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  • शिवपुरी में अवैध खनन कार्रवाई के दौरान बवाल युवक को थप्पड़ मारते खनिज निरीक्षक का VIDEO वायरल

    शिवपुरी में अवैध खनन कार्रवाई के दौरान बवाल युवक को थप्पड़ मारते खनिज निरीक्षक का VIDEO वायरल


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में खनिज निरीक्षक ऋषभ दीक्षित एक युवक को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

    जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले खनिज निरीक्षक ऋषभ दीक्षित अपनी टीम के साथ पिछोर क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्थरों से भरी एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोककर जांच की। चालक के पास वैध रॉयल्टी और परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने पर ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर लिया गया।

    जब जब्त वाहन को पुलिस बल की मौजूदगी में थाने ले जाया जा रहा था तभी मौके पर मौजूद कुछ लोगों और अधिकारियों के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान धक्का मुक्की और तीखी बहस की स्थिति बन गई। घटना के बाद खनिज निरीक्षक ने पिछोर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि मंगल लोधी और उसके साथियों ने शासकीय कार्य में बाधा डाली पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और जब्त वाहन छुड़ाने का प्रयास किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

    अब सामने आए वायरल वीडियो में खनिज निरीक्षक पहले युवक मंगल लोधी से मोबाइल मांगते दिखाई देते हैं। कुछ ही क्षण बाद वे युवक को थप्पड़ मार देते हैं जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का मुक्की और कहासुनी शुरू हो जाती है। वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जाएगा कि थप्पड़ मारने से पहले क्या हुआ था और विवाद किस वजह से बढ़ा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि दोनों पक्षों की भूमिका क्या रही। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है और सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

  • 31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

    31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप


    जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है।

    जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका।

    खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है।

    उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

    इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • जबलपुर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 96 मामलों में 6 करोड़ का जुर्माना, प्रशासन का सख्त रुख

    जबलपुर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 96 मामलों में 6 करोड़ का जुर्माना, प्रशासन का सख्त रुख


    मध्यप्रदेश
    के जबलपुर जिले में अवैध उत्खनन और खनिजों के अनधिकृत परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त और व्यापक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है, जिसमें जिला प्रशासन ने 96 मामलों में सुनवाई के बाद कुल 6 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई कलेक्टर न्यायालय के माध्यम से की गई, जहां खनिज विभाग द्वारा दर्ज किए गए प्रकरणों की विस्तृत जांच और सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया गया। प्रशासन के इस कदम को जिले में अवैध खनन गतिविधियों पर लगाम कसने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे खनिज संसाधनों के अनियंत्रित दोहन पर सख्त संदेश गया है। जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला वर्ष 2022 से लंबित था, जब खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और परिवहन से जुड़े कई मामलों को दर्ज कराया था, जिन पर समय-समय पर कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। लंबी प्रक्रिया के बाद अब इन मामलों में एक साथ बड़ा फैसला सुनाया गया है, जिससे प्रशासनिक सख्ती और कानूनी कार्रवाई की गंभीरता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    इस फैसले के तहत सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि एक अकेले प्रकरण में ही 40 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया, जो इस कार्रवाई की गंभीरता और पैमाने को दर्शाता है। अभिलाष तिवारी सहित अन्य संबंधित मामलों में यह कठोर निर्णय लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अवैध खनन और परिवहन में शामिल किसी भी व्यक्ति या समूह को अब राहत नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने यह कार्रवाई ऐसे समय में की है जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ क्षेत्रों में खनिज संसाधनों का अवैध रूप से दोहन किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

    जिला प्रशासन के इस निर्णय को खनिज माफियाओं के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय बताए जाते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सख्त आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कम होगी। इसके साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस निर्णय के बाद खनिज परिवहन और उत्खनन से जुड़े नियमों का पालन अधिक सख्ती से किया जाएगा।

    इस पूरी कार्रवाई को प्रशासन की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अवैध गतिविधियों पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। लंबे समय से लंबित मामलों पर एक साथ निर्णय आने से यह भी स्पष्ट हुआ है कि अब प्रशासन इस तरह के मामलों में देरी के बजाय कठोर और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कुल मिलाकर यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जिले में खनिज संसाधनों के संरक्षण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी माना जा रहा है।

  • रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत

    रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने निकली टीम पर माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया इस हमले में एक वन आरक्षक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है

    जानकारी के मुताबिक यह घटना दिमनी थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 552 के पास की है जहां चंबल नदी के ऐसाह घाट से अवैध रेत खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं इसी सूचना के आधार पर अंबाह रेंज की वन विभाग की टीम तड़के सुबह गश्त पर निकली थी

    गश्ती के दौरान रथोल का पुरा और रानपुर के बीच वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर ने रेत से भरे एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोकने की कोशिश की लेकिन चालक ने रुकने के बजाय बेरहमी से वाहन उन पर चढ़ा दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी वाहन लेकर फरार हो गया

    घटना के बाद वन विभाग की टीम ने तुरंत घायल वनकर्मी को अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया परिजन भी जिला अस्पताल पहुंचे जिससे माहौल गमगीन हो गया

    बताया जा रहा है कि हरिकेश गुर्जर हाल ही में दूसरे जिले से स्थानांतरित होकर अंबाह रेंज में पदस्थ हुए थे उनकी इस तरह की मौत ने एक बार फिर अवैध खनन के बढ़ते खतरे और उसमें शामिल माफियाओं के हौसलों को उजागर कर दिया है

    मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उसकी पहचान भी कर ली गई है सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर ने बताया कि आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून का डर खत्म होता जा रहा है

    यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध खनन का नेटवर्क कितना खतरनाक हो चुका है जब कानून की रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए

  • गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है लंबे समय से जानलेवा खतरा बनी गुफानुमा सुरंगों पर आखिरकार बुलडोजर चला दिया गया यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए की गई बल्कि स्थानीय लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी बेहद जरूरी मानी जा रही थी

    जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के बटुरा और टिकुरीटोला इलाकों में जमीन के नीचे बनाई गई ये खदानें किसी हादसे का इंतजार करती नजर आ रही थीं संकरी और गहरी सुरंगों के जरिए अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा था जो कभी भी धंस सकती थीं और बड़ी जनहानि का कारण बन सकती थीं

    लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए अमलाई पुलिस और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया मौके पर पहुंची टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से करीब पांच गुफानुमा सुरंगों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और उन्हें मिट्टी से पाटकर बंद कर दिया गया

    कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस की निगरानी में सुरक्षित किया गया और खुले गड्ढों को भी भर दिया गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है

    बताया जा रहा है कि इन अवैध खदानों को पहले भी कई बार बंद कराया जा चुका है लेकिन खनन माफिया हर बार नए तरीके से सुरंगें खोदकर फिर से कोयला निकालना शुरू कर देते हैं यही वजह है कि इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए व्यापक कार्रवाई की है

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि अवैध खनन सिर्फ कानून का उल्लंघन ही नहीं बल्कि लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है ऐसे में जरूरी है कि इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

  • भिण्ड में खनिज माफिया ने घेरा, टीम की कार्रवाई पुलिस के साथ सफल

    भिण्ड में खनिज माफिया ने घेरा, टीम की कार्रवाई पुलिस के साथ सफल


    भिण्ड । भिण्ड मध्यप्रदेश में खनिज विभाग की टीम पर माफिया द्वारा दबाव डालने और पीछा करने का मामला सामने आया जिला खनिज अधिकारी पंकज ध्वज मिश्रा अपनी टीम के साथ गोहद अनुभाग के चितौरा-मौ मार्ग पर देर रात जांच कर रहे थे इसी दौरान टीम ने गिट्टी से भरा एक डंपर रोका

    जांच में पाया गया कि डंपर ओवरलोड था और वाहन पर नंबर प्लेट नहीं थी साथ ही चेसिस नंबर भी स्पष्ट नहीं था, जिससे यह मामला संदिग्ध लग रहा था जैसे ही टीम ने कार्रवाई शुरू की, खनिज माफिया ने टीम को घेरने की कोशिश की और दबाव डालना शुरू कर दिया

    स्थिति बिगड़ने पर जिला पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस टीम के सहयोग से खनिज विभाग की टीम को सुरक्षित निकाला गया अधिकारी बताते हैं कि इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया कि खनिज नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

    भिण्ड खनिज विभाग ने कहा कि जांच अभियान लगातार जारी रहेगा और सभी ओवरलोड और अवैध खनन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी ऐसे मामलों में टीम और पुलिस के समन्वय से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी

    स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध खनन या संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जा सके

    इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि खनिज माफिया अपनी अवैध गतिविधियों को दबाने के लिए दबाव डाल सकता है लेकिन खनिज विभाग और पुलिस के सहयोग से ऐसी परिस्थितियों में भी टीम सुरक्षित और प्रभावी कार्रवाई कर सकती है

  • शहडोल में सरकारी मशीनरी का अवैध इस्तेमाल: कोयला खदान से मिट्टी चोरी कर रेलवे निर्माण में लगाया गया, नगर परिषद उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप

    शहडोल में सरकारी मशीनरी का अवैध इस्तेमाल: कोयला खदान से मिट्टी चोरी कर रेलवे निर्माण में लगाया गया, नगर परिषद उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप


    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के अमलाई क्षेत्र से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अवैध उत्खनन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नगर परिषद बरगवां-अमलाई के उपाध्यक्ष राज तिवारी पर आरोप है कि उनके संरक्षण में कोल इंडिया की प्रतिबंधित खदान से ओवरबर्डन यानी मिट्टी चोरी कर अमलाई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म निर्माण में खपाई जा रही थी।

    सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरी अवैध गतिविधि में नगर परिषद की जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के अनुसार मशीन बिना किसी आधिकारिक आदेश या सीएमओ की अनुमति के खदान क्षेत्र में खुदाई कर रही थी। इसे छिपाने के लिए जेसीबी चालक को मरी हुई गाय को दफनाने का झांसा देकर मौके पर बुलाया गया लेकिन असल में वहां से मिट्टी ट्रैक्टरों के जरिए रेलवे स्टेशन तक भेजी जा रही थी।

    स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि पिछले दो दिनों में लगभग 40 से 50 ट्रैक्टर मिट्टी रेलवे परिसर में डाली जा चुकी है। बताया गया है कि अमलाई स्टेशन पर प्लेटफॉर्म निर्माण के लिए करीब 8 से 10 लाख रुपये का मिट्टी भराई का ठेका दिया गया था। रेलवे के इंजीनियर और ठेकेदार भी मानते हैं कि मिट्टी राज तिवारी के माध्यम से मंगवाई जा रही थी हालांकि वे इसके अवैध स्रोत से अनजान थे।

    मामला उजागर होने पर कोल इंडिया सुहागपुर एरिया के अधिकारियों ने सर्वे दल के साथ मौके का मुआयना किया और पुष्टि की कि उत्खनन उनकी भूमि पर हो रहा था। इसके बाद अमलाई उप क्षेत्रीय प्रबंधक पी. रमन्ना और सुरक्षा अधिकारियों ने देवहरा पुलिस चौकी में लिखित शिकायत सौंपी है।

    राज तिवारी जो एक संपन्न और रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं पर लगे आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रेलवे के मुख्य अभियंता अरविंद ने स्पष्ट किया है कि यदि मिट्टी चोरी की पुष्टि होती है तो संबंधित निर्माण कंपनी का ठेका निरस्त कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    देवहरा पुलिस फिलहाल इस मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित सिंडिकेट में और कौन-कौन से अधिकारी या रसूखदार शामिल हैं। मामला केवल अवैध उत्खनन तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और उच्च स्तरीय संरक्षण का गंभीर उदाहरण भी माना जा रहा है।

  • शहडोल में बेलगाम खनन माफिया, दफ्तर तक कर रहे रेकी; एक साल में 222 केस, 70 लाख से अधिक जुर्माना वसूला

    शहडोल में बेलगाम खनन माफिया, दफ्तर तक कर रहे रेकी; एक साल में 222 केस, 70 लाख से अधिक जुर्माना वसूला


    भोपाल। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए मध्यप्रदेश से बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य पुलिस विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में सरकार ने तेज़ी दिखाई है। इसी क्रम में पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा ने करीब 10 हजार पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा।

    प्रस्तावित भर्ती में सबसे अधिक पद आरक्षक कांस्टेबल के होंगे। जानकारी के अनुसार कुल 10 हजार पदों में से लगभग 7500 पद आरक्षकों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा 1 हजार पद ड्राइवर के और करीब 1200 पद मिनिस्ट्रियल स्टाफ के शामिल किए गए हैं। यह भर्ती न केवल पुलिस बल को मजबूत करेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों को भी गति प्रदान करेगी।

    दरअसल, मध्यप्रदेश पुलिस में लंबे समय से पदों की कमी बनी हुई है। वर्तमान में केवल आरक्षक वर्ग में ही करीब 13 हजार पद खाली बताए जा रहे हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने और पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए इन पदों को भरना बेहद जरूरी हो गया है। यही कारण है कि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है।

    सूत्रों के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी रिटायर होते हैं, जिससे विभाग में लगातार रिक्तियां बढ़ती जा रही हैं। अनुमान है कि हर वर्ष लगभग 11 से 12 हजार पुलिसकर्मी सेवा निवृत्त हो जाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही 22 हजार पदों पर भर्ती का ऐलान किया था। अब उसी योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से भर्तियां की जा रही हैं।

    वहीं, वर्ष 2025 की पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया फिलहाल जारी है और उम्मीदवारों के फिजिकल टेस्ट लिए जा रहे हैं। इसके बाद लिखित परीक्षा और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए चयन किया जाएगा। इस बीच नई भर्ती की तैयारी से उन युवाओं में भी उत्साह बढ़ गया है जो लंबे समय से पुलिस विभाग में नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में भर्ती होने से न केवल बेरोजगारी कम होगी, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक सुदृढ़ होगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुलिस बल की उपस्थिति बढ़ने से अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश पुलिस में प्रस्तावित यह बंपर भर्ती युवाओं के लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की मंजूरी और भर्ती प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।

  • शहडोल में माफिया राज: अफसरों की हर चाल पर गुर्गों की नजर; खनिज विभाग के सामने से ट्रैक्टर लेकर फरार हुए रेत तस्कर

    शहडोल में माफिया राज: अफसरों की हर चाल पर गुर्गों की नजर; खनिज विभाग के सामने से ट्रैक्टर लेकर फरार हुए रेत तस्कर


    शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में रेत माफिया अब कानून की सरहदों को पूरी तरह लांघ चुका है। जिले में रेत का कोई वैध ठेका न होने के बावजूद अवैध रेत का साम्राज्य इस कदर फैला है कि माफिया अब सीधे तौर पर सरकारी अमले से टकराने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में यह बात सामने आई है कि माफियाओं ने प्रशासन की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए एक मजबूत रेकी तंत्र खड़ा कर दिया है, जिसकी मदद से वे कार्रवाई से पहले ही सतर्क हो जाते हैं।

    खनिज निरीक्षक के सामने से भाग निकले ट्रैक्टर ताजा मामला उस समय का है जब खनिज निरीक्षक अभिषेक पटले अपनी टीम के साथ सिंहपुर क्षेत्र में अवैध परिवहन की सूचना पर पहुंचे थे। रात के अंधेरे में जब टीम ने रेत से लदे ट्रैक्टरों को रोकने की कोशिश की, तो माफिया बेखौफ होकर ट्रैक्टरों को भगा ले गए। इस दौरान दो बाइक सवारों ने जानबूझकर खनिज अमले की गाड़ी के सामने बाधा उत्पन्न की ताकि ट्रैक्टरों को भागने का पर्याप्त समय मिल सके। यह घटना स्पष्ट करती है कि माफिया अब पूरी रणनीति और सुरक्षा घेरे के साथ अवैध कारोबार कर रहे हैं।

    ऑफिस के बाहर तैनात हैं गुप्तचर जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रेत माफिया ने खनिज विभाग के कार्यालय के बाहर अपने जासूस तैनात कर रखे हैं। ये गुर्गे विभाग की हर गाड़ी के निकलने की सूचना तुरंत अपने आकाओं को देते हैं। हाल ही में खनिज अमले ने कार्यालय के ठीक सामने से एक युवक को रेकी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। उसके मोबाइल की जांच करने पर पता चला कि वह लगातार अधिकारियों के मूवमेंट की लोकेशन और तस्वीरें माफियाओं को भेज रहा था।

    खूनी खेल का इतिहास और बढ़ता खतरा शहडोल में रेत माफियाओं का इतिहास काफी हिंसक रहा है। इससे पहले अवैध उत्खनन रोकने पहुंचे एक पटवारी और एक पुलिस एएसआई को ट्रैक्टर से कुचलकर मौत के घाट उतारने जैसी सनसनीखेज वारदातें हो चुकी हैं। हाल ही में एक तहसीलदार पर भी हमले का प्रयास किया गया था। इन घटनाओं के बावजूद जिले में अवैध रेत का परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा है, जो प्रशासन की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है। खनिज निरीक्षक अभिषेक पटले का कहना है कि तमाम बाधाओं और रेकी के बावजूद विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन माफियाओं का सूचना तंत्र इतना सक्रिय है कि वे अक्सर चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं।

  • रेत खनन पर NGT का बड़ा प्रहार: 9 मंजूरियां अवैध घोषित; कहा बिना सिया के मूल्यांकन के खनन हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई

    रेत खनन पर NGT का बड़ा प्रहार: 9 मंजूरियां अवैध घोषित; कहा बिना सिया के मूल्यांकन के खनन हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई


    भोपाल। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने मध्य प्रदेश में रेत खनन को लेकर चल रही मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने सीधे तौर पर रेत खनन से जुड़ी 9 मंजूरियों को अवैध करार देते हुए उन्हें शून्य घोषित कर दिया है। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ये मंजूरियां स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी के अनिवार्य मूल्यांकन के बिना ही सीधे प्रमुख सचिव के अनुमोदन से जारी कर दी गई थीं, जो पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन है।

    क्या था पूरा विवाद?

    मामले की जड़ साल 2025 के उस घटनाक्रम में है जब मार्च से मई के बीच सिया की कोई बैठक आयोजित नहीं हो सकी थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष एस.एन.एस. चौहान लगातार बैठक बुलाने के लिए मेंबर सेक्रेटरी को पत्र लिखते रहे, लेकिन प्रशासनिक खींचतान और अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण प्रक्रिया ठप रही। इसी दौरान, पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव के अनुमोदन पर प्रभारी मेंबर सेक्रेटरी ने 23 मई को 237 डीम्ड मंजूरियां आनन-फानन में जारी कर दीं। यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और अब एनजीटी ने प्रक्रियागत खामियों को देखते हुए इन मंजूरियों को रद्द कर दिया है।

    NGT की सख्त टिप्पणी: सिया की स्वीकृति अनिवार्य
    एनजीटी ने अपने आदेश में साफ कहा है कि किसी भी खदान में खनन कार्य शुरू करने से पहले सिया की तकनीकी और पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य है। बिना सूक्ष्म परीक्षण और जांच के किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायाधिकरण ने इन सभी विवादित मामलों को दोबारा विचार करने के लिए सिया के पास वापस भेज दिया है। जब तक सिया इन पर नए सिरे से मूल्यांकन कर मंजूरी नहीं देती, तब तक इन खदानों में किसी भी प्रकार का खनन कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

    समझें क्या है सिया और इसकी भूमिका?
    सिया यानी स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी एक ऐसी संवैधानिक संस्था है जो प्रदेश स्तर पर विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करती है। भारत सरकार के नियमों के मुताबिक, बड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्रीय स्तर पर मंजूरी ली जाती है, जबकि राज्य स्तरीय परियोजनाओं जैसे रेत खनन के लिए सिया को शक्तियां दी गई हैं। इसकी प्रक्रिया में विशेषज्ञों द्वारा स्थल निरीक्षण और डेटा का परीक्षण शामिल होता है, जिसे बाईपास करना कानूनन अपराध है।एनजीटी के इस फैसले से मध्य प्रदेश के खनन क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब उन सभी ठेकेदारों को अपनी खदानें बंद करनी होंगी जिनकी मंजूरियां इस विवादित प्रक्रिया के तहत जारी हुई थीं।