Tag: Human Trafficking

  • भोपाल में संगठित गिरोह का खुलासा: बेबी सिटर की नौकरी के बहाने युवतियों को जाल में फंसाने का आरोप

    भोपाल में संगठित गिरोह का खुलासा: बेबी सिटर की नौकरी के बहाने युवतियों को जाल में फंसाने का आरोप


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित तौर पर सक्रिय एक संगठित गिरोह पर युवतियों को नौकरी का झांसा देकर शोषण और देह व्यापार में धकेलने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िताओं के मुताबिक आफरीन और अमरीन नाम की दो बहनें इस नेटवर्क की मास्टरमाइंड बताई जा रही हैं जो कथित रूप से बेबी सिटर की नौकरी का लालच देकर लड़कियों को अपने संपर्क में लाती थीं।

    पीड़िताओं में 30 वर्षीय सलोनी बदला हुआ नाम और 22 वर्षीय श्रीधी बदला हुआ नाम सामने आई हैं। सलोनी ने बताया कि वह दो बच्चों की मां है और आर्थिक तंगी के कारण काम की तलाश में भोपाल आई थी। इवेंट कैटरिंग का काम अस्थायी था इसलिए उसे स्थायी नौकरी की जरूरत थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आशिमा मॉल में आफरीन से कराई गई जहां उसे बच्ची की देखरेख के नाम पर नौकरी की पेशकश की गई।

    सलोनी का आरोप है कि शुरुआत में कम वेतन पर काम कराया गया फिर घर में रहने का दबाव बनाया गया। कुछ समय बाद उसे पार्टियों में ले जाया जाने लगा जहां एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का कहना है कि इस घटना का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया और देह व्यापार के लिए मजबूर किया गया।

    इसी तरह श्रीधी को भी कथित तौर पर बेहतर कमाई और सुविधाओं का लालच देकर जोड़ा गया। आरोप है कि उसे अलग-अलग शहरों में भेजा गया और जबरन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया। पीड़िताओं का दावा है कि आरोपित महिलाएं उन्हें धार्मिक गतिविधियों के लिए भी प्रेरित करती थीं और विश्वास में लेने की कोशिश करती थीं।

    सलोनी के अनुसार इस नेटवर्क में कई अन्य लड़कियां भी फंसी थीं लेकिन बदनामी और सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आ पा रहीं। आरोप है कि यह गिरोह कॉलेज छात्राओं से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की युवतियों को निशाना बनाता था।

    करीब एक साल पहले दोनों बहनों के अहमदाबाद शिफ्ट होने की जानकारी सामने आई। बाद में पीड़िताओं ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बाग सेवनिया थाने में एफआईआर दर्ज होने से पहले कई दिनों तक पूछताछ और प्रक्रिया चली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संभावित मानव तस्करी ब्लैकमेल और दुष्कर्म के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल पुलिस आधिकारिक रूप से जांच जारी होने की बात कह रही है। 

  • भोपाल रेप-धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा: लिव-इन, स्पा की आड़ में सेक्स रैकेट और WhatsApp से ‘सप्लाई’ का आरोप

    भोपाल रेप-धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा: लिव-इन, स्पा की आड़ में सेक्स रैकेट और WhatsApp से ‘सप्लाई’ का आरोप


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए रेप और कथित धर्मांतरण मामले में जांच के दौरान कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी चंदन यादव रायसेन जिले का निवासी है, जो भोपाल आकर स्पा सेंटर में काम करने लगा था। जांच में यह भी सामने आया है कि वह अमरीन के साथ तीन साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था और स्पा सेंटर की आड़ में जिस्मफरोशी का नेटवर्क संचालित किए जाने का आरोप है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन से कई WhatsApp ग्रुप मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर लड़कियों की सप्लाई और ग्राहकों से संपर्क से जुड़े चैट्स पाए गए हैं। डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अमरीन और उसकी बहन आफरीन तलाकशुदा हैं।

