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  • IEA की चेतावनी…. वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट, कीमतों में आ सकता है भारी उछाल

    IEA की चेतावनी…. वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट, कीमतों में आ सकता है भारी उछाल


    वाशिंगटन।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और होर्मुज संकट (Hormuz Crisis.) के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency.- IEA) ने बुधवार को गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रमुख समुद्री मार्गों में एक होर्मुज के 10 सप्ताह से अधिक समय से प्रभावी रूप से अवरुद्ध रहने के कारण वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जा रही है।

    एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति में 39 लाख बैरल प्रतिदिन की भारी कमी आ सकती है। आईईए ने कहा कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय तक बंद रहने से विश्व के तेल भंडार ‘अभूतपूर्व’ और ‘रिकॉर्ड’ गति से समाप्त हो रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति ठप्प होने के कारण वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ रहा है, जो भविष्य में तेल कीमतों में भारी उछाल और जेट ईंधन की कमी का कारण बन सकता है।

    एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अस्थिरता के चलते 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति में 3.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) की कमी आने की आशंका है। हालांकि आर्थिक मंदी के कारण मांग में कुछ कमी आने की उम्मीद है, लेकिन आईईए ने स्पष्ट किया कि मांग में गिरावट आपूर्ति की भारी कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण उत्पन्न इस आपूर्ति संकट से निपटने के लिए विभिन्न देशों ने अपने वाणिज्यिक और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों का आक्रामक दोहन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आकंड़ों के अनुसार, मार्च में 129 मिलियन बैरल की कमी के बाद अप्रैल में अकेले 117 मिलियन बैरल का रिकॉर्ड नुकसान हुआ है।

    वहीं, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आईईए के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई है, जिसमें से लगभग 164 मिलियन बैरल पहले ही बाजार में पहुंच चुका है। हालांकि एजेंसी ने माना कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। उच्च कीमतें, बिगड़ता आर्थिक माहौल और मांग घटाने के उपाय वैश्विक तेल खपत पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।

    गौरतलब है कि होर्मुज मार्ग के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र एक संकट के मोड़ पर पहुंच गया है, ठीक उसी समय जब गर्मियों का पीक ट्रैवल सीजन शुरू हो रहा है। एयरलाइंस पहले ही जेट ईंधन की संभावित कमी को लेकर चिंतित हैं। आईईए ने चेतावनी दी है कि यह संकट जितना लंबा चलेगा, वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में उतनी ही अधिक अस्थिरता फैलेगी।

  • ट्रम्प का दावा- ईरान की कमर तोड़ी, जंग जल्द खत्म होगी: हमलों से तबाह हुए सैन्य ठिकाने, तेल संकट से दुनिया में मचा हड़कंप

    ट्रम्प का दावा- ईरान की कमर तोड़ी, जंग जल्द खत्म होगी: हमलों से तबाह हुए सैन्य ठिकाने, तेल संकट से दुनिया में मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान उम्मीद से ज्यादा सफल रहा है और यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान में कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकाने तबाह हो चुके हैं और अब वहां हमला करने के लिए लगभग कुछ भी नहीं बचा है। ट्रम्प के मुताबिक शुरुआती सैन्य योजना करीब छह हफ्तों की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने तय समय से पहले ही कई बड़े लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।

    इधर युद्ध के असर से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी International Energy Agency (IEA) ने घोषणा की है कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडार से करीब 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करेंगे। एजेंसी के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol के अनुसार यह फैसला तेल आपूर्ति में आई भारी बाधा को कम करने के लिए लिया गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद फारस की खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। बताया जा रहा है कि युद्ध के बाद इस मार्ग से तेल निर्यात पहले के मुकाबले 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

    दूसरी ओर ईरान ने भी युद्ध के गंभीर मानवीय नुकसान का दावा किया है। ईरान के शिक्षा मंत्री Alireza Kazemi ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 206 छात्र और शिक्षक मारे गए हैं और 161 लोग घायल हुए हैं। वहीं मीनाब शहर के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    युद्ध के कारण तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 21 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की औसत कीमत 3.58 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि डीजल भी तेजी से महंगा हुआ है।

    इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे Strait of Hormuz को बंद भी कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों में सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। स्पेन ने इजराइल से अपना राजदूत वापस बुला लिया है, जबकि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक असर वाला संकट बनता जा रहा है।