Tag: Human Rights

  • रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR

    रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR


    भोपाल। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। रतलाम जिले के एक गांव की 21 वर्षीय युवती ने अपने ही जन्मदाताओं और सगे मामाओं पर उसे देह व्यापार के नर्क में धकेलने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पिछले 7 सालों से जुल्म सह रही यह युवती किसी तरह जान बचाकर भोपाल पहुंची, जहां उसने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई।
    7 साल की उम्र से सह रही थी जुल्म
    पीड़िता ने भोपाल के महिला थाने में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया कि जब वह महज 14 साल की थी, तभी से उसके माता-पिता और दो मामा मिलकर उससे जबरन देह व्यापार करवा रहे थे। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उसे दरिंदगी के हवाले कर दिया गया।
    युवती का आरोप है कि जब भी वह इस घिनौने काम का विरोध करती, तो उसके परिजन उसे बेरहमी से पीटते और तरह-तरह की शारीरिक व मानसिक यातनाएं देते थे।

    नर्क से भागकर भोपाल में ली शरण
    सालों तक जुल्म की बेड़ियां सहने के बाद, युवती ने आखिरकार साहस जुटाया और मौका मिलते ही अपने गांव से भागकर भोपाल आ गई। यहां उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई और एक आवेदन के माध्यम से अपनी पूरी कहानी बयां की।

    पीड़िता की हालत और उसकी बातों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

    भोपाल में ‘जीरो’ पर FIR, अब रतलाम पुलिस करेगी जांच
    महिला थाना प्रभारी (TI) अंजना दुबे के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता के बयानों के आधार पर उसके माता-पिता और दो मामा के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

    चूंकि मामला रतलाम जिले का है, इसलिए भोपाल पुलिस ने ‘जीरो पर एफआईआर’ दर्ज की है। अब केस डायरी आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए रतलाम पुलिस को सौंपी जा रही है।

    मामले के मुख्य आरोपी: सगे माता-पिता और दो मामा।
    पिछले 7 सालों से (14 वर्ष की आयु से) लगातार शोषण।
    अपराध: जबरन देह व्यापार और मारपीट।
    कानूनी स्थिति, भोपाल में जीरो FIR दर्ज, मामला रतलाम ट्रांसफर।
    यह मामला समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जहां संरक्षक ही भक्षक बन गए। अब सबकी नजरें रतलाम पुलिस पर हैं कि वह इन आरोपियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करती है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा के आरोपों से बढ़ी हिंसा, ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट में हुई चेतावनी

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा के आरोपों से बढ़ी हिंसा, ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट में हुई चेतावनी


    नई दिल्ली:बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोपों के तहत हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज HRCBM की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच कम से कम 71 हमले दर्ज किए गए। यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक लगातार चल रहे पैटर्न का हिस्सा हैं।

    रिपोर्ट में बताया गया कि हिंसा बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में हुई। इनमें रंगपुर, चांदपुर, चटगांव, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कुमिल्ला, गाजीपुर, टांगाइल और सिलहट जैसे जिले शामिल हैं। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इतने व्यापक इलाके में बार-बार इस तरह की घटनाओं का होना अल्पसंख्यक समुदाय की प्रणालीगत असुरक्षा को दर्शाता है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अक्सर सोशल मीडिया या निजी बातचीत में किसी व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाया जाता है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई होती है, भीड़ इकट्ठा हो जाती है और हिंसा फैलती है। अक्सर हिंसा सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हिंदू मोहल्लों के घर, मंदिर और दुकानों को भी निशाना बनाया जाता है।

    विशेष चिंता की बात यह है कि हिंसा में नाबालिग भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 फीसदी से ज्यादा आरोपी हिंदू थे, जिनमें 15 से 17 साल के नाबालिग भी शामिल थे। उदाहरण के लिए, 27 जुलाई 2025 को रंगपुर के बेटगारी यूनियन में एक 17 वर्षीय लड़के की गिरफ्तारी के बाद भीड़ ने कम से कम 22 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की।एचआरसीबीएम के मुताबिक, कई मामलों में सोशल मीडिया खासतौर से फेसबुक का इस्तेमाल आरोपों के लिए हुआ। कई बार अकाउंट हैक पाए गए और पोस्ट की सच्चाई साबित नहीं हो सकी। इसके बावजूद पुलिस ने भीड़ के दबाव में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने से पहले ही FIR दर्ज कर दी जाती थी।

    शिक्षण संस्थानों में भी इसका असर पड़ा। कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों को निलंबित किया गया, उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया और कुछ को पुलिस रिमांड में भेजा गया। रिपोर्ट में साइबर सिक्योरिटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी उल्लेखनीय बताई गई है।रिपोर्ट में कई मौतों का भी जिक्र है। 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में 30 वर्षीय हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को जला दिया। खुलना में एक नाबालिग पर कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में हमला किया गया। इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय MEA ने हालात को लगातार जारी दुश्मनी करार दिया और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।एचआरसीबीएम की रिपोर्ट साफ करती है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक विशेषकर हिंदू समुदाय लगातार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश सरकार दोनों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन

    पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan)के सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) की एक सुनवाई में नॉर्वे के राजदूत अल्बर्ट इलसास(Ambassador Albert Ilsas) भी पहुंच गए। इससे पाकिस्तानी सरकार इतना भड़क गई कि इलसास को समन भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक मानवाधिकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान नॉर्वे के राजदूत सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे। ऐक्टिविस्ट इणान जैनब मजारी और उनके पति हादी अली चत्ता की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इलसास को समन किया है और कहा है कि देश के आंतरिक मामलों में दखल देना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उपस्थित होकर नॉर्वे के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

    अंदराबी ने कहा, उन्होंने जो कुछ भी किया है उसे देश के आंतरिक मामलों में दखल माना जा रहा है। किसी भी देश के राजदूत से उम्मीद की जाती है कि वह विएना कन्वेंशन के नियमों का पालन करे। वहीं इमान ने राजदूत का पक्ष लेते हुए कहा है कि राजदूत का सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना यह कतई नहीं दिखाता है कि वह किसी पक्ष में थे। यह एक आम बात है, हालांकि पाकिस्तान की सरकार एक राजदूत की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।

    बता दें कि इमान और उनके पति के खिलाफ पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक ऐक्ट 2016 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में उन्होंने अंतरिम राहत के लिए अपील की थी। उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद दंपती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।