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  • राष्ट्रीय सम्मान और सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक फैसला, द्वीपीय देश अब नए आधिकारिक नाम से जाना जाएगा

    राष्ट्रीय सम्मान और सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक फैसला, द्वीपीय देश अब नए आधिकारिक नाम से जाना जाएगा


    नई दिल्ली । 
    प्रशांत महासागर में स्थित दुनिया के सबसे छोटे स्वतंत्र गणराज्यों में शामिल नाउरू ने अपनी राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अपना आधिकारिक नाम बदल दिया है। अब यह देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “रिपब्लिक ऑफ नाओरो” के नाम से जाना जाएगा। सरकार का कहना है कि नया नाम देश की मूल भाषा, पारंपरिक उच्चारण और सांस्कृतिक विरासत के अधिक अनुरूप है। इस बदलाव को राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने कहा कि लंबे समय से विदेशों में देश के नाम का उच्चारण वास्तविक स्थानीय उच्चारण से अलग किया जाता रहा है। उनके अनुसार, नया नाम स्थानीय भाषा की वर्तनी और उच्चारण को सही रूप में प्रस्तुत करता है तथा देश की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करता है। उन्होंने इसे नए राष्ट्रीय गौरव की शुरुआत बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की विरासत को उचित स्थान दिलाने का प्रयास भी है।

    नाम परिवर्तन के साथ देश के अंतरराष्ट्रीय पहचान कोड में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां आधिकारिक कोड “एनआरयू” था, अब इसे “एनआरओ” किया जाएगा। वहीं, देश के नागरिकों की पहचान भी अब पहले की बजाय नए आधिकारिक नाम के अनुरूप होगी। सरकार का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की वास्तविक पहचान अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित होगी।

    सरकार ने बताया कि यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया। इस विषय पर पहले संसद में प्रस्ताव रखा गया, जिस पर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आवश्यक चरणों में चर्चा और मतदान कराया गया। संसद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। प्रारंभिक स्तर पर जनमत संग्रह कराने की संभावना भी जताई गई थी, लेकिन व्यापक विचार-विमर्श के बाद संसद ने माना कि यह नाम पहले से ही देश की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है और इसके लिए अलग जनमत संग्रह की आवश्यकता नहीं है।

    सरकारी बयान में कहा गया कि “नाओरो” नाम कभी समाप्त नहीं हुआ था, बल्कि वर्षों से स्थानीय समुदाय, राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक परंपराओं में उपयोग होता रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “नाउरू” नाम केवल उच्चारण की सुविधा के कारण अधिक प्रचलित हो गया था। अब सरकार ने उसी पारंपरिक नाम को आधिकारिक मान्यता देकर अपनी ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित किया है।

    करीब 12 हजार की आबादी वाला यह द्वीपीय देश क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों के लिहाज से दुनिया के सबसे छोटे देशों में गिना जाता है। वर्ष 1968 में स्वतंत्र गणराज्य बनने से पहले यह विदेशी शासन के अधीन रहा था। फॉस्फेट खनन के कारण एक समय इसकी अर्थव्यवस्था बेहद समृद्ध हुई, लेकिन खनन गतिविधियां घटने के बाद देश को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर जैसी समस्याएं भी इसके सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

    हाल के वर्षों में कई देशों ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से आधिकारिक नामों में बदलाव किए हैं। नाओरो का यह निर्णय भी उसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है, जहां देश अपनी स्थानीय भाषा, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। सरकार अब विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और देशों के साथ समन्वय कर नए नाम को सभी आधिकारिक अभिलेखों और दस्तावेजों में लागू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

  • केसरिया रंग पर छिड़ा घमासान, भारतीय हॉकी की पहचान और नीली जर्सी के इतिहास पर उठा बड़ा सवाल।

    केसरिया रंग पर छिड़ा घमासान, भारतीय हॉकी की पहचान और नीली जर्सी के इतिहास पर उठा बड़ा सवाल।

    नई दिल्ली। खेल जगत में किसी भी राष्ट्रीय टीम की जर्सी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि उसकी दशकों पुरानी पहचान, विरासत और प्रशंसकों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक होती है। भारतीय खेल इतिहास में ‘मैन इन ब्लू’ और ‘विमेन इन ब्लू’ की अवधारणा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भारत की खेल पहचान बन चुकी है। आगामी एफआईएच विश्व कप से ठीक पहले हॉकी इंडिया द्वारा भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की प्राथमिक जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से बदलकर केसरिया करने के फैसले ने देश में एक नया विवाद और गहन वैचारिक बहस छेड़ दी है।

    हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे तकनीकी और खेल विज्ञान से जुड़े कारणों का हवाला दिया है। महासंघ का तर्क है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं में अधिकांश सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ नीले रंग की होती हैं। मैचों के दौरान नीली जर्सी पहनकर खेलने से खिलाड़ियों के कपड़े नीले टर्फ के रंग में मिल जाते हैं, जिससे मैदान पर साथी खिलाड़ियों की दृश्यता में बाधा आती है और त्वरित निर्णय लेने में परेशानी होती है। सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों के परामर्श से दृश्यता में सुधार के उद्देश्य से ही यह बदलाव किया गया है।

