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  • होटल में चल रहे देह व्यापार के धंधे पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार, रेस्क्यू की गईं मराठी और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्रियां, फिल्म जगत स्तब्ध

    होटल में चल रहे देह व्यापार के धंधे पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार, रेस्क्यू की गईं मराठी और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्रियां, फिल्म जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली। देश की आर्थिक और मनोरंजन राजधानी मुंबई से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। मुंबई पुलिस की एक विशेष टीम ने दक्षिण मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थित एक नामी होटल में चल रहे बेहद हाई-प्रोफाइल देह-व्यापार रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस औचक छापेमारी और दबोचने की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो प्रसिद्ध अभिनेत्रियों (एक्ट्रेस) को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इस खुलासे के बाद से ही माया नगरी के गलियारों में हड़कंप मच गया है और मनोरंजन जगत के कई बड़े नामों पर सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू की गई दो अभिनेत्रियों में से एक मराठी सिनेमा की जानी-मानी मुख्य अभिनेत्री (लीड एक्ट्रेस) है, जो कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुकी है। वहीं, दूसरी अभिनेत्री बंगाली फिल्मों के साथ-साथ कुछ बॉलीवुड फिल्मों में छोटे और कैमियो रोल कर चुकी है। पुलिस ने इन दोनों ही पीड़ित महिलाओं को इस अवैध धंधे के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन अभिनेत्रियों को किन परिस्थितियों में इस अनैतिक दलदल में धकेला गया।

    इस पूरी छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से एक मुख्य दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी मनोरंजन उद्योग से ही जुड़ा हुआ एक सक्रिय शख्स है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सेलिब्रिटीज के साथ काम करने वाला एक पेशेवर मेकअप आर्टिस्ट है। वह फिल्म सेट और शूटिंग के दौरान अभिनेत्रियों से जान-पहचान बढ़ाता था और फिर उनकी मजबूरियों या आर्थिक तंगहाली का फायदा उठाकर उन्हें इस अवैध व्यापार के नेटवर्क में शामिल कर लेता था। सेलिब्रिटी नेटवर्क होने के कारण वह हाई-प्रोफाइल ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना लेता था।

    गौरतलब है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी साल जनवरी महीने में भी नवी मुंबई के तुर्भे नाका इलाके में पुलिस ने एक ऐसे ही बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया था। उस दौरान अनैतिक मानव तस्करी विरोधी विभाग (AHTU) की टीम ने एक स्थानीय लॉज पर अचानक छापा मारकर सात महिलाओं को मुक्त कराया था और मौके से तीन आरोपियों को दबोचा था। पुलिस के अनुसार, इस तरह के रैकेट को चलाने वाले शातिर अपराधी अक्सर बड़े होटलों और लॉज को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाते हैं।

    पुलिस की शुरुआती जांच और कार्यप्रणाली से यह साफ हुआ है कि ये आरोपी आपस में मिलीभगत कर पीड़ित महिलाओं को आलीशान होटलों में ठहराते थे। इसके बाद विभिन्न डिजिटल माध्यमों और संपर्कों के जरिए ग्राहकों को बुलाकर उनकी पसंद के अनुसार मोटी रकम का सौदा तय किया जाता था। इस रैकेट की पुख्ता जानकारी जुटाने और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पुलिस ने नकली ग्राहकों (डमी कस्टमर्स) का जाल बिछाया था, जिसके बाद इस पूरी अवैध गतिविधि का भंडाफोड़ हो सका। फिलहाल, गिरगांव मामले में स्थानीय पुलिस सख्त कानूनी धाराओं के तहत आगे की तफ्तीश कर रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट के अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

  • दिल्ली में बड़ा खुलासा बच्चे खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, 5 नवजात बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तार

    दिल्ली में बड़ा खुलासा बच्चे खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, 5 नवजात बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तार

    नई द‍िल्‍ली । देश की राजधानी दिल्ली में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में अस्पताल की संचालिका सहित कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पुलिस ने पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित बरामद कर आश्रय गृह भेज दिया है। यह गिरोह पिछले लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और अब तक करीब 30 बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर उनसे नवजात बच्चों को मात्र 10 से 15 हजार रुपये में खरीद लेते थे। इसके बाद इन्हीं बच्चों को बेऔलाद दंपतियों को 5 से 10 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था। इस पूरे रैकेट में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक के नेटवर्क जुड़े हुए थे।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब जून के पहले सप्ताह में दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से पुलिस को सूचना मिली कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ संदिग्ध रूप से घूम रही है। पुलिस ने एक नकली ग्राहक बनाकर महिला से संपर्क किया। सौदा तय होने और 20 हजार रुपये की टोकन मनी दिए जाने के बाद जब आरोपियों ने नवजात को सौंपा, तभी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्योति उर्फ कमलेश को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसी दिन उसकी साथी शालू और ललित को भी हिरासत में ले लिया गया।

    पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती गईं और जांच बेगमपुर स्थित एक निजी अस्पताल तक पहुंची। पुलिस ने छापा मारकर अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी को भी गिरफ्तार किया, जो इस गिरोह की कथित मास्टरमाइंड बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट में लैब टेक्निशियन और वाहन चालक की भूमिका भी अहम थी, जो बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और दस्तावेज तैयार करने में मदद करते थे।

    गिरोह का संचालन कई स्तरों पर किया जाता था। राजस्थान और गुजरात से बच्चों की व्यवस्था साएबा भाई घमर उर्फ कालिया करता था, जिन्हें कार चालक विपिन दिल्ली तक पहुंचाता था। इसके बाद अस्पताल में ही फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे ताकि बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने जैसा दिखाया जा सके। इस नेटवर्क में लड़कियों की कीमत 4 से 5 लाख रुपये और लड़कों की कीमत 8 से 10 लाख रुपये तक तय थी।

    पुलिस ने आगे की कार्रवाई में ग्वालियर और पानीपत से भी कई खरीदारों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने लाखों रुपये देकर नवजात खरीदे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद पांच बच्चों में से चार आदिवासी समुदाय से हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का बताया जा रहा है। सभी बच्चों की उम्र 27 दिन से लेकर चार महीने के बीच है।

    फिलहाल पुलिस बच्चों के जैविक माता-पिता की पहचान में जुटी है और पुष्टि के बाद उन्हें उनके असली परिवारों को सौंपा जाएगा। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कैसे संगठित अपराध गरीब और असहाय वर्ग को निशाना बनाकर मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देते हैं।