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  • नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ पर फोकस अमित शाह तय कर सकते हैं नई डेडलाइन

    नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ पर फोकस अमित शाह तय कर सकते हैं नई डेडलाइन


    नई दिल्ली । देश में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार लगातार सक्रिय नजर आ रही है। नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय तक चले अभियान को निर्णायक सफलता मिलने के बाद अब सरकार का ध्यान अवैध घुसपैठ की चुनौती पर केंद्रित हो गया है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर व्यापक रणनीति तैयार कर रहे हैं और इसके लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    गृह मंत्रालय का मानना है कि किसी भी बड़े अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्पष्ट समय सीमा और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है। इसी सोच के तहत अवैध घुसपैठ की पहचान, निगरानी और कार्रवाई के लिए मिशन मोड में काम करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस दिशा में एक स्पष्ट डेडलाइन निर्धारित की जा सकती है, जिससे सभी राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों को एकीकृत किया जा सके।

    गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले नक्सलवाद के खिलाफ भी समयबद्ध रणनीति अपनाई थी। इसके तहत सुरक्षा बलों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई की गई थी। अब उसी मॉडल को सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर लागू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के आसपास होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमणों की पहचान के निर्देश दिए गए हैं। सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में जमीन उपयोग और जनसंख्या संरचना में होने वाले बदलावों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए संबंधित एजेंसियां विस्तृत सर्वेक्षण और समीक्षा कार्य कर रही हैं।

    सुरक्षा एजेंसियां आधुनिक तकनीकों का भी व्यापक उपयोग कर रही हैं। सीमा क्षेत्रों में थर्मल कैमरे, सेंसर, रडार और ड्रोन जैसी तकनीकों की मदद से निगरानी बढ़ाई गई है। विशेष रूप से संवेदनशील सीमाई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के प्रयास जारी हैं। सीमा बाड़बंदी और अन्य बुनियादी सुरक्षा परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

    अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान और कार्रवाई के लिए सरकार कथित रूप से तीन स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसमें पहचान, हिरासत और कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्कासन जैसे चरण शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी और समीक्षा भी की जा रही है ताकि अभियान प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।

    हाल के महीनों में गृह मंत्री अमित शाह विभिन्न राज्यों के दौरे कर सुरक्षा व्यवस्था और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर चुके हैं। राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अवैध घुसपैठ की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के साझा प्रयास बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

    आने वाले समय में यदि इस अभियान के लिए औपचारिक समय सीमा तय की जाती है तो यह देश की सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। फिलहाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस दिशा में रणनीतिक स्तर पर तैयारियों को आगे बढ़ा रही हैं।

  • भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ी टेंशन….. BGB-BSF ने एक-दूसरे पर लगाए अवैध घुसपैठ कराने के आरोप

    भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ी टेंशन….. BGB-BSF ने एक-दूसरे पर लगाए अवैध घुसपैठ कराने के आरोप


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश की सीमा (India and Bangladesh Border) पर एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति (Stressful Situation) पैदा हो गई है। सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force- BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (Border Guard Bangladesh.- BGB) ने एक-दूसरे पर घुसपैठ कराने और अवैध रूप से लोगों को सीमा पार धकेलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस तनातनी के बीच सीमा पर स्थित नो-मैन्स लैंड पर बच्चों और महिलाओं सहित दर्जनों लोग फंसे हुए हैं। यह गतिरोध ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं।

    बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल (BGB) ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि भारतीय बीएसएफ ने गुरुवार और शुक्रवार के शुरुआती घंटों में कई बार लोगों को बांग्लादेशी क्षेत्र में धकेलने की कोशिश की। BGB के अनुसार, पिछले 24 घंटों में सीमावर्ती इलाकों जैसे पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के पास लालमोनिरहाट और पंचगढ़, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के पास नौगांव और मालदा और मुर्शिदाबाद के पास चापाइनवाबगंज में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं।

    BGB का दावा है कि उन्होंने जीरो-लाइन पर 70 से अधिक लोगों को बांग्लादेश में प्रवेश करने से रोका है। BGB की 15वीं लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहंदी इमाम ने बताया, “ये लोग फिलहाल वहीं फंसे हुए हैं और हमारी सेना किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए हाई अलर्ट पर है।” BGB के मुताबिक, शुक्रवार सुबह नौगांव में 5 बच्चों सहित 17 लोगों को रोका गया। लालमोनिरहाट के तीन इलाकों हातीबांधा, पटग्राम और आदित्यमारी में 33 लोगों को रोका गया। वहीं, गुरुवार तड़के चापाइनवाबगंज में 10 महिलाओं और 6 बच्चों समेत 28 लोगों को जीरो-लाइन पर रोका गया था।


