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  • मदीना को निशाना बनाने की कोशिश! हूती विद्रोहियों ने अदन में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर दागी मिसाइलें

    मदीना को निशाना बनाने की कोशिश! हूती विद्रोहियों ने अदन में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर दागी मिसाइलें


    नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को हमलों की नई लहर शुरू की। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मदीना क्षेत्र के ऊपर एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, जबकि अदन में राष्ट्रपति भवन परिसर और हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर है। हालांकि, हूती प्रवक्ता ने सऊदी अरब की ओर ड्रोन भेजने के आरोपों को खारिज किया है।

    हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने शुक्रवार को बताया कि उसने मदीना क्षेत्र के ऊपर एक ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी) स्थित है, जो इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। इससे पहले गठबंधन ने मक्का क्षेत्र में भी एक ड्रोन को रोकने की जानकारी दी थी।

    अदन में राष्ट्रपति महल और हवाई अड्डे पर मिसाइलें

    एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हूतियों ने दो मिसाइलों से अदन स्थित राष्ट्रपति महल को निशाना बनाया। यमन सरकार के एक सैन्य प्रवक्ता ने भी बताया कि शुक्रवार को अदन हवाई अड्डे और अल-माशीक राष्ट्रपति महल परिसर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिसाइलें अपने लक्ष्य पर लगीं या नहीं। हमले में किसी के हताहत होने या नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है।

    दो प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति महल परिसर की ओर एम्बुलेंस जाते देखीं। इस परिसर में कई इमारतें हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे कुछ समय पहले शहर में दो धमाकों की आवाज भी सुनाई दी थी।

    दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 2014 में हूतियों ने इस सरकार को राजधानी सना से बाहर कर दिया था। इसके बाद से यमन में संघर्ष जारी है और जुलाई में लड़ाई तेज होने के बाद अदन को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

    शुक्रवार के मिसाइल हमलों से पहले बुधवार को भी हूतियों ने अदन हवाई अड्डे को निशाना बनाया था। इस हमले से पहले संगठन ने लोगों को हवाई अड्डे से दूर चले जाने की चेतावनी दी थी। यह हवाई अड्डा दक्षिणी यमन में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।

    मक्का और मदीना के धार्मिक महत्व के कारण बढ़ी चिंता

    मक्का में ग्रैंड मस्जिद (मस्जिद अल-हरम) और काबा स्थित हैं, जबकि मदीना में पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी है। इस्लाम में दोनों शहरों का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां हर साल बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और आगंतुक पहुंचते हैं।

    सऊदी अरब पहले भी हूतियों पर मक्का और मदीना के आसपास हमले की कोशिश करने का आरोप लगा चुका है। सितंबर में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि उसने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को रोककर नष्ट किया। गठबंधन के मुताबिक, यह ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। उसने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया था।

    हूतियों ने आरोपों को किया खारिज

    हूती संगठन ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने के आरोपों को बार-बार खारिज किया है। उसका कहना है कि उसके सैन्य अभियान सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे तक सीमित हैं।

    शुक्रवार को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सऊदी अरब की ओर ड्रोन भेजने के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि संगठन ने सऊदी क्षेत्र के खिलाफ कोई सैन्य अभियान नहीं चलाया है। उनके मुताबिक, हूतियों के हमलों का निशाना केवल सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य अड्डे रहे हैं। हूतियों ने सऊदी अरब पर हमलों के झूठे दावे गढ़ने का आरोप भी लगाया है।

  • मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

    मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना पर हमला करने की खबरों से इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का निशाना सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इससे पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने मक्का और मदीना की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है। कई इलाकों में मिसाइलों का मलबा गिरने की भी जानकारी दी गई थी।

    हूती समूह के इस बयान से सऊदी अरब और यमन के बीच सीमा पार तनाव बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा कि जब भी वे सैन्य अभियान चलाते हैं, तो उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं। सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के इनकार और उनके बताए लक्ष्यों पर तत्काल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी।

    सऊदी अरब ने मिसाइलें रोकने का किया दावा

    सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों का मलबा मक्का के पास और जेद्दा, ताइफ तथा रबिघ में मिलने की जानकारी सामने आई।

