की गई। इनमें मक्का, जिद्दा और ताइफ जैसे महत्वपूर्ण शहर भी शामिल रहे। सऊदी अरब के लिए यह स्थिति इसलिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि पहली बार मक्का तक संभावित हमले का खतरा पहुंचा और वहां भी लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।

    सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने अपने नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिद्दा, ताइफ, आभा, जाजान प्रांत, अल-उला और यान्बू सहित छह क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया। चेतावनी मिलते ही प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय घरों अथवा नजदीकी सुरक्षित स्थानों के भीतर रहने की अपील की। लोगों को खिड़की, दरवाजे, बालकनी और छत से दूर रहने तथा सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नहीं लगाने की सलाह दी गई। प्रशासन ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा।

    दक्षिणी सऊदी में हमले, 13 नागरिक घायल

    यह अलर्ट सोमवार को यमन की दिशा से हुए सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद जारी किया गया। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, 14 सितंबर को हुए हमलों में आम नागरिकों और उनके रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया गया।

    अल-मलिकी ने बताया कि मिसाइल और ड्रोन मुख्य रूप से खमीस मुशैत, आभा और ताइफ शहरों में पहुंचे। हमलों में 13 लोग घायल हुए, जबकि कम से कम सात आवासीय मकानों और दो निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा।

    हूतियों ने सऊदी एयरबेस को निशाना बनाने का किया दावा

    दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के भीतर काफी अंदर तक सैन्य कार्रवाई की। हूतियों के अनुसार, उनका मुख्य निशाना खमीस मुशैत में स्थित सऊदी अरब का महत्वपूर्ण सैन्य एयरबेस था।

    हूती प्रवक्ताओं ने दावा किया कि यह हमला यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन से एयरबेस के लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया गया तथा वहां भारी नुकसान हुआ।

    2022 के सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव

    हूती हमलों के दावों के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़ा जवाब देने की बात कही है। मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी अरब अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की रक्षा करने में सक्षम है तथा भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों से हुआ सीजफायर प्रभावी नहीं रह गया है। दोनों पक्षों के बीच शांति प्रयासों में ठहराव के बीच क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

    तेल ढांचे पर भी मंडरा रहा खतरा

    सऊदी अरब की चिंता केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं है। देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर भी हमलों का खतरा बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह एक हवाई हमले के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन का संचालन प्रभावित हुआ था। हालांकि, उस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार नहीं बताया गया, बल्कि इराक में सक्रिय ईरान समर्थित शिया गुटों पर संदेह जताया गया।

    सऊदी सिविल डिफेंस के अनुसार, छहों क्षेत्रों में जारी आपातकालीन चेतावनी बाद में हटा ली गई और खतरा टल गया। हालांकि, मक्का और जिद्दा जैसे महत्वपूर्ण शहरों तक सुरक्षा अलर्ट पहुंचना इस बात का संकेत है कि यमन से जुड़ा संघर्ष अब व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।