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  • भोपाल के युवक के साथ राजस्थान में हैवानियत: बंधक बनाकर पीटा, बीयर की बोतल में पेशाब पिलाने का आरोप

    भोपाल के युवक के साथ राजस्थान में हैवानियत: बंधक बनाकर पीटा, बीयर की बोतल में पेशाब पिलाने का आरोप



    भोपाल। प्यार की तलाश में राजस्थान गए भोपाल के एक 18 वर्षीय युवक के साथ रूह कंपा देने वाली बर्बरता का मामला सामने आया है। युवक को न सिर्फ तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, बल्कि अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए उसे बीयर की बोतल में भरकर कथित तौर पर पेशाब पिलाया गया। आरोपियों ने इस खौफनाक कृत्य का वीडियो बनाकर पीड़ित के परिजनों को भेजकर उन्हें डराने की कोशिश की है।
    हनीट्रैप जैसा जाल: प्रेमिका ने कॉल कर बुलाया था गांव
    मामला भोपाल के कोलार इलाके का है। पीड़ित युवक का प्रेम-प्रसंग झालावाड़ (राजस्थान) के दांगीपुरा क्षेत्र की एक युवती से चल रहा था। युवती कुछ दिन पहले भोपाल आई थी, जिसे उसके परिजन समझा-बुझाकर वापस ले गए थे। साजिश के तहत तीन दिन पहले युवती से ही युवक को कॉल करवाया गया और उसे मिलने के लिए राजस्थान बुलाया गया। जैसे ही युवक वहां पहुँचा, युवती के परिजनों और ग्रामीणों ने उसे घेर लिया और बंधक बना लिया।

    वीडियो भेजकर दी चुनौती, दहल गए परिजन
    हैरानी की बात यह है कि आरोपियों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं था। उन्होंने युवक को पीटते हुए और उसे जबरन तरल पदार्थ (पेशाब) पिलाते हुए वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे युवक के परिवार को भेज दिया। वीडियो देखने के बाद रविवार दोपहर बदहवास परिजन कोलार थाने पहुँचे और मदद की गुहार लगाई।

    एक्शन में पुलिस: MP से राजस्थान तक घेराबंदी
    मामले की गंभीरता और युवक की जान को खतरा देखते हुए भोपाल पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभाला:
    इंटरस्टेट को-ऑर्डिनेशन: कोलार पुलिस ने तुरंत राजगढ़ की कालीपीठ पुलिस से संपर्क साधा, क्योंकि यह इलाका राजस्थान बॉर्डर से सटा है।

    रेस्क्यू ऑपरेशन: कोलार टीआई संजय सोनी के मुताबिक, राजगढ़ पुलिस की एक विशेष टीम झालावाड़ के दांगीपुरा के लिए रवाना कर दी गई है।

    प्राथमिकता: पुलिस का पहला लक्ष्य युवक को सुरक्षित मुक्त कराना और उसे उपचार दिलाना है। राजस्थान पुलिस को भी अलर्ट पर रखा गया है।युवक की जान बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है।

    हालांकि घटना राजस्थान की है, लेकिन हमने अपनी टीमें रवाना कर दी हैं और राजस्थान पुलिस के समन्वय से आरोपियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
    युवक की जान बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। हालांकि घटना राजस्थान की है, लेकिन हमने अपनी टीमें रवाना कर दी हैं और राजस्थान पुलिस के समन्वय से आरोपियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। संजय सोनी, थाना प्रभारी, कोलार (भोपाल)
  • इंदौर बगैर अपराध इंजीनियर को 30 घंटे हथकड़ी में थाने में बैठाने पर चंदन नगर टीआई की मुश्किलें बढ़ीं

    इंदौर बगैर अपराध इंजीनियर को 30 घंटे हथकड़ी में थाने में बैठाने पर चंदन नगर टीआई की मुश्किलें बढ़ीं


    इंदौर । इंदौर में एक दिलचस्प और विवादास्पद घटना सामने आई है जिसमें चंदन नगर थाना पुलिस ने एक निर्दोष इंजीनियर को बगैर किसी अपराध के 30 घंटे तक थाने में हथकड़ी लगाकर बैठाया। यह मामला तब सामने आया जब पुलिस ने एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी संजय दुबे की गिरफ्तारी के लिए संजय दुबे के बेटे राजा को पकड़ लिया। 26 नवंबर को पुलिस ने राजा को सैलून से उठाया, जबकि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। राजा का नाम केवल इसलिए लिया गया क्योंकि पुलिस 12 नवंबर से आरोपी संजय दुबे को पकड़ने में विफल रही थी।

    इस घटना के बाद राजा के साले आकाश तिवारी ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि राजा निर्दोष था और उसके खिलाफ कोई अपराध नहीं था, बावजूद इसके उसे पुलिस ने बगैर कारण के गिरफ्तार कर लिया और 30 घंटे तक थाने में हथकड़ी लगाकर रखा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    हाई कोर्ट की प्रतिक्रिया और पुलिस कमिश्नर से सवाल

    हाई कोर्ट ने पुलिस के इस कृत्य को गंभीरता से लिया और इसे नागरिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन मानते हुए थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को सख्त हिदायत दी। कोर्ट ने पटेल से 26 और 27 नवंबर के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि पुलिस ने क्या सचमुच अनुचित कार्रवाई की थी। हालांकि, जब पटेल कोर्ट में पेश हुए, तो वे अपने साथ सीसीटीवी फुटेज लाने में विफल रहे और इसका कारण तकनीकी गड़बड़ी बताया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य काफी हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि राजा के साथ दुर्व्यवहार किया गया था।

    कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से पूछा कि उन्होंने पटेल के खिलाफ क्या विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की है। इस सवाल से यह स्पष्ट हो गया कि कोर्ट अब इस मामले में पटेल के खिलाफ कठोर कदम उठाने की ओर इशारा कर रहा है।

    राजा को रिहा किया गया, लेकिन मामला जारी

    राजा को 27 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे रिहा किया गया, लेकिन इस रिहाई के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि 30 घंटे के दौरान की सीसीटीवी फुटेज पेश की जाए, लेकिन पटेल ने इसे प्रस्तुत नहीं किया, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर और सवाल खड़े हो गए। इस मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है, और पुलिस को इस समय तक अपने पक्ष को स्पष्ट करने का अवसर दिया गया है।

    इस घटना से यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने का अधिकार है, और क्या पुलिस अधिकारियों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने पर सजा मिलनी चाहिए। यह मामला न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश में पुलिस के बर्ताव और नागरिकों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

    इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि पुलिस के लिए कानून से ऊपर होना कोई विकल्प नहीं है, और हर नागरिक को अपने अधिकारों की रक्षा करने का हक है। हालांकि, मामले की आगे की सुनवाई में अदालत द्वारा की जाने वाली कार्रवाई इस बात का निर्णय करेगी कि क्या थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जाती है, या फिर इसे एक और प्रशासनिक लापरवाही के रूप में ही छोड़ दिया जाएगा।