    जांच में यह दावा भी किया गया है कि अमरीन, चंदन यादव के साथ लिव-इन में रह रही थी और दोनों मिलकर नेटवर्क चला रहे थे। आरोप है कि भोपाल से लड़कियों को अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों तक भेजा जाता था। फरार आरोपियों बिलाल, चानू और यासिर की तलाश में पुलिस की एक टीम अहमदाबाद रवाना हुई है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड  डिजिटल चैट और जब्त मोबाइल की गहन जांच की जा रही है।

    मामले में यह भी सामने आया है कि भोपाल की दो सगी बहनों पर काम दिलाने के बहाने धर्मांतरण कराने और सेक्स रैकेट से जोड़ने का आरोप है। पूछताछ में कथित तौर पर यह बात सामने आई कि कुछ युवतियों का धर्म परिवर्तन कर उन्हें कथित रूप से संपन्न ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में भी सप्लाई की बात जांच के दायरे में है।

    इस पूरे प्रकरण में छत्तीसगढ़ की एक ब्यूटीशियन और भोपाल की एक युवती ने बागसेवनिया थाना में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ रेप और एक महिला के खिलाफ धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की FIR दर्ज की गई है। पीड़िताओं ने पुलिस को कुछ दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी सौंपे हैं, जिनमें कई अन्य युवतियों के कथित धर्मांतरण के संकेत होने का दावा किया गया है।

    पुलिस ने मुख्य आरोपी अमरीन, उसकी बहन आफरीन और चंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है। साथ ही आरोपियों द्वारा बड़े लोगों से संबंध होने के दावों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

  • दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत

    दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत


    नई दिल्ली। 12 फरवरी, 2026 को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ICC T20 वर्ल्ड कप मैच के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो समय सारिणी में खास बदलाव किया है। मैच के कारण स्टेडियम और आसपास भारी भीड़ के मद्देनजर DMRC ने प्रमुख मेट्रो लाइनों पर आखिरी ट्रेन का समय लगभग 90 मिनट तक बढ़ा दिया है, ताकि दर्शक और सामान्य यात्री आसानी से घर लौट सकें।

    रेड लाइन (लाइन 1) पर शहीद स्थल से रिठाला रूट की आखिरी ट्रेन अब रात 12:10 से 12:15 बजे तक चलेगी। येलो लाइन (लाइन 2) पर समयपुर बादली से गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर तक ट्रेन 12:20 बजे तक उपलब्ध रहेगी। ब्लू लाइन (लाइन 3 और 4) की नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से द्वारका सेक्टर 21 तक की आखिरी ट्रेनें 11:35 और 11:45 बजे तक चलेंगी। ग्रीन लाइन (लाइन 5) की कुछ ट्रेनें 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। वायलेट, पिंक, मैजेंटा, ग्रे लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी ट्रेन समय में बदलाव किया गया है।

    DMRC ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल 12 फरवरी के लिए है। 13 फरवरी से मेट्रो टाइमिंग पहले की तरह सामान्य हो जाएगी। इस निर्णय से न केवल मैच देखने वाले दर्शकों को सुविधा मिली है, बल्कि देर रात सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिली है।

    DMRC के इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि मैच खत्म होने के बाद भी लोग सुरक्षित और समय पर घर पहुंच सकें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार बनाएं और भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त समय रखें।

  • वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें

    वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लड़कियों की कथित तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े अपराधों को हल्के में लेना अस्वीकार्य है। अदालत ने ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश देते हुए वर्ष 2014 से अब तक के 11 वर्षों में ग्वालियर संभाग से लापता हुई लड़कियों और उनकी बरामदगी से जुड़ा विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।

