Tag: HumanRights

  • सार्वजनिक मंच पर पारंपरिक नियमों की अनदेखी पर ईरानी गायिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश

    सार्वजनिक मंच पर पारंपरिक नियमों की अनदेखी पर ईरानी गायिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश

    नई दिल्ली । ईरान में सख्त इस्लामी ड्रेस कोड और हिजाब नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वहां की एक अदालत ने देश की मशहूर गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब के सार्वजनिक रूप से उपस्थित होने और स्लीवलेस ड्रेस पहनने के आरोप में 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद से न केवल ईरान के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कला जगत से जुड़े लोगों में गहरा असंतोष और आक्रोश देखा जा रहा है। इस सख्त कानूनी कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है।

    मिली जानकारी के अनुसार, गायिका परस्तू अहमदी हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक हिजाब को छोड़कर बिना सिर ढके और स्लीवलेस पोशाक में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद ईरान के रूढ़िवादी प्रशासन और नैतिक पुलिस ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई करते हुए स्थानीय अदालत ने इसे देश के शरिया कानूनों और सार्वजनिक शालीनता के नियमों का खुला उल्लंघन माना और गायिका को कोड़े मारने की कठोर सजा मुकर्रर कर दी।

    ईरान में साल 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही महिलाओं के पहनावे और हिजाब को लेकर कानून बेहद सख्त कर दिए गए हैं। प्रशासन लगातार सार्वजनिक स्थानों, सांस्कृतिक आयोजनों और सोशल मीडिया पर महिलाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है। परस्तू अहमदी जैसी लोकप्रिय हस्ती पर इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करके प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा कितनी भी बड़ी क्यों न हो।

    इस अदालती फैसले के सार्वजनिक होने के बाद से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार की कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि कलाकारों पर इस प्रकार की शारीरिक प्रताड़ना की सजा थोपना पूरी तरह से अमानवीय है और यह महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन है। सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के लोग गायिका के समर्थन में आ गए हैं और इस दंडात्मक कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर ईरान के सख्त कानूनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच चल रहे पुराने संघर्ष को वैश्विक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।

  • पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर चिंता गहराई, मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस

    पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर चिंता गहराई, मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हाल के दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं और विरोध प्रदर्शनों के बाद वहां की स्थिति को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक वर्गों ने इन घटनाओं को गंभीर मानते हुए नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्षेत्र में हुई जनहानि और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबरों ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    श्रीनगर में राजनीतिक विश्लेषकों और जनप्रतिनिधियों ने पीओजेके की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वहां लंबे समय से स्थानीय लोगों को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र में आम नागरिकों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा और कई बार लोगों की मांगों तथा समस्याओं को बलपूर्वक दबाने के आरोप सामने आते रहे हैं।

    विश्लेषकों के अनुसार हालिया विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से नागरिक सुविधाओं, आर्थिक राहत और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर किए जा रहे थे। लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और टकराव ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

    कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पीओजेके का मुद्दा केवल राजनीतिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मानवीय पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए। यदि इन मूलभूत अधिकारों पर प्रभाव पड़ता है तो उसका व्यापक सामाजिक असर दिखाई देता है।

    इस पूरे मामले पर जम्मू-कश्मीर के कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि किसी भी परिस्थिति में निहत्थे नागरिकों के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने क्षेत्र में शांति, संवाद और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पीओजेके की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। वहां के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात को लेकर समय-समय पर विभिन्न रिपोर्टें और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हालिया घटनाओं ने एक बार फिर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्याओं और उनकी सुरक्षा को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसी भी क्षेत्र में स्थिरता और विकास तभी संभव है जब नागरिकों को न्यायपूर्ण वातावरण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा का भरोसा मिले। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता शांति बहाली, संवाद को बढ़ावा देने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मानी जा रही है।

    पीओजेके में हुई हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र से जुड़े मानवीय और प्रशासनिक मुद्दे अभी भी गंभीर बने हुए हैं। आने वाले समय में वहां की परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर व्यापक नजर बनी रहने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिक अधिकारों दोनों से जुड़ा हुआ है।

  • कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे

    कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे




    बेंगलुरु।
    कर्नाटक कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।कर्नाटक सरकार का कहना है कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे।
    निवासियों की आपत्ति
    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

    विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल
    इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ।

    दलित संघर्ष समिति और कई अन्य संगठन भी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