    हालांकि, इस तकनीकी दलील के बावजूद खेल जगत के कई दिग्गजों और पूर्व कप्तानों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व दिग्गजों का कहना है कि भारतीय हॉकी का गौरवशाली इतिहास नीली जर्सी के साथ जुड़ा हुआ है और विश्व पटल पर भारत की पहचान इसी रंग से बनती रही है। खेल के अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि ब्राजील की पीली, न्यूजीलैंड की काली या इटली की नीली जर्सी की तरह भारतीय टीम का नीला रंग भी दशकों की मेहनत के बाद एक वैश्विक ब्रांड बना था, जिसे एक झटके में बदलना अनुचित है।

    राजनीतिक गलियारों में भी इस बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले को सांस्कृतिक और वैचारिक ब्रांडिंग का हिस्सा बताते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि खेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि खेलों में जर्सी के डिजाइन और रंग समय-समय पर बदलते रहे हैं और इस निर्णय को किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

    वैश्विक खेलों में जर्सी के रंग और राष्ट्रीय ध्वज के बीच अंतर होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी स्थापित खेल राष्ट्र की प्राथमिक पहचान को अचानक बदल देना हमेशा से चर्चा का विषय बनता रहा है। 1928 से लेकर अब तक ओलंपिक और विश्व कप के मंचों पर भारतीय हॉकी ने जो स्वर्णिम अध्याय लिखे हैं, वे किसी एक रंग से कहीं बढ़कर हैं। फिलहाल, यह बहस केवल एक रंग तक सीमित न रहकर खेल की ब्रांडिंग, विरासत और संस्थागत फैसलों में पारदर्शिता के इर्द-गिर्द घूम रही है।

  • मानवता और सहअस्तित्व भारतीय संस्कृति की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मानवता और सहअस्तित्व भारतीय संस्कृति की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति के मूल में मानवता, सहअस्तित्व और परस्पर सहयोग का महत्वपूर्ण भाव शामिल है। मानवता, सहअस्तित्व भारतीय संस्कृति की पहचान है।

    उन्होंने कहा कि स्काउट और गाइड संगठन विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कारवान बनाने की दृष्टि से एक आदर्श संगठन है। इस नाते मध्य प्रदेश में इन युवाओं का एक सप्ताह का वैचारिक आयोजन स्थानीय युवाओं के लिए भी प्रेरक है। उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात राष्ट्रों को सहयोग के सूत्र में बांधने के लिए बिम्सटेक एक महत्वपूर्ण मंच है। युवा राष्ट्र के निर्माण में सहभागी होते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार देर शाम अपने निवास स्थित संवाद सभाकक्ष में बिम्सटेक यूथ कल्चरल हेरिटेज एंड सस्टेनेबिलिटी इमेरसन प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में सात देशों के युवा प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिभागी देशों भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड के स्काउट गाइड को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत स्काउट और गाइड संगठन को रचनात्मक प्रकल्पों के संचालन के लिए बधाई दी। उन्होंने देश के दिल मध्य प्रदेश में अन्य देशों और राज्यों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि पड़ोसियों से हमारे आत्मीय और सहज संबंध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल से भी यहां प्रतिनिधि आएं हैं। बंगाल की खाड़ी से बिम्सटेक के देश जुड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दक्षिण एशियाई देशों के लिए आशा, स्थिरता और विकास का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के प्रति यूथ कल्चरल हेरिटेज एंड सस्टेनेबिलिटी इमेरसन प्रोग्राम के लिए प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को सांस्कृतिक धरोहर, पर्यावरण संरक्षण, सतत् विकास और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श के साथ ही ऐसे महत्वपूर्ण विषयों को जीवन के लक्ष्यों में शामिल करने के लिए प्रेरित करते हैं।

    उन्होंने कहा कि हमारा देश अनेक नदियों का मायका है। भारत को मध्य प्रदेश से बड़ी जल राशि प्राप्त होती है। मध्य प्रदेश की नदियां कई राज्यों की नदियों में समाहित होकर उन्हें समृद्ध करती है। मध्य प्रदेश से सम्राट विक्रमादित्य की पहचान भी जुड़ी है, जो दान, वीरता, न्यायप्रियता और सुशासन के प्रतीक थे। उन्होंने अनेक राज्यों और राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न नामों से व्यवस्थित शासन संचालन के प्रमाण प्रस्तुत किए। भारत ऐसे ही गौरवशाली व्यक्तित्वों से विश्व में अलग पहचान रखता है।

    कार्यक्रम को भारत स्काउट एंड गाइड के नेशनल कमिश्नर मनीष मेहता सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।