    यह सख्त आदेश पायल नामक महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिवपुरी जिले में कुछ संगठित गिरोह युवतियों को बंधक बनाकर उनसे जबरन देह व्यापार करवा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश बोहरे ने अदालत को बताया कि इस संबंध में पुलिस और प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब पर अदालत ने तीखी आपत्ति जताई। शासन ने अपने जवाब में इस पूरे मामले को आपसी पारिवारिक विवाद बताया था। हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल निजी विवाद नहीं बल्कि संगठित अपराध, मानव तस्करी और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है।

    खंडपीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस का दृष्टिकोण बेहद चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सबसे अहम है। इसी क्रम में कोर्ट ने आईजी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल फाइलों और कागजी जवाबों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सोच और कार्यशैली में बदलाव जरूरी है।हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2014 से अब तक ग्वालियर संभाग में दर्ज सभी गुमशुदगी मामलों का विस्तृत ब्योरा पेश किया जाए। इसमें यह जानकारी भी शामिल करनी होगी कि कितनी लड़कियां लापता घोषित की गईं, कितनी को बरामद किया गया और कितने मामलों की जांच अब तक लंबित है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पुलिस प्रशासन पर और भी सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले शिवपुरी जिले के पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में तलब किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करना या उन्हें घरेलू विवाद बताकर दबाना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।अदालत के इस सख्त रुख के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारियों के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और आंकड़ों को संकलित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वहीं महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को अहम बताते हुए कहा है कि इससे लड़कियों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।

  • रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR

    रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR


    भोपाल। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। रतलाम जिले के एक गांव की 21 वर्षीय युवती ने अपने ही जन्मदाताओं और सगे मामाओं पर उसे देह व्यापार के नर्क में धकेलने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पिछले 7 सालों से जुल्म सह रही यह युवती किसी तरह जान बचाकर भोपाल पहुंची, जहां उसने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई।
    7 साल की उम्र से सह रही थी जुल्म
    पीड़िता ने भोपाल के महिला थाने में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया कि जब वह महज 14 साल की थी, तभी से उसके माता-पिता और दो मामा मिलकर उससे जबरन देह व्यापार करवा रहे थे। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उसे दरिंदगी के हवाले कर दिया गया।
    युवती का आरोप है कि जब भी वह इस घिनौने काम का विरोध करती, तो उसके परिजन उसे बेरहमी से पीटते और तरह-तरह की शारीरिक व मानसिक यातनाएं देते थे।

    नर्क से भागकर भोपाल में ली शरण
    सालों तक जुल्म की बेड़ियां सहने के बाद, युवती ने आखिरकार साहस जुटाया और मौका मिलते ही अपने गांव से भागकर भोपाल आ गई। यहां उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई और एक आवेदन के माध्यम से अपनी पूरी कहानी बयां की।

    पीड़िता की हालत और उसकी बातों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

    भोपाल में ‘जीरो’ पर FIR, अब रतलाम पुलिस करेगी जांच
    महिला थाना प्रभारी (TI) अंजना दुबे के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता के बयानों के आधार पर उसके माता-पिता और दो मामा के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

    चूंकि मामला रतलाम जिले का है, इसलिए भोपाल पुलिस ने ‘जीरो पर एफआईआर’ दर्ज की है। अब केस डायरी आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए रतलाम पुलिस को सौंपी जा रही है।

    मामले के मुख्य आरोपी: सगे माता-पिता और दो मामा।
    पिछले 7 सालों से (14 वर्ष की आयु से) लगातार शोषण।
    अपराध: जबरन देह व्यापार और मारपीट।
    कानूनी स्थिति, भोपाल में जीरो FIR दर्ज, मामला रतलाम ट्रांसफर।
    यह मामला समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जहां संरक्षक ही भक्षक बन गए। अब सबकी नजरें रतलाम पुलिस पर हैं कि वह इन आरोपियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करती है।

  • भीख और अवैध यात्रा से पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को कई देशों ने किया बाहर

    भीख और अवैध यात्रा से पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को कई देशों ने किया बाहर


