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  • ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर

    ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के बिलौआ इलाके में अवैध खनन का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें पर्यावरण और खनिज नियमों की खुली अनदेखी कर करोड़ों रुपये की खनिज संपदा निकाल ली गई। आरोप है कि एक क्रेशर संचालक ने निजी और कृषि भूमि पर बिना अनुमति के 200 से 250 फीट तक गहरी खुदाई कर भारी मात्रा में पत्थर का अवैध उत्खनन कर डाला।

    सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा उत्खनन उस समय किया गया जब संबंधित जमीन पर माइनिंग की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। इसके बावजूद महीनों तक भारी मशीनों की मदद से लगातार खुदाई चलती रही और खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    शिकायत सामने आने के बाद जब इस क्षेत्र की सैटेलाइट इमेज मंगाई गई, तो स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि तीन अलग-अलग सर्वे नंबरों पर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया गया है और जमीन का बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील हो चुका है। अनुमान के मुताबिक यहां करोड़ों रुपये मूल्य का पत्थर निकाला जा चुका है।

    मामले में यह भी आरोप है कि खनिज विभाग ने न तो समय रहते निरीक्षण किया और न ही अवैध उत्खनन पर कोई सख्त कार्रवाई की। नियमों के अनुसार बिना अनुमति खनन पर भारी जुर्माना और खदान सील करने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में न तो जुर्माना लगाया गया और न ही कोई कठोर कार्रवाई हुई।

    इसके बजाय, संबंधित फाइल को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा मामला मिलीभगत और संरक्षण का परिणाम है, जिसमें नियमों को दरकिनार कर खनन माफिया को फायदा पहुंचाया गया।

    वहीं दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर यह दलील दी जा रही है कि सीमांकन में त्रुटि के कारण क्रेशर संचालक ने गलती से दूसरी जमीन पर खुदाई कर दी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या 250 फीट गहरी खुदाई किसी “गलती” का परिणाम हो सकती है, या इसके पीछे महीनों की सुनियोजित प्रक्रिया रही है।

    स्थानीय स्तर पर 22 अप्रैल 2026 को पर्यावरण मंजूरी के लिए लोक सुनवाई भी कराई गई थी, जिसमें ग्रामीणों को रोजगार और विकास के वादे किए गए थे। लेकिन इससे पहले ही खनन पूरा कर लिया गया, जिससे इस सुनवाई की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है।

    फिलहाल कलेक्टर स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई है। खनिज विभाग के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि अनुमति के बिना इतनी बड़ी खुदाई कैसे और किसकी अनुमति से हुई।  यह पूरा मामला न केवल खनिज संपदा की लूट को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त

    सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त


    नई दिल्ली। शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में निर्माणाधीन सनघटा डैम परियोजना में गुणवत्ता को लेकर सामने आई लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के औचक निरीक्षण के बाद खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। मौके से करीब 4 हजार घनमीटर गिट्टी के साथ एक पोकलेन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई है।

    दरअसल, शनिवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सनघटा डैम, निर्माणाधीन पंप स्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के कार्यों का अचानक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। कई जगहों पर सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके निर्देश के बाद खनिज विभाग की टीम हरकत में आई और खनिज निरीक्षक सोनू श्रीवास के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की गई।

    खनिज विभाग ने गिट्टी निर्माण के लिए संचालित बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगली अनुमति तक क्रेशर बंद रहेगा। इसके अलावा मौके पर मौजूद लगभग 4000 घनमीटर गिट्टी को जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान एक पोकलेन मशीन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई, जिनका उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा रहा था।

    प्रशासन की इस कार्रवाई से निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में चल रही अन्य परियोजनाओं की भी गुणवत्ता जांच की जाएगी और जहां भी अनियमितता मिलेगी वहां सख्त कार्रवाई होगी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद जगी है कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

  • अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत

    अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के अंतर्गत हाटा चौकी के ग्राम लोढ़ी में अवैध उत्खनन का काला कारोबार एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। लगातार जारी अवैध खनन गतिविधियों के बीच हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को दहशत और आक्रोश में डाल दिया है। पत्थर से लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।

    मृतक की पहचान राजभान साकेत के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय ट्रैक्टर में भारी मात्रा में पत्थर लोड था और वह तेज गति से गुजर रहा था। इसी दौरान युवक ट्रैक्टर के पहिए की चपेट में आ गया और गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही हाटा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। बाद में थाना प्रभारी अनिल काकड़े भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। यह घटना लोढ़ी गांव में ट्रांसफार्मर प्लांट के पास पप्पू सिंह की मड़ई के सामने हुई बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह ट्रैक्टर राजेंद्र बहादुर सिंह उर्फ पप्पू से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

    ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध पत्थर खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। लगातार शिकायतों और रिपोर्ट के बावजूद इस पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज आवाजाही और बिना नियमों के खनन कार्य से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    घटना के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस पर भी दबाव बनाए जाने की बात कही है जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि स्थानीय लोगों की जान के लिए भी गंभीर जोखिम बन चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।