    BSF का पलटवार

    भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने BGB के इन आरोपों को खारिज करते हुए बिल्कुल अलग दावा किया है। BSF ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कूचबिहार के मेखलीगंज इलाके के पनिशाला में महिलाओं और बच्चों सहित 10 बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से घुसाने की BGB की कोशिश को नाकाम कर दिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए BSF ने तुरंत इलाके में अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात कर दिया है ताकि कोई भी भारतीय सीमा में प्रवेश न कर सके। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें BSF और BGB के जवान सीमा पर फंसे कुछ लोगों के सामने इस मुद्दे पर चर्चा करते दिख रहे हैं।


    दोनों देशों ने पल्ला झाड़ा, फ्लैग मीटिंग से इनकार

    BSF और BGB दोनों ही बलों ने इन 10 लोगों को अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है, इसलिए वे कड़कड़ाती धूप और असुरक्षित माहौल में सीमा पर फंसे रहने को मजबूर हैं। स्थिति को संभालने के लिए BSF द्वारा एक फ्लैग मीटिंग बुलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन खबरों के मुताबिक BGB ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद BSF ने सीमा पर गश्त काफी तेज कर दी है।


    दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी नजरें

    सीमा पर उपजे इस ताजा विवाद के बीच दोनों देशों के सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी जल्द ही आमने-सामने होंगे। पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार, 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में 57वीं भारत-बांग्लादेश सीमा समन्वय बैठक आयोजित होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में जीरो-लाइन पर फंसे लोगों और घुसपैठ के आरोपों का यह मुद्दा बेहद गरमाएगा।

  • घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर सख्त होगी सरकार, पीएम मोदी जल्द लॉन्च करेंगे ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’

    घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर सख्त होगी सरकार, पीएम मोदी जल्द लॉन्च करेंगे ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’

    नई दिल्ली । देश की सीमा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर केंद्र सरकार अब एक बड़े और निर्णायक कदम की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ को रोकना और देश में कृत्रिम जनसांख्यिकीय बदलाव की चुनौतियों से निपटना बताया जा रहा है। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अभियान मान रही है।

    हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिए कि नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करने के बाद अब सरकार का अगला फोकस अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोकने पर है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सीमावर्ती इलाकों में चल रही घुसपैठ अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है और इसे रोकने के लिए कठोर और व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है। उनके अनुसार देश अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और अब सुरक्षा एजेंसियों को उसी दृढ़ता के साथ सीमा सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।

    सरकार का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध प्रवासन के कारण कई क्षेत्रों की जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव आया है। इसे देखते हुए ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ के तहत सुरक्षा एजेंसियों, राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा। इस मिशन में सीमा सुरक्षा बल की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ के संभावित क्षेत्रों की विशेष जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत बनाया जा सके।

    बताया जा रहा है कि इस मिशन के तहत सीमाओं पर आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। सीमा पर स्मार्ट निगरानी, मजबूत बाड़बंदी और संदिग्ध गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखने जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। सरकार की योजना पड़ोसी देशों के साथ वापसी समझौतों को और प्रभावी बनाने की भी है ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया तेज हो सके।

    गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मिशन में केवल सीमा सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर से लेकर पुलिस थाना स्तर तक सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा ताकि घुसपैठियों की पहचान और कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई न रहे।

    सरकार जल्द ही त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक भी करने जा रही है। इस बैठक में एक संयुक्त सुरक्षा रणनीति तैयार की जाएगी ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। केंद्र सरकार का मानना है कि राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय के बिना इस चुनौती से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता।

    इसके अलावा सरकार अगले साल ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करने की तैयारी में है। इस परियोजना के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगने वाली लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा को अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम देश की सुरक्षा को नई मजबूती देगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के अवैध जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशों को विफल करने में मदद करेगा।

  • बांग्लादेश बॉर्डर पर अब होगी लोहे की दीवार, BSF को जमीन देने के फैसले से तेज होगी फेंसिंग

    बांग्लादेश बॉर्डर पर अब होगी लोहे की दीवार, BSF को जमीन देने के फैसले से तेज होगी फेंसिंग



