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  • सीमावर्ती जिलों के पुलिस प्रमुखों के साथ अमित शाह की अहम बैठक आज, अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर तैयार होगी नई रणनीति

    सीमावर्ती जिलों के पुलिस प्रमुखों के साथ अमित शाह की अहम बैठक आज, अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर तैयार होगी नई रणनीति


    नई दिल्ली ।
    देश की सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने तथा अवैध घुसपैठ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति पर काम तेज कर दिया है। इसी क्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुरुवार को नई दिल्ली में सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों और सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की भागीदारी प्रस्तावित है। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिहाज से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक में अवैध घुसपैठ, अवैध आप्रवासन, सीमा प्रबंधन, ड्रोन गतिविधियों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियां, मादक पदार्थों की तस्करी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अधिकारियों से जमीनी स्तर की स्थिति, स्थानीय चुनौतियों और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी ली जाएगी, ताकि आगे की रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर राज्यों सहित सभी प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इन क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों, सीमा पार गतिविधियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आधार पर साझा रणनीति तैयार करने पर भी विचार होगा।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय सीमा क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना भी है। सीमाओं पर निगरानी मजबूत करने के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने, सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य की प्रगति तथा निगरानी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

    केंद्र सरकार पहले भी सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती रही है। हाल के महीनों में वरिष्ठ स्तर पर कई दौरे और समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनमें स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने तथा संदिग्ध मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

    बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने, सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने तथा कानून के दायरे में रहकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा। अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जाएगी कि वे स्थानीय स्तर पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का नियमित आकलन करें और आवश्यकतानुसार समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

    सरकार का मानना है कि सीमा सुरक्षा केवल सीमाओं की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तस्करी, अवैध प्रवेश, संगठित अपराध और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से समन्वित तरीके से निपटना भी शामिल है। ऐसे में इस उच्चस्तरीय बैठक से निकलने वाले निर्णय आने वाले समय में सीमा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • अमेरिका में 16 साल तक अवैध रूप से रहने पर गुजरात के कारोबारी पर बड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना

    अमेरिका में 16 साल तक अवैध रूप से रहने पर गुजरात के कारोबारी पर बड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना


    नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय तक अवैध रूप से रहने के मामले में एक भारतीय मूल के गुजराती कारोबारी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने उस पर करीब 1.8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 15 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।

    मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्री

    जानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह रहायह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।

    मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्री

    जानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह  था। जांच में सामने आया कि उसे कई साल पहले ही देश छोड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसने इस आदेश का पालन नहीं किया और लगातार अमेरिका में ही बना रहा।

    रोजाना जुर्माना बढ़ता गया

    इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के तहत जारी नोटिस में कहा गया है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर का पालन न करने की स्थिति में उस पर रोजाना जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना 998 डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से तय किया गया, जो समय के साथ बढ़ते-बढ़ते लगभग 1.8 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

    सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा कार्रवाई

    अमेरिकी प्रशासन अवैध प्रवासियों के खिलाफ हाल के वर्षों में सख्त रुख अपनाए हुए है। इस मामले को भी उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें लंबे समय तक आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाता है।

    मामला चर्चा में क्यों है?

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जुर्माने की रकम बेहद बड़ी है और यह साफ संकेत देता है कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम नियमों के उल्लंघन को लेकर बेहद सख्त कार्रवाई कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में संदेश दिया जाता है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर की अनदेखी करना गंभीर आर्थिक परिणाम ला सकता है।