Tag: illegal construction

  • रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल

    रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को इस महत्वपूर्ण प्रकरण पर सुनवाई होनी है जिसमें याचिकाकर्ता रेसीडेंशियल भूखंडों पर किए गए अवैध निर्माण और उनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन भोपाल से जुड़ी याचिका पर कोई फैसला नहीं हो सका। अब आज होने वाली सुनवाई पर व्यापारियों रहवासियों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश की विभिन्न राजधानियों के नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने वाले राज्यों को कड़ी फटकार लगाई और कई राज्यों को स्पष्ट चेतावनी भी दी। हालांकि भोपाल से संबंधित याचिका पर विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी थी इसलिए अब बुधवार को इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।

    भोपाल में यह पूरा विवाद तब तेज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कई दुकानों और प्रतिष्ठानों को सील किया गया जबकि अनेक व्यापारियों ने कार्रवाई के डर से स्वयं अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। शहर के कई प्रमुख इलाकों में इस कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिला।

    हालांकि बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सरकार ने व्यापारियों को अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया। बैठक में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे मामले की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की जाए। यह समिति पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। तब तक व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद शहर के कई इलाकों में बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    दूसरी ओर इस फैसले का शहर के कई रहवासी संगठनों ने विरोध किया है। अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां और अन्य क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि आवासीय इलाकों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक पार्किंग शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में लोगों ने पैदल मार्च निकालकर नगर निगम की कार्रवाई को अधूरा बताते हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की गई और बाद में कई प्रतिष्ठान फिर से खुल गए जो सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए और अवैध निर्माण पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए।

    वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों के पक्ष में खड़ा है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों के सामने व्यावसायिक भूखंडों की भारी कमी है। ऐसे में कई लोग मजबूरी में आवासीय परिसरों से व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। चैंबर ने सरकार से मिक्स लैंड यूज नीति लागू करने और व्यापारियों के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

    अब सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के मामले में आगे की दिशा क्या होगी। अदालत के फैसले का असर हजारों व्यापारियों रहवासियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।

  • सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त

    सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त


    भोपाल । भोपाल में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को बावड़ियाकलां स्थित सुभालय विहार में अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला भवन पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गौरव गृह निर्माण सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले सुभालय परिसर में स्थित मकान क्रमांक बी 93 पर की गई। जांच में सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण किया गया उसका मूल क्षेत्रफल 1312 वर्गमीटर था जबकि लगभग 900 वर्गमीटर क्षेत्र में जी प्लस वन भवन का निर्माण कर लिया गया था। सबसे अहम बात यह रही कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को एकल प्लॉट के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए इसका अवैध विभाजन कर दिया गया।

    नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूखंड को अनधिकृत तरीके से छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा गया और बाद में स्वीकृत मानकों के विपरीत भवन निर्माण कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ था इसलिए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। निगम का कहना है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के इंजीनियर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

    नगर निगम ने शहरवासियों से भी अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से उसकी वैधता और स्वीकृत लेआउट की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बिना अनुमति के निर्माण या अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

    नगर निगम का कहना है कि अवैध निर्माण केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को प्रभावित नहीं करता बल्कि भविष्य में सड़क जल निकासी पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी गंभीर असर डालता है। इसी कारण प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में वैध और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जो लोग बिना स्वीकृति के निर्माण कर रहे हैं या अवैध प्लॉटिंग में शामिल हैं उनके खिलाफ आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर

    उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर


    नई दिल्ली। उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के किनारे लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, रेस्टोरेंट और कॉलोनियों के रूप में 200 से अधिक अवैध निर्माण खड़े होने का मामला अब न्यायालय की निगरानी में है।

    इस पूरे मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह नदी किनारे 100 से 200 मीटर के दायरे में हुए सभी अतिक्रमणों की विस्तृत सूची तैयार करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि अब तक इन अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई की गई है और उन्हें हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को यह रिपोर्ट 15 जून तक हर हाल में पेश करने का आदेश दिया है। इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि तब तक किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि इन क्षेत्रों में जारी नहीं रहनी चाहिए।