    नई दिल्ली। भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए अब पश्चिम बंगाल में बाड़ेबंदी का काम तेज होने जा रहा है। नई सरकार ने BSF को जमीन देने का फैसला लेते हुए 45 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, जिससे लंबे समय से अटकी फेंसिंग परियोजना को बड़ी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो देश की सबसे बड़ी जमीनी सीमा मानी जाती है। इस सीमा का बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम से होकर गुजरता है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 80 फीसदी सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन सबसे ज्यादा बिना बाड़ वाला हिस्सा अब भी पश्चिम बंगाल में मौजूद है।

    सीमावर्ती इलाकों में घने जंगल, नदी, दलदल और पहाड़ी क्षेत्रों की वजह से कई जगहों पर पारंपरिक बाड़ लगाना मुश्किल रहा है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, स्थानीय विरोध और प्रशासनिक देरी भी फेंसिंग की रफ्तार धीमी होने की बड़ी वजह बनी। केंद्र सरकार लंबे समय से आरोप लगाती रही कि पश्चिम बंगाल में जमीन अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा यह अहम प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ।

    कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी यह मुद्दा पहुंचा, जहां अदालतों ने सीमा सुरक्षा को गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने तो देरी पर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जुर्माना तक लगाया था। अब नई सरकार के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबित जमीन जल्द BSF को सौंपी जाएगी और सीमा पर सुरक्षा मजबूत होगी।

    सरकार का मानना है कि फेंसिंग पूरी होने से अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी और सीमा पार अपराधों पर लगाम लगेगी। वहीं कई संवेदनशील इलाकों में स्मार्ट फेंसिंग, सीसीटीवी कैमरे और मोशन सेंसर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए जाने की योजना है, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

  • Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…

    Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…


    पटना।
    बिहार (Bihar) के सीमांचल में अवैध घुसपैठ (Illegal Intrusion) के साथ ही भारतीय जाली नोट, मानव व्यापार और नशे के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के तीन दिवसीय दौरे के बाद केन्द्रीय एजेंसियां समेकित रूप से इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने में जुट गयी हैं। अभियान में एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, एनआईए, ईडी, आईबी सहित स्थानीय प्रशासन और बिहार पुलिस का आपसी सहयोग रहेगा।

    दरअसल, केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि नेपाल से जुड़े बिहार के सीमाई इलाकों में अवैध घुसपैठ के साथ ही जाली भारतीय नोट, मानव व्यापार और नशीली दवाओं की तस्करी का बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। यह नेटवर्क भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी बिगाड़ रहा है। इसके लिए केन्द्रीय एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश मिला है। सूत्रों के मुताबिक एसएसबी, आईबी, बीएसएफ और आईटीबीपी को इंटेलिजेंस शेयरिंग कर तस्करी रूटों के लाइव मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मिली है।

    एनआईए और ईडी जाली नोट, नारकोटिक्स और मानव व्यापार के नेटवर्कों की बड़े स्तर पर जांच करेंगे। इसमें बिहार पुलिस का भी सहयोग मिलेगा। बैठक के बाद केन्द्रीय एजेंसियां इन नेटवर्क के अहम कड़ियों की पहचान और इसके फंडिंग पैटर्न को समझने में जुटी है।


    मदरसों की फंडिंग और चीनी भाषियों पर नजर

    केन्द्रीय बल और जांच एजेंसियों की सीमाई क्षेत्रों के मदरसों की विदेशी फंडिंग पर भी नजर है। संदिग्ध मदरसों के फंडिंग की जांच कराने का निर्देश है। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि सीमाई क्षेत्र में चीनी भाषा सीखने-सिखाने वाले कई संस्थान खुल गए हैं। पहले इन संस्थानों को सिर्फ शैक्षिक इकाई के रूप में देखा जाता था, लेकिन, अब चीनी इंफ्लुएंसर्स की पहचान करते हुए उनके बैकग्राउंड को खंगाला जा सकता है। आशंका है कि जासूसी या सॉफ्ट वारफेयर के लिए चीनी भाषा प्रभावित लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक बैठक में सीमा से सटे इलाके में सुनियोजित रूप से कई अवैध बस्तियां बसाये जाने की सूचना मिली है। केन्द्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर अब सीमा क्षेत्र के अंदर 10 किमी तक ऐसी अवैध बस्तियों को हटाया जाएगा। बॉर्डर इलाके में रोहिंग्याओं की बढ़ी हुई सक्रियता को देखते हुए किशनगंज इलाके में सैन्य संगठनों की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।