    इस्लामाबाद/पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और गंभीर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। आतंकवाद के आरोपों के बाद अब पाकिस्तानी भिखारियों और अवैध प्रवासियों के कारण कई देश परेशान हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अलग-अलग देशों ने 50 हजार से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को या तो अपने यहां से बाहर निकाल दिया या एयरपोर्ट पर ही प्रवेश देने से रोक दिया।यह चौंकाने वाली जानकारी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानियों और मानवाधिकारों पर स्थायी समिति की बैठक में सामने आई। बैठक में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी FIA के महानिदेशक रिफ्फत मुख्तार राजा ने विस्तृत आंकड़े पेश किए।

    सऊदी अरब सबसे सख्त हजारों पाकिस्तानी लौटाए गए

    एफआईए डीजी के मुताबिक इस साल सबसे ज्यादा निर्वासन सऊदी अरब से हुआ है। वहां भीख मांगने के आरोप में करीब 24000 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर कर दिया गया। सऊदी प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने धार्मिक यात्राओं और वीजा की शर्तों का गलत इस्तेमाल किया।
    इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरातUAE ने भी 6000 पाकिस्तानियों को निर्वासित किया जबकि अजरबैजान से करीब 2500 लोगों को भिखारी होने के आरोप में बाहर निकाला गया। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नुकसान पहुंचा है।

    एयरपोर्ट पर ही रोके गए हजारों लोग

    एफआईए डीजी ने समिति को बताया कि सिर्फ निर्वासन ही नहीं बल्कि हजारों पाकिस्तानियों को विदेश यात्रा से पहले ही रोक दिया गया। जांच में सामने आया कि कई लोग उमरा वीजा का बहाना बनाकर यूरोप जाने की कोशिश कर रहे थे।उन्होंने कहा कि जब इन यात्रियों के दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो उनमें यूरोपीय देशों में अवैध प्रवेश की योजना साफ नजर आई।एफआईए प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहामजबूत सबूतों के आधार पर ऐसे यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही यात्रा की अनुमति नहीं दी गई।

    एशियाई देशों में भी संदिग्ध गतिविधियां

    एफआईए ने समिति को यह भी बताया कि कंबोडिया और म्यांमार जैसे देशों में भी पाकिस्तानी नागरिकों की संदिग्ध आवाजाही सामने आई है।आंकड़ों के अनुसार:इस साल 24000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए जिनमें से 12000 अब तक वापस नहीं लौटे।वहीं 4000 लोग म्यांमार पर्यटक वीजा पर गए लेकिन करीब 2500 अभी तक लापता हैं।इन मामलों को मानव तस्करी अवैध काम और संगठित गिरोहों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    कड़े कदमों से पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार

    हालांकि एफआईए डीजी ने यह भी दावा किया कि हाल के महीनों में कड़े नियंत्रण उपायों के चलते कुछ सुधार देखने को मिला है।उन्होंने बताया कि पाकिस्तान का पासपोर्ट रैंकिंग में 118वें स्थान से सुधरकर 92वें स्थान पर आ गया है।उनका कहना था कि पहले पाकिस्तान अवैध प्रवासन के मामलों में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल था लेकिन नीतियों में बदलाव और सख्ती के कारण स्थिति में आंशिक सुधार हुआ है।

    पहले भी हो चुके हैं सामूहिक निर्वासन

    इससे पहले जनवरी महीने में भी सऊदी अरब और अमेरिका समेत कई देशों ने एक ही हफ्ते में 200 से ज्यादा पाकिस्तानियों को निर्वासित किया था।पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन निर्वासनों की वजह वीजा उल्लंघन कानूनी अपराध अवैध काम और मानव तस्करी रही।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता
    इन घटनाओं ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रहे निर्वासन और अवैध गतिविधियों के मामलों से साफ है कि कई देश अब पाकिस्तानी नागरिकों की आवाजाही को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने इस समस्या पर ठोस और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में उसके नागरिकों के लिए विदेश यात्रा और रोजगार के रास्ते और मुश्किल हो सकते हैं।