    यह याचिका वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर नियमों को दरकिनार करते हुए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। इनमें होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और आवासीय कॉलोनियां तक शामिल हैं। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे शिप्रा का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि नदी के किनारे व्यावसायिक निर्माण न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अनुचित है। कोर्ट ने भी टिप्पणी की कि नदी तट पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या स्थायी निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती।

    पूर्व सुनवाई में 5 मई को भी कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए थे कि सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि नदी किनारे कोई अवैध गतिविधि संचालित न हो। इसके साथ ही नदी निधि विकास योजना से जुड़ी रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए थे।

    अब सभी की नजरें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट यह तय करेगी कि अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने कितनी गंभीरता से कदम उठाए हैं।

  • महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम तेज, 16 अवैध इमारतें ध्वस्त

    महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम तेज, 16 अवैध इमारतें ध्वस्त


    उज्जैन । उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के आसपास अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के समीप स्थित 16 अवैध मकानों को जमींदोज कर दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। इससे पहले भी प्रशासन द्वारा 42 अवैध मकानों को हटाया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अभियान लगातार जारी है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई उज्जैन विकास प्राधिकरण की भूमि पर किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ की गई। प्रशासन को लंबे समय से इन निर्माणों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद जांच कर इन्हें अवैध घोषित किया गया। इसके पश्चात नियमानुसार नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय सीमा में पालन नहीं होने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया।

    सुबह से ही शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आधा दर्जन से अधिक पोकलेन और बुलडोजर मशीनों की सहायता से एक-एक कर अवैध इमारतों को ढहाया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।

    प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल अवैध निर्माणों के खिलाफ है और इसे चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले महाकाल क्षेत्र के आसपास किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस क्षेत्र की गरिमा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कुछ लोगों ने प्रशासन के इस कदम को उचित ठहराते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की व्यवस्था सुधरेगी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, वहीं प्रभावित लोगों ने इसे लेकर असंतोष भी जताया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की गई है।

    महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के आसपास सुव्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त वातावरण बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल क्षेत्र का सौंदर्य बढ़ेगा बल्कि श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में महाकाल क्षेत्र में और भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस अभियान से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।

  • जयपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई: किशनपोल जोन में पांच अवैध भवन और दुकानें सीज

    जयपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई: किशनपोल जोन में पांच अवैध भवन और दुकानें सीज


    जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में नगर निगम ने शहर में बढ़ते अवैध निर्माणों के खिलाफ शनिवार को सख्त कार्रवाई की। किशनपोल जोन में नगर निगम की टीम ने बिना अनुमति और अवैध तरीके से निर्माण किए जा रहे पांच भवन और दुकानों को सीज कर दिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व किशनपोल जोन के राजस्व अधिकारी सुनील कुमार ने किया, जबकि नगर निगम उपायुक्त विजेन्द्र सिंह ने इसे सीधे निर्देशित किया।

    नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि इन भवनों और दुकानों में निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे और उपविधियों के विपरीत चल रहा था। इससे पहले संबंधित भवन मालिकों और दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वे निर्माण रोकने के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। ऐसे में निगम ने कठोर कदम उठाते हुए अवैध निर्माण को सीज करने का निर्णय लिया।

    इस दौरान निगम टीम ने पुलिस जाब्ता के साथ संयुक्त निरीक्षण किया और निर्माण स्थल पर अवैध गतिविधियों को तुरंत रोका। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई नगर निगम की शहरी नियोजन और सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नगर निगम का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण की रोकथाम के लिए आगे भी नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    विशेष रूप से नगर निगम ने चेतावनी दी है कि शहर में बिना अनुमति निर्माण करने वालों के खिलाफ भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे ऐसे मामलों की सूचना तुरंत नगर निगम को दें ताकि समय रहते अवैध निर्माण रोका जा सके। किशनपोल जोन में यह कार्रवाई नगर निगम की शहर में अवैध निर्माण पर नजर रखने की नीति को दर्शाती है। निगम का लक्ष्य है कि जयपुर शहर का शहरी ढांचा नियामक ढांचे के अनुसार सुरक्षित और सुव्यवस्थित रहे।