    केरल सरकार की निंदा
    पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया और कहा कि यह इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है।

    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब
    कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

  • नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा । बिहार के नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में 5 दिसंबर की रात को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी जब 35 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन को धर्म के नाम पर बेरहमी से मार डाला गया। यह घटना उस वक्त हुई जब अतहर डुमरी गांव से लौट रहे थे और भट्टा गांव के पास छह-सात नशे में धुत युवकों ने उन्हें रोक लिया। बाद में नाम और धर्म का पता चलने के बाद अतहर पर हमला किया गया। उनकी हत्या के बाद परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए इसे सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हत्या करार दिया है।

    घटना का विवरण

    अतहर हुसैन जब घर लौट रहे थे तब कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। उन्हें साइकिल से उतारकर हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीटा गया। वहां पर अतहर के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं पार की गईं। पैंट खोलकर उनके धर्म की पहचान की गई फिर करंट लगाया गया उंगलियां तोड़ी गईं कान काटे गए और शरीर पर गर्म लोहे की रॉड से चोटें दी गईं। इस पूरी घटना को सहते हुए भी अतहर ने पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए मदद मांगी।

    इलाज के दौरान अतहर की मौत

    अतहर हुसैन को गंभीर अवस्था में नवादा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 7 दिसंबर को उन्होंने कांपती आवाज में इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी सुनाई थी। हालांकि उनके शरीर पर लगी गहरी चोटों ने उनका साथ नहीं दिया और 12 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान उन्होंने एबीपी संवाददाता को अस्पताल में अपनी आपबीती सुनाई और पूरी घटना के बारे में जानकारी दी।

    पोस्टमॉर्टम और पुलिस कार्रवाई

    अतहर की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम नालंदा सदर अस्पताल में फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट की निगरानी में किया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों—सोनू कुमार रंजन कुमार सचिन कुमार और श्री कुमार को गिरफ्तार किया है। हालांकि अन्य आरोपी अभी फरार हैं।

    रोह थाना प्रभारी रंजन कुमार ने इस मामले में गिरफ्तारी की पुष्टि की है लेकिन परिजनों का कहना है कि उन्हें सिर्फ गिरफ्तारी से संतुष्टि नहीं है। वे चाहते हैं कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई हो और अतहर हुसैन के हत्यारों को सजा मिले। उनके बेटे इस्तेखार हुसैन ने प्रशासन से सिर्फ एक बात कही हमारे पिता के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।”

    मॉब लिंचिंग पर बढ़ते सवाल

    इस दर्दनाक घटना ने बिहार और खासकर नवादा जिले में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धर्म के नाम पर हिंसा और इस तरह के अपराधों का बढ़ता चलन समाज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं है बल्कि यह हमारे समाज के उन गंभीर मुद्दों को उजागर करती है जिनमें धार्मिक सहिष्णुता की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां दिखाई देती हैं।

    अतहर के परिजनों का दर्द इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि समाज और प्रशासन को सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने से अधिक कुछ करना होगा। समाज में धार्मिक सहिष्णुता और समानता की आवश्यकता को बल देने के साथ साथ हमें ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई और अतहर हुसैन जैसे व्यक्ति की हत्या न हो।

    मॉब लिंचिंग की घटनाएं एक बहुत बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी हैं। अतहर हुसैन की दर्दनाक मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि हमें समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता को समझना होगा। केवल गिरफ्तारी से इन घटनाओं का समाधान नहीं होगा बल्कि इसके लिए समाज के सभी हिस्सों को एकजुट होकर काम करना होगा।

  • दिल्ली HC के आदेश के बाद सेलिना जेटली ने भाई से 15 महीने बाद संपर्क के लिए लिखा इमोशनल नोट

    दिल्ली HC के आदेश के बाद सेलिना जेटली ने भाई से 15 महीने बाद संपर्क के लिए लिखा इमोशनल नोट

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने यूएई में हिरासत में लिए गए अपने भाई, मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत कुमार जेटली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया आदेश की जानकारी दी है। सेलिना के भाई को सितंबर 2024 से यूएई में हिरासत में रखा गया है, और इस दौरान उन्हें अपने भाई से बात करने का मौका नहीं मिला है।

    दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप और MEA को निर्देश
    सेलिना जेटली ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जिससे उन्हें उम्मीद मिली है। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि वह सेलिना और उनके भाई के बीच संचार स्थापित करने में मदद करे।
    कोर्ट ने एमईए को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है, जो यूएई में संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि एमईए, TAMM ऐप या किसी अन्य उपलब्ध माध्यम का उपयोग करके सेलिना को उनके भाई से संपर्क कराने की हर संभव कोशिश करे।

    15 महीने से विक्रांत से बात नहीं हुई
    पुरानी पारिवारिक तस्वीर के साथ एक भावुक नोट साझा करते हुए सेलिना जेटली ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने लिखा। मां और पापा.. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ कर रही हूँ! मुझे विक्रांत से बात किए हुए 15 महीने हो चुके हैं। आज, उम्मीद रिकॉर्ड पर रखी गई… धन्यवाद ब्रह्मांड!
    सेलिना ने कोर्ट को धन्यवाद दिया कि, उसने उनके कष्टों को पहचाना और भारतीय सशस्त्र बलों में उनके परिवार की 4 पीढ़ियों के योगदान को स्वीकार किया। यह याचिका सेलिना ने अपने भाई, मेजर (रिटा.) विक्रांत कुमार जेटली के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व और उनसे संपर्क करने की अनुमति मांगने के लिए दायर की थी, जिन्हें 6 सितंबर 2024 से यूएई में अपहृत और हिरासत में रखा गया है। भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि,वे उन्हें (सेलिना को) विक्रांत से बात कराने की पूरी कोशिश करेंगे।

    अगली सुनवाई 23 दिसंबर को
    सेलिना ने बताया कि इस मामले में कोर्ट में अगली सुनवाई 23 दिसंबर को निर्धारित की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वह भविष्य के कदमों को लेकर आशावादी हैं।उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया है कि वे इस संवेदनशील समय में उनसे सीधे कोई सवाल न पूछें और किसी भी जानकारी के लिए उनके प्रमुख कानूनी सलाहकार श्री राघव कक्कड़ से संपर्क करें। मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत कुमार जेटली की यूएई में हिरासत के संबंध में जो जानकारी सामने आई है, वह चिंताजनक है क्योंकि हिरासत का कोई स्पष्ट और आधिकारिक कारण सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है।सेलिना जेटली की याचिका और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर अब तक की मुख्य जानकारी इस प्रकार है।

    आधिकारिक रूप से अस्पष्ट कारण
    राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला: यूएई के अधिकारियों ने विक्रांत जेटली की हिरासत के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं (National Security Concerns) का हवाला दिया है। भारतीय सरकार के प्रतिनिधियों ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला या सिर्फ एक केस बताया है, लेकिन इसके बारे में कोई और विस्तृत जानकारी या आरोप स्पष्ट नहीं किए हैं।

    सेलिना जेटली और उनके कानूनी दल ने पारदर्शिता की कमी की आलोचना की है। उनका आरोप है कि हिरासत के 15 महीने बाद भी, यूएई अधिकारियों द्वारा कोई औपचारिक जांच विवरण, आरोप या सबूत साझा नहीं किए गए हैं। विक्रांत कुमार जेटली भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज के एक पूर्व अधिकारी हैं। उन्होंने 2021 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी, भारत के लिए चार पीढ़ियों तक सेवा दी है।वह 2016 में यूएई चले गए थे और वहाँ एक ट्रेडिंग, कंसल्टेंसी और जोखिम प्रबंधन सेवा फर्म मैटिटी ग्रुप के सीईओ के रूप में कार्यरत थे। उन्हें सितंबर 2024 में यूएई (माना जाता है कि अबू धाबी या दुबई) में हिरासत में लिया गया था।
    सेलिना जेटली की याचिका में दावा किया गया है कि उनके भाई को बिना किसी पूर्व चेतावनी या स्पष्टीकरण के अवैध रूप से अपहृत और हिरासत में लिया गया है।
    चूंकि हिरासत के कारणों और आरोपों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है, परिवार का मानना है कि यह हिरासत अन्यायपूर्ण हो सकती है, जो शायद गलत पहचान या बाहरी दबावों के कारण हुई हो।यह एक जटिल राजनयिक और कानूनी मामला है, जहाँ यूएई में कार्यरत एक भारतीय पूर्व सैन्य अधिकारी को बिना स्पष्ट आरोप के लंबे समय से हिरासत में रखा गया है।