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  • जेपीएससी भर्ती विवाद पर छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा बयान, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल रहेगी जारी

    जेपीएससी भर्ती विवाद पर छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा बयान, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल रहेगी जारी

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने स्पष्ट किया है कि उनका अनशन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर उनके अनशन खत्म करने की खबरें चलाई जा रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्होंने केवल सलाह के बाद पानी पीना शुरू किया है। उनका कहना है कि भूख हड़ताल पहले की तरह जारी रहेगी और मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।

    देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने समाजसेवी सोनम वांगचुक की सलाह का सम्मान करते हुए केवल पानी ग्रहण किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने छात्रों और आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़ी गलत या भ्रामक जानकारी साझा न करें, क्योंकि इससे छात्रों के संघर्ष पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

    भूख हड़ताल के पांचवें दिन देवेंद्र महतो की तबीयत में गिरावट भी देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि लगातार उपवास के कारण शरीर में कमजोरी बढ़ गई है और अधिक देर तक बोलने पर सीने में तकलीफ महसूस होती है। उठने-बैठने में भी उन्हें सहारे की आवश्यकता पड़ रही है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है। जांच के दौरान उनके रक्तचाप की स्थिति पहले की तुलना में कुछ बेहतर बताई गई है, लेकिन शारीरिक कमजोरी अभी भी बनी हुई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका मनोबल पूरी तरह मजबूत है और वह छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

    छात्र संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार को 16 मांगों का प्रस्ताव सौंपा है। इनमें प्रमुख मांग विवादित परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष जांच कराना, भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और सरकारी व्यवस्था के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया संचालित करना शामिल है। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी मांग की है कि चयन प्रक्रिया के सभी चरण पहले से स्पष्ट किए जाएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    छात्रों ने आयोगों में निष्पक्ष और स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है। आंदोलन में शामिल छात्रों का दावा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच पूरे राज्य में इस आंदोलन को लेकर व्यापक चर्चा बनी हुई है और बड़ी संख्या में छात्र लगातार प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के लाठीचार्ज के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि, समाधान की उम्मीदें बढ़ीं

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के लाठीचार्ज के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि, समाधान की उम्मीदें बढ़ीं


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत है।

    जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इसी क्रम में AISA से जुड़े तीन छात्र लगातार भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने छात्रों के लंबे संघर्ष और धैर्य की सराहना की।

    प्रदर्शन स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की बात कहते रहे।

    अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब नए स्वरूप में जारी रहेगा। उनका कहना था कि पिछले 23 दिनों के संघर्ष ने विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका दावा है कि इस आंदोलन ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनाया है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना केवल व्यक्तिगत संकल्प का नहीं, बल्कि सामूहिक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिससे उनकी मांगों को और मजबूती मिली।

    अनशन समाप्त होने के अवसर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    छात्र नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों से जोड़ना तथा संबंधित मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भविष्य की रणनीति पर विचार कर जल्द ही अगले चरण की घोषणा करेगा।

    जंतर-मंतर पर समाप्त हुई यह भूख हड़ताल भले ही अपने निर्धारित स्वरूप में खत्म हो गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • संसद मार्च के बीच AISA के तीन छात्रों ने समाप्त किया अनशन, संघर्ष जारी रखने का किया एलान, जंतर-मंतर पर बदली आंदोलन की दिशा

    संसद मार्च के बीच AISA के तीन छात्रों ने समाप्त किया अनशन, संघर्ष जारी रखने का किया एलान, जंतर-मंतर पर बदली आंदोलन की दिशा

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत है।

    जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इसी क्रम में AISA से जुड़े तीन छात्र लगातार भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने छात्रों के लंबे संघर्ष और धैर्य की सराहना की।

    प्रदर्शन स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की बात कहते रहे।

    अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब नए स्वरूप में जारी रहेगा। उनका कहना था कि पिछले 23 दिनों के संघर्ष ने विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका दावा है कि इस आंदोलन ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनाया है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना केवल व्यक्तिगत संकल्प का नहीं, बल्कि सामूहिक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिससे उनकी मांगों को और मजबूती मिली।

    अनशन समाप्त होने के अवसर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    छात्र नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों से जोड़ना तथा संबंधित मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भविष्य की रणनीति पर विचार कर जल्द ही अगले चरण की घोषणा करेगा।

    जंतर-मंतर पर समाप्त हुई यह भूख हड़ताल भले ही अपने निर्धारित स्वरूप में खत्म हो गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं के बीच पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर नया घटनाक्रम सामने आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की और इसी दौरान एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

    जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह पुलिस की एक टीम सिविल ड्रेस में जंतर-मंतर पहुंची। चिकित्सकीय सलाह और बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक को एंबुलेंस के माध्यम से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। मौके पर कुछ देर तक बहस और नारेबाजी भी हुई, हालांकि बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

    अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की हालत पर डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर में डिहाइड्रेशन, पोटैशियम की कमी और कीटोन का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की स्थिति में शरीर में कीटोन बढ़ना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि इसके साथ गंभीर डिहाइड्रेशन भी हो तो किडनी और शरीर की चयापचय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण चिकित्सकों ने तत्काल उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक के परिजनों से भी उपचार शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से संभावित जटिलताओं को रोका जा सकता है। अस्पताल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक परीक्षण किए जा रहे हैं।

    इस बीच जंतर-मंतर पर वांगचुक के समर्थन में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान एक महिला अचानक उनके पास पहुंची और उन पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों ने तुरंत स्थिति संभाली। इस घटनाक्रम का वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा।

    घटना के बाद अभिजीत दीपके ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर स्याही से रंगे कपड़ों की तस्वीर और वीडियो साझा करते हुए लिखा, “नीला मेरा रंग है… जय भीम।” उनके इस संदेश पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने घटना की आलोचना की, जबकि अन्य लोगों ने पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग राजनीतिक टिप्पणियां कीं।

    पूरे घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन स्थल पर हुई स्याही फेंकने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के स्वरूप को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी जारी है और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

  • 20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि वह किसी भी हालत में उस दिन तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे और यदि मार्च सफल नहीं हुआ तो “भूत बनकर” लोगों के बीच वापस आएंगे। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों और समर्थकों के बीच वांगचुक की मौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

    वायरल वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वह 20 जुलाई तक स्वस्थ रहकर प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी कारण से यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर” वापस आएंगे। उनका यह बयान गंभीर घोषणा के बजाय एक हल्का-फुल्का और प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है, जिसे वहां मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए सुना।

    लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 20 दिनों में उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक कम हो चुका है। बीते 24 घंटों में भी वजन में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत भी सामने आए हैं। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं।

    इस बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर आंदोलनकारी अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के कारण जंतर-मंतर पर लगातार समर्थकों की आवाजाही बनी हुई है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समय-समय पर वहां पहुंच रहे हैं।

    सोनम वांगचुक का ताजा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है। उनका संदेश समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनकी सेहत पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन और प्रस्तावित संसद मार्च की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरीं सोनाक्षी सिन्हा, वीडियो जारी कर बोलीं- अब चुप नहीं बैठ सकती, संवाद की अपील

    सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरीं सोनाक्षी सिन्हा, वीडियो जारी कर बोलीं- अब चुप नहीं बैठ सकती, संवाद की अपील

    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन लगातार 19वें दिन भी जारी है। इस बीच उनके समर्थन में अब बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा भी खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए अनशन को लेकर चिंता व्यक्त की और सरकार तथा समाज से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। अभिनेत्री ने कहा कि अब वह इस विषय पर चुप नहीं रह सकतीं और संवाद के जरिए समाधान निकालना जरूरी है।

    अपने वीडियो संदेश में सोनाक्षी सिन्हा ने कहा कि सोनम वांगचुक देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्ति हैं और लंबे समय से बिना भोजन के अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि उन छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है, जिनकी शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यदि किसी नागरिक को अपनी बात मनवाने के लिए इतने लंबे समय तक भूख हड़ताल करनी पड़े, तो यह सभी के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने दिनों से चल रहे अनशन के बावजूद सार्थक बातचीत की पहल क्यों नहीं हो रही है। उनका मानना है कि यदि समय रहते बातचीत शुरू की जाए तो किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है और हालात को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

    सोनाक्षी सिन्हा ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि देश और उसके भविष्य की चिंता करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देशहित में अपनी बात रखना किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील नहीं कर रहीं, बल्कि संबंधित पक्षों से जल्द बातचीत शुरू करने का आग्रह कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने सोनाक्षी सिन्हा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण विषय पर अपनी आवाज उठाई है। वहीं कुछ लोगों ने इस मामले पर अलग-अलग दृष्टिकोण भी व्यक्त किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो को बड़ी संख्या में देखा और साझा किया जा रहा है।

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर भी चिंता जताई जा रही है और इस मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही है, जबकि प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल एक आंदोलन तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।

  • सोनम वांगचुक के अनशन पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब, आज फिर होगी सुनवाई

    सोनम वांगचुक के अनशन पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब, आज फिर होगी सुनवाई

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर जारी उनके अनशन के 19वें दिन अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई एक बार फिर निर्धारित की गई है, जबकि दूसरी ओर वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

    सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़ा हुआ है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि हाल के महीनों में सामने आए परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक की घटनाओं ने बड़ी संख्या में छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। इसी मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है।

    अनशन के दौरान वांगचुक के कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, जिनमें उनका स्वास्थ्य पहले की तुलना में काफी कमजोर दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनका वजन काफी कम हो गया है। इसके साथ ही कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और निम्न रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी चर्चा हो रही है। हालांकि उनकी चिकित्सकीय स्थिति को लेकर अंतिम आधिकारिक जानकारी संबंधित स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

    वांगचुक की सेहत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने और चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए।

    मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकारों का पक्ष और अदालत की आगे की टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इस बीच आंदोलन से जुड़े संगठन ने भी आगामी दिनों के लिए अपनी रणनीति घोषित की है। संगठन ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के अवसर पर जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की है। इसके लिए छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से भी बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।

    वांगचुक के समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों की सक्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं। दूसरी ओर प्रशासन और न्यायालय की निगाहें अब प्रदर्शन की स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर बनी हुई हैं।

    दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं। अदालत के समक्ष सरकार का जवाब, वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला बॉलीवुड का समर्थन, स्वरा भास्कर पहुंचीं धरना स्थल, आंदोलन में जताई एकजुटता

    जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला बॉलीवुड का समर्थन, स्वरा भास्कर पहुंचीं धरना स्थल, आंदोलन में जताई एकजुटता


    नई दिल्ली ।
    नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। आंदोलन के 18वें दिन बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर प्रदर्शन स्थल पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से भी बातचीत की और प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखाई। वांगचुक की गिरती सेहत के बीच इस मुलाकात को आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

    जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में शामिल होकर परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संबंधित मांगों पर सरकार से कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। लंबे समय से जारी इस अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।

    प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं स्वरा भास्कर ने आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात की और अपने समर्थन का संदेश साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। स्वरा ने आंदोलन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का प्रयास है। उन्होंने सोनम वांगचुक के लंबे संघर्ष की प्रशंसा करते हुए उनके प्रति सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

    आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति प्रभावित हो रही है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनके शरीर पर इसका असर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और संगठन अपनी मांगों पर सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहा है।

    सोनम वांगचुक के समर्थन में केवल स्वरा भास्कर ही नहीं बल्कि फिल्म और साहित्य जगत की कई अन्य हस्तियां भी सामने आई हैं। लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, फिल्मकार संजय काक सहित कई लोगों ने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। इन हस्तियों ने आंदोलन से जुड़े पक्षों से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और वांगचुक की भूख हड़ताल समाप्त कराने की अपील भी की है। इसके अलावा अभिनेता ओमी वैद्य ने भी वीडियो संदेश जारी कर लोगों से इस मुद्दे पर जागरूक होने और अपनी आवाज उठाने का आग्रह किया है।

    आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए आंदोलन से जुड़े लोग और समर्थक उनकी चिकित्सकीय निगरानी तथा जल्द समाधान की उम्मीद जता रहे हैं। यह आंदोलन अब सामाजिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

  • सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 दिनों से जारी इस आंदोलन के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में फिल्म अभिनेता अभय देओल ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान भी उनकी मांगों और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता चुकी हैं। लगातार मिल रहे सार्वजनिक समर्थन के कारण यह आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

    अभय देओल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने किसी विस्तृत टिप्पणी के बजाय टूटे हुए दिल का प्रतीक साझा कर उनकी बिगड़ती सेहत पर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके साथ उन्होंने फिल्म 3 Idiots के चर्चित गीत का भी उल्लेख किया, जिसे कई लोगों ने सोनम वांगचुक से जुड़ी प्रेरणा की ओर संकेत के रूप में देखा। अभय देओल की यह प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई।

    इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान ने भी एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सरकार से वांगचुक की मांगों पर संवाद शुरू करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान तलाशना अधिक उचित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय कार्य करते रहे हैं और उनके योगदान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जंतर-मंतर पर जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है और वजन में भी उल्लेखनीय कमी आई है। समर्थकों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया जा रहा है। बढ़ती चिंता के बीच उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने तथा संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी इन मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

    आंदोलन से जुड़े संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। इस प्रस्तावित मार्च को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सोनम वांगचुक की सेहत, उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन की दिशा पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, सार्वजनिक हस्तियों और आम नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा लगातार राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी संभावित संवाद की संभावना पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा

    लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे उनका लंबा चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन अब केवल लद्दाख के अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों तक फैल चुका है।

    इस बार वांगचुक की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की बात शामिल है। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं। इसके साथ ही वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग पर जोर दे रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    वांगचुक का आंदोलन पहली बार 2024 में लद्दाख के राज्य दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के साथ शुरू हुआ था। उस समय उन्होंने अत्यधिक ठंड में उपवास कर सरकार का ध्यान क्षेत्रीय अधिकारों और पर्यावरणीय मुद्दों की ओर आकर्षित किया था। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली तक पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    सितंबर 2024 में उनकी ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ ने आंदोलन को व्यापक पहचान दिलाई, जब उन्हें दिल्ली बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद दिल्ली में 16 दिनों के अनशन के बाद सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने पर उन्होंने उपवास समाप्त किया था। हालांकि, लद्दाख मुद्दों पर स्थायी समाधान न मिलने के कारण आंदोलन लगातार जारी रहा।

    2025 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं और वांगचुक की संस्था पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। कई महीनों की हिरासत के बाद 2026 की शुरुआत में उनकी रिहाई हुई।

    रिहाई के बाद वांगचुक ने अपने आंदोलन को नए मुद्दों से जोड़ते हुए इसे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ जुड़कर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया।

    वर्तमान चरण में उनका आंदोलन लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ देश की शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों को भी केंद्र में ला रहा है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

    इस आंदोलन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या क्षेत्रीय अधिकारों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को एक साझा मंच पर लाकर प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।