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  • BS-III और BS-IV डीजल वाहनों के लिए उम्मीद, चार से पांच हजार रुपये में लग सकती है उत्सर्जन नियंत्रण डिवाइस

    BS-III और BS-IV डीजल वाहनों के लिए उम्मीद, चार से पांच हजार रुपये में लग सकती है उत्सर्जन नियंत्रण डिवाइस

    नई दिल्ली । पुराने डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और उन्हें सीधे कबाड़ में भेजने की जरूरत घटाने के लिए नई तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली द्वारा विकसित रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस यानी आरईसीडी इसी दिशा में तैयार की गई तकनीक है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसके परीक्षण को सफल बताते हुए पुराने वाहनों के लिए संभावित राहत का संकेत दिया है।

    राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों में पुराने डीजल वाहनों के उत्सर्जन को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। बढ़ते प्रदूषण के बीच वाहनों के उत्सर्जन मानकों को सख्त करने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। दूसरी ओर, पुराने वाहन मालिकों, खासकर व्यावसायिक वाहन संचालकों के लिए नया वाहन खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। ऐसे में रेट्रोफिट तकनीक को एक वैकल्पिक समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    आईआईटी दिल्ली की विकसित आरईसीडी का उद्देश्य डीजल इंजन से निकलने वाले प्रदूषक कणों को नियंत्रित करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह उपकरण पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को 90 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम होने का दावा करता है। इसके अलावा नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में भी करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाने की बात कही गई है।

    नितिन गडकरी के अनुसार, यदि बीएस-III और बीएस-IV श्रेणी के डीजल वाहनों में यह उपकरण प्रभावी ढंग से लगाया जाता है, तो उनके उत्सर्जन प्रदर्शन में बीएस-VI मानकों के करीब सुधार लाया जा सकता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर पुराना वाहन स्वतः बीएस-VI वाहन की श्रेणी में आ जाएगा। इसके लिए निर्धारित तकनीकी और नियामकीय मानकों का पालन जरूरी होगा।

    इस तकनीक की एक खास बात इसकी संभावित कम लागत बताई जा रही है। गडकरी के अनुसार, आरईसीडी की कीमत लगभग चार हजार से पांच हजार रुपये के बीच रह सकती है। यदि अंतिम उत्पाद इसी दायरे में उपलब्ध होता है और नियामकीय स्वीकृति मिलती है, तो पुराने वाहनों के मालिकों के लिए यह नई गाड़ी खरीदने की तुलना में कम खर्च वाला विकल्प हो सकता है।

    सरकार की ओर से इस तकनीक के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 228 के तहत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की संभावना है। किसी भी व्यापक इस्तेमाल से पहले उपकरण की कार्यक्षमता, सुरक्षा, टिकाऊपन और वास्तविक उत्सर्जन नियंत्रण क्षमता का मानकों के अनुरूप परीक्षण आवश्यक होगा। इसके बाद ही इसके उपयोग को लेकर अंतिम नियम स्पष्ट होंगे।

    आरईसीडी का संभावित इस्तेमाल केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहने की बात कही गई है। डीजल से संचालित जनरेटरों में भी इस तकनीक को अपनाने की संभावना बताई गई है। इससे ऐसे उपकरणों से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है, हालांकि इसके लिए अलग-अलग परिस्थितियों में तकनीकी उपयुक्तता और नियामकीय आवश्यकताओं का परीक्षण जरूरी होगा।

    गडकरी पहले भी वाहन स्क्रैपिंग को बढ़ावा देने और पुराने वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहनों पर जोर दे चुके हैं। उनका तर्क रहा है कि पुराने वाहनों की जगह नए वाहन आने से वाहन उद्योग की बिक्री और उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन नई उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक से स्क्रैपिंग और प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने का विकल्प सामने आ सकता है।

    फिलहाल आरईसीडी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका आधिकारिक नियामकीय ढांचे में शामिल होना है। यदि परीक्षणों और निर्धारित मानकों में तकनीक सफल रहती है तथा इसे व्यापक मंजूरी मिलती है, तो पुराने डीजल वाहनों को लेकर नीति में बदलाव की संभावना बन सकती है। इससे प्रदूषण घटाने के साथ वाहन मालिकों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।