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  • वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचयूएल की आय बढ़ी, लेकिन मुनाफे में कमी से शेयर 5 प्रतिशत से अधिक फिसले

    वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचयूएल की आय बढ़ी, लेकिन मुनाफे में कमी से शेयर 5 प्रतिशत से अधिक फिसले


    नई दिल्ली । देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी किए हैं। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में कंपनी के स्टैंडअलोन मुनाफे में सालाना आधार पर लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती लागत का असर कंपनी की लाभप्रदता पर साफ दिखाई दिया, जबकि कुल आय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया भी नकारात्मक रही और शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली।

    कंपनी के अनुसार, पहली तिमाही में उसका स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ घटकर 2,631 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2,732 करोड़ रुपये था। इसी प्रकार कंसोलिडेटेड आधार पर भी कंपनी का मुनाफा करीब 3.17 प्रतिशत घटकर 2,680 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 2,741 करोड़ रुपये था। इससे स्पष्ट है कि आय में वृद्धि के बावजूद बढ़ते खर्च ने कंपनी के मुनाफे को प्रभावित किया।

    वित्तीय परिणामों में यह भी सामने आया कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कुल आय सालाना आधार पर लगभग 9.8 प्रतिशत बढ़कर 17,529 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 15,958 करोड़ रुपये थी। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के उत्पादों की मांग और कारोबार का विस्तार जारी रहा, लेकिन बढ़ी हुई लागत ने आय में हुई वृद्धि का पूरा लाभ मुनाफे में नहीं बदलने दिया।

    कंपनी का कुल खर्च भी इसी अवधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। पहली तिमाही में कुल व्यय करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 13,822 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह 12,565 करोड़ रुपये था। कंपनी का मानना है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण लागत पर अतिरिक्त दबाव बना, जिसका सीधा असर लाभ पर पड़ा।

    कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती बनाए रखी है। उन्होंने बताया कि सरकार और केंद्रीय बैंक की सक्रिय नीतियों ने आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया, जिससे बाजार में मांग स्थिर बनी रही। उनके अनुसार कंपनी का प्रदर्शन उसके मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो, प्रतिस्पर्धी उत्पादों और रणनीतिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी लगातार बाजार विस्तार, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने और अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में निवेश कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य दीर्घकालिक विकास को गति देना और बदलते बाजार माहौल में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखना है। कंपनी का विश्वास है कि ये निवेश आने वाले समय में बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन की नींव तैयार करेंगे।

    हालांकि, तिमाही नतीजों के तुरंत बाद शेयर बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया कमजोर रही। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में दोपहर के कारोबार के दौरान एचयूएल का शेयर लगभग 5.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,052 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे यह संकेत मिला कि बाजार ने मुनाफे में आई गिरावट और बढ़ती लागत को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के लिए लागत नियंत्रण, मांग में निरंतरता और लाभप्रदता में सुधार प्रमुख चुनौतियां और प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।

  • रिलायंस से SBI तक बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट, एक सप्ताह में 2.74 लाख करोड़ रुपये घटे

    रिलायंस से SBI तक बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट, एक सप्ताह में 2.74 लाख करोड़ रुपये घटे


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता का असर बीते कारोबारी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। व्यापक बिकवाली के चलते देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से नौ के बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान इन कंपनियों का संयुक्त मार्केटकैप लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार में कमजोरी का असर बैंकिंग, आईटी, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों पर देखने को मिला, जबकि केवल एक कंपनी इस दबाव के बीच बढ़त दर्ज करने में सफल रही।

    20 से 24 जुलाई के कारोबारी सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.68 प्रतिशत फिसलकर 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 566.85 अंक या 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर आ गया। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, निवेशकों की मुनाफावसूली और जोखिम से बचने की रणनीति का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी पड़ा, जिससे बड़े शेयरों में लगातार दबाव बना रहा।

    सबसे अधिक नुकसान देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक को हुआ। सप्ताह भर में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी बड़ा झटका लगा, जिसका मार्केटकैप 65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गया। भारतीय शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी होने के बावजूद रिलायंस अपनी शीर्ष स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इन सभी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे उनके कुल मूल्यांकन में कमी आई।

    इस पूरे सप्ताह के दौरान केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। कंपनी का बाजार पूंजीकरण मामूली बढ़त के साथ ऊपर गया और वह शीर्ष 10 कंपनियों में अकेली ऐसी कंपनी रही, जिसने निवेशकों को राहत दी। उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की इस कंपनी में अपेक्षाकृत स्थिर निवेश के कारण उसका मूल्यांकन बढ़ने में सफलता मिली।

    हालांकि बाजार में कमजोरी के बावजूद कंपनियों की रैंकिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे अधिक बाजार पूंजीकरण वाली सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख निकट भविष्य में भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और निवेशकों का भरोसा लौटता है तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के वित्तीय परिणामों और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर बाजार की अगली चाल तय होगी।

  • पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

    पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

    नई दिल्ली। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों पर आने वाले समय में असर देखने को मिल सकता है। वजह है पाम ऑयल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में आई दिक्कतें, जो अब भारतीय बाजार तक पहुंच चुकी हैं। यह वही कच्चा माल है जिसका इस्तेमाल न सिर्फ खाने के तेल में बल्कि साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बिस्किट और कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

    भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई में बाधा, बायोडीजल की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसकी कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो बड़े पैमाने पर FMCG उत्पाद बनाती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बच सकती हैं, लेकिन इसका असर प्रोडक्ट के साइज या पैकेजिंग पर दिख सकता है। यानी साबुन का साइज छोटा हो सकता है या शैंपू की मात्रा पहले से कम हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ेगा।

    HUL और गोदरेज जैसी बड़ी FMCG कंपनियों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इनका प्रोडक्शन काफी हद तक पाम ऑयल पर निर्भर करता है। कच्चे माल की बढ़ती लागत से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बन सकता है, जिससे उनकी मुनाफे की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    पाम ऑयल का इस्तेमाल सिर्फ खाने के तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक उपयोग के कई उत्पादों का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमतों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है।

    फिलहाल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रणनीति के तहत धीरे-धीरे बदलाव करने की योजना बना सकती हैं ताकि अचानक कीमत बढ़ाने से बचा जा सके। लेकिन अगर पाम ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर बाजार में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।

  • सिमोन टाटा का निधन: टाटा परिवार की सौतेली मां और लेक्मे की शख्सियत रही प्रेरणा का स्रोत

    सिमोन टाटा का निधन: टाटा परिवार की सौतेली मां और लेक्मे की शख्सियत रही प्रेरणा का स्रोत


    नई दिल्ली । भारतीय उद्योग जगत और टाटा परिवार के लिए एक दुःखद खबर है। रतन टाटा की सौतेली मां और नोएल टाटा की मां, सिमोन दुनोयर टाटा का 95 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में निधन हो गया। स्विट्जरलैंड में जन्मीं सिमोन ने न केवल टाटा परिवार में अपनी जगह बनाई, बल्कि भारतीय कॉस्मेटिक्स उद्योग में भी एक नई पहचान स्थापित की।

    सिमोन दुनोयर टाटा का जन्म स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हुआ था। उनका पूरा नाम सिमोन नेवल दुनोयर था। 1953 में भारत यात्रा पर आईं सिमोन ने टाटा परिवार से जुड़ाव बनाया और 1955 में जेआरडी टाटा के सौतेले भाई, नवल एच. टाटा से विवाह किया। नवल टाटा की पहली पत्नी सूनी कॉमिस्सैरिएट से दो बेटे थे, रतन और जीमी टाटा। सिमोन ने परिवार में संतुलन बनाए रखा और नवजात टाटा परिवार को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके और नवल टाटा के बेटे नोएल टाटा आज टाटा ट्रस्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

    सिमोन टाटा ने 1960 के दशक में टाटा ग्रुप के व्यवसाय में सक्रिय योगदान देना शुरू किया। उन्होंने टाटा ऑयल मिल्स की सब्सिडियरी कंपनी लेक्मे के बोर्ड में शामिल होकर इसकी रणनीति और विकास में अहम भूमिका निभाई। उस समय लेक्मे एक छोटी कंपनी थी, जो हमाम, ओके और मोदी सोप्स जैसे उत्पाद बनाती थी। लेकिन सिमोन ने इसे भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद कॉस्मेटिक ब्रांड बनाने का विजन दिया।

    1982 में सिमोन टाटा लेक्मे की चेयरपर्सन बनीं। उन्होंने भारतीय बाजार में महिलाओं की त्वचा और बालों की देखभाल के लिए विशेष उत्पाद विकसित कर ब्रांड को मजबूत किया। 1996 में भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद, लेक्मे ने हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के साथ 50:50 साझेदारी की और लेक्मे यूनिलीवर लिमिटेड की स्थापना हुई। 1998 में सिमोन ने HUL को अपने 50 प्रतिशत शेयर 200 करोड़ रुपए में बेच दिए। इसके बाद लेक्मे ने कॉस्मेटिक्स से रिटेलिंग की दिशा में कदम बढ़ाया।

    सिमोन टाटा को भारतीय कॉस्मेटिक्स उद्योग की ‘जैज़ीनेरा’ कहा जाता है। उन्होंने लेक्मे को केवल घरेलू उत्पादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय महिलाओं की जरूरतों और समस्याओं को समझते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में लेक्मे ने मार्केट में नई रणनीतियों और साझेदारियों के माध्यम से तेजी से विकास किया।

    1998 में, सिमोन टाटा ने UK की लिटिलवुड्स इंटरनेशनल (इंडिया) कंपनी को खरीदा, जो रेडी-टू-वियर गारमेंट्स बेचती थी। इसी कदम के साथ उन्होंने ट्रेंट लिमिटेड की नींव रखी। लेक्मे लिमिटेड का नाम बदलकर ट्रेंट कर दिया गया और यह टाटा ग्रुप का प्रमुख रिटेल आर्म बन गया। आज ट्रेंट वेस्टसाइड, जुडियो और अन्य रिटेल फॉर्मेट्स चला रहा है। नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और सिमोन टाटा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सिमोन टाटा न केवल एक व्यवसायिक दृष्टिकोण रखने वाली महिला थीं, बल्कि उन्होंने टाटा परिवार में पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों को भी मजबूती से संभाला। उनका जीवन भारतीय उद्योग जगत और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। उनके योगदान ने न केवल महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उद्योग में बदलाव लाया, बल्कि रिटेलिंग और ब्रांड निर्माण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित किए।

    उनकी यह विरासत आज भी टाटा समूह के कार्यों और समाज में उनके प्रभाव में देखी जा सकती है। सिमोन टाटा के निधन से टाटा परिवार और भारतीय उद्योग जगत को एक अनमोल व्यक्तित्व खोना पड़ा है।