    शनिवार को सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा के लोगों को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। करीब 10 मिनट बाद एजेंसी ने बताया कि खतरा टल गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइलों के मलबे की जानकारी वाले सभी स्थानों पर वास्तव में क्या हुआ और क्या कोई मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंची थी। हूतियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मक्का और मदीना को निशाना नहीं बनाया।

    रियाद एयरपोर्ट और अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों पर हमले किए। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा, रबिघ तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशन और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।

    प्रवक्ता ने दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नज्रान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के एक हवाई अड्डे को भी निशाना बनाने का दावा किया।

    वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। हालांकि, हूतियों की ओर से बताए गए अन्य ठिकानों पर हमलों की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने भी इन दावों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर मिसाइल हमले का आरोप

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया है। यमन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से दो मिसाइलें तटरक्षक बल के मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही इलाके में तटरक्षक बल की एक इमारत पर गिरी।

    दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। उन्होंने अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन ठिकानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।

    2022 के युद्धविराम पर फिर मंडराया खतरा

    ताजा घटनाक्रम से यमन में संघर्ष रोकने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है। वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी।

    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों का राजधानी सना और देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

    ईरान के साथ जारी व्यापक अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है। इसी महीने की शुरुआत में हूतियों ने विमानन कंपनियों को सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, उस चेतावनी में मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को अलग रखा गया था।

  • लाल सागर में 14 भारतीयों को ले जा रही नाव पर सऊदी हवाई हमले का दावा, हूतियों ने शुरू किया बचाव अभियान

    लाल सागर में 14 भारतीयों को ले जा रही नाव पर सऊदी हवाई हमले का दावा, हूतियों ने शुरू किया बचाव अभियान

    नई दिल्ली । लाल सागर में 14 भारतीय नागरिकों को ले जा रही एक नाव पर सऊदी अरब की ओर से हवाई हमला किए जाने का दावा सामने आया है। यमन के हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि जुकर द्वीप के पास एक भारतीय नौका को निशाना बनाया गया। हूती पक्ष के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद नाव पर सवार लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है। हालांकि, हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नाव पर मौजूद भारतीयों की मौजूदा स्थिति को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि सऊदी अरब ने लाल सागर में जुकर द्वीप के नजदीक इस नाव पर हवाई हमला किया। उनके मुताबिक, नौका पर 14 भारतीय नागरिक सवार थे। उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलने के बाद हूती बलों की बचाव टीमों को सक्रिय किया गया, जो कथित तौर पर नाव में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं या हमले में किसी को चोट पहुंची है।

    इस घटना को लेकर सऊदी अरब प्रशासन या सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की ओर से हमले की पुष्टि अथवा खंडन किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया दावा माना जा रहा है। भारतीय नागरिकों की संख्या और उनकी स्थिति की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

    जिस इलाके में कथित हमले की बात कही गई है, वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में वैश्विक माल और ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई की खबर से समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

    हूती प्रवक्ता ने कथित हमले की निंदा करते हुए सऊदी अरब पर गैर-जिम्मेदाराना सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं लाल सागर में सामान्य नौकाओं और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। हूती पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से मामले पर ध्यान देने तथा ऐसी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए दबाव बनाने की अपील भी की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    लाल सागर और यमन के आसपास का समुद्री क्षेत्र लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य गतिविधियों के कारण संवेदनशील बना हुआ है। यहां किसी भी संभावित हमले का असर केवल स्थानीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और व्यापार पर भी पड़ सकता है। जुकर द्वीप के पास भारतीय नागरिकों को ले जा रही नाव पर हमले का दावा इसी कारण चिंता का विषय बन गया है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल नाव पर सवार बताए जा रहे 14 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बचाव अभियान चलाए जाने का दावा किया गया है, लेकिन उसके नतीजों का विवरण सामने नहीं आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से मामले की पुष्टि, नागरिकों की पहचान और उनकी स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने तक घटना से जुड़े दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

  • यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल

    यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल


    नई दिल्ली ।
    यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल बताए गए हैं। मृतकों में ज्यादातर नए भर्ती हुए सैनिक शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाते हुए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही, लेकिन मृतकों और घायलों की संख्या नहीं बताई।

    अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह द्वारा किया जाता था। यह इलाका सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक पहुंचने वाले मार्ग पर स्थित है। इस कारण सैन्य और जरूरी आपूर्ति को सरकारी बलों तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए जवान रैपिड इंटरवेंशन नाम से गठित नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    यमन में संघर्ष बढ़ने के पीछे कई क्षेत्रीय और आंतरिक कारण बताए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से टकराव तेज हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भी क्षेत्र की परिस्थितियों पर पड़ा है। वर्ष 2022 में हुआ संघर्षविराम यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई को काफी हद तक रोकने में सफल रहा था, लेकिन हालिया घटनाओं के बीच उस व्यवस्था की प्रभावशीलता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

    इस बीच उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में रविवार को हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया है। सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

    सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास भी तनाव बढ़ने की खबरें हैं। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हमले दोबारा शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है। इन हमलों में सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन घटनाओं से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है।

    लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और वैश्विक माल परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है। इस रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र से हूती विद्रोहियों को पीछे हटाना और वहां दोबारा नियंत्रण स्थापित करना बताया गया है। हालिया मिसाइल हमले ने यमन में संघर्ष के और गंभीर होने की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

  • सऊदी में हूतियों के हमले जारी… तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को बनाया निशाना

    सऊदी में हूतियों के हमले जारी… तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को बनाया निशाना


    तेहरान।
    ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने रात में सऊदी अरब (Saudi Arabia) की तेल कंपनी अरामको (Oil company Aramco) के मुख्यालय पर हमला किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों को नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि हमले में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के इस्तेमाल वाली इमारत की सबसे ऊपरी तीन मंजिलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। एक अधिकारी के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कार्यालय भी हमले की चपेट में आया। इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हूती विद्रोहियों ने इससे पहले कहा था कि उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल से धहरान को निशाना बनाया, जहां अरामको का मुख्यालय है।

    इससे पहले बुधवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय निवासियों ने इसके लिए पड़ोसी देश यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर आरोप लगाया। हूती विद्रोहियों के एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि रूस और चीन समेत कई देशों ने संघर्षविराम समझौते के प्रयासों के तहत उनसे संपर्क किया है। हाल के दिनों में सऊदी अरब के संवेदनशील प्रतिष्ठानों से धुआं उठने की घटनाओं ने क्षेत्र और वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा है, जिन्होंने कहा है कि वह विचार कर रहे हैं कि अमेरिका को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के हमलों में शामिल होना चाहिए या नहीं।

    सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बताया कि उसने धहरान की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल, रियाद को निशाना बनाने वाली क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ड्रोन और प्रिंस सुल्तान एयर बेस एवं सरकारी मिलिट्री इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन वाले खरज की ओर दागी गई एक क्रूज मिसाइल को रोक दिया। हूती विद्रोहियों ने इन हमलों को यमन की राजधानी सना और अन्य विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों पर सऊदी अरब की ”आक्रामकता” का जवाब बताया।

    विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यमन में हुए हमलों में दो लोगों की मौत होने की जानकारी दी और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। हूती विद्रोही हालिया ईरान युद्ध के एक नए मोर्चे पर सऊदी अरब के हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बना रहे हैं। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले एक सप्ताह में कई हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम 18 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    वर्षों तक चले गृहयुद्ध से मजबूत हुए हूती विद्रोही इस समय ईरान के सबसे प्रभावी सशस्त्र सहयोगी माने जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उनका अपना एजेंडा भी है। इन हमलों से अमेरिका के प्रमुख सहयोगी सऊदी अरब पर दबाव बढ़ रहा है। हूती विद्रोहियों के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने संघर्षविराम समझौते के तहत संपर्क किया है।

    उन्होंने कहा कि ओमान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश की है, जबकि रूस और चीन ने ईरान के माध्यम से प्रयास किए हैं। इस बीच, विद्रोहियों ने हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रखने की चेतावनी दी है। विमानन विश्लेषण कंपनी सिरियम के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब के विभिन्न हवाई अड्डों से रवाना होने वाली तीन हजार से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या उन्हें परिचालन में नहीं बताया गया है।


    सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहा

    हमलों में तेजी से सऊदी अरब के सामने हूती मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की चुनौती उजागर हुई है। सऊदी अरब ने अमेरिका सहित अपने सहयोगियों से अधिक सैन्य सहायता मांगी है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हथियारों का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहा है। इस बीच, सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में हवाई हमले कर रहा है।


    दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए

    हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि मंगलवार को होदेदा प्रांत के रास ईसा बंदरगाह क्षेत्र में हुए हवाई हमले में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। मंत्रालय ने कहा कि हमले में सरकारी तेल कंपनी के एक प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सना में एक तेल प्रतिष्ठान पर भी हमला किया।

  • हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल

    हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल


    नई दिल्ली।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच छिड़ा संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. मंगलवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान (Dharan) में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ (World’s Largest oil company, ‘Saudi Aramco’) के प्रशासनिक परिसर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया. सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने बुधवार को ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले के बाद इमारत में आग लगी, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मिसाइल हमले में ऑफिस बिल्डिंग की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा. सूत्र और मामले से परिचित दो अन्य लोगों ने इमारत में आग लगने की जानकारी दी. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

    अरामको का यह परिसर कंपनी के एक प्रमुख संचालन केंद्र के रूप में काम करता है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है. इसके संचालन नेटवर्क में तेल के कुएं, पाइपलाइन, रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल शामिल हैं।


    रियाद समेत कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन नष्ट करने का दावा

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि धहरान के ऊपर रोकी गई एक मिसाइल के टुकड़े आवासीय इलाके में गिरे. हालांकि, इससे हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई. अधिकारियों ने रियाद और देश के दक्षिणी हिस्से में भी मिसाइलों तथा ड्रोन को रोककर नष्ट करने की जानकारी दी।

    इससे पहले मंगलवार को सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हूतियों को बार-बार हमले करने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी.

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से हूती विद्रोही सऊदी अरब के अहम ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं. इनमें राजधानी रियाद का हवाई अड्डा भी शामिल है. शनिवार को रियाद हवाई अड्डे पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी. रिपोर्ट इसे पिछले एक दशक में सऊदी अरब पर हुआ सबसे घातक हमला बताती है. लगातार हमलों के कारण देश में उड़ान सेवाएं भी प्रभावित हुईं. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब सऊदी अरब में एक बड़े ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन हो रहा था।


    हूतियों ने पहले ही अरामको को दी थी धमकी

    धहरान पर हमले से पहले हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने यमन की राजधानी सना पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों के जवाब में ‘कड़ी और दर्दनाक’ कार्रवाई की चेतावनी दी थी. उनके मुताबिक, संभावित निशानों में धहरान स्थित अरामको मुख्यालय और रियाद की एक तेल रिफाइनरी शामिल थे.हूतियों ने सऊदी अरब में तेल क्षेत्र के कर्मचारियों को भी उन ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी दी थी, जिन्हें वे संभावित लक्ष्य मानते हैं।


    सना में तेल डिपो पर भी हमला

    हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सऊदी अरब सना पर हमले कर रहा है. दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित एक तेल डिपो से नागरिकों को दूर रहने की चेतावनी दी. हूती संचालित अल-मसीरा टेलीविजन ने बताया कि गठबंधन ने यमन पेट्रोलियम कंपनी के सबाह केंद्रीय स्टेशन को निशाना बनाया. यह ईंधन डिपो सना के बाहर स्थित है. गठबंधन ने स्टेशन और अन्य ठिकानों पर हमले की पुष्टि की. उसका कहना था कि कार्रवाई का उद्देश्य हूतियों की सऊदी अरब, यमन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खतरा पहुंचाने की क्षमता को कमजोर करना था।

  • 2015 में यमन युद्ध से दूर रहा था पाकिस्तान, अब सऊदी के साथ हूतियों के खिलाफ कितना कारगर होगा गठजोड़?

    2015 में यमन युद्ध से दूर रहा था पाकिस्तान, अब सऊदी के साथ हूतियों के खिलाफ कितना कारगर होगा गठजोड़?


    नई दिल्ली। 2015 में सऊदी अरब के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने यमन में हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया था। अब 11 साल बाद सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या यह गठजोड़ हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य ताकत को निर्णायक बढ़त दिला पाएगा?

    2015 में संसद ने युद्ध से दूर रहने का फैसला किया था
    मार्च 2015 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान के लिए लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और सैनिक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इस मुद्दे पर पाकिस्तान की संसद में पांच दिन तक बहस हुई। 10 अप्रैल 2015 को संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यमन संघर्ष में पाकिस्तान को तटस्थ रखने का फैसला किया।

    हालांकि, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन को स्पष्ट रखा था। संसद के प्रस्ताव में कहा गया था कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता या मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों को खतरा होने की स्थिति में पाकिस्तान उसके साथ खड़ा रहेगा। उस समय पाकिस्तान ने संघर्ष का सैन्य हिस्सा बनने के बजाय राजनयिक भूमिका निभाने पर जोर दिया था।

    11 साल बाद बदले हालात, लागू हुआ मक्का रक्षा समझौता
    7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के मुताबिक, तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों पर हमले के तौर पर माना जाएगा और रक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

    यमन में हूतियों के हमले बढ़ने के बीच 5 अक्टूबर को रियाद में समझौते की रणनीतिक समिति की आपात बैठक हुई। इसके बाद तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने और सऊदी अरब में आवश्यक सैन्य बलों तथा क्षमताओं की तेजी से तैनाती की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई। हालांकि, कितने सैनिक भेजे जाएंगे और उनकी सटीक भूमिका क्या होगी, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    कागज पर बड़ी सैन्य ताकत, लेकिन यमन में चुनौती अलग
    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की संयुक्त सैन्य क्षमता हूतियों की तुलना में काफी बड़ी है। सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम हैं। पाकिस्तान बड़ी थल सेना और वायुसेना के साथ सैन्य अभियान का अनुभव रखता है। वहीं तुर्किये के पास ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी क्षमताएं हैं।

    लेकिन यमन का भूगोल किसी भी बड़ी सैन्य ताकत के लिए चुनौती पैदा करता है। उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाके, गुफाएं और सुरंगें हूतियों को छिपकर हमला करने की क्षमता देते हैं। उनके पास मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और अपेक्षाकृत बिखरी हुई सैन्य संरचना भी है। ऐसे में सिर्फ हवाई हमलों या बड़ी सैन्य ताकत के दम पर उन्हें पूरी तरह पराजित करना आसान नहीं होगा।

    सऊदी अरब पहले भी लंबी लड़ाई में उलझ चुका है
    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन 2015 से यमन में सैन्य अभियान चलाता रहा है, लेकिन वह हूतियों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सका। बाद के वर्षों में अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों पर हमले किए, लेकिन संगठन की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बनी रही।

    मौजूदा संघर्ष में भी हूतियों ने सऊदी क्षेत्र और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता दिखाई है। 7 अक्टूबर को भी हूतियों ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि सऊदी नेतृत्व वाली सेनाएं यमन में अपने अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

    पाकिस्तान और तुर्किये की भूमिका निर्णायक हो सकती है, लेकिन…
    विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्किये सऊदी अरब की एयर डिफेंस, खुफिया जानकारी, निगरानी और सैन्य तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। तुर्किये ने पहले ही कहा है कि वह सऊदी अरब की जरूरत के मुताबिक सैन्य तकनीकी सहायता देने के लिए तैयार है।

    हालांकि, मौजूदा समझौते का सार्वजनिक स्वरूप मुख्य रूप से सऊदी अरब की रक्षा और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने पर केंद्रित है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान और तुर्किये यमन के अंदर सीधे जमीनी युद्ध या हूती ठिकानों के खिलाफ संयुक्त हमलों में किस स्तर तक शामिल होंगे। सितंबर में हुई सैन्य बैठकों के बाद भी उपलब्ध बयानों में संयुक्त जमीनी अभियान या सीधे हमलों की घोषणा नहीं हुई थी।

    हूतियों को पूरी तरह हराना अब भी बड़ी चुनौती
    सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्किये का सैन्य सहयोग मिलने से उसकी रक्षा क्षमता और यमन में उसके समर्थित बलों को बढ़त मिल सकती है। तीनों देशों की संयुक्त ताकत हूतियों पर भारी दबाव डाल सकती है और उनके मिसाइल-ड्रोन हमलों से निपटने में मदद कर सकती है।

    लेकिन सना और उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाकों पर कब्जा कर हूतियों के संगठनात्मक और सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना अलग चुनौती है। यमन की लंबी लड़ाई का अनुभव भी यही बताता है कि हवाई शक्ति और आधुनिक हथियारों के बावजूद हूतियों को निर्णायक रूप से समाप्त करना आसान नहीं रहा है। इसलिए पाकिस्तान और तुर्किये की भागीदारी सऊदी अरब की स्थिति मजबूत कर सकती है, लेकिन इससे हूतियों का पूरी तरह सफाया तय नहीं माना जा सकता।

  • सऊदी अरब में नागरिक उड़ानें असुरक्षित….. हूतियों ने चेतावनी के बाद मचा हड़कंप

    सऊदी अरब में नागरिक उड़ानें असुरक्षित….. हूतियों ने चेतावनी के बाद मचा हड़कंप


    नई दिल्ली।
    ईरान (Iran) के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) के हवाई क्षेत्र को नागरिक उड़ानों (Civil flights) के लिए असुरक्षित बताते हुए चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार सऊदी हवाई समर्थन के साथ हूतियों के कब्जे वाले इलाकों पर जवाबी हमला कर रही है। यमन की सरकारी समाचार एजेंसी सबा ने बताया कि हूतियों की HOCC एजेंसी ने कहा कि सऊदी हवाई क्षेत्र सुरक्षित नहीं है और यह हमारी सेना की कार्रवाई का ठिकाना होगा। हालांकि, इस चेतावनी में पवित्र शहरों मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को छूट दी गई है। यानी इन दोनों शहरों की ओर जाने वाली उड़ानों को इस चेतावनी से बाहर रखा गया है।

    सऊदी अरब और हूथियों के बीच जुलाई 2022 में हुआ समझौता टूटने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर बढ़ गया था। पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने यमन के पूरे लाल सागर तट पर कब्जा कर लिया और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को भी अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद से दोनों तरफ से हमले जारी हैं। संघर्ष विराम टूटने के बाद हूथी पड़ोसी सऊदी अरब पर भी हमले कर रहे हैं और उसके जहाजों पर समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर चुके हैं।

    इसी बीच यमन की सेना ने करीब 100 सऊदी लड़ाकू विमानों के साथ हूथी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह जवाबी अभियान हूथियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए चलाया जा रहा है। इसमें राजधानी सना भी शामिल है। यमनी सेना ने दावा किया है कि उसने अब तक 1,000 से ज्यादा हमले किए हैं।दूसरी ओर हूथी विद्रोहियों ने कहा है कि रविवार को उन्होंने यमन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में तुरबाह शहर समेत और इलाकों पर कब्जा कर लिया है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और जमीन पर स्थिति तेजी से बदल रही है।

    यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरियानी ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया कि सऊदी समर्थन वाली यमनी सरकारी सेनाओं ने बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर लिया है। उनके मुताबिक, सऊदी हवाई मदद से यमनी सेनाएं तट के साथ तेजी से आगे बढ़ीं और धुबाब इलाके की अहम जगहों पर कब्जा कर लिया। धुबाब जलडमरूमध्य के सबसे संकरे बिंदु पर स्थित है, इसलिए इस इलाके का सामरिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है।मंत्री ने कहा कि यह जलमार्ग खासतौर पर सऊदी तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इस साल फरवरी में पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद पड़ा है। ऐसे में बाब अल-मंदब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच समुद्री आवाजाही के लिए अहम रास्ता बन गया है।

    अल-एरियानी के अनुसार, यमनी सेना ने धुबाब पट्टी पर कब्जा कर लिया है और इलाके में बची हुई हूथी सेना को मुख्य बल से काट दिया है। उनका कहना है कि सरकारी बलों की बढ़त जारी है। हालांकि, एक अन्य सरकारी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि जलडमरूमध्य के पास एक सैन्य अड्डे पर लड़ाई अभी भी चल रही है। इसका मतलब है कि पूरे इलाके पर पूरा नियंत्रण अभी पुष्ट नहीं हुआ है।

    हूथियों ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यमनी सेना को मैदान पर कोई खास फायदा नहीं हुआ है। दोनों पक्षों के बयान एक-दूसरे से अलग हैं और स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।फिलहाल यमन में लड़ाई फिर तेज हो गई है। एक तरफ सरकारी सेना सऊदी हवाई समर्थन के साथ आगे बढ़ने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ हूथी नए इलाकों पर कब्जे और सऊदी हवाई क्षेत्र को असुरक्षित बताने की चेतावनी दे रहे हैं। बाब अल-मंदब जैसे संकरे और व्यस्त समुद्री रास्ते पर नियंत्रण की लड़ाई पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • हूतियों के खिलाफ सक्रिय होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? सऊदी में पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक आज

    हूतियों के खिलाफ सक्रिय होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? सऊदी में पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक आज

    नई दिल्ली ।सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य गठबंधन की अहम बैठक सोमवार को रियाद में हो रही है। तीनों देशों की स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की इस बैठक में मक्का रक्षा समझौते के भविष्य पर चर्चा होगी। बैठक ऐसे समय हो रही है जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में मक्का रक्षा समझौते को सक्रिय किया जाएगा और क्या पाकिस्तान तथा तुर्की सऊदी अरब के समर्थन में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होंगे।

    रियाद में होने वाली बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री तथा सेना प्रमुख शामिल होंगे। बैठक के दौरान सऊदी अरब पर हूतियों की ओर से किए जा रहे हमलों से निपटने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा तीनों देशों के बीच हुए सैन्य समझौते के काम करने के तरीके और गठबंधन को भविष्य में अधिक संस्थागत रूप देने के लिए उठाए जाने वाले अगले कदमों पर भी विचार किया जाएगा। बैठक को इस समझौते की आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मक्का रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को तीनों देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते में सामूहिक रक्षा से जुड़ा एक प्रावधान शामिल है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते के बाद से पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब इसके संस्थागत और सैन्य ढांचे को विकसित करने पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी अरब को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाए जाने के कारण इस समझौते की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

    सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती विद्रोही राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। हूतियों और सऊदी अरब के बीच जारी टकराव ने मक्का रक्षा समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधान को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब रियाद में होने वाली बैठक में यह देखा जाएगा कि मौजूदा स्थिति में तीनों देशों के बीच हुआ सैन्य समझौता किस तरह आगे बढ़ता है और सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका क्या होगी।

    पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों की निंदा की है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि उनका देश समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेगा। तुर्की के नेताओं ने भी सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों की कई मंचों पर आलोचना की है। हालांकि, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है। इसी वजह से यह सवाल बना हुआ है कि मक्का रक्षा समझौते के तहत किए गए वादे को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा और क्या दोनों देश सऊदी अरब के लिए चल रही सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होंगे।

  • रियाद में अरामको की सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला, हूतियों ने सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया

    रियाद में अरामको की सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला, हूतियों ने सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया


    नई दिल्ली ।सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी तनाव के बीच शनिवार को राजधानी रियाद में सऊदी अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाकर हमला किए जाने का दावा किया गया। यमन के हूती विद्रोहियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हमले के बाद अरामको की सुविधा से आग की लपटें और काले धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। हूतियों ने इस हमले को यमन में सऊदी अरब की ओर से किए गए हमलों की जवाबी कार्रवाई बताया है।

    हूती विद्रोहियों का कहना है कि रियाद स्थित अरामको की सुविधा पर किया गया हमला यमन की राजधानी सना और देश के दूसरे प्रांतों में हुई सऊदी कार्रवाई के जवाब में किया गया। उनके अनुसार, इस हमले में मिसाइलों और ड्रोन दोनों का इस्तेमाल किया गया। हूतियों ने इसे बदले की कार्रवाई के तौर पर पेश किया है। हालांकि, इस हमले से अरामको की संबंधित सुविधा को कितना नुकसान हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    हमले के बाद रियाद में अरामको की सुविधा के आसपास आग और धुएं का असर दिखाई देने की बात सामने आई। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, शनिवार को सुविधा के पास धुएं और आग का गुबार उठता हुआ देखा गया। घटना के बाद इलाके में हलचल भी देखी गई। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से अरामको की सुविधा को निशाना बनाए जाने की तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में हमले से हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले पिछले सप्ताह हूतियों ने यानबू में भी अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा किया था। उस घटना के संबंध में सऊदी अरब की ओर से छह मिसाइलों को रोकने की बात कही गई थी। दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव के बीच अरामको की सुविधाओं को लेकर सामने आ रहे हमलों के दावों ने तनाव की स्थिति को और सामने ला दिया है।

    रियाद में हुए ताजा हमले को लेकर हूतियों ने स्पष्ट रूप से इसे यमन में सऊदी हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। विद्रोहियों के दावे के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए अरामको की सुविधा को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, सऊदी अधिकारियों की ओर से तत्काल हमले की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल घटना के बाद सुविधा को हुए नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी द्वारा आग और धुएं के गुबार देखे जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि हमले की पूरी स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।