Tag: Hypersonic Missile

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल समेत बड़े हमले में 4 की मौत, कीव में भारी तबाही; जेलेंस्की बोले- रूस पागल हो चुका है



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रविवार को एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके रहे।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। इस दौरान रूस ने ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। यह मिसाइल अपनी तेज गति और आधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलों में जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी आपूर्ति की एक सुविधा, एक बाजार, कई घर और स्कूल इस हमले में क्षतिग्रस्त हुए हैं। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि रूसी मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी और रूस “पागल हो चुका है।”

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने दावा किया कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा यह मिसाइल सिर्फ डर पैदा करने और शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

    यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 604 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। अधिकारियों ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया है।

    इस बीच रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की ओर से उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले किए गए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के “आतंकी हमलों” के जवाब में ओरेश्निक और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने ओरेश्निक मिसाइल के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध में गंभीर बढ़ोतरी बताया है।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पहले से ही चरम पर है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां संघर्ष को और अधिक खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं।

  • कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    यूक्रेन की राजधानी कीव एक बार फिर रूस के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहल उठी। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। लगातार सायरन बजते रहे और पूरे शहर में धुएं का गुबार देखा गया, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने इस हमले में ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह वही मिसाइल है जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। जेलेंस्की के अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा जिले में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    यह तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक ओरेशनिक मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो शहर और जनवरी में लवीव क्षेत्र पर इसी तरह के हमले किए जा चुके हैं।

    रूसी हमले के जवाब में यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की गई, जिससे कीव के कई सरकारी दफ्तर, आवासीय इमारतें, स्कूल और गोदाम क्षतिग्रस्त हो गए। कीव के सैन्य प्रशासन प्रमुख के अनुसार, शहर के कम से कम नौ जिलों में नुकसान दर्ज किया गया है।

    मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भवन पर भी हमला हुआ, जहां लोग शरण लिए हुए थे। वहीं कई सुपरमार्केट और औद्योगिक गोदाम भी इस हमले की चपेट में आ गए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ओरेशनिक मिसाइल रूस की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि यह जमीन के नीचे कई मंजिल गहराई में बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता करीब 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह परमाणु हमले के लिहाज से भी बेहद खतरनाक हथियार बन जाती है।

    कीव पर हुए इस हमले के बाद एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव चरम पर पहुंच गया है और आगे और बड़े हमलों की आशंका जताई जा रही है।

  • कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत

    कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पूरे शहर में रातभर हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और कई इलाकों में धुएं का गुबार देखा गया।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि इस हमले में रूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा इलाके में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह इस मिसाइल का युद्ध में तीसरा उपयोग बताया जा रहा है।

    स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कीव के कम से कम नौ जिलों में आवासीय भवनों, स्कूलों, सुपरमार्केट और गोदामों को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि एक स्कूल इमारत भी प्रभावित हुई, जहां लोग शरण लिए हुए थे। कई जगहों पर रिहायशी इलाकों में भारी तबाही की खबर है।

    रूस ने यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में किया है। हमले के दौरान राजधानी कीव के मध्य इलाकों सहित कई हिस्सों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

    ओरेशनिक मिसाइल रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे गहरे बंकरों और मजबूत सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया बताया जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है।

    जानकारों के मुताबिक, इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की दिशा और तीव्रता दोनों को और ज्यादा खतरनाक बना देता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

  • भारत के ‘रहस्यमयी’ मिसाइल टेस्ट से चीन-पाकिस्तान में खलबली, अग्नि-6 की ताकत ने बढ़ाई टेंशन

    भारत के ‘रहस्यमयी’ मिसाइल टेस्ट से चीन-पाकिस्तान में खलबली, अग्नि-6 की ताकत ने बढ़ाई टेंशन



    नई दिल्ली। भारत ने ओडिशा तट से एक बेहद शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का गुप्त परीक्षण कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। माना जा रहा है कि यह परीक्षण अग्नि-6 या उससे जुड़ी किसी एडवांस हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का हिस्सा हो सकता है। हालांकि DRDO ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा कदम मान रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक हो सकती है। परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है। खासतौर पर पाकिस्तान की चिंता इस बात को लेकर बताई जा रही है कि भारत अब ऐसी मिसाइल तकनीक की तरफ बढ़ रहा है, जिसे रोक पाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें इतनी तेज और एडवांस हैं कि मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए उन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है। यही वजह है कि भारत की रणनीतिक क्षमता को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि मिसाइल ने हाइपरसोनिक री-एंट्री प्रोफाइल के साथ उड़ान भरी और इसकी गति मैक-5 से ज्यादा हो सकती है। सोशल मीडिया पर बांग्लादेश और पूर्वी भारत के कई इलाकों से आसमान में तेज रफ्तार रोशनी जैसी वस्तु के वीडियो भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिसाइल की पैंतरेबाजी क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है।

    विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के खिलाफ इतनी लंबी दूरी की मिसाइल की जरूरत नहीं है, इसलिए इस परीक्षण का मुख्य संदेश चीन को माना जा रहा है। भारत अब ऐसी क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे चीन के भीतर मौजूद सामरिक और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सके।

    रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर यह वास्तव में MIRV तकनीक या अग्नि-6 से जुड़ा परीक्षण है, तो यह चीन की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इससे भारत की ‘सटीक और तेज जवाब’ वाली सैन्य रणनीति को नई ताकत मिलेगी।

  • हाइपरसोनिक हमले की आशंका: क्या ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर?

    हाइपरसोनिक हमले की आशंका: क्या ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर?


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर गंभीर संकेत सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पहली बार ईरान के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, जिससे हालात और भी विस्फोटक हो सकते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में एक ‘छोटा लेकिन बेहद प्रभावशाली’ हमले का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल सिस्टम और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की बात कही गई है।

    इस रणनीति में ‘डार्क ईगल’ जैसी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल हो सकता है। यह मिसाइल 3,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है। इसके अलावा B-1B लांसर जैसे भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है, जो इस तरह के हमलों को अंजाम देने में सक्षम हैं।

    तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। मुजतबा खामेनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो उसका जवाब समुद्र में दिया जाएगा। वहीं तेल बाजार में भी इसका असर साफ दिख रहा है कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत है।

    इसी बीच इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं और गाजा जाने वाले सहायता जहाजों को भी रोका है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाइपरसोनिक हथियारों का इस्तेमाल होता है, तो यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि युद्ध की प्रकृति में बड़ा बदलाव होगा। ऐसे हथियारों को रोकना बेहद मुश्किल होता है, जिससे जवाबी कार्रवाई का जोखिम भी बढ़ जाता है।

    कुल मिलाकर, हालात बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुके हैं। एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध में बदल सकती है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति हावी होती है या फिर हथियारों की भाषा आगे बढ़ती है।

  • हाइपरसोनिक वार की तैयारी? ईरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ विकल्प पर अमेरिका, मिडिल ईस्ट में बढ़ी टेंशन

    हाइपरसोनिक वार की तैयारी? ईरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ विकल्प पर अमेरिका, मिडिल ईस्ट में बढ़ी टेंशन


    नई दिल्ली। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (United States Central Command) ने व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक में राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कमांडर Brad Cooper ने एक “छोटा लेकिन बेहद शक्तिशाली हमला” करने की रणनीति प्रस्तुत की, जिसमें ईरान की बची हुई सैन्य क्षमता, नेतृत्व और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है।

    इस प्रस्ताव में अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें ‘डार्क ईगल’ हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल है। यह मिसाइल करीब 3,200 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को टारगेट कर सकती है।

    इसके साथ ही अमेरिकी वायुसेना ने B-1B Lancer जैसे भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती भी बढ़ा दी है, जो बड़ी मात्रा में हथियार और उन्नत मिसाइल सिस्टम ले जाने में सक्षम हैं।

    बढ़ते तनाव के संकेत:
    बीते 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि “तूफान आगे बढ़ रहा है, इसे कोई नहीं रोक पाएगा।” दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है।

    Mojtaba Khamenei ने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी और हमलावरों को “समंदर में डुबो दिया जाएगा।”

    इसी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है, हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट आई।


    जमीनी हालात और क्षेत्रीय असर:
    दूसरी ओर, लेबनान में भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दक्षिणी इलाकों में हुए हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है। यह घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद Hezbollah और इजरायल के बीच तनाव बना हुआ है।

    ट्रम्प का बदला हुआ सुर:
    हालांकि, इन सभी तैयारियों के बीच ट्रम्प ने यह भी कहा है कि वे दोबारा हमले शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं और फिलहाल सीजफायर तोड़ने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है।एक तरफ सैन्य तैयारियां और दूसरी ओर कूटनीतिक बयान—इन दोनों के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।