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  • जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को जांजीबार, यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया के राष्ट्रपति और रिवोल्यूशनरी काउंसिल के चेयरमैन डॉ. हुसैन अली म्विनी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, जल आपूर्ति और अन्य विकासोन्मुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और तंजानिया अपने दीर्घकालिक संबंधों को नई तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत जांजीबार और तंजानिया के साथ अपनी विकास साझेदारी को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने उच्च शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की है। उनका कहना था कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जो भविष्य की विकास आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विदेश मंत्री ने विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आईआईटी जांजीबार भारत और तंजानिया के बीच मजबूत होते शैक्षणिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाई देती है, बल्कि अफ्रीका में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। उन्होंने इसे ज्ञान आधारित सहयोग का प्रभावी उदाहरण बताया।

    राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली म्विनी भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं और इससे पहले उन्होंने चेन्नई में आयोजित आईआईटी मद्रास के 63वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। अपने चेन्नई प्रवास के दौरान उन्होंने भारत और जांजीबार के बीच शैक्षणिक सहयोग की सराहना करते हुए आईआईटी मद्रास के जांजीबार परिसर को दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। यह भारत का पहला विदेशी आईआईटी परिसर है, जिसे दोनों देशों के बीच ज्ञान और नवाचार आधारित सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    नई दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति म्विनी का औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत और तंजानिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोगों के बीच संपर्क और साझा विकास प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि शिक्षा, डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के विकास संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

    भारत पिछले कुछ वर्षों से अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी को व्यापक रूप देने पर लगातार कार्य कर रहा है। इसी नीति के तहत शिक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल परिवर्तन और कौशल विकास को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जांजीबार के राष्ट्रपति की यह यात्रा भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरे से भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक, शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी तथा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विकास साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होगी।

  • भारत इनोवेट्स 2026 में आईआईटी मद्रास की बड़ी मौजूदगी, 15 स्टार्टअप्स और अत्याधुनिक शोध परियोजनाएं होंगी प्रदर्शित

    भारत इनोवेट्स 2026 में आईआईटी मद्रास की बड़ी मौजूदगी, 15 स्टार्टअप्स और अत्याधुनिक शोध परियोजनाएं होंगी प्रदर्शित

    नई दिल्ली । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी नवाचारों और स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता को प्रदर्शित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। फ्रांस में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम में संस्थान अपने डीप-टेक अनुसंधान, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा। इस आयोजन को भारत और फ्रांस के बीच तकनीकी सहयोग तथा नवाचार साझेदारी को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    यह कार्यक्रम 14 से 16 जून के बीच आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी संगठनों से जुड़े नवाचारों को वैश्विक समुदाय के सामने रखा जाएगा। आयोजन का उद्देश्य उभरती तकनीकों और स्टार्टअप्स को निवेशकों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, शोध संस्थानों और तकनीकी साझेदारों से जोड़ना है, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के अवसर मिल सकें।

    आईआईटी मद्रास इस कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका निभाते हुए दो महत्वपूर्ण विषयगत क्षेत्रों का नेतृत्व करेगा। संस्थान अपने साथ जुड़े 15 स्टार्टअप्स को भी प्रदर्शित करेगा, जो विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में अभिनव समाधान विकसित कर रहे हैं। इसके अलावा पांच प्रमुख शोध परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जो भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं और अनुसंधान आधारित विकास को रेखांकित करेंगी।

    प्रदर्शित की जाने वाली प्रमुख तकनीकों में हाइपरलूप परिवहन प्रणाली, लैब-ग्रोन डायमंड तकनीक, स्वदेशी 5जी और 6जी संचार समाधान, स्मार्ट पोर्ट ऑटोमेशन तथा कम कंप्यूटिंग संसाधनों पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही हैं और इनमें वैश्विक स्तर पर उपयोग की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

    संस्थान के अनुसार, हाइपरलूप तकनीक भारत की अगली पीढ़ी की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। इसी प्रकार स्वदेशी 5जी और 6जी समाधान देश को दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वहीं, कम कंप्यूटिंग क्षमता पर कार्य करने वाले एआई मॉडल्स को ऐसे क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जहां संसाधन सीमित हैं लेकिन डिजिटल समाधान की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।

    कार्यक्रम में ब्लू इकोनॉमी से जुड़े नवाचारों को भी विशेष स्थान मिलेगा। समुद्री और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विकसित स्वायत्त प्रणालियां, अंडरवॉटर निरीक्षण तकनीकें और समुद्री शैवाल आधारित टिकाऊ उत्पाद इस क्षेत्र की प्रमुख आकर्षण परियोजनाओं में शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकें पर्यावरणीय स्थिरता और औद्योगिक दक्षता दोनों को बढ़ावा दे सकती हैं।

    आईआईटी मद्रास के नेतृत्व का मानना है कि यह आयोजन केवल तकनीकी प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच शोध, नवाचार, स्टार्टअप सहयोग और प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसर भी पैदा करेगा। विशेष रूप से दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण और सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारतीय संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को नई पहचान दिला रही है। आईआईटी मद्रास की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारतीय अनुसंधान संस्थान अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक तकनीकी विकास और उद्योग परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    ‘भारत इनोवेट्स 2026’ जैसे आयोजन भारतीय स्टार्टअप्स और शोध परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेश, साझेदारी और तकनीकी सहयोग के नए अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। इससे भारत की नवाचार क